Monday, October 31, 2011

साहित्यकारों की जरूरत पाखी

पत्रिका: पाखी, अंक: अक्टूबर 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: पे्रम भारद्वाज, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 250 रू.), ई मेल: pakhi@pakhi.in ,वेबसाईट: http://www.pakhi.in/ , फोन/मोबाईल: 0120.4070300, सम्पर्क: इंडिपेंडेंट मीडिया इनीशिएटिव सोसायटी, बी. 107, सेक्टर 63, नोएडा 201303

साहित्य की प्रमुख पत्रिका का समीक्षित अंक साहित्यिक रचनाओ के साथ साथ अन्य सामाजिक, सांस्कृतिक समसामयिक रचनाओं से युक्त है। अंक में विजय, सी. भास्कर राव, प्रदीप पंत, नसीम साकेती, पंकज सुबीर एवं काजल पाण्डेय की समसामयिक विचारों से युक्त कहानियों का प्रकाशन किया गया है। पत्रिका में प्रकाशित प्रदीप सौरभ का उपन्यास अंश ‘‘देश भीतर देश’’ आज की परिस्थितियों का नए नजरिए से देखने का सफल प्रयास है। जिसे उपन्यास को पूरा पढ़कर और भी अच्छी तरह से जाना समझा जा सकता है। कालम बात जो नागवार गुजरी के अंतर्गत प्रकाशित विचारों में मन्नू भण्डारी, तेजेन्द्र शर्मा, साधना अग्रवाल, नज्म सुभाष तथा मधु के साहित्येतर लघु आलेख, इन आलेखकारों का अपना नजरिया है। यह आवश्यक नहीं है कि पत्रिका का पाठक इन विचारों से इत्तेफाक रखे ही। इस अंक में प्रकाशित मृत्यंुजय प्रभाकर व ओम नागर की कविताएं अधिक प्रभावित नहीं कर सकीं हैं। आदित्य विक्रम सिंह, भारत यायावर, राजीव रंजन गिरि तथा विनोद अनुपम के स्तंभ की सामग्री अच्छी कही जा सकती है। लेकिन खेद का विषय है कि ये आलेख लगातार टाइप्ड होते जा रहे हैं। जिसकी वजह से आलेखों की गंभीरता बुरी तरह से प्रभावित हुई है। पत्रिका में प्रकाशित लघुकथाएं, समीक्षाएं तथा अन्य रचनाएं भी भले ही साहित्य की श्रेणी में न आतीं हों लेकिन पढ़ने योग्य हैं।

Sunday, October 30, 2011

साहित्य का समावर्तन

पत्रिका: समावर्तन, अंक: अक्टूबर 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, पृष्ठ: 86, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 250 रू.), ई मेल: samavartan@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 07342524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.

साहित्य जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका समावर्तन का समीक्षित अंक ख्यात साहित्यकार लेखिका सुधा अरोड़ा पर एकाग्र है। पत्रिका ने उनके समग्र व्यक्तित्व को बड़े ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। उनका आत्मकथ्य, कविताएं तथा अन्य रचनाएं साहित्य के नए जानकारों के लिए संजोकर रखने योग्य है। पत्रिका के संपादक रमेश दवे तथा प्रज्ञा रावत के लेख उनके लेखन व सामाजिक जीवन के संबंध में बहुत कुछ उजागर करते हैं। अन्य रचनाओं में निरंजन श्रोत्रिय द्वारा चयनित अपर्णा मनोज की कविताएं इस विधा के प्रति समपर्ण का भाव जाग्रत करती है। प्रणव कुमार बंधोपाघ्याय का यात्रा विवरण, परिधि शर्मा की कहानी तथा कमलेश्वर साहू व राजेन्द्र नागदेव की कविताएं अच्छी व सरसता लिए हुए हैं। वरिष्ठ साहित्यकार संतोष चैबे पर एकाग्र खण्ड में आफाक अहमद, सविता भार्गव, सुधीर पचैरी, आलेख तथा महेन्द्र गगन से बातचीत पत्रिका के अन्य आकर्षण हैं। प्रताप सिंह सोढी की लघुकथाएं, गिरीश रस्तोगी, ओम प्रभाकर के लेख, विनय उपाध्याय के कालम सहित अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती हैं।

मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका का अक्टूबर अंक

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: अक्टूबर 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. बि. रामसंजीवैया, मनोहर भारती, पृष्ठ: 62, मूल्य: 5रू (वार्षिक: 50 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 080.23404892, सम्पर्क: 58, वेस्ट आॅफ कार्ट रोड़, राजाजी नगर, बेंगलूर कर्नाटक

पत्रिका का समीक्षित अंक प्रधान सचिव व पत्रिका के प्रधान संपादक डाॅ. बि. रामसंजीवैया पर आंशिक रूप से एकाग्र है। अंक में उनके समग्र्र व्यक्तित्व पर संक्षिप्त किंतु उपयोगी आलेख मनोहर भारती जी ने लिखा है। पत्रिका के अन्य आलेखों में मित्रेश कुमार गुप्त, रामशरण युयुत्सू, मोहन भारतीय, दर्शन सिंह रावत, रामशरण यादव के आलेख प्रभावित करते हैं। हरीश कुमार शर्मा, रंजना अरगड़े, अमित पटेल व हितेश कुमार शर्मा के लेखों में अन्य समाजिक विषयों पर प्रकाश डाला गया है। सुनीता पचैरी, सुंदरलाल कथूरिया तथा रामनिवास मानव की कविताएं प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व जानकारियां भी उपयोगी व सार्थक हैं।

Friday, October 28, 2011

पत्रिका ‘‘युग वंशिका’’ का प्रवेशांक

पत्रिका: युग वंशिका, अंक: जुलाई 2011, स्वरूप: वार्षिक, संपादक: नित्यानंद तुषार, पृष्ठ: 88, मूल्य: 30रू (वार्षिक: उपलब्ध नहीं), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0120.2742464, सम्पर्क: प्रारंभ प्रकाशन, आर 64, सेक्टर 12, प्रताप विहार, ग़ाजियाबाद उ.प्र.

समीक्षित अंक पत्रिका युग वंशिका का प्रवेशांक है। सामान्यतः किसी पत्रिका के प्रवेशांक में जो कमियां होती हैं प्रायः वही सब इसमें भी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पत्रिका साहित्यजगत के जानकारों के लिए अनुउपयोगी है। सरसरी तौर पर अंक देखकर यह कहा जा सकता है कि भविष्य में यह पत्रिका साहित्य जगत के शीर्ष पर अवश्य काबिज होगी। इस अंक में जीवन सरकार, रज्जन त्रिवेदी, विपिन बिहारी, सदानंद झा, जसवंत सिंह विरदी, रजनी गुप्त, कुंवर आमोद, दिवा भट्ट एवं किसलय पंचैली की कहानियों का प्रकाशन किया गया है। इनमें से कुछ कथाकार जाने पहचाने तथा शेष साहित्य जगत में लगभग नए हैं। लेकिन फिर भी बिपिन बिहारी, रजनी गुप्त एवं किसलय पंचोली की कहानियां सशक्त हैं। काजल पाण्डे का लघु उपन्यास ‘‘सच झूठ के बीच’’ एक वडी विषयवस्तु को प्रस्तुत करता है। प्रताप दीक्षित का व्यंग्य ख्यात व्यंग्यकार स्व. श्री रवीन्द्रनाथ त्यागी की सी भाषा के कारण प्रभावित करता है। नचिकेता, वीरेन्द्र आस्तिक, चन्द्रसेन विराट, यशोधर राठौर के गीतों में इस विधा के आधुनिक स्वरूप से दर्शन होते हैं। रंजना श्रीवास्तव तथा रश्मि रमानी की कविताएं समसामयिक हैं। निदा फाजली, नित्यानंद तुषार की ग़ज़लों को छोड़कर अन्य ग़ज़लें प्रभावित नहीं कर सकी हैं। पत्रिका का यह प्रवेशांक है इसमें साहित्य की अन्य विधा जैसे संस्मरण, रेखाचित्र, डायरी, रिपोतार्ज आदि विधाएं भी सम्मिलित की जाना चाहिए था। उम्मीद है साहित्य समाचार अगले अंक से अवश्य ही प्रकाशित किए जाएंगे?

