Saturday, January 31, 2009

हंस.....जनचेतना का प्रगतिशील कथा-मासिक (प्रथम भाग)

पत्रिका-हंस अंक-जनवरी 09, स्वरूप-मासिक, संपादक-राजेन्द्र यादव, मूल्य-25रू। वार्षिक-250, संपर्क-अक्षर प्रकाशन प्रा.लि. 2/36, अंसारी रोड़ दरिया गंज, नई दिल्ली 110.002 भारत
वर्ष 2009 का यह प्रथम अंक है। इसका प्रकाशन-संपादन प्रख्यात कथाकार पे्रमचंद ने किया था। उसी परंपरा को बहुत ही सुदंर ढंग से श्री राजेन्द्र यादव ने बाखूबी आगे बढ़ाया है। समीक्षित अंक में पांच कहानियां शामिल की गई हैं। जिनमें ‘निजी अनुभव की घटना’(ब्लादिमीर तूष्कोव), ‘पेड़ लगाकर फल खाने का वक्त नहीं’(सुभाष चंद्र कुशवाहा), ‘दो चित्रःचहूडा’(सूरजपाल चैहान), ‘लहुलुहान कौन’(प्रतिभा), ‘ओह ये नीली आंखें’ (रमणिका गुप्ता), ‘वो आखिरी बार सैनफ्रांसिस्को में देखी गई थी’(सोहन शर्मा) उल्लेखनीय है। ‘न हन्तये’ के अंतर्गत दो आलेख एक इतिहास का संत’(मुद्राराक्षस) तथा अनामदास की पत्रकारिता(डाॅ.विकास कुमार झा) लिए गए हैं। राजेन्द्र नागदेव, अनिल गंगल, हरभगवान चावला एंव दिनेश विजय की कविताओं में से प्रतीकात्मक कविता ‘पांच बूढ़े’(राजेन्द्र नागदेव) तथा ‘सानिया मिर्जा के लिए’(अनिल गंगल) बाजारवाद को प्रगतिशील नजरिए से देखती प्रतीत होती है। जिन्होंने मुझे बिगाड़ा’ के अंतर्गत कश्मीरा सिंह ने ‘सच’ को व्यक्तित्व विकास के लिए महत्वपूर्ण कारक माना है। सच बोलना उन्होंने मां से सीखा जिसकी बदौलत उन्हें जीवन सुख हासिल हुआ। ‘बीच बहस मंे’ के अंतर्गत कनक तिवारी एवं दिनेश प्रताप सिंह के आलेख पत्रिका की धार को तीव्र करते दिखाई देते हैं। मैत्रेयी पुष्पा का संस्मरण ‘अम्मी मुझे पहचानों’ पाठकों को लेखिका के असाधारण व्यक्तित्व की गहराई में उतारता चला जाता है। इस अंक का प्रमुख आलेख परिक्रमाःहिंदी साहित्यःवर्ष 2008(भारत भारद्वाज) है। इस आलेख में वर्ष 2008 की साहित्यिक लेखन, प्रकाशन एवं प्रमुख गतिविधियों पर विचारात्मक चिंतन प्रस्तुत किया गया है। अन्य स्थायी स्तंभ - कसौटी, रेतघड़ी, लेकिन दरवाजा, निरूत्तर, परख, हमेशा की तरह उपयोगी व पठनीय है।

Friday, January 30, 2009

संयोग साहित्य....साहित्य में योग के लिए

पत्रिका-संयोग साहित्य, अंक-जुलाई-दिसम्बर।08, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-मुरलीधर पाण्डेय, मूल्य-15रू. वार्षिक-100, संपर्क-204ए, चिंतामणि आर.एन.पी. पार्क (काशीविश्वनाथ मंदिर के सामने), भायंदर पूर्व, मुम्बई 401.105
यह पत्रिका विगत 11 वर्ष से निरंतर प्रकाशित हो रही है। समीक्षित अंक में संकेतों के मौन(ए.एल.श्रीवास्तव), अनुभव के धागों से(जया चक्रवर्ती), प्रभावित करने वाली कहानियां है। व्यंग्य ‘नाम में क्या रखा है’(शामलाल कौशल) में और अधिक विस्तार एवं विश्लेषण की आवश्यकता थी। काव्य जगत के अंतर्गत शिल्पी(स्नेह), रमेश प्रसून(माहिया) तथा मोतीलाल मिश्र(धन्यवाद) की कविताएं इस अंक का आकर्षण है। गीतों में रीतेश अग्रवाल, निर्मल शुक्ल, कुमार शैलेन्द्र तथा तेजराम शर्मा अपनी-अपनी प्रस्तुति बहुत ही अच्छे ढंग से कर सके हैं। ग़ज़लांे में शैलजा नरहरि, अहमद बशी, डाॅ. कैलाश निगम तथा डाॅ. परशुराम शुक्ल ने अधिक प्रभावित किया। सबसे अच्छी ग़ज़़ल राम मेश्राम की ग़ज़ल है। उनकी ग़ज़ल मैं मैं मैं में क्या रखा है.... अच्छी समसामयिक रचना है। यह सादगीपूर्ण सुन्दर मुद्रण युक्त पत्रिका आपके शेल्फ में जगह पाने योग्य है।

