Monday, January 31, 2011

राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र से ‘अरावली उद्घोष’

पत्रिका: अरावली उद्घोष, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: बी.पी. शर्मा ‘पथिक’, अतिथि संपादक: शंकर लाल मीणा, पृष्ठ: 80, रेखा चित्र/छायांकन: --, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 80), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो.: 0294.2431742, सम्पर्क: 449, टीचर्स कालोनी, अम्बामाता स्कीम, उदयपुर 313001 राजस्थान
आदिवासी मीडिया व साहित्य के लिए समर्पित पत्रिका अरावली उद्घोष का समीक्षित अंक श्रेष्ठ रचनाओं से युक्त है। अंक में संस्कृति विमर्श के अंतर्गत डाॅ. धर्मचंद्र विद्यालंकार, स्वामी वाजिद काजमी, डाॅ. देवीप्रसाद मोर्य के लेख हमारे आसपास की अच्छी तरह से पड़ताल करते हैं। अरविंद केजरीवाल तथा भागीरथ ने आज के ज्वलंत प्रश्न प्रश्नों पर अच्छे समाधान सुझाने का प्रयास किया है। स्व. शिवराम, मंजू अरूण, वेदप्रकाश अग्रवाल तथा देवेन्द्र कुमार मिश्र की कविताएं समसामयिक हैं। ख्यात कवि प्रभात की सभी कविताएं आज के बदलते समाज पर विमर्श प्रस्तुत करती है। सुरेश नायक व डाॅ. पूरन सिंह की कहानियां साधारण होते हुए भी असाधारण विषय उठाती हैं। नारी विमर्श के अंतर्गत रमणिका गुप्ता व सुरेश पण्डित के लेख तत्कालीन विषय व उसके निहितार्थ पर एक विहंगम दृष्टिपात है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार व पत्र आदि उपयोगी हैं। अतिथि संपादक शंकर लाल मीणा का संपादकीय वर्तमान शिक्षा जगत में बढ़ती मुनाफाखोरी पर गहराई तक प्रहार करता है।

नाटकों में ‘रंग अभियान’

पत्रिका: रंग अभियान, अंक: 20 , स्वरूप: अनियतकालीन, संपादक: अनिल पतंग, पृष्ठ: 64, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 100 आठ अंक), ई मेल: ranj.abhiyan@yahoo.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09430416408, सम्पर्क: नाट्य विद्यालय, बाघा, पो. सुहदनगर, जिला बेंगूसराय(बिहार)851218
नाट्य व कला पर आधारित पत्रिका का समीक्षित अंक रचनात्मकता से भरपूर है। यह हर्ष का विषय है कि हिंदी में नाट्य विधा पर कार्य करके यह पत्रिका इस विधा में कमी को काफी हद तक पूरा कर रही है। अंक में धरोहर के अंतर्गत उत्तराखण्ड की लोक कथाएं व संस्कृति(डाॅ. शशि पवांर), लोक रंगमंच व रामलीला में लोक कल्याण की भावना(हनीफ भट्टी) हमारी धरोहर के संबंध में अच्छी जानकारी उपलब्ध कराती है। नाट्यालेखों में मैं कोचवान बनूंगा(डाॅ. मनोज श्रीवास्तव), आग(रवीन्द्र राकेश, कु. आलोक) तथा मैं इंसान हूं(सुरेश कांटक) प्रभावशाली रचनाएं हैं। स्मृति शेष के अंतर्गत मुखर्जी दा पर सुधांशु कुमार चक्रवर्ती का लेख संग्रह योग्य रचना है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा सभी स्थायी स्तंभ प्रभावित करते हैं।

Sunday, January 30, 2011

हिमाचल से ‘हिमप्रस्थ’

