Tuesday, May 31, 2011

पाखी का मई 2011 अंक

पत्रिका: पाखी , अंक: मई वर्ष 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ: 108, मूल्य: 25, ई मेल: pakhi@pakhi.in , वेबसाईट: www.pakhi.in , फोन/मो. 0120.4070300, सम्पर्क: इंडिपेंडेंट मीडिया इनिशिएटिव सोसायटी, बी-107, सेक्टर 63, नोएड़ा उ.प्र.
साहित्य जगत की अग्रणी पत्रिका पाखी का यह अंक सामाजिक साहित्यिक रचनाओं से युक्त है। पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित कहानियां वर्तमान समय में आम आदमी के जीवन में मच रही उथल पुथल को व्यक्त करती है। इन कहानियों में प्रमुख रूप से पांव में पहिए वाली लड़की(संतोष दीक्षित), वह चेहरा(रूप सिंह चंदेल) तथा बदलाव(शरद उपाध्याय) का उल्लेख विशेष रूप से किया जा सकता है। गरिमा श्रीवास्तव के उपन्यास अंश तथा अचला शर्मा का प्रसंगवश भी प्रभावित करता है। अजित कुमार, प्रत्यक्षा, नमिता सत्येन तथा विनीता जोशी की कविताएं भी नयापन लिए हुए हैं। स्मृति शेष के अंतर्गत राजेन्द्र लहरिया तथा उमाशंकर चैधरी के लेख अच्छे हैं। मीमांसा स्तंभ की सामग्री विशेष रूप से प्रेेम शशांक व राकेश बिहारी ने अपेक्षा के अनुरूप लेखन किया है। प्रतिभा कुशवाहा का स्तंभ ब्लागनामा अपने नए रूप में प्रभावित करता है। वैसे प्रत्येक अंक में इस स्तंभ की उपयोगिता तथा सार्थकता बढ़ती जा रही है। पंकज शर्मा व अशोक गुजरती की लघुकथाओं में नवीनता के साथ साथ भारतीय परिवेश तथा दृष्टिकोण के दर्शन होते हैं। अंक की सामग्री साहित्यिक के साथ साथ समाज के लिए दिश निर्देश प्रदान करने वाली है। पत्रिका का स्वरूप राष्ट्रीय से बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर को हो गया है यह पत्रिका के प्रत्येक पाठक केे लिए हर्ष का विषय है।

Monday, May 30, 2011

अब साहित्य में भी ‘समावर्तन’

पत्रिका: समावर्तन, अंक: मई2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू(वार्षिक 250रू.), मेल: samavartan@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन .प्र.
इस पत्रिका ने अल्प समय में ही साहित्य जगत में अपनी अच्छी पहचान बना ली है। पत्रिका कला, साहित्य व संस्कृति के विभिन्न पहलूओं को साथ लेकर चलती हुई पाठकों की पठन रूचि में परिष्कार करने का अच्छा प्रयास कर रही है। इस कारण से पत्रिका के प्रत्येक अंक में कुछ न कुछ नवीनता होती है। इस अंक में ख्यात साहित्यकार वीरेन्द्र कुमार जैन को लेखन व विचार के केन्द्र में रखा गया है। उनके व्यक्तित्व पर रमेश दवे, ज्योत्सना मिलन, कुबेरनाथ राय, देवराज, चंद्रकांत वाडिवेकर, रामनारायण उपाध्याय ने विस्तार से अपने विचार रखें हैं। वीरेन्द्र जी की कविताएं, साक्षात्कार तथा अन्य रचनाएं भी पत्रिका में आकर्षक रूप में प्रकाशित की गई है। दिनेश अत्रि, राधेलाल बिजघावने, एम.एल. चैरसिया तथा चंद्रसेन विराट की कविताएं ठीक ठाक हैं। पत्रिका का दूसरा खण्ड ख्यात संगीतज्ञ पं. भीमसेन जोशी पर एकाग्र है। जोशी जी की साहित्य साधना के पचास वर्ष पर सुधीर चंद्र अपने विचार रखते हैं। रमेश दवे, विजय शंकर मिश्र, मीनाक्षी जोशी, कुलदीप कुमार, पं. जसराज, विनोद शर्मा, चम्पा श्रीवास्तव के लेख अच्छे व प्रभावशाली हैं। सुरेश शर्मा की लघुकथाएं तथा प्रमोद भार्गव की कहानी ‘परखनली का आदमी’ उल्लेखनीय रचनाएं हैं। निरंजन श्रोत्रिय के द्वारा चयनित कविताएं तथा ध्रव शुक्ल की कविताएं(पिता की कविताएं) अच्छी रचनाएं हैं। सुरश पण्डित, प्रतापराव कदम, राग तेलंग तथा विनय उपाध्याय ने अपने अपने लेखों में साहित्य बनाम स्थानीयता अथवा बाजारीकरण के परिपे्रक्ष्य में अपनी बात रखी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं आदि भी प्रभावित करती है।