Thursday, January 29, 2009

प्रगतिशील आकल्प.......समकालीन सृजन के लिए

पत्रिका-प्रगतिशील आकल्प, अंक-जुलाई-सितम्बर।08, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-डॉ. शोभनाथ यादव, आजीवन सदस्यता-रू.1000, संपर्क-पंकज क्लासेस, पोस्ट ऑफिस बिलिंडग, जोगेश्वरी (पूर्व), मुम्बई 400060
टैब्लायड आकार में प्रकाशित होने वाली यह देश की प्रथम साहित्यिक पत्रिका है। इसका प्रकाशन विगत सात वर्ष से निरंतर हो रहा है। इस अंक में दो कहानियां प्रकाशित की गई हैं। जिनमें उषा यादव(एक और सबा), महमूद अहयूबी(नदिया बहे धीरे-धीरे) है। व्यक्तित्व के अंतर्गत नंद किशोर नौटियाल तथा महावीर प्रसाद प. सराफ पर प्रकाश डाला गया है। वरिष्ठ पत्रकार ने राष्ट्रीयता पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। राजकुमार कुम्भज, सुधेश, बख्शीश सिंह, शब्बीर हसन, गणेश चंद्र राही, कुमार नयन की कविताएं हैं। जिनमें से राजकुमार कुम्भज की कविताएं विशेष रूप से प्रभावित करती हैं। शशि भूषण बडोनी, सतीश राजा पुष्करणा तथा रामशंकर चंचल की लघुकथाएं पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं। अन्य सभी स्थायी स्तंभ प्रभावित करते हैं। पत्रिका का प्रमुख आकर्षण ओमप्रकाश वाल्मीकि का आत्म संघर्ष है। इस आलेख में उन्होंने अपने लेखकीय जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव का बहुत ही बारीकी से विश्लेषण किया है। शासकीय सेवा में रहते हुए देश भर में भ्रमण करते हुए उन्होंने जो अनुभव प्राप्त किए हैं वे हर रचनाकार के से लगते हैं। डॉ. शोभनाथ यादव से डॉ. रीना सिंह की बातचीत समकालीन कविता का अच्छा विश्लेषण है। पत्रिका आकर्षक पठनीय तथा संग्रह योग्य है।

Wednesday, January 28, 2009

कृतिका...... शोधपरक पत्रिका

पत्रिका-कृतिका अंक-जुलाई-दिसम्बर08, स्वरूप-अर्द्धवार्षिक, प्रधान संपादक-डाॅ। चन्द्रमा सिंह, संपादक-डाॅ. वीरेन्द्र सिंह यादव, संपर्क-1760, नया रामनगर, उरई, जालौन 285.001 (उ.प्र.) भारत
इंटीग्रेटेड सेन्टर फाॅर वल्र्ड स्टडीज, उरई जालौन उ.प्र. का यह शोध परक अर्द्धवार्षिक पत्र है। पत्रिका में साहित्य, कला, संस्कृति, आयुर्वेद, मानविकी, एवं समाज विज्ञान की शोधपरक रचनाएं प्रकाशित की जाती हैं। इस अंक में भाषा एवं साहित्य पर दो रचनाएं (प्रोफेसर राम चैधरी, डाॅ. तिलक राज), धरोहर के अंतर्गत तीन रचनाएं (डाॅ. किशन यादव, डाॅ. दिवस कांत समाथिया, ज्योति श्रीवास्तव), आध्यात्म एवं दर्शन के अंतर्गत डाॅ. अनिल कुमार सिन्हा का आलेख प्रकाशित किया गया है। आधी दुनिया का यथार्थ (डाॅ शुभा चैधरी, डाॅ. चम्पा श्रीवास्तव, डाॅ. जार्ज कुट्टी, चित्रा आम्रवंशी, आकांक्षा यादव), संगीत के अंतर्गत डाॅ. ज्योति सिन्हा की शोध परक रचनाएं प्रभावित करती हैं। संवाद के अतर्गत डाॅ. लक्ष्मी सिंह यादव तथा निरूत्तर के अंतर्गत डाॅ. महालक्ष्मी जौहरी की रचनाएं शोध परक रचनाओं की कसौटी पर कुछ पीछे दिखाई देती हैं। नागरिक समाज में डाॅ. अजय सिंह एवं डाॅ. वीरेन्द्र सिंह यादव का दृष्टिकोण नितांत शोधपरक है जो विषय वस्तु का प्रतिपादन करने में पूरी तरह सक्षम है। लोक साहित्य में हसीन खान, अमृता पीर, ममता यादव में से भोजपुरी कला पर अमृता पीर द्वारा लिखा गया शोधालेख विशेष प्रभावित करता है। इतिहास के अंतर्गत डाॅ. उमारतन, डाॅ. शंकरलाल, कु. अनीता सिंह के शोधपत्र अच्छे बन पड़े हैं। समकालीन सृजन के अंतर्गत डाॅ. राधा वर्मा एवं डाॅ. सुरेश फाकिर में मौलिकता की गंध है। लीला चैहान एवं शम्स आलम में से लीला को शेखर एक जीवन पर पुनः विचार कर इस शोध को फिर से लिखना चाहिए क्योंकि अभी इसमें वह धार नहीं आ पाई है जो शेखर इस उपन्यास के प्रमुख बिंदुओं को उभार सके। डाॅ. चन्द्रमा सिंह तो आलोचना का विश्लेषण बहुत ही अच्छी तरह कर पाए हैं लेकिन क्रांतिबोध को और भी अधिक अध्ययन कर अपना शोध प्रस्तुत करना चाहिए था। सुलगते सवाल, बीच बहस में तथा शोधार्थी के अंतर्गत ली गई रचनाएं भी उच्च कोटि की व प्रभावशाली है। यदि आप गंभीर शोध परक साहित्य पढ़ना चाहते हैं तो यह पत्रिका आप ही के लिए है।