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 56, रेखा चित्र/छायांकन: सुरजीत, मूल्य: 5रू.(वार्षिक 60), ई मेल: himprasthahp@gmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: हिमाचल प्रदेश प्रिटिंग पे्रस परिसर, घोड़ा चैकी, शिमला 5(हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश की यह पत्रिका निरंतर उत्कृष्ट व जनोपयोगी साहित्य का प्रकाशन कर रही है। समीक्षित अंक में यशपाल की कहानियां वस्तु एवं शिल्प(हेमराम कौशिक), प्रयोगवाद के पुरोधाः अज्ञेय(राजेन्द्र परदेसी), मानव कल्याण ही अज्ञेय की कविताओं का लक्ष्य है(डाॅ. रामनारायण सिंह मधुर), भावी पीढ़ी और मीडिया(उमा ठाकुर) तथा कबीर और हमारा समय(डाॅ जगन्नाथ मणि त्रिपाठी) उल्लेखनीय आलेख हैं। कहानियों में नया कोट(डाॅ. मदन चंद्र भटट), नर से भारी नारी(विनोद राही) समाज के संबंध में एक नया दृष्टिकोण सामने लाती है। प्रताप सिंह सोढ़ी एवं पंकज शर्मा की लघुकथाएं अच्छी व समसामयिक हैं। पवन चैहान, वंदना राणा, कृष्णा ठाकुर एवं विक्रम की कविताएं प्रभावित करती है। संतोष उत्सुक का व्यंग्य तथा भीम सिंह नेगी का चिंतन इतिहास साक्षी है प्रभावित नहीं कर सके हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार अच्छे व जानकारी परक हैं।

संवाद के लिए ‘संकेत’

पत्रिका: संकेत, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: अनवर सुहैल, पृष्ठ: 24, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 07658.264920, सम्पर्क: एफ-6, सूर्या अपार्टमेंटस के सामने, कटोरा तालाब, रायपुर छतीसगढ़ पत्रिका
संकेत का समीक्षित अंक कवि भास्कर चैधुरी की कविताआंे पर एकाग्र है। अंक में भास्कर चैधुरी की डहेलिया, राजनीति, जिसके लिए कविता, अम्मा, लेखक, जगत, राष्ट्रपति भवन, नींव में आदमी, बिटिया, स्कूल पास कर चुकी लड़कियां तथा संसद किसलिए कविताएं प्रभावित करती हैं।

Saturday, January 29, 2011

‘सुखनवर’ का नया अंक

पत्रिका: सुख़नवर, अंक: नवम्बर-दिसम्बर 2010, स्वरूप: द्वैमासिक, संपादक: अनवारे इस्लाम, पृष्ठ: 48, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 170), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.2555789, सम्पर्क: सी 16, सम्राट कालोनी अशोक गार्डन, भोपाल म.प्र.
हिंदी व उर्दू जबान के लिए समर्पित पत्रिका सुख़नवर का समीक्षित अंक अच्छी विचारपूर्ण रचनाओं से युक्त है। अंक में सुरेश पंडित, डाॅ. संजीव जैन के लेख विषयों के साथ विश्लेषणात्मक ढंग से विचार करते हैं। आरिफ शेख, रमेश कंवल, शरीफ कुरैशी, किशन स्वरूप, अजीत सिंह बादल, राजेश रेड्डी, की ग़ज़लें अच्छी व प्रेरणास्पद है। नईम कौसर एवं मनीष कुमार सिंह की कहनियां तथा रूखसाना सिद्दकी की लघुकथाएं ठीक ठाक हैं। बुद्धिलाल पाल, खुर्शीद हयात की कविताएं नयापन लिए हुए हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं समीक्षाएं आदि भी प्रभावित करती है।

Sunday, January 23, 2011

समाज की विदू्रपताओं से मुठभेड़-‘पाखी’