Sunday, May 29, 2011

साहित्यिक पत्रिका ‘साक्षात्कार’ का नया अंक

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: मार्च 2011(मई में प्रकाशित), स्वरूप: मासिक, संपादक: त्रिभुवननाथ शुक्ल, पृष्ठ: 120, मूल्यः 25रू(वार्षिक 250रू.), मेल: ,वेबसाईटउपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0755.2554782, सम्पर्क: साहित्य अकादमी, .प्र. संस्कृति परिषद, वाण गंगा भोपाल .प्र.
पत्रिका के इस अंक में डाॅ. बलदेव शर्मा से रवि शर्मा की बातचीत प्रमुख आकर्षण है। इसमें साहित्य के मार्फत आम आदमी के जीवन को टटोलने का प्रयास किया गया है। डाॅ. बलदेव वंशी ने माखनलाल चतुर्वेदी की कविताओं आत्मबद्धता को स्पष्ट किया है। ‘सखि वसंत आया’ निबंध में डाॅ.दुर्गेश्वर बसंत के माध्यम से देश के नित बदलते हालातों पर कटाक्ष करते हैं। विनय राजाराम तथा सेवाराम त्रिपाठी ने अपने अपने लेखों में रचनाकारों के आंतरिक पक्ष को लेखन की विषयवस्तु बनाया है। राधेलाल बिजघावने, शिवकुमार पाण्डेय, संतोष गोयल तथा विजय कुमार की कहानियों में ऐसा कुछ नहीं मिला जिसका उल्लेख किया जा सके। क्योंकि इस तरह की वर्णात्मक कहानियां हिंदी साहित्य पटल से ओझल हुए एक अर्सा गुजर गया है। डाॅ. पुरूषोत्तम तथा सुरेन्द्र गोयल को छोड़कर अन्य कविताएं साधारण ही हैं। शिव चैरसिया का आंचलिक गीत प्रभावित करता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी पढ़ी जा सकती है।

केदारनाथ अग्रवाल पर एकाग्र ‘अक्सर’

पत्रिका: अक्सर, अंक: मार्च 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: हेतु भारद्वाज, पृष्ठ: 232, मूल्य: 25रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0141.2761245, सम्पर्क: ए-243, त्रिवेणी नगर, गोपालपुरा बाईपास, जयपुर 302018 राजस्थान

राजस्थान से प्रकाशित इस ख्यात पत्रिका का यह अंक प्रसिद्ध कवि केदारनाथ अग्रवाल पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व को समेटने का प्रयास किया गया है। प्रायः सभी रचनाएं तथा आलेख उनके जीवन वृत्त पर प्रकाश डालने के साथ साथ उनके काव्य पर नए प्रतिमानों के अनुसार विचार करते दिखाई पड़ते हैं। इन आलेखों में प्रमुख हैं - केदार की कविताओं में राजनीति की प्रमुख भूमिका है(राम विलास शर्मा), प्रकृति इतिहास को सौन्दर्यबोध(विश्वनाथ त्रिपाठी), आग लगे इस रामराज में(अजय तिवारी), श्रम के सौन्दर्य के कवि(अशोक त्रिपाठी), पक्षी जो एक अभी अभी उड़ा(केशव तिवारी), केदार की प्रगतिशील एन्द्रिकता का आलोक(लीलाधर मंडलोई) एवं तेज धार का कर्मठ पानी(जीवन सिंह) में उनके काव्यात्म रूप का सौन्दर्यपरक विवरण मिलता है। अन्य आलेखों में उनके दैनिक जीवन तथा साहित्यिक गतिविधियों व रचनासंसार से पत्रिका का पाठक परिचित होता है। जन जन के सजग चितैरेःकेदारनाथ(राजेश जोशी), मुक्ति के लिए एक मान(एकान् श्रीवास्तव), कंधे पर केन नदी(नरेश चंद्रकर), मित्र संवाद(कमेन्द्रु शिशिर), सूर्य कभी नहीं डूबता(रंजना जायसवाल), आस्था और विश्वास के कवि केदार(नरेन्द्र पुण्डरीक), केदार जी की विनम्रता को याद करते हुए(महावीर अग्रवाल) तथा सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार(कल्लु लाल कुलमी) के आलेखों में उनकी कविताओं पर नए ढंग से विचार किया गया है। पत्रिका की सज्जा कलेवर तथा प्रस्तुतिकरण प्रभावित करता है। ( published in jansandesh times, lucknow)