Thursday, October 27, 2011

संबोधन का जुलाई-सितम्बर अंक

पत्रिका: संबोधन, अंक: जुलाई-सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: कमचर मेवाड़ी, पृष्ठ: 190, मूल्य: 20रू (वार्षिक: 80रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 02952223221, सम्पर्क: पोस्ट कांकरोली, जिला राजसमंद राजस्थान

पत्रिका संबोधन का समीक्षित अंक महिला कथाकार विशेषांक है। अंक में प्रायः प्रत्येक वर्ग की प्रतिनिधि रचनाओं को स्थान दिया गया है। अंक की कहानियों में प्रमुख साम्य यह है कि वे इन कथाकारों की प्रतिनिधि कहानियां है। इन कहानियों को पुनः पढ़ना एक सुखद अनुभव है। युवा समीक्षक आलोचक पल्लव का समीक्षात्मक लेख पत्रिका में प्रकाशित कहानियों पर संक्षेप में प्रकाश डालता है। इन कहानियों में एक प्लेट सैलाब(मन्नू भण्डारी), इमाम साहब(नासिरा शर्मा), प्रेम(ममता कालिया), भूख(चित्रा मुदगल), कांसे का ग्लास(सुधा अरोडा), प्रमुख स्त्री के बीच(ज्योत्सना मिलन), गृह प्रवेश(मालती जोशी), चीख(उर्मिला शिरीष), स्वयं से किय ाग या वादा(स्वाति तिवारी), केयार आॅफ स्वात घाटी(मनीषा कुलश्रेष्ठ), अललटप्पू(सुषमा मुनीन्द्र), अपनी तरफ लौटते हुए(जयश्री राय) तथा जिसे में फोन नहीं करती(इंदिरा दांगी) प्रमुख हैं। वहीं दूसरी ओर सीमा थापक, मीनाक्षी स्वामी, शाइस्ता फ़ाखरी, रूचि बागड़देव तथा नीता श्रीवास्तव की कहानियों में वह पैनापन नहीं लगा जिसके लिए कहानी विधा जानी पहचानी जाती है। पत्रिका का कलेवर, साज सज्जा सादगीपूर्ण है व सहज ही आकर्षित करता है।

Monday, October 24, 2011

साहित्य, कला एवं सामाजिक संस्कारों की पत्रिका ‘संस्कृति’

पत्रिका: संस्कृति, अंक: 18 पूर्वाद्ध वर्ष 2010, स्वरूप: अर्द्धवार्षिक, संपादक: भारतेश कुमार मिश्र, पृष्ठ: 105, मूल्य: केवल नि शुल्क सीमित वितरण के लिए, ई मेल: editorsanskriti@gmail.com ,वेबसाईट: http://www.indiaculture.nic.in/ , फोन/मोबाईल: 011.23383032, सम्पर्क: केन्द्रीय सचिवालय, ग्रंथागार, द्वितीय तल, शास्त्री भवन, डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली 110001(भारत)

कला, साहित्य एवं सामाजिक संस्कारों की प्रमुख पत्रिका संस्कृति का प्रत्येक अंक सराहनीय होता है। समीक्षित अंक भी गंभीर, गहन विश्लेषण युक्त रचनाओं से युक्त है। अंक में ख्यात आलोचक समीक्षक रमेश कुंतल मेघ का आलेख सौन्दर्य बोध को नए सिरे से परिभाषित करता है। रामशरण युयुत्सू, अनिल कुमार तथा भालचंद्र जोशी के लेख क्षेत्रीय संस्कृति तथा सरोकारों की अच्छी प्रस्तुति कही जा सकती है। नरेश पुण्डरीक ने बुंदेलखण्ड तथा अश्विनी कुमार ने झारखण्ड को नए सिरे से सजाया सवांरा है। राजेन्द्र कुमार दीक्षित, परमानंद पांचाल, देवेन्द्र नाथ ओझा एवं लीला मिश्र ने हमारी ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर को विश्लेषित कर उन्हें पाठकों की मुख्य पसंद बना दिया है। लोकेश चंद्र, मीना सिंह, कृपाशंकर सिंह तथा वीरेन्द्र सिंह यादव अपने अपने विषयों के साथ अच्छी तरह से न्याय कर सके हैं। वैदिक समाज और साहित्य में स्त्री की भूमिका(श्रुतिकांत पाण्डेय), भरमौर की जनजातिय संस्कृति(डाॅ. जगत सिंह), विवाह की विचित्र परंपराए(योगेश चंद्र शर्मा) एवं रवीन्द्र नाथ झा के आलेख पठनीय व संग्रह योग्य हैं। सुदर्शन वशिष्ठ, प्रदीप शर्मा तथा सुमित पी.बी. ने स्पष्ट व सारगर्भित विश्लेषण अपने अपने आलेखों में किया है। पत्रिका का कलेवर, साज सज्जा तथा प्रस्तुतिकरण प्रभावित करता है। इस अमूल्य पत्रिका को प्रत्येक पाठक पढ़कर सहेजना चाहेगा।