पत्रिका: पाखी, अंक: जनवरी 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ: 96, रेखा चित्र/छायांकन: राजेन्द्र परदेसी, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 240), ई मेल: pakhi@pakhi.in , वेबसाईट: http://www.pakhi.in/ , फोन/मो. 0120.4070300, सम्पर्क: इंडिपेन्डेंट मीडिया इनिशिएटिव सोसायटी, बी-107, सेक्टर 63, नोएडा 201303 उ.प्र.
ख्यात साहित्यिक पत्रिका पाखी का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से युक्त है। अंक मंे पत्रिकारिता की लक्ष्मण रेखा के तहत एक विचार श्रृंखला प्रकाशित की गई है। जिसमें ख्यात पत्रकारों, विद्वानों ने पेड़ न्यूज व वर्तमान पत्रकारिता पर अपने विचार रखे हैं। राम बहादुर राय, पुण्य प्रसून वाजपेयी, एन.के. सिंह, अरविंद मोहन, अरूण त्रिपाठी, विमल कुमार, दिलीप मंडल, विनीत कुमार, कुलदीप नैययर, श्रवण गर्ग, रामशरण जोशी, आलोक तोमर, संजीव श्रीवास्तव, अली अनवर, शैलेन्द्र एवं ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ने पेड पत्रकारिता पर गंभीर चर्चा व विचार प्रस्तुत किए हैं। प्रकाशित कहानियों में काम(राम स्वरूप अणखी), शाम का भूला(वासुदेव), योग क्षेम(सुषमा मुनीन्द्र) एवं दीमक(गोविंद उपाध्याय) अच्छी व समसामयिक कहानियां हैं। शीबा असलम फहमी न ेख्यात कथाकार, उपन्यासकार एवं हंस के संपादक राजेन्द्र यादव जी से तत्कालीन साहित्य व लेखन पर गंभीर व सार्थक चर्चा की है। वाद विवाद एवं संवाद के अंतर्गत वंदना राग एवं भरत प्रसाद के विचार सराहनीय हैं। अशोक कुमार पाण्डेय, संदीप अवस्थी, सुशीला पुरी एवं अखिलेश्वर पाण्डेय की कविताएं भूमंडलीकरण के बीच से आम आदमी के जीवन में सुख चैन की आशा जगाती है। तेजेन्द्र शर्मा की ग़ज़ल कुछ खास प्रभावित नहीं कर सकी है। जितने अच्छे वे कहानीकार हैं उतना अच्छा प्रभाव ग़ज़ल में नहीं छोड़ सके हैं। राजीव रंजन गिरि , विनोद अनुपम एवं अरविंद श्रीवास्तव के लेख स्तरीय हैं व पत्रिका के विविधतापूर्ण स्वरूप को दर्शाते हैं। निर्मला सिंह की लघुकथा सहित पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी प्रभावित करते हैं।

Friday, January 21, 2011

मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका का नया अंक

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. वि. रामसंजीवैया, डाॅ. मनोहर भारती, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 5रू.(वार्षिक 60), ई मेल: brsmhpp@yahoo.co.in , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 08023404892, सम्पर्क: 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजी नगर, बेंगलूर (कर्नाटक)
इस साहित्यिक पत्रिका का स्वरूप हिंदी साहित्य की सभी विधाआंे के साथ समान रूप से न्याय करता है। अंक में एस.पी. केवल, रामचरण यादव, डाॅ. महेश चंद्र शर्मा, प्रो. सुनीता विवेक, डाॅ. एम. शेषन, हितेष कुमार शर्मा, विजय राघव रेड्डी, डाॅ. परमानंद पांचाल, प्रो. बी. बै. ललिताम्बा, डाॅ. टी. जी. प्रभाकर प्रेमी, श्रीमती पे्रमलता मिश्रा, नंदकिशोर शर्मा तथा चतुर्भुज सहाय के लेख प्रभावित करते हैं। देवेन्द्र कुमार मिश्रा की कहानी तथा स्तरीय है। सदाराम सिन्हा, डाॅ. रामनिवास मानव, नरेन्द्र सिंह सिसोदिया, रमेश चंद्र शर्मा चंद्र, लालता प्रसाद मिश्र, रामचरण यादव, त्रिलोक सिंह ठकुरेला की कविताएं अच्छी हैं। बी. गोविंद शेनाय तथा रामनिवास मानव की लघुकथाएं समयानुकूल हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी अपेक्षित स्तर के हैं।

Thursday, January 20, 2011

हिंदी साहित्य में साहित्य सागर

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: जनवरी2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 250), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.4260116, सम्पर्क: 161 बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, भोपाल म.प्र. साहित्यिक
पत्रिका साहित्य सागर का समीक्षित अंक ख्यात साहित्यकार प्रियदर्शी खैरा पर एकाग्र हैं पत्रिका में उनके व्यक्तित्व पर अखिलेश कुमार चतुर्वेदी, ओम मिश्रा, कांतिकुमार जैन, वैभव कोठारी व महेश श्रीवास्तव के विचार स्वागत योग्य हैं। पत्रिका की अन्य रचनाओं में नर्मदा प्रसाद मालवीय, गिरिमोहन गुरू, लालबहादु चैहान की कविताएं प्रभावित करती है। डाॅ. शरद नारायण खरे, मालती शर्मा गोपिका, अर्चना प्रकाश, सतीश चतुर्वेदी की रचनाएं अच्छी व समयानुकूल हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि स्तरीय बन पड़े हैं।