Tuesday, January 27, 2009

आकंठ.....प्रगतिशील लेखन के लिए

पत्रिका-आकंठ, अंक-अक्टूबर-दिसम्बर08, स्वरूप-मासिक, संपादक-हरिशंकर अग्रवाल, संपर्क-इंदिरा गाॅधी वार्ड, तहसील कालोनी, बनवारी रोड़, पिपरिया जिला होशंगाबाद (म प्र) मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पिपरिया नगर से प्रकाशित होने वाली यह काव्य प्रधान पत्रिका है। पत्रिका में प्रकाशित रचनाएं मुख्यतः प्रगतिशील विचारधारा से ओतप्रोत होती हैं। समीक्षित अंक में शैलेन्द, सुरेश सेन‘निशांत’, अनिल गंगल, कुसुम जैन, अपर्णा जेना, शम्मी शम्स वारसी एवं ज्योति पटैल की कविताएं शामिल की गई हैं। पत्रिका के संपादक हरिशंकर अग्रवाल के चुनिंदा कविताओं के संकलन ‘रोहणी तप रही है’ की समीक्षा सुरेश बंसल तथा भगवत पठारिया ने की है। लगभग सभी कविताएं प्रेम को अभिव्यक्ति देने में समर्थ हैं। पत्रिका के समाचार ‘अनय के कहानी संग्रह तीसरा विभाजन का लोकापर्ण एवं संगोष्ठी’ तथा ‘प्रेमचंद कथा सम्मान 2008’ शामिल किए गए हैं। विगत सात वर्ष से लगातार प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका लेखकों रचनाकारों ही नहीं पाठकों के मध्य भी अच्छी खासी लोकप्रिय है।

Monday, January 26, 2009

अणुकन्या.....तकनीक और साहित्य का सम्पर्क सूत्र

पत्रिका-अणुकन्या, अंक-01(प्रवेशांक), मुख्य संरक्षक-के।सी. पुरोहित, संरक्षक-एम.के. बालाजी, मुख्य परामर्शदाता-वी. चेल्लप्पा, परामर्शदाता-टी.वी. बलसराजन, सपंादक-श्रीमती सुरभि सुधीर, मूल्य-निःशुल्क वितरण के लिए, सम्पर्क-कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट, कुडनकुलम पोस्ट, राधापुरम तालुक, तिरूनेलवेली, तमिलनाडू 627.106
यह इस संस्थान की गृहपत्रिका है। पत्रिका के प्रवेशांक में प्रोजेक्ट के वरिष्ठ अधिकारियों के संदेश प्रकाशित किए गए हैं। संपादक ने अपने वक्तव्य में हिंदी का महत्व प्रतिपादित किया है। इसमें अनंत शयनम् आयंगर, वी. चेल्लप्पा एवं श्रीमती सुरभि के आलेख हैं। इन आलेखों में प्रोजेक्ट का हिंदी के प्रति अनुराग प्रगट होता है। शैलेन्द्र कुमार जोशी ने प्रोजेक्ट के विकास में राजभाषा की भूमिका र आलेख लिखा है। एन.ई.जे. मणिकण्डन ने अंग्रेजी-हिंदी-तमिल शब्दावली के माध्यम से उत्तर-दक्षिण की खाई पाटने का भागीरथी प्रयास किया है। हरिनारायण साहू, श्रीमती सुखदा, रविशंकर, श्रीमती भावना भारद्वाज, डाॅ. अजय दुबे, डाॅ. प्रीति दुबे, मनोज कुमार सिंह की रचनाएं सिद्ध करती हैं कि नितांत तकनीकि वातावरण में कार्य करते हुए भी संवेदनाएं जीवित रहती हैं। संपूर्ण रंगीन मुद्रण वाली इस पत्रिका की साज-सज्जा आकर्षक है।

Sunday, January 25, 2009

हिमप्रस्थ..........सांस्कृतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति

पत्रिका-हिमप्रस्थ, अंक-दिसम्बर।08, स्वरूप-मासिक, सपंादक-रणजीत सिंह राणा, मूल्य-5रू।, वार्षिक-50रू।सम्पर्क-हिमाचल प्रदेश प्रिटिंग प्रेस परिसर, घोड़ा चैकी, शिमला-6
‘हिमप्रस्थ हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित होने वाली हिंदी की प्रमुख पत्रिका है। पत्रिका के इस अंक में डाॅ. कांता वर्मा(भारती के काव्य में सांस्कृतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति), शशिभूषण शलभ(गीतकार शैलेन्द्र), सकीन अख्तर(कश्मीरी गीत काव्य परंपरा) प्रमुख आलेख हैं। सभी आलेखों का मूल स्वर सामाजिक सांस्कृतिक मूल्यां े को स्थापित करता दिखाई देता है। प्रभात वर्मा का यात्रा वृतांत ‘पांगी घाटी में शिव दर्शन’ यात्रा के बहाने घाटी की सैर कराता प्रतीत होता है। सत्यनारायण भटनागर, डाॅ. यशोदा प्रसाद समेल्टी, कुलदीप चन्देल की लघुकथाएं विशेष रूप से प्रभावित करती हैं। पत्रिका प्रमुख आकर्षण श्री शांता कुमार से बातचीत है। इस साक्षात्कार में शांताकुमार के साहित्यिक अवदान के दर्शन होते हैं। शांताकुमार का राजनीतिक संस्मरण ‘राजनीति की शतरंज’ की जितनी आलोचना हुई उससे कहीं अधिक सराहना हुई थी। पाठकों को यह जानकार आश्चर्य होगा कि उनकी अब तक सोलह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जिन्हें कविता, कहानी उपन्यास जैसी विधा में लिखा गया है। इस अंक का कविता खंड कुछ कमजोर प्रतीत हुआ। केवल देवांशु पाल की कविताएं ही प्रभावित करती हैं। पुस्तक समीक्षा तथा अन्य रचनाएं भी पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं।