Sunday, October 23, 2011

साहित्यकारों की सम्पर्क पत्रिका ‘‘आसपास’’ का नया अंक

पत्रिका: आसपास, अंक: अक्टूबर 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 32, मूल्य: 5रू(वार्षिक: 50 रू.), ई मेल: shabdashilpi@yahoo.com ,वेबसाईट: http://www.dharohar.com/ , फोन/मोबाईल: 07552776129, सम्पर्क: एच 3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर, भोपाल म.प्र.

रचनाकर्मियों की संवाद पत्रिका का समीक्षित अंक जानकारीपरक समाचारों से युक्त है। अंक में ख्यात ग़ज़ल गो शहरयार को ज्ञानपीठ पुरस्कार का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। मध्यप्रदेश की राजधनी भोपाल में शुरू हो रहे हिंदी विश्वविद्यालय में तकनीकि शिक्षा की पढ़ाई का समाचार हिंदी के साथ साथ तकनीक से जुडे़ पाठकों के लिए उपयोगी है। उच्च न्यायालय के हिंदी में पारित प्रस्ताव तथा भारतीय भाषा दिवस के रूप में मनाया जाए हिंदी दिवस का समाचार पत्रिका के अन्य आकर्षण हैं। इंटरनेट पर हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार, देवेद्र दीपक व भारद्वाज को दीनदयाल उपाध्याय सम्मान एवं मध्यप्रदेश लेखक संघ द्वारा देश के 16 साहित्यकारों के सम्मान से संबंधित समाचार शब्दधर्मियों के मध्य संवाद स्थापित करने में पूर्णतः सक्षम है। रीयूनियन द्वीप फ्रांस में पहली बार हिंदी दिवस व नेशनल बुक ट्रस्ट के नए निदेशक का समाचार भी साहित्यजगत के लिए उपयोगी है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, समाचार, पत्र आदि भी उपयोगी व जानकारी परक हैं।

Saturday, October 22, 2011

‘‘समय के साखी’’ का नागार्जुन जन्मशती अंक

पत्रिका: समय के साखी, अंक: 15 वर्ष: 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: आरती, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू(वार्षिक: 225 रू.), ई मेल: samaysakhi@gmail.com ,वेबसाईट: , http://www.samaykesakhi.in/ फोन/मोबाईल: 09713035330, सम्पर्क: बी-308, सोनिया गांधी काम्पलेक्स, हजेला अस्पताल के पास, भोपाल 3, म.प्र.

पत्रिका का समीक्षित अंक ख्यात प्रगतिशील कवि नागार्जुन पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व पर सारगर्भित आलेखों का प्रकाशन किया गया हैै। प्रमुख आलोचक रामप्रकाश त्रिपाठी, सुरेश पंडित, रमाकांत शर्मा, सूर्यकांत नागर, मधुरेश जी एवं माधव हाड़ा के आलेख नागार्जुन की कविताओं का विश्लेषणपरक मूल्यांक न करते हैं। ख्यात कवि सर्वश्री ओमप्रकाश भारती, महेश पुनेठा, मोहन सगोरिया तथा कुमार सुरेश ने उनकी कविताओं पर अन्य रचनाओं पर विचार रखे हैं। नागार्जुन की कलम से कालम के अंतर्गत उनकी कुछ चुनी हुई कविताएं प्रकाशित की गई है। इन कविताओं के माध्यम से साहित्य के नए पाठकों का नागार्जुन से पुनः परिचय कराया गया हैै। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी प्रभावित करते हैं।