Wednesday, January 19, 2011

समावर्तन का नया अंक

पत्रिका: समावर्तन, अंक: जनवरी2011, स्वरूप: मासिक, संस्थापक: प्रभात कुमार भट्टाचार्य, संपादक: रमेश दवे, मुकेश वर्मा, निरंजन श्रोत्रिय, कार्यकारी संपादक: श्रीराम दवे, पृष्ठ: 96, रेखा चित्र/छायांकन: अक्षय आमेरिया, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 250), ई मेल: samavartan@yahoo.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
साहित्य जगत की स्थापित इस पत्रिका का समीक्षित अंक आंशिक रूप से ख्यात सौन्दर्य कवि शमशेर बहादुर पर एकाग्र है। उनकी कविताओं व अन्य रचनाओं के साथ साथ पत्रिका के संपादक रमेश दवे, अखिलेश शुक्ल, पे्रम शशांक, रंजना अरगड़े, कृष्ण दत्त पालीवाल, ख्यात आलोचक प्रभाकर श्रोत्रिय, कृष्णगोपाल मिश्र, वरिष्ठ आलोचक प्रो. रमेश चंद्र शाह के आलेख शमशेर बहादुर की कविताओं के साथ साथ उनके समग्र जीवन पर भलीभांति प्रकाश डालते हैं। पत्रिका के संपादक निरंजन श्रोत्रिय द्वारा बुद्धिलाल पाल की कविताओं का चयन व प्रस्तुतिकरण प्रभावशाली है। राजी सेठ, नरेन्द्र दीपक, नरेन्द्र गौड़ एवं महेन्द्र गगन की कविताएं समय असमय में न उलझकर सीधे तौर पर अपनी बात पाठकों के सामने रखती हैं। राजेन्द्र परदेसी की कहानी गृहस्थी एक आम मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार की कहानी है। सतीश राठी एवं प्रद्युम्न भल्ला की लघुकथाओं में लघुकथात्मकता की कमी खटकी। एन्तोन चेखव की कथा का रूपांन्तरण ब्रजेश कृष्ण द्वारा पर्याप्त सावधानी से किया गया है। रंगशीर्ष के अंतर्गत सचिदा नागदेव पर उपयोगी व ज्ञानवर्धक सामग्री का प्रकाशन पत्रिका द्वारा किया गया है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, स्थायी स्तंभ व समीक्षाएं भी रूचिकर हैं।

पत्रिका आसपास का नया अंक

पत्रिका: आसपास, अंक: जनवरी2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 32, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 5रू.(वार्षिक 50), ई मेल: shabdashilpi@yahoo.com , वेबसाईट: http://www.dharohar.com/ , फोन/मो. 9425007710, सम्पर्क: एच 3, उद्धवदास मेहेता परिसर, नेहरू नगर, भोपाल म.प्र.
संवाद पत्रिका आसपास के इस अंक में नवीनतम समाचार प्रकाशित किए गए हैं। अंक में उल्लेखनीय कार्य के लिए पत्रिकाओं को पुरस्कार प्रदान करने का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। समाचार में समावर्तन सहित अन्य पत्रिकाओं के पुरस्कार समाचार सचित्र प्रकाशित किए गए हैं। ख्यात कथाकार उदयप्रकाश जी को मिल साहित्य अकादमी पुरस्कार का विस्तृत समाचार अच्छा व जानकारीपरक है। इसके अतिरिक्त साहित्य अकादमी सिखाएगी हिंदी, गालिब ने पूछा था कि क्या बर्फी हिंदु है? स्पंदन का सम्मान समारोह, दिव्य समारोह की जानकारी नये विषयों के उपयोगी संदर्भो से साक्षात्कार कराती है। कथाकार संतोष चैबे व कवि आलोक श्रीवास्तव को मिले पुरस्कारों का समाचार जानकर लगता है कि यह पत्रिका का पुरस्कार पर एकाग्र विशेषांक है। ख्यात कवि व आई.ए.एस. अधिकारी पंकज राग को मीरा स्मृति सम्मान का समाचार पत्रिका की अन्य अच्छी व उपयोगी सूचना है। अन्य समाचार भी रचनाकारों को आपस में संवाद स्थापित करने का अच्छा माध्यम बने हैं।