Friday, May 27, 2011

समय के साथ पत्रिका ‘समय के साखी’

पत्रिका: समय के साखी, अंक: फरवरी मार्च 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. आरती, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू(वार्षिक 220रू.), मेल: samaysakhi@gmail.com ,वेबसाईट: www.samaykesakhi.com , फोन/मोबाईल: 09713035330, सम्पर्क: बी-308, सोनिया गांधी काम्पलेक्स, हजेला हास्पिटल के पास, भोपाल .प्र.
पत्रिका समय के साखी का यह अंक कविताओं पर एकाग्र है। अंक में अशोक तिवारी, सदाशिव कौतुक, ओम नागर, वरूण कुमार तिवारी, विश्वनाथ, प्रदीप जिलवाने, देवांशु पाल, सच्चितानंद विशाख, जगत नंदन सहाय, अशफाक अहमद सिद्दकी, शैली खत्री, सिद्धेश्वर तथा देवेन्द्र कुमार मिश्रा की कविताएं प्रमुख रूप से प्रकाशित की गई है। विनय मिश्र की ग़ज़ल तथा मधुकर आष्ठाना, मनोज कुमार जैन के गीत भी पत्रिका में सम्मिलित किए गए हैं। पत्रिका का दूसरा खण्ड साहित्यिक समाचारों के भाग के रूप में प्रकाशित किया गया है। लेकिन पत्रिका में कविता विधा पर किसी आलेख का न होना अंक की बड़ी कमी है।इसकी वजह से अंक के आकर्षण मंे कुछ कमी आई है।

Thursday, May 26, 2011

पत्रिका ‘हिंदुस्तानी जबान’ का नया अंक

पत्रिका: हिंदुस्तानी जबान, अंक: अपै्रल-जून 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: सुशीला गुप्ता, पृष्ठ: 96, मूल्य: 10रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: hp.sabha@hotmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 022.22812871, सम्पर्क: महा.गां. मेमोरियल रिसर्च सेंटर, 7, नेताजी सुभाष रोड़, मुम्बई 400002
हिंदी तथा उर्दू जबान में एकसाथ प्रकाशित इस पत्रिका का स्वरूप गांधीवादी है। समीक्षित अंक में संपादकीय के अंतर्गत सुशीला गुप्ता ने देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर अपनी बात रखी है। वर्तमान संदर्भ में उनका यह कहना कि, ‘उसे जड़ से उखाड़ने के लिए उसकी तह तक जाना होगा।’ पत्रिका के अनेक लेखों में भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाकर उससे निपटने के तरीकों से अवगत कराया है। संस्कृति भाटिया, सैयद नज़र फातमा, शीतल परकाश, राधा बाकले ने संक्षेप में समस्याओं के सामधान की तरफ संकेत किया है। महीप सिंह, धीरज भाई वणकर, संजीव कुमार दुबे, हरेश सदाशिव स्वामी, लालमणि त्रिपाठी ने साहित्य से जुड़े विषयों को आज के संदर्भ में प्रस्तुत किया है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा पत्र आदि भी उपयोगी हैं। इसी तरह से उर्दू खण्ड की सामग्री भी हिंदी के साथ साथ उर्दू जानने समझने वाले पाठकों के लिए अतिआवश्यक है।

Tuesday, May 24, 2011

नारी चेतना की प्रगतिशील पत्रिका ‘नारी अस्मिता’