Saturday, January 24, 2009

हिंदुस्तानी जबान.....गाॅधीवादी दर्शन की पत्रिका

पत्रिका-हिंदुस्तानी जबान, अंक-अक्टूबर-दिसम्बर।08, स्वरूप-त्रैमासिक, प्र। सपंादक-डाॅ. सुशीला गुप्ता, मूल्य-10रू., विदेशों के लिए 50 रू. सम्पर्क-महा. गाॅ. मेमोरियल रिसर्च सेंटर और लाइब्रेरी, महा. गाॅ. बिल्ंिड़ग, 7, नेताजी सुभाष रोड़ मुम्बई 400.002
गाॅधीवादी विचारधारा पर केन्द्रित यह पत्रिका देश की दो प्रमुख जबान हिंदी व उर्दू में प्रकाशित होती है। पत्रिका में डाॅ. मनोज कुमार राय, मीरा मेहता, डाॅ. सत्येन्द्र शर्मा, डाॅ. रणजीत सिंह साहा के आलेख सम्मलित किए गए हैं। ये आलेख गाॅधीवादी विचारधारा की आज के सदर्भ में व्याख्या बहुत ही अच्छे ढंग से करते हैं। पुस्तक समीक्षा के अतर्गत डाॅ. सुमनिका सेठी तथा डाॅ. गजानन च्वहाण की समीक्षाएं है। दोनों समीक्षाएं डाॅ. गंगाप्रसाद विमल तथा हरिनारायण व्यास के काव्य-संवेदना से परिचित कराती है। पत्रिका के उर्दू खण्ड की रचनाएं भी प्रभावशाली हैं।

Friday, January 23, 2009

कथन.....साहित्य एवं संस्कृति की पत्रिका

पत्रिका-कथन, अंक-जनवरी।-मार्च09, स्वरूप-त्रैमासिक, संस्थापक-रमेश उपाध्याय, संपादक-संज्ञा उपाध्याय, मूल्य-25 रू।, वार्षिक-100रू., सम्पर्क-107, साक्षरा अपार्टमेंट्स, ए-3, पश्चिम विहार, नयी दिल्ली110063
30 वर्ष पुरानी पत्रिका ‘कथन’ का यह 61 वां अंक है। पत्रिका में तीन कहानियां क्रमशः द्वारकेश नेमा(पेड़), हरजेंद्र चैधरी(तपिश), रूपलाल बेदिया(अपूज्यपाठ) सम्मलित की गई है। द्वारकेश नेमा ने अपनी कहानी पेड़ में दुर्घटना का तानाबान पेड़ के आसपास बुनकर गहरा संवेदनात्मक अनुभव कराया है। रूपलाल बेदिया की कहानी ‘अपूज्यपाठ’ को पूर्णतः दलित कहानी तो नहीं कहा जा सकता लेकिन उसका कथ्य दलित व शोषित वर्ग की आवाज़ को सिद्दत के साथ उठाता हुआ प्रतीत होता है। तपिश भी एक अच्छी कहानी है जो विस्फोटों के साए में जी रहे शहरी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। कविताओं में निर्मला ठाकुर, अच्युतानंद मिश्र, शंकरानंद विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। बद्रीनायायण की कविताएं (विशेष प्रस्तुति) बाजारवाद के दुष्परिणामों के प्रति ध्यान आकर्षित करती हैं। एकांत श्रीवास्तव एवं बिंदु भास्कर की रचनाएं और भी अधिक गहराई के साथ अपनी प्रस्तुती देती तो संबंधित विषय के प्रति अधिक न्यायसंगत होता। प्रभाष जोशी की रचना (मुम्बई के बहाने कुछ सवाल) पत्रिका के इस अंक की सर्वश्रेष्ठ रचना है। वे ताज एवं ओबेराय पर हुए आतंकी हमलों की चेनलों द्वारा प्रस्तुतीकरण पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। इलेक्ट्रांनिक मीडिया ने जिस तरह से फीचर फिल्म की भांति मुम्बई की घटना का प्रसारण किया वह आम जन को खबरी चेनलों से दूर ही करता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि राष्ट्रीय चेनलों पर उस घटना के प्रसारण के पश्चात भी दूसरे दिन लोग अखबार पढ़ने के लिए लालायित दिखे। इससे सिद्ध होता है कि आम जनता आज भी इलेक्ट्रानिक मीडिया को दूसरे दर्जे पर ही रखती है। इस बार ज्वारीमल्ल पारख का आलेख ‘भूमंडलीय यथार्थ और हिंदी सिनेमा’ आलेख की अपेक्षा किसी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक के व्याख्यान के समान लगा। ऐसा लगा जैसे श्री पारख ने इसे जल्दी में लिखा हो। सभी समीक्षाएं तथा उत्पल कुमार का लेख ‘टोटल कैपिटलिज्म’ पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं। नव नियुक्त संपादक श्रीमती संज्ञा उपाध्याय के संपादकीय में रमेश उपाध्याय के संपादकीय की झलक मिलती है। पत्रिका स्तरीय संग्रह योग्य तथा पठनीय है।