Tuesday, January 18, 2011

सरस्वती सुमन का नया अंक

पत्रिका: सरस्वती सुमन, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: कुंवर विक्रमादित्य सिंह, पृष्ठ: 96, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 100), ई मेल: saraswatisuman@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0135.2740060, सम्पर्क: 1, छिब्बर मार्ग, आर्य नगर, देहरादून 248001
उत्कृष्ट साहित्य के लिए समर्पित सरस्वती सुमन का समीक्षित अंक अच्छी रचनाओं से युक्त है। अंक में चंद्रकुंवर बत्र्वाल की 36 कविताएं प्रमुखता से प्रकाशित की गई हैं। विज्ञान व्रत, बी.पी. दुबे, कंुदन सिंह सजल, शम्मी शम्स वारसी, मेहमूद हमसर अब्बासी, अर्जुन प्रसाद सिंह, सरला भटनागर, नरेश निसार, एम.वसीम अकरम, डाॅ. नलिन तथा शरीफ कुरेशी की ग़ज़लें प्रभावित करती हैं। सत्यनारायण सत्य, अब्बास खान, कंुवर विक्रमादित्य सिंह, कमल कपूर, मुकुल सक्सेना, बलजीत सिंह, मनोज अबोध, की कविताएं प्रभावित करती हैं। प्रभुलाल चैध्री, शैलजा अरोड़ा, आकांक्षा यादव, पुष्पपाल सिंह, कृष्ण कुमार यादव, लेख उल्लेखनीय हैं। संजय जनागल, प्रेमचंद्र गोस्वामी, शबनम शर्मा, श्रीमती शुक्ला चैधरी, सत्यनारायण भटनागर की कहानियां आज के समाज व परिवेश पर विचार करती दिखाई पड़ती हैं। रामसहाय वर्मा व आनंद दीवान के व्यंग्य नयापन लिए हुए हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी प्रभावित करती हैं।

Sunday, January 16, 2011

बच्चों के लिए अभिनव बालमन

पत्रिका: अभिनव बालमन, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर 10, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: निश्चल, पृष्ठ: 64, रेखा चित्र/छायांकन/कला सज्जा: दिलीप, पल्लव, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 9719007153, सम्पर्क: शारदायत, 17/238, जेड 13/59, अलीगढ़ 202001 उ.प्र.
बच्चों के लिए निरंतर उत्कृष्ट साहित्य प्रकाशित कर रही पत्रिका के समीक्षित अंक में उपयोगी व ज्ञानवर्धक सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अंक में कुलदीप, विभूति भारद्वाज, अदिति शर्मा तथा अन्य बाल रचनाकारों की अच्छी रचनाएं प्रकाशित की गई हैं। वरिष्ठ रचनाकारों में अभिमेष शर्मा, डाॅ. शंभूनाथ तिवारी, ब्रजनंदन वर्मा, डाॅ. कुलभूषण लाल की रचनाएं बालोपयोगी है। मुकुल व मानव उपाध्याय की कहानियां सच्चे अर्थो में बाल कहानियां कहलाने योग्य हैं। भगवत प्रसाद पाण्डेय की कहानी बच्चों के साथ साथ अधिक उम्र के लोगों के लिए भी उपयोगी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं समीक्षाएं व पत्र आदि भी बच्चों के समग्र विकास में सहायक हैं।

Saturday, January 15, 2011

सांस्कृतिक चेतना की ‘समकालीन अभिव्यक्ति’

पत्रिका: समकालीन अभिव्यक्ति, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर 10, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: उपेन्द्र कुमार मिश्र, पृष्ठ: 64, रेखा चित्र/छायांकन/कला सज्जा: सुनीता वर्मा, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 50), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 011.26645001, सम्पर्क: फ्लैट नं. 5, तृतीय तल, 984, वार्ड नं. 7, महरौली, नई दिल्ली 30
विविध विधाओं के लिए समर्पित पत्रिका समकालीन अभिव्यक्ति का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से स्मृद्ध है। अंक में अशोक प्रजापति, अकबर लाहोरी, चंद्रभान राही, मनीष कुमार सिंह की समकालीन कहानियां प्रकाशित की गई हैं। पत्रिका के लेख साहित्य, समाज तथा कला के लिए समर्पित हैं। विश्वमोहन तिवारी, अनिता एच. भट्ट, नवलकिशोर भट्ट तथा डाॅ. सुरंगमा यादव के लेख विविध विषयों की विवेचना अच्छी तरह से कर सके हैं। राजीव कुमार त्रिगति एवं ऋषिवंश की कविताएं पत्रिका के काव्य स्वरूप को स्पष्ट करती हैं। अनिल डबराल, बुद्धि प्रकाश कोटनाला, कृष्णा श्रीवास्तव की विविध विधाओं की रचनाएं व्यापकता लिए हुए हैं। अनिल शर्मा तथा के.एल.दिवान की लघुकथाओं सहित अन्य रचनाएं भी स्तरीय व विचारणीय है।