पत्रिका: नारी अस्मिता, अंक: मार्च-अप्रैल-मई2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: रचना निगम, पृष्ठ: 54, मूल्य: 25रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: nari_asmita@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0265.6545817, सम्पर्क: 15,गोयागेट सोसायटी, शक्ति अपार्टमेंट, बी-ब्लाक, द्वितीय तल, एस/3, प्रतापनगर, बडोदरा 390004 गुजरात महिला विषयक पत्रिका नारी अस्मिता के प्रत्येक अंक के समान इस अंक में भी नारी की अस्मिता व उसकी सक्रिय भागीदारी को लेकर विचारपूर्ण रचनाएं प्रकाशित की गई हैं। अंक में श्रीमती कांति अययर, प्रभा दीक्षित एवं श्रीकांत जरिया के लेख इच्छा मृत्यु एवं वर्तमान बदलते दौर के पक्षों पर अपने अपने ढंग से अभिमत स्थापित करते हैं। कहानियों में औरत की जात(विनोद साब), अस्मिता के लिए(डाॅ. जेबा रसीद), बंधन(डाॅ. छाया गौतम) तथा निर्णय(मृणलिनी दुबे) भी नारी की समस्याओं को सामने लाकर उनके सुझाव मांगती है। सुधा अग्रवाल की सिंगापुर यात्रा में पाठकों को इस यात्रा के वास्तविक आनंद की प्राप्ति होती है। रूखसान सिद्दकी, कुमार शर्मा अनिल, सावित्री चैधरी एवं ज्योति जैन की लघुकथाएं समाज में नारी के प्रति सम्मान की भावना जाग्रत करने के लिए प्रयासरत दिखाई पड़ती है। सुरेश आनंद का व्यंग्य पूज्य गांधी बाबा हम क्या करें? आज की अव्यवस्था व कुप्रबंध पर कटाक्ष करता है। पत्रिका की समीक्षाएं भी अलग ढंग से लिखी गई हैं इसकी वजह पुस्तकों का चयन भी समयानुकूल होना है।

Monday, May 23, 2011

कथाप्रधान त्रैमासिक ‘कथाबिंब’

पत्रिका: कथा बिंब, अंक: अप्रैल-मई-जून 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मंजुश्री, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: kathabimb@yahoo.com ,वेबसाईट: http://www.kathabimb.com/ , फोन/मोबाईल: 09819162648, सम्पर्क: ए-10, बसेरा आॅफ दिन क्वारी रोड़, देवनार मुम्बई 400.088 महाराष्ट्र

कथाप्रधान इस पत्रिका की कहानियां हमेशा अपनी विशिष्ठ शैली व प्रस्तुतिकरण के कारण प्रभावित करती है। इस अंक में कहानी कभी मरती नहीं(सुशांत सुप्रिय), बुलाकी(संजीव निगम) तथा आजकल(डाॅ. स्वाति तिवारी) में बाजारीकरण के विपरीत आम भारतीय मान्यताओं को प्रतिस्थापित करने का प्रयास किया गया है। सीताराम गुप्ता, डाॅ. वासुदेवन शेष तथा बी.गोविंद शैनाय की लघुकथाएं पत्रिका की लम्बी कथाओं के विपरीत समय के बदलाव को प्रतिबिंबतकरती है। मुंकुद कौशल, अमरकांत निगम, संतोष कुमार तिवारी तथा रमेश प्रसून , श्याम गोइन्का की कविताएं ग़ज़लें अन्वेषण के विरूद्ध मानव मस्तिष्क की सिराओं में नवजीवन का संचार करती दिखाई पड़ती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी स्तरीय व जानकारीपरक हैं। ( written by me, published in jansandesh times )

Sunday, May 22, 2011

साहित्य परिक्रमा का विचार योग्य अंक

पत्रिका: साहित्य परिक्रमा अंक: अप्रैल-मई-जून 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मुरारीलाल गुप्त गीतेश, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू(द्वैवार्षिक 100रू.), ई मेल: shridhargovind@gmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 09425407471, सम्पर्क: राष्ट्रोत्थान भवन, माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क, ग्वालियर म.प्र.

साहित्यिक पत्रिका के इस अंक में मानव की जीवन दृष्टि एवं उसके दृष्टिकोण पर आधारित रचनाओं को स्थान दिया गया हैै। अंक में प्रत्येक रचनाओं में इस भावना की अभिव्यक्ति महसूस की जा सकती है। बौद्धिक क्षेत्र में गिरती गिरावट(शंकर शरण), महान समाज सुधारक संत पीपाजी(ललित शर्मा), नरेन्द्र कोहली के उपन्यास में श्रीकृष्ण(किरण कुमारी) जैसे लेख जीवन दृष्टिकोण के सबल पक्ष को ध्यान में रखते हुए लिखे गए हैं। एकांकी अस्तित्व(मनोहरलाल आनंद), कहानी चरण स्पर्श(उषा जायसवाल) तथा नीलिमा टिक्कू की लघु कथाएं भी इस दृष्टिकोण की प्रतिपूर्ति करती है। गोपाल कृष्ण का व्यंग्य भी अच्छा व नवीनता लिए हुए है। राम अधीर, आशा शर्मा, घमंड़ी लाल अग्रवाल तथा नलिनी कांत की कविताएं जीवन दृष्टि इर्दगिर्द अपनी उपस्थित दर्ज कराती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी विशिष्ठता लिए हुए हैं।

Tuesday, May 17, 2011

साहित्य सागर का नया अंक

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: मई 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20रू(वार्षिक 240रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0755.4260116, सम्पर्क: 161 बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल 462043 म.प्र.