Friday, October 21, 2011

नारी अस्मिता का नया अंक

पत्रिका: नारी अस्मिता, अंक: जून-नवम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: रचना निगम, पृष्ठ: 64, मूल्य: 25रू(वार्षिक: 100रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0255.6545817, सम्पर्क: 15, गोयागेट सोसायटी, शक्ति अपार्टमेंट, बी-ब्लाक, द्वितीय तल, एस/3, प्रतापनगर बड़ोदरा गुजरात

देश की सर्वाधिक लोकप्रिय स्त्री विषयक पत्रिका का समीक्षित अंक साहित्यिक एवं सामाजिक रचनाओं से भरपूर है। अंक में कमलेश शर्मा, पूनम गुजराती, वसंती पवार, रेखा भंसाली एवं सुमन जे, शर्मा के सामाजिक महत्वयुक्त आलेखों का प्रकाशन इस अंक में किया गया है। शुक्ला चैधरी तथा लीला मोदी के आलेख साहित्येत्तर विषयों की अच्छी प्रस्तुति है। प्रकाशित कहानियों में मां मुझे बचाओ(कविता रायजादा), धूप छांव(सुदेश बत्रा) एवं अब्दुल्ला का ताजमहल(अनीता पंडा) अच्छी रचनाओं में शुमार की जा सकती है। श्रीमती संतोष खन्ना से साक्षात्कार अच्छा व प्रभावी है। प्रायः सभी लघुकथाएं ठीक ठाक हैं। अंक की कविताएं अन्य रचनाओं की तरह अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पायी हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी प्रभावित करते हैं।

Monday, October 17, 2011

समकालीन अभिव्यक्ति का नया अंक

पत्रिका: समकालीन अभिव्यक्ति, अंक: सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: उपेन्द्र कुमार मिश्र, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू(वार्षिक: 60रू.), ई मेल: samkaleen999@gmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 011.26645001, सम्पर्क: फ्लैट नं. 5, तृतीय तल, 984 वार्ड नं. 7, महरौली, नई दिल्ली 30

पत्रिका समकालीन अभिव्यक्ति का समीक्षित अंक नारी विशेषांक है। अंक में महिला रचनाकारों की कहानियों, कविताओं तथा आलेखों का समावेश इस अंक में किया गया है। इंदिरा राय, रंजना सिंह, मीरा चंद्रा तथा कमल कपूर ने कहानियों के पात्रों के साथ पूरी तरह से न्याय किया है। जिससे प्रायः सभी कहानियों में प्रवाह आ गया है। लता सुमंत, आकांक्षा यादव, कृष्णा श्रीवास्तव तथा हर्ष नंदिनी भाटिया के आलेखों मंे भी नारी जीवन तथा उसके संघर्ष को व्यक्त किया गया हैै। मीनू बैस, इंदिरा शर्मा, पूनम यादव, राजकुमारी रश्मि, सवर्णा दीक्षित, प्रियंका, रश्मि मिश्रा तथा सरोज वशिष्ठ की कविताएं भी स्त्री विषयक दृष्टिकोण सामने रखती है। प्रो. वंशीधर त्रिपाठी से साक्षात्कार तथा राजी सेठ से सुदर्शन नारंग के छः प्रश्न पत्रिका की विशिष्ठ रचनाएं हैं। पत्रिका की समीक्षाएं, पत्र तथा समाचार भी श्रेष्ठ हैं।

Sunday, October 16, 2011

हिंदी साहित्य में ‘तटस्थ’ के 39 वर्ष

पत्रिका: तटस्थ, अंक: जुलाई-सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: कृष्णबिहारी सहल, पृष्ठ: 64, मूल्य: 38रू (वार्षिक: 150रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 01572253439, सम्पर्क: विवेकानंद विला, पुलिस लाईन के पीछे, सीकर राजस्थान

लघुपत्रिका दौर की 39 वर्ष पुरानी यह पत्रिका रचनात्मकता व विविधता में किसी व्यवसायिक पत्रिका से कमतर नहीं है। समीक्षित अंक में ख्यात कवि श्रीकांत जोशी की काव्य यात्रा पर मणिशंकर आचार्य का आलेख उनके व्यक्तित्व पर भलीभांति प्रकाश डालता है। कहानी सारा जहां हमारा(चंद्रप्रकाश पाण्डेय), वटवृक्ष(सरला अग्रवाल), पत्थर हुए लोग(तारिक असलम तस्लीम) में रोचकता के साथ साथ समयानुकूल विशिष्टताएं भी दिखाई पड़ती हैं। कृष्ण कुमार यादव का आलेख तथा ओंमकारनाथ चतुर्वेदी का व्यंग्य मां बहुत भूख लगी है अच्छी रचनाएं हैं। श्रीकांत जोशी, हरदयाल, राजेन्द्र परदेसी, शकूर अनवर, देवेद्र कुमार मिश्रा, मनोज सोनकर, रमेश सोबती तथा नंद चतुर्वेदी जी की कविताओं में पाठक के लिए बहुत कुछ है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा पत्र भी प्रभावित करते हैं।