Friday, January 14, 2011

शुभ तारिका का मध्यप्रदेश अंक

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: दिसम्बर 10, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 105, रेखा चित्र/छायांकन: संतोष जडिया , मूल्य: 25रू.(वार्षिक 120), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप, ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी 133001 हरियाणा
ख्यात मासिक पत्रिका शुभ तारिका का समीक्षित अंक मध्यप्रदेश पर एकाग्र है। अंक में मध्यप्रदेश की विरासत के साथ साथ यहां के रचनाकारों की श्रेष्ठतम रचनाओं का पत्रिका के इस अंक में प्रकाशन किया गया है। बढ़ते कदम मध्यप्रदेश के अंतर्गत महेश श्रीवास्तव, स्वाति तिवारी, सुनीता दुबे, प्रलय श्रीवास्तव व सुरेश गुप्ता के आलेख मध्यप्रदेश की विरासत तथा कला-संस्कृति पर अच्छा विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। संजय पतारे, ऋषि कुमार मिश्र, भालचंद्र जोशी, अजातशत्रु, युगेश शर्मा, सच्चिदानंद जोशी, दिलीप चिंचालकर, रामचरण यादव, रूखाना सिद्दकी, शैलेन्द्र कुमार शर्मा एवं कृष्णशंकर सोनाने के लेख मध्यप्रदेश की जमीन तथा उसकी सोधी खुशबू से देश भर के पाठकों का परिचय कराते हैं। निर्मला मांडवीकर, अर्जुन सिंह अंतिम, एवं पदमा राजेन्द्र की रचनाएं सरसता लिए हुए हैं। कांतिलाल ठाकरे, मालती जोशी, डाॅ. रमेशचंद्र की रचनाओं से पाठक लगाव महसूस करता है। शिवदत्त डोगरे, प्रमीला गुप्ता व जगदीश चंद्र जैन की लोक चरित्र की रचनाएं नए पाठकों को हमारे अतीत से परिचित कराती हैं। चंद्रभान राही, मालती बसंत, सीमा शाह जी की कहानियां व अंजना सबि, अखिलेश शुक्ल, अमर गोपालानी, मंगला रामचंद्रन, संतोष सुपेकर, रामशंकर चंचल की लघुकथाएं प्रभावशाली हैं। राम तेलंग, गिरिजा कुलश्रेष्ठ, ऋषिवंश, देवेन्द्र कुमार मिश्रा, गार्गीशंकर मिश्र, आनंद बिल्थरे, आलोक नेगी तथा महेश श्रीवास्तव की कविताएं मध्यप्रदेश की रचनाशीलता के विविध रूप को सामने लाने के लिए किया गया एक सफल प्रयास है। मध्यप्रदेश के हरदा नगर में उर्मि कृष्ण जी का जन्म हुआ है। उस स्थान का वर्णन बहुत ही मार्मिक व आत्मसात करने योग्य है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी स्तरीय व सहेज कर रखने योग्य हैं।

Sunday, January 9, 2011

कादम्बिनी क्लब हैदराबाद का ‘पुष्पक’