पत्रिका का समीक्षित अंक ख्यात समाजसेवी घनश्याम सिंह चंदेल पर एकाग्र हैं। अंक में उनके व्यक्तिव पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। पत्रिका में उनके व्यक्तित्व पर क्रमशः लखनलाल खरे, सुरेन्द्र भारद्वाज, अरूण अपेक्षित ने अच्छा विश्लेषण किया है। अन्य रचनाओं में जसवंत सिंह विरदी, अर्चना श्रीवास्तव, पृथ्वीराज दुआ, प्रियदर्शनी खैरा, देवी सरन, हर्षवर्धन पाठक तथा मालती वसंत की कहानियां उल्लेखनीय हैं। किशोर टण्डन, बनवारीलाल शर्मा, नवल जाससवाल तथा रजनी सक्सेना की कहानियां भी आज के समाज को प्रतिबिम्बित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी ध्यान देने योग्य है।

Monday, May 16, 2011

साहित्य का ‘कथन’

पत्रिका: कथन, अंक: April -june2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: संज्ञा उपाध्याय, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: kathanpatrika@hotmail.com ,वेबसाईट: , फोन/मोबाईल: 011.25268341, सम्पर्क: 107, साक्षरा अपार्टमेंट, ए-3, पश्चिम विहार, नई दिल्ली 110.063

कथन का प्रत्येक अंक अपने आप में विशेषांक होता है। इस अंक मंे राजेश जोशी, मनीषा कुलश्रेष्ठ, जाफर मेंहदी जाफरी व हरजेन्द्र चैधरी की कहानियां प्रकाशित की गई है। मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी ‘स्यामीज’ विशिष्ठ शिल्प व सुगठित कथानक से पाठकों को बांधे रखती है। अंशु मालवीय को छोड़कर अन्य कवियों की कविताएं अपेक्षित प्रभाव डालने में लगभग असमर्थ रही हैं। तेलुगु कहानी ‘गांव बुलाता है’(अनु. आर.शांता संुदरी) पढ़कर यह नहीं कहा जा सकता है कि यह अनुदित रचना है। हयाशी कुसिको(मछलियों का शहर और हारमोनियम, अनु. जितेन्द्र भाटिया) की जापानी कहानी वहां के कथा साहित्य की विविधता व मौलिकता से परिचय कराती है। वरिष्ठ साहित्यकार लीलाधर मंडलोेई के विचार, ‘किसान को इस समय हाशिये पर फेंक दिया गया है।’(कवि राजेन्द्र शर्मा की कविताओं के मार्फत) कविता के बाजारीकरण का पक्ष न लेने का आग्रह करते हैं। रमेश उपाधया की कथा समीक्षा, नवल अल सादवी का आत्म कथ्य, एजाज अहमद व असगर अली इंजीनियर के आलेख पत्रिका को अन्य पत्रिकाओं से अलग करते विशिष्ठ स्वरूप प्रदान करते हैं। शिवदयाल, अजय कुमार, ज्वारी मल्ल पारख, उत्पल कुमार के स्तंभ की सामग्री में नवीनता है। पत्रिका की अन्य रचनाए, समीक्षाएं भी प्रभावित करती हैं।

Sunday, May 15, 2011

लघु पत्रिका ‘पाठ’ का नया अंक

पत्रिका: पाठ, अंक: अप्रैल-जून, वर्ष 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: देवांशु पाल, पृष्ठ: 34, मूल्य: 20, ई मेल: प्रकाशित नहीं , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 07752.226086, सम्पर्क: गायत्री विहार, बिनोबा नगर, बिलासपुर 495001 छ.ग.