Thursday, January 22, 2009

साहित्य सागर.............सत साहित्यिक शोध पत्रिका

पत्रिका-साहित्य सागर, अंक-जनवरी।09, स्वरूप-मासिक, संपादक-कमलकांत सक्सेना, सह संपादक-आशा सक्सेना, मूल्य-25 रू., वार्षिक-250 रू., सम्पर्क-161 बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया भोपाल 462.043 (म.प्र.)
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से प्रकाशित होने वाली यह मासिक साहित्यिक पत्रिका समाज में व्याप्त कुरीतियों को सत साहित्य के माध्यम से खत्म करने के लिए कृतसंकल्पित है। पत्रिका का पहला आलेख जीवराज सिंधी ने लिखा है जिसमें उन्होंने माना है कि मुस्लिम समाज ही आतंकवाद खत्म करेगा। क्योंकि इस्लाम के अंदर आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। अमेरिकी नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ओबामा के बारे में वे लिखते हैं कि उन्हें अपने कार्यो को अंजाम देने में वक्त लगेगा। उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। आर.पी. सिंह अपने आलेख में ॔स्वतंत्रता संग्राम में पत्र एवं पत्रकारों की भूमिका पर गंभीरता से विचार करते हैं। उस समय देश भर के पत्रकारों ने अपनी अपनी भूमिका के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाने का महत्वपूर्ण कार्य किया था। एक ओर जहां काशी नाथ सिंह मीडिया के चुप रहने के फायदे बताते हैं वहीं दूसरी ओर जगदीश श्रीवास्तव अपने आत्मकथ्य में भारतीय नगरों एवं ग्रामों की सेर कराते हैं। पत्रिका में जगदीश श्रीवास्तव, नरेन्द्र जैन, सुखदेव सिंह कश्यप की कविताएं विचारने के लिए बाध्य करती हैं। सतीश चतुर्वेदी, डॉ. नीरज कनौजिया एवं रामकृष्ण सोमानी के आलेख सम सामयिक साहित्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। अन्य रचनाएं तथा सभी स्थायी स्तंभ भी पत्रिका की उपयोगिता में वृद्धि करते हैं।

Wednesday, January 21, 2009

संकल्प रथ......... सम सामयिक चेतना की छंद धर्मी पत्रिका

पत्रिका-संकल्प रथ, अंक-दिसम्बर।08, स्वरूप-मासिक, संपादक-राम अधीर, मूल्य-20 रू., वार्षिक-200 रू.सम्पर्क-108/08,शिवाजी नगर, भोपाल (म.प्र.)
मूलतः गीत प्रधान इस पत्रिका का प्रकाशन विगत 12 वर्ष से निरंतर हो रहा है। पत्रिका का प्रथम आलेख डाॅ. श्रीरंजन सूरिदेव का है। आलेख मंे उन्होंने कविता में छान्दस प्रयोग के अवमूल्यन पर अपनी चिंता प्रगट की है। दूसरा महत्वपूर्ण आलेख डाॅ. कृष्णचंद पण्ड्या का है। इस लेख में उत्तर छायावाद की व्याख्या बच्चन एवं नरेन्द्र शर्मा के संदर्भ में की गई है। लेखक ने बच्चन की काव्य भावना तथा नरेन्द्र के काव्य की पृष्ठभूमि को अलग होते हुए भी एक माना है। गीत विधा में बीते वर्षो में कई प्रयोग होते रहे है। बीना पंत ने अपने आलेख में नवगीत के प्रयोग पर कैलाश गौतम की टिपण्णी बहुत ही सुदंर ढंग से प्रस्तुत की है। डाॅ. विमल कुमार पाठक तथा श्याम सुंदर घोष के आलेख पत्रिका की प्रकृति के अनुरूप हैं। सभी गीत विशेष रूप से वीरबाला, विनोद रायसारा, डाॅ. देवेन्द्र आर्य, उमेश अग्रवाल तथा दिवाकर शर्मा के गीत गुनगुनाने के लिए बाध्य करते हैं। पत्रिक ा गागर में सागर के समान है। गीत विधा पर खोजपरक कार्य करने वाली यह एकमात्र पत्रिका है।

Tuesday, January 20, 2009

आसपास.......मासिक संवाद पत्रिका

पत्रिका-आसपास, अंक-जनवरी.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-राजुरकर राज सहा. संपादक-करूणा राज, मूल्य-60रू.वार्षिक, 150 रू.त्रैवार्षिक, सम्पर्क-एच.03 उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर भोपाल (म.प्र.)
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से प्रकाशित यह पत्रिका रचनाधर्मियों की मासिक संवाद पत्रिका है। पत्रिका में बहुत ही संुदर ढंग से रचनाकारों-साहित्यकारों तथा बुद्धिजीवी पाठकों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया है। पत्रिका का पहला समाचार दुष्यंत कुमार अलंकरण की घोषणा का है। इस अलंकरण के अतर्गत डाॅ. अशोक चक्रधर को दुष्यंत अलंकरण तथा श्री इकबाल मजीद को अमृत साधना का समाचार है। गोविंद मिश्र को साहित्य अकादेमी पुरस्कार के समाचार के साथ-साथ दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के स्थापना दिवस समारोह की विस्तृत रिपोर्ट सचित्र सम्मलित की गई है। पत्रिका संग्र्रहालय में आने वाले अतिथियों का विवरण भी पत्रिका में देती है। इस बार इसके अंतर्गत श्रीमती राजेश्वर दुष्यंत, डाॅ. धनंजय वर्मा, श्रीमती गायत्री कमलेश्वर, श्री विश्वनाथ सचदेव तथा श्री गोपाल चतुर्वेदी सहित अन्य महत्वपूर्ण आगंतुकों का सचित्र विवरण सुदंर ढंग से प्रकाशित किया गया है। अन्य सभी स्थायी स्तंभ तथा समाचार पत्रिका को आकर्षक तथा संग्रह योग्य बनाते हैं। पत्रिका-आसपास, अंक-जनवरी.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-राजुरकर राज सहा. संपादक-करूणा राज, मूल्य-60 रू.वार्षिक, 150 रू.त्रैवार्षिक, सम्पर्क-एच.03 उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर भोपाल (म.प्र.) मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से प्रकाशित यह पत्रिका रचनाधर्मियों की मासिक संवाद पत्रिका है। पत्रिका में बहुत ही संुदर ढंग से रचनाकारों-साहित्यकारों तथा बुद्धिजीवी पाठकों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया है। पत्रिका का पहला समाचार दुष्यंत कुमार अलंकरण की घोषणा का है। इस अलंकरण के अतर्गत डाॅ. अशोक चक्रधर को दुष्यंत अलंकरण तथा श्री इकबाल मजीद को अमृत साधना का समाचार है। गोविंद मिश्र को साहित्य अकादेमी पुरस्कार के समाचार के साथ-साथ दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के स्थापना दिवस समारोह की विस्तृत रिपोर्ट सचित्र सम्मलित की गई है। पत्रिका संग्र्रहालय में आने वाले अतिथियों का विवरण भी पत्रिका में देती है। इस बार इसके अंतर्गत श्रीमती राजेश्वर दुष्यंत, डाॅ. धनंजय वर्मा, श्रीमती गायत्री कमलेश्वर, श्री विश्वनाथ सचदेव तथा श्री गोपाल चतुर्वेदी सहित अन्य महत्वपूर्ण आगंतुकों का सचित्र विवरण सुदंर ढंग से प्रकाशित किया गया है। अन्य सभी स्थायी स्तंभ तथा समाचार पत्रिका को आकर्षक तथा संग्रह योग्य बनाते हैं।