Saturday, October 15, 2011

साहित्य के लिए आवश्यक 'पंजाबी संस्कृति'

पत्रिका: पंजाबी संस्कृति, अंक: जुलाई-सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: राम आहूजा, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू(वार्षिक: 80रू.), ई मेल: ram_ahuja@hotmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0124.2582115, सम्पर्क: एन-115, साउथ सिटी, गुडगांव(हरियाणा)

हरियाणा से प्रकाशित हिंदी साहित्य की यह पत्रिका हिदंी व पंजाबी दोनों में एक साथ रचनाआंे का प्रकाशन करती है। इस अंक में श्रीकांत व्यास व वीर सावरकर के लेख धर्मक्षेत्र के अंतर्गत प्रकाशित किए गए हैं। समसामयिक आलेखों में सबसे बड़ा योद्धा(राम आहूजा), ज्ञान के मोती(जवाहर लाल जौहर) एवं जीवन में शिक्षा का महत्व(मानसी बाधवा) अच्छी रचनाएं हैं। लीला मोदी की कहानी नौ कन्या तथा हमारे अपने(मनीष कुमार सिंह) विशेष रूप से प्रभावित करती है। वहीं दूसरी ओर उसकी तरक्की(चित्रेश) अपेक्षित प्रभाव छोड़ने में असफल रही है। इस कहानी पर अभी और कार्य किया जाना चाहिए था। मदन लाल वर्मा, सुर्कीति भटनागर, महेश राणा, वाहिद फराज, सरोज व्यास सलिल, राज कुमारी शर्मा, ओम प्रकाश बजाज, रमेश मनोहरा, राम निवास मानव, चांद शर्मा एवं अश्विनी टांक की कविताओं में नवीनता के साथ साथ समय के संघर्ष का स्वर दिखाई पड़ता है। राम निवास, श्याम लाल कौशल एवं सुरेन्द्र मंथन की लघुकथाओं को छोड़कर अन्य लघुकथाओं में कथावस्तु के स्तर पर शून्य ही झलकता है। पत्रिका का सिरायकी खण्ड भी उपयोगी व पठनीय रचनाआंे से परिपूर्ण है। अन्य रचनाएं, समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।

Tuesday, October 11, 2011

एक और ‘साहित्य अभियान’

पत्रिका: साहित्य अभियान, अंक: सितम्बर 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: सनत, पृष्ठ: 22, मूल्य: 10रू(वार्षिक: 120रू.), मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 9301492734, सम्पर्क: साहित्य निकेतन, जूट मिल थाने के पीछे, हनुमान मंदिर के पास, रायगढ़ (छतीसगढ़)
सृजनात्मक सोच युक्त साहित्य अभियान का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से युक्त है। अंक में सुजीत कर, सनत कुमार नायक एवं प्रमोद जोशी केे विचारयुक्त आलेख प्रभावित करते हैं। शिक्षा, शिक्षक एंव विद्याथी परिचर्चा वर्तमान शैणक्षिक वातावरण में समसामयिक है व अच्छी सारगर्भित विवेचना प्रस्तुत करती है। रामधारीसिंह दिनकर, सीताराम गुप्ता, सनत कुमार नायक, तुकाराम कंसारी, श्याम नारायण श्रीवास्तव एवं मनीषा दिव्य भारद्वाज की कविताओं का स्वर समाज के पिछड़ों को अभिव्यक्ति प्रदान करता है। कृष्ण कुमार यादव, हसमुख रामदेपुत्रा सहित अन्य लेखकों की लघुकथाएं भी पठनीय व ध्यान देने योग्य हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी अपेक्षित स्तर की हैं व प्रभावित करती हैं।