इस लघु पत्रिका के प्रत्येक अंक में सामग्री का स्तर उच्च होता है। इस अंक की सामग्री भी संजोकर रखने योग्य है। स्मृति शेष के अंतर्गत ‘शिवराम का हमारे बीच से अकस्मात चले जान’ में कवि के संबंध में महेन्द्र नेह ने बहुत सूक्ष्म ढंग से विचार किया है। प्रमोद द्विवेदी, अशोक सिंह, सवाई सिंह शेखावत की कविताएं व अशोक अंजुम की ग़ज़लें विधागत स्तर के साथ साथ वास्तविकता के धरातल पर भी खरी उतरती है। क्रांतिकारी रचनाकार सुधीर विद्यार्थी से अरशद की बातचीत में उनके जीवन के उतार चढ़ाव व सामाजिक-साहित्यिक परिस्थितियांे पर विचार किया गया है। मानव के प्रति मानव के जी की पुकार(अलीक) तथा आदिवासी साहित्य विमर्श(श्रवण कुमार मीणा), सुरेश पण्डित के लेख साहित्य की अपेक्षा वर्तमान समय की वास्तविकता से आम पाठकों को परिचित कराते हैं। अरूण अभिषेक, की कहानियां प्रभावित करती है। रवीन्द्र तेलंग का लेख ‘ए री मैं तो पे्रम दीवानी’ कुछ अधिक फिल्मी हो गया है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी स्तरीय व विचार योग्य है।

साहित्य के मार्फत ‘युग गरिमा’

पत्रिका: युग गरिमा, अंक: अपै्रल 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: आर.एन. मिश्र, पृष्ठ: 34, मूल्य: 10रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: yuggarima2gmail.com , वेबसाईट: http://www.yuggarima.org/ , फोन/मोबाईल: 09335768043 सम्पर्क: 10/400, इंदिरा नगर, लखनऊ उ.प्र.

इस पत्रिका का स्वरूप विशुद्ध साहित्यिक न होते हुए भी इसकी अंतर्रात्मा साहित्य का पोषण करती है। अंक में आदित्य प्रसाद अग्रवाल, मयंक श्रीवास्तव, किशोरीलाल शर्मा के लेख साहित्येत्तर विषयों पर साहित्यिक दृष्टिकोण से विचार करते हैं। आध्यात्म के अंतर्गत श्री रविशंकर, दीनदयाल मणि त्रिपाठी एवं वालेन्द्रु शेखर तिवारी ने आध्यात्म पर वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विचार किया है। लोकेन्द्र सिंह चैहान व उषा यादव की कविताएं तथा कमल कपूर की रचना ‘आस्था के फूल’ आत्मिक शांति प्रदान करती है। ( Published in Jansandesh Times)

Tuesday, May 10, 2011

साहित्य की ‘अभिलाषा’

पत्रिका: अभिलाषा, अंक: 27, वर्ष 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, प्रधान संपादक: के.सी. शर्मा , पृष्ठ: 66, मूल्य: उपलब्ध नहीं, ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 011.23094219, सम्पर्क/प्रकाशक: कार्यालय महानिदेशक, लेखा परीक्षा एवं रक्षा सेवाएं, नई दिल्ली (भारत)

पत्रिका अभिलाषा साहित्यिकता से भरपूर उच्च कोटि की पत्रिका है। इसमें प्रकाशित रचनाआंे का स्तर किसी अन्य हिंदी की पत्रिका से कम नहीं है। अंक में विभिन्न अधिकारियों की सम्मति तथा आशीर्वाद के साथ साथ पत्रिका के संबंध में उनके अमूल्य विचारों को भी स्थान दिया गया है। पत्रिका में प्रकाशित कविताओं में मनमीत कौर, पूजा शर्मा, किरनजीत कौर, राजेन्द्र सिंह, के.सी. शर्मा, नसीम पठान, सूरज प्रकाश वधवा, निकेता मलिक, हर्ष कुमार, उषा बवेजा, निशा शर्मा, ललित शर्मा, पूनम मुंजाल, आर.पी. सिंह, राहुल गौर की कविताओं की भाषा सरल व भाव विशिष्ठ हैं। इनमें आम पाठकों के लिए कुछ न कुछ अवश्य है। प्रकाशित लेखों में के.सी. शर्मा, नमन शर्मा, एस.बी. नवीन, के.एन. सिंह, अधीश, निशा शर्मा, मुकेश, नीरू कालरा, अमन शर्मा, आरती रस्तोगी, रमेश कुमार, के.पी. सिंह एवं भारती प्रवीण के विशिष्ठ हैं। वृंदा मल्होत्रा, एस.जी. गोस्वामी, जय गुप्ता, चंद्रकला तथा राजेश कुमार के विविध विषयों पर लिखे गए आलेखों में नवीनता तथा ताजगी है। एल.पी. शर्मा, जी.पी. यादव, विश्वजीत चंदा ने साहित्य से अलग हटकर पाठकों की पढ़ने में रूचि जाग्रत करने का कुशल प्रयास किया है। पत्रिका का राजभाषा हिंदी की काम काज मेंउपयोगिता पर प्रकाश डालता है।