पत्रिका: पुष्पक, अंक: 16, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डाॅ. अहिल्या मिश्र, पृष्ठ: 118, रेखा चित्र/छायांकन: , मूल्य: 75रू.(वार्षिक 300), ई मेल: mishraahilya@yahoo.in , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 040.23703708, सम्पर्क: 93सी, राजसदन, बेंगलराव नगर, हैदराबाद 500038 सी-7, आंध्रप्रदेश
दक्षिण से प्रकाशित प्रमुख साहित्यिक पत्रिका पुष्पक के समीक्षित अंक में विविध साहित्यिक सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अंक मंे प्रकाशित कहानियों में स्नेह स्पर्श(शांति अग्रवाल), बुरे दिन(श्याम कुमार पोकरा), सोच(मधु भटनागर), रिमोट कन्ट्रोल(पवित्रा अग्रवाल) प्रमुख हैं। लघुकथाओं में स्थापना(अखिलेश शुक्ल), काला आखर(आकांक्षा यादव) तथा कुलदीपक(सत्यपाल), लातों के भूत(पंकज शर्मा), प्रेम विवाह(विनोदिनी गोयनका) प्रभावित करती है। डाॅ. अहिल्या मिश्र, ज्ञानेन्द्र साज, रमा द्विवेदी, सुधाकर आशावादी, भानुदत्त त्रिपाठी, ठाकुर खिलवाणी, ज्योति नारायण, रामशंकर चंचल, उमाश्री, सरिता सुराना जैन, पंकज शर्मा, डाॅ. नकवी, कृपाशंकर शर्मा अचूक, मीना गुप्ता, सुरेश चंद्र, देवेन्द्र कुमार मिश्रा, राजेन्द्र बहादुर सिंह राजन, करण सिंह उढ़वाल, हीरा प्रसाद हरेन्द्र, कंुदन सिंह सजल, ओम रायजादा, कृष्ण कुमार, अशोक अंजुम, साहिल, भगवान दास जैन, सुषमा भण्डारी, मदन मोहन उपेन्द्र, प्रेमलता नीलम, साक्षी भारती, मीना मुथा, सुरेश उजाला की कविताएं, ग़ज़लें, गीत आदि भी उल्लेखनीय हैं। केशव शुक्ला का व्यंग्य अच्छा बन पड़ा है। लेखों में डाॅ. अहिल्या मिश्र, राजकुमारी भटनागर, संपत देवी मुरारका, सीता मिश्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी स्तरीय व पढ़ने योग्य हैं।

Saturday, January 8, 2011

‘सनद’ का प्रभाष जोशी स्मृति अंक

पत्रिका: सनद, अंक: 09, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मंजु मल्लिक मनु, संस्थापक: फजल इमाम मल्लिक पृष्ठ: 128, रेखा चित्र/छायांकन: N.A. , मूल्य: 50रू.यह अंक(वार्षिक 100), ई मेल: manumallick@rediffmail.com , sanadpatrika@gmail.com , वेबसाईट: http://www.sanad.in/ , फोन/मो. 9868018472, सम्पर्क: 4-बी, फ्रेन्डस अपार्टमेंट, मधु बिहार गुरूद्वारा के पास, पटपड़ गंज, दिल्ली 110092
ख्यात साहित्यिक पत्रिका ‘सनद’ का समीक्षित अंक प्रभाष जोशी स्मृति अंक के रूप में प्रकाशित किया गया है। स्व. प्रभाष जी के समग्र व्यक्तिव पर पत्रिका ने संग्रह योग्य सामग्री प्रकाशित की हैं। प्रभाष जी ख्यात पत्रकार, संपादक, खेल विशेषज्ञ व साहित्यकार थे। उनके विभिन्न क्रियाकलापों पर पत्रिका में प्रकाशित लेख भलीभांति प्रकाश डालते हैं। जनसत्ता तक उनके अनवरत सफर को लेखों में अच्छे विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया गया है। हरिकृष्ण पाठक, जवाहर लाल कौल, अच्युतानंद मिश्र, रूपेश पाण्डेय, शुभु पटवा, राम बहादुर राय, अनिल बंसल, अंबरीश कुमार, फजल इमाम मल्लिक, जितेन्द्र ठाकुर, संजय सिंह, मेघा पाटकर, नंदिता मिश्रा, डाॅ. सुनीलम, संजय स्वतंत्र, सुरेश कौशिक, संदीप जोशी, मन चतुर्वेदी, जाहिद खान, आशीष गौतम, बनवारीलाल शर्मा, गोविंदाचार्य, विजयन एमजे के लेख संग्रह योग्य व शोध छात्रों के लिए उपयोगी हैं। राजकुमार कुम्भज व प्रेमिला सिंह की कविताएं प्रभाष जी के व्यक्तिव पर पूरी शिद्दत के साथ प्रकाश डालती हैं। पत्रिका के संपादक ने सटीक बात कही है। उनके अनुसार, ‘‘प्रभाष जोशी का जाना हमारे बीच से एक गांधीवादी चिंतक का जाना है।’’ स्व. प्रभाष जोशी जी भारत ही नहीं विश्व पत्रकारिता जगत में वर्षो याद रखे जाएंगे।