Monday, January 19, 2009

वसुधा.................. कनाडा से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका

पत्रिका-वसुधा, अंक -जुलाई-सितम्बर.08, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-स्नेह ठाकुर, सम्पर्क- 16, Revils Crescent , Toronto, Ontario MIv-1 Canada
कनाडा के टोरंटो शहर से प्रकाशित यह पत्रिका संस्थागत पत्रिका न होकर स्नेह ठाकुर के हिंदी के प्रति प्रेम और समर्पण की परिचायक है। संपादक ने इस अंक में अपने संपादकीय में अपनी साहित्यिक गतिविधयों से भरी भारत की विस्तृत यात्रा का वर्णन किया है। इस अंक में भी कहानियों, लेखों, संस्मरणों, कविताओं और अंतरंग बातचीत से भरपूर है। इसमें डॉ. हरजेंद्र चौधरी की ॔नए फलेट में’ और उषा वर्मा की ॔इस बार’ तनावपूर्ण रिस्तों की अद्भुत कहानियां है। इस अंक की शोभा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय तथा डॉ. ि.त्रभुवननाथ शुक्ल के लेख व संस्मरण है। प्रख्यात कथाकार मन्नू भंडारी से संतोष गोयेल की बातचीत ने इस पत्रिका की सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं। आशा है वसुधा की यह सकि्रयता निरंतर जारी रहेगी। (विश्व हिंदी समाचार मॉरीशस में प्रकाशित समीक्षा से साभार)

Sunday, January 18, 2009

हिंदी चेतना ..............कनाडा से प्रकाशित पत्रिका

पत्रिका-हिंदी चेतना अंक-अप्रैल2008, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रमुख संपादक-श्याम त्रिपाठी, सम्पर्क- Hindi Chetna, 6 Larkmere Court, Markham, Ontario L3R3R1,
email. hindichetna@yahoo.ca
हिंदी प्रचारिणी सभा, कनाडा की त्रैमासिक अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक पत्रिका ॔विगत दस वर्ष से लगातार प्रकाशित हो रही है। यह पत्रिका विश्व हिंदी साहित्य को एक ऐसा मंच प्रदान करती है, जिससे न केवल कनाडा बल्कि अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, भारत नार्वे, फ्रांस, मॉरीशस आदि अनेक देशों के लेखक अपनी रचनाओं के जरिए विश्व के असंख्य हिंदी प्रेमियों से जुडने में गर्व महसूस करते हैं। इसके पाठकों का दायरा भी पूरा विश्व है। यह ॔वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्घांतों में पूरी आस्था रखते हुए विश्वव्यापी हिंदी प्रेमियों को निरंतर जोड़े रखने का एक सार्थक प्रसास कर रही है। इसका यह 38 वां अंक है। इसमें प्रकाशित कहानियां, कविताएं, लेख, हिंदी की गतिविधियों से संबंधित रिपोर्ट आदि सामग्री हिंदी पाठकों में वाकई हिंदी के प्रति एक चेतना जगाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इस पत्रिका के प्रेमचंद स्मृति अंक का विमोचन आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन के अवसर पर भारत के विदेश राज्य मंत्री श्री आनंद शर्मा जी ने न्यूयार्क में किया था। पत्रिका का अगला अंक (अक्टूबर 2008) विशेषांक के रूप में हिंदी के वरिष्ठ एवं प्रख्यात साहित्यकार श्री नरेन्द्र कोहली पर केन्द्रित होगा। (विश्व हिंदी समाचार के सितम्बर 2008 अंक से साभार)