Saturday, May 7, 2011

साहित्य के प्रति समर्पित- ‘दिव्यलोक’

पत्रिका: दिव्यलोक, अंक: वार्षिकांक वर्ष 2011, स्वरूप: वार्षिकांक, संपादक: जगदीश किंजल्क, पृष्ठ: 180, मूल्य: उपलब्ध नहीं, ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.2494777 , सम्पर्क: साहित्य सदन, प्लाट नं. 145-ए, सांईनाथ नगर, सी-सेक्टर, कोलार, भोपाल म.प्र.

मध्यप्रदेश की नहीं देश भर में प्रसिद्ध साहित्यकार स्व. श्री अंबिकाप्रसाद दिव्य जी की स्मृति में प्रकाशित इस पत्रिका के प्रत्येक वार्षिकांक में उल्लेखनीय सामग्री का प्रकाशन किया जाता है। इस अंक में शंकर पुणतांबकर, रामनारायण शर्मा, दया दीक्षित, के लेख दिव्य जी के समग्र व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हैं। प्रतिभा जौहरी, राधेमोहन राय व सतीश दुबे की कहानियां स्तरीय हैं। मयंक श्रीवास्तव, नवल जायसवाल, बृजकिशोर पटेल व चंद्रसेन विराट के गीत प्रभावित करते हैं। तेजराम शर्मा, सुदर्शन वशिष्ठ, केशव शरण, ऋचा शर्मा, चमेली जुगरान तथा अंजना मिश्र के नवगीतों मेें भाषागत स्तर पर भले ही नवीनता न हो पर विषयों की विविधता दिखाई देती है। इस अंक के व्यंग्य बहुत प्रभावी नहीं कहे जा सकते हैं। लेकिन ग़ज़लों में विशेष रूप से दरवेश भारती, अशोक अंजुम तथा राम मेश्राम ने बहुत ही अच्छे ढंग से विधा का निर्वाहन किया है। ज्योति जैन व अशोक गुजराती की लघुकथाएं भी समसामयिक विषयों से जुड़ी रहने के कारण पाठकों को प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र-समाचार आदि भी जानकारी परक हैं।

Tuesday, May 3, 2011

मारिशस से प्रकाशित ‘विश्व हिंदी समाचार’

पत्रिका: विश्व हिंदी समाचार, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, पृष्ठ: 12, मूल्य: प्रकाशित नहीं, ई मेल: whsmauritus@intnet.mu ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 230.6761196, सम्पर्क: विश्व हिंदी सचिवालय, स्विफ्ट लेन, फाॅरेस्ट साइट, माॅरिशस माॅरिशस से प्रकाशित यह विश्व की महत्वपूर्ण साहित्यिक समाचार पत्रिका है। पत्रिका के इस अंक में माॅरिशस के महा.गां. संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय आप्रवासी भारतीय अंतर्राष्टीय सम्मेलन का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। लंदन में प्रथम हिंदी सम्मेलन तथा सिडनी, आॅस्टेलिया में कवि सम्मेलन का समाचार विश्व स्तर पर हिंदी के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी उपलब्ध कराता है। यू.के. में हिंदी पत्रकारिता व लंदन में प्रथम हिंदी छात्र सम्मेलन से हिंदी प्रेम व उसकी उपयोगिता की संक्षिप्त जानकारी मिलती है। मैं कुम्हार हूं दर्जी नहीं (ख्यात कथाकार उदय प्रकाश से बातचीत के अंश), माॅरिशस से प्रकाशित विश्व हिंदी समाचार का नया अंक(अखिलेश शुक्ल द्वारा संपादित) हिंदी ब्लागिंग की आचार संहिता पर समाचार-आलेख(महा. गां.अं.विश्व. वर्धा मंे आयोजित कार्यक्रम की रपट) पत्रिका के अन्य आकर्षण है। (समीक्षा जनसंदेष टाइम्स में पूर्व में प्रकाषित हो चुकी है।)

Monday, May 2, 2011

हिंदी साहित्य के लिए ‘हंस’

पत्रिका: हंस, अंक: April 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजेन्द्र यादव, पृष्ठ: 96, मूल्य: 30रू(वार्षिक 300रू.), ई मेल: editorhans@gmail.com ,वेबसाईट: http://www.hansmonthly.in/ , फोन/मोबाईल: 011.41050047, सम्पर्क: अक्षर प्रकाशन प्रा.लि. 2/36, अंसारी रोड़, दरियागंज, नई दिल्ली-2 भारत

वर्षो पूर्व ख्यात कथाकार उपन्यास सम्राट प्रेमचंद द्वारा स्थापित, संपादित इस पत्रिका के प्रत्येक अंक में प्रमुख रूप से कहानियों के साथ साथ समसामयिक विषयों पर लेख प्रकाशित किए जाते हैं। इस अंक मंे प्रकाशित कहानियों में इंटरनेट-पीढ़ी की अधूरी प्रेमकथा(हरजेन्द्र चैधरी), फुलवा में बास नहीं(कृष्ण बिहारी), जननी...स्वर्गादपि गरीयसि(कुसुम खेमानी), सलीब(प्रतिभा) तथा डर(सपना सिंह) प्रभावित करती है। अरूण यादव, अनुज तथा किरण अग्रवाल की कविताएं पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं। डाॅ. रणजीत, तेजेन्द्र शर्मा तथा चंद्रभान सिंह यादव के लेख साहित्येत्तर विषयों पर संक्षिप्त लेकिन उपयोगी विश्लेषण हैै। बात बोलेगी के अंतर्गत कथाकार संजीव का लेख नजरूल बनाम अज्ञेय तथा संपादकीय यमुना नगर में कुरूक्षेत्र: प्रवासी साहित्य पत्रिका के इस वर्ष प्रकाशित सर्वोत्तम संपादकीय लेख हैं। शीबा असलम फहमी, मुकेश कुमार तथा भारत भारद्वाज के स्तंभ पत्रिका के अन्य अंकों की तरह विचार योग्य सामग्री से युक्त हैं। (समीक्षा जनसंदेष टाइम्स में पूर्व में प्रकाषित हो चुकी है।)

Sunday, May 1, 2011

पत्रिका ‘पाखी’ का जन्मशती विशेषांक

पत्रिका: पाखी, अंक: अपै्रल 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ: 96, मूल्य: 20रू(वार्षिक 240रू.), ई मेल: pakhi@pakhi.in ,वेबसाईट: http://www.pakhi.in/ , फोन/मोबाईल: 0120.4070100, सम्पर्क: इंडिपेडेंट मीडिया इनिशियेटिव सोसायटी, बी 107, सेक्टर 63, नोएड़ा 201303 उ.प्र.

पत्रिका का यह अंक जन्मशती अंक के रूप में प्रकाशित किया गया है। अंक में अज्ञेय, नागार्जुन, शमशेर बहादुर, फै़ज, उपेन्द्र नाथ अश्क, भगवत शरण उपाध्याय, भुवनेश्वर, गोपाल सिंह नेपाली, राधाकृष्ण तथा आरसी प्रसाद सिंह पर सामग्री का प्रकाशन किया गया है। यद्यपि यह प्रकाशित सामग्री इन साहित्यकारांे, कवियों, लेखकों के समग्र व्यक्तित्व-कृतित्व पर न होकर एक संस्मरण के रूप में है। लेकिन फिर भी प्रकाशित लेखों से उनके संबंध मंे पाठकों की जिज्ञासाएं शांत अवश्य होती है। रमेश चंद शाह, उद्भ्रांत, विजय बहादुर सिंह, सुरेन्द्र स्निग्ध, मदन कश्यप, अब्दुल बिस्मिल्लाह, अली अहमद फातमी, बलराम, नीलाभ, खगेन्द्र ठाकुर, संजीव, नरेन्द्र पुण्डरीक, नंदकिशोर नंदन तथा रश्मि रेखा ने अपने अपने आलेखों में नए संदर्भ के साथ रचनाकारों पर विचार व्यक्त किए हैं। अज्ञेय के मर्मज्ञ कृष्णदत्त पालीवाल से पंकज शर्मा की बातचीत जन्मशती मनाने की साथ्र्कता पर बहुत अधिक एकाग्र होे गई है। जसपाल सिंह, विमल कुमार, विनोद अनुपम तथा राजीव रंजन गिरि के स्तंभों की सामग्री भी नवीनता लिए हुए है। इतने अधिक रचनाकारों पर कम से कम चार अंक प्रकाशित किए जाते तो भी कम था। इसलिए संक्षेप में जन्मशती मनाने का पाखी का यह प्रयास गले नहीं उतरता है। (समीक्षा जनसंदेष टाइम्स में पूर्व में प्रकाषित हो चुकी है।)