विश्व हिंदी समाचार.......माॅरीशस की पत्रिका

पत्रिका-विश्व हिंदी समाचार अंक-दिसम्बर08, स्वरूप-त्रैमासिक, प्र। संपादक-डाॅ। (श्रीमती)विनोद बाला अरूण, संपादक-डाॅ। राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, सम्पर्क-Swift Lane Forest Side, Mauritius
हिन्दी सचिवालय द्वारा माॅरीशस से प्रकाशित यह एक समाचार पत्रिका है। इसमें माॅरीशस तथा विश्व के कई देशांे में हिंदी भाषा तथा साहित्य पर हो रहे कार्यो के समाचार शामिल किए गए हैं। इस अंक का प्रथम समाचार ‘नयी कविता’ आंदोलन के सशक्त कवि श्री कुंवर नारायण के 41 वें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने का हैं। समाचार मंे विस्तार से इस कार्यक्रम की विवेचना की गई है। इन्द्रधनुष सांस्कृतिक परिषद माॅरीशस की साहित्यिक पत्रिका ‘इन्द्रधनुष’ की बीसवीं वर्षगांठ के सफल आयोजन की रपट भी मुखपृष्ठ पर है। अजित कुमार को ‘जयजयवंती’ एवं आशकरण अटल को ‘हास्य रत्न’ सम्मान की सचित्र रिपोर्ट आकर्षक है। विश्व हिंदी सचिवालय माॅरीशस की महासचिव श्रीमती विनोद बाला अरूण ने अपने आलेख में हिंदी की प्रगति पर विस्तार से विचार व्यक्त किए हैं। उनके अनुसार 37 से अधिक देशों में विभिन्न विधाओं मेें लेखन हो रहा है। यह हिंदी भाषा एवं साहित्य की शक्ति है। इस शक्ति को संगठित किए जाने की आवश्यकता है। पत्रिका के संपादक डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने विश्व हिंदी दिवस धूमधाम से मनाये जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने लिखा है- आज विश्व में अधिकांश देश हिंदी भाषा और संस्कृति का महत्व समझने लगे हैं। निश्चय ही यह हिंदी के लिए शुभ संकेत हैै। जितेन्द्र कुमार मित्तल ने विश्व में हिंदी की स्वयंसेवी संस्थाओं पर उपयोगी आलेख लिखा है। इसमें हिंदी सोसायटी सिंगापुर, डी.ए.वी. हिंदी स्कूल आर्य समाज सिंगापुर, हिंदी समाज सिडनी तथा यू.के. हिंदी समिति यू.के. के कार्यकलापों पर प्रकाश डाला गया है। पत्रिका के दो प्रमुख आकर्षण है पहला है- ‘अमेरिका में हिंदी महोत्सव की धूम’। इसके अंतर्गत अमेरिका में 14-15 जून 2008 को आयोजित कार्यक्रम की आकर्षक रिपोर्ट ंिहंदी प्रेमियों को गौरवान्वित करती है। इस समाचार पत्रिका का दूसरा प्रमुख आकर्षण है भारत के प्रमुख कवि डाॅ. देवेन्द्र दीपक की अध्यक्षता में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम। 6 दिसम्बर 2008 को अपराह्न 1ः30 बजे रवीन्द्र नाथ टैगोर संस्थान के सभागार में डाॅ. देवेन्द्र दीपक की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। डाॅ. देवेन्द्र दीपक ने अपने वक्तव्य में माॅरीशस के युवा कवियों के लिए कार्यशाला आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। ‘उत्तरी अमेरिका के हिंदी साहित्यकार’(श्रीनाथ प्रसाद त्रिवेदी) पर रिपोर्ट वहां हो रहे हिंदी के सृजनात्मक कार्यो को हमारे समझ लाने का भागीरथी प्रयास करती है। पत्रिका में ही हिंदी लेखक संघ माॅरीशस पर इन्द्रदेव भोला इन्द्रनाथ ने रिपोर्ट प्रस्तुत की है। पत्रिका की साज-सज्जा आकर्षक है। पूर्णतः रंगीन साफ-सुथरा ऋुटिहीन मुद्रण सुदंर ढंग से संयोजित समाचार पाठक को आश्वस्त करते हैं कि विश्व में हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है।

Friday, January 16, 2009

केरल हिंदी साहित्य अकादेमी ................आकर्षक शोध पत्रिका

पत्रिका-केरल हिंदी साहित्य अकादेमी(शोध पत्रिका) अंक-जुलाई।08, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-डॉ। एन. चन्द्रशेखरन नायर, मूल्य-20रू. वार्षिक-80 रू. सम्पर्क-श्री निकेतन लक्ष्मीनगर, पट्टम पालस, पोस्ट तिरूवनन्तपुरम 615004 (केरल)

प्रायः यह समझा जाता है कि उत्तर भारत तथा दिल्ली में ही हिंदी पर कार्य हो रहा है। इस पत्रिका से केरल में हिंदी भाषा एवं साहित्य पर किये जा रहे शोधात्मक कार्य की जानकारी मिलती है। दक्षिण में हिंदी के प्रति आकर्षण उत्पन्न होना हमारे लिए सुखद है। पत्रिका का प्रथम आलेख जो डॉ. रवीन्द्र कुमार ने लिखा है देश में पत्रकारिता पर पर्याप्त प्रकाश डालता है। डॉ. एम. नारायण रेड्डी ने मोहन राकेश के उपन्यासों में अनुशीलन पर विस्तृत टिपण्णी दी .साधना तोमर, सिद्धेश्वर की कविताएं हिंदी पट्टी के साहित्यकारों की कविताओं के समान गुरूत्व ग्रहण किए हुए हैं। हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति इस पत्रिका से अनुराग झलकता है। पत्रिका भविष्य में अच्छा साहित्य प्रकाशित करेगी ऐसी आशा है।


Thursday, January 15, 2009

पंजाबी संस्कृति ............सामाजिक सरोकारों की पत्रिका

पत्रिका-पंजाबी संस्कृति, अंक-अक्टू-दिस।08, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-श्रीराम आहूजा, मूल्य-20रू. त्रैवार्षिक-200 रू. सम्पर्क-9/20, ओल्ड़ केम्पस, सी.सी.एच., एच..यू. हिसार (हरियाणा)

िंदी और पंजाबी भाषा में प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका अपने आप में अनूठी है। इसमें प्रकाशित रचनाएं राष्ट्रीय एकता, साम्प्रदायिक सदभाव एवं सामाजिक चेतना जगाने के लिए प्रयासरत है। पत्रिका में प्रो. शामलाल कौशल, निशा रेहान तथा रविकांत खरे उन मानवीय संस्कारों, विचारों को विश्लेषित हैं जहां मनुष्य का जीवन प्रारंभ होता है। डाॅ. इन्दु बाली, जसवंत सिंह बिरदी, डाॅ. सुरेश मंथन तथा सुखचैन सिंह भंडारी की कहानियां यर्थाथवाद के धरातल पर मानवीय मूल्यों की स्थापना करती दिखाई देती है। काव्य खण्ड के अंतर्गत सम्मलित की गई रचनाएं राष्ट्रीय एकता अखंडता को प्रगट करती है। डाॅ. राम आहूजा, नीरज अरोड़ा, डाॅ. मधु संधु की लघुकथाएं समाज के उपेक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। इन रचनाओं में भी राष्ट्रीयता के दर्शन होते हैं। व्यंग्य लेखों में डाॅ. रामनिवास शर्मा, अखिलेश शुक्ल, शरद तैलंग समाज की कुरीतियों पर प्रहार करते हैं। सिरायकी खण्ड के अतर्गत शामिल की गई रचनाएं स्थानीय साहित्य तथा संस्कृति पर पर्याप्त प्रकाश डालती है। पत्रिका संग्रह योग्य तथा पठ्नीय है।

गगनाचल...............भारत की सास्कृतिक पहचान



त्रिका-गगनांचल, अंक-जुलाई-सितम्बर08, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-अजय कुमार गुप्ता, मूल्य-400रू। वार्षिक(विदेशों में 100डालर), सम्पर्क-भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, आजाद भवन, इन्द्रप्रस्थ एस्टेट, नई दिल्ली


परिषद की यह अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पत्रिका है। इसका प्रकाशन 6 विभिन्न भाषाओं में किया जाता है। समीक्षित अंक में डॉ. फरजाना सुलताना ने राजस्थान की महिला कथाकारों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला है। डॉ. रामचन्द्र राय एवं सकीना अख्तर ने रवीन्द्र नाथ टैगोर तथा महाश्वेता देवी के साहित्यिक योगदान पर चर्चा की है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार में रेडियो के योगदान पर नीलम शर्मा ने लेख लिखा है। डॉ. रामदरश मिश्र, डॉ. मानसिंह तथा महावीर अग्रवाल के आलेख लोक चेतना जाग्रत करने का सफल प्रयास है। योगेश तिवारी, शरद दत्त तथा डॉ. अमरनाथ अमर ने कला एवं संस्कृति को अपने लेखन का आधार बनाया है। अशोक कुमार शशिप्रभा तिवारी, मृदुला सिन्हा के आलेख भी प्रभावित करते है। अवधनारायण मुआचार्य शास्त्री एवं शुभकांत बोहरा की कविताएं भूमंडलीकरण के बीच यथार्थ का प्रस्तुतीकरण है। स्वाति चौधरी, के.सरीन, हीरालाल कर्नावट, शिवानी, माधवी के लेख रिपोतार्ज की शैली में रचे हुए हैं जो कहानी-सी अनुभूति देते हैं। आकर्षक साज-सज्जा उत्कृष्ट मुद्रण युक्त यह पत्रिका भारतीय कला-संस्कृति एवं साहित्य का आइना है।

Wednesday, January 14, 2009

प्रेरणा..................समकालीन सृजन के लिए

पत्रिका-प्रेरणा, अंक-अक्टू-जून 08, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-अरूण तिवारी, मूल्य-20रू। वार्षिक-100 रू. सम्पर्क-ए-74, पैलेस आर्चड, फेज-3, सर्वधर्म के पीछे, कोलार रोड़, भोपाल (म.प्र.)
पेरणा का यह अंक स्मरण अंक है। इसमें ‘कबीर से लेकर कमलेश्वर’ तक के अग्रज रचनाकारों पर सारगर्भित लेख दिए गए हैं। कालम बहस के लिए’ के अंतर्गत कवित की रचना व उसके स्वरूप पर विमर्श प्रस्तुत किया गया है। हितेश व्यास, कुमार रवीन्द्र, पे्रमशंकर रघुवंशी ने गहन गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया है। डाॅ. वीरेन्द्र मोहन तथा मुशर्रफ आलम जौकी के आलेख हिंदी की प्रारंभिक आलोचना हस्तक्षेप के साहित्य मंे कहानी का योगदान स्पष्ट करती है। ‘चिंतन’ के अतर्गत यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’, डाॅ. प्रमोद त्रिवेदी, डाॅ. सुभाष रस्तोगी के आलेख सम्मलित किए गए हैं। स्मरण खंड़ के अतर्गत कबीर(डाॅ. प्रभा दीक्षित), निराला(डाॅ. दौलत राम वाढेकर), प्रेमचंद(सुलतान अहमद), महादेवी वर्मा(डाॅ. कुमार विमल), हरिशंकर परसाई(डाॅ. धनंजय वर्मा), यशपाल(राजेन्द्र परदेसी), मुक्तिबोध(सुब्रतो दत्ता), वनमाली(संतोष चैबे), भीष्म साहनी(डाॅ.प्रभा दीक्षित), नागार्जुन(डाॅ. राण प्रताप), शानी(डाॅ. धनंजय वर्मा), सर्वेश्वर दयाल सक्सेना(अनिल सिन्हा), त्रिलोचन(विजय बहादुर सिंह), दुष्यंत कुमार(राजुरकर राज तथा धनंजय वर्मा), सत्येन कुमार(अनिता सभरवाल), श्रीकांत वर्मा(माताचरण मिश्र), कमलेश्वर(अरूण तिवारी की अंजना मिश्र के संयोजन में चर्चा) आदि पठ्नीय रचनाएं हैं। कहानियों में सूर्यकांत नागर, प्रकाश कांत, विजय गौड़, कुमार शैलेन्द्र की कहानियां समकालीन परिदृश्य का विस्तृत फलक प्रस्तुत करती है। सभी कविताएं तथा ग़ज़ल विशेष रूप से केवल गोस्वामी, के.जी. पिल्लई, लाल्टू, श्रेयश जोशी, नूर मोहम्मद नूर, उद्भ्रांत, आलोक सातपुते, श्रानदेव मुकेश, कृष्ण कुमार यादव, प्रभावित करते हैं। पुस्तक चर्चा के अंतर्गत अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय(केवल नाम के संदर्भ में) रचनाकारों की पुस्तकें ली गई हैं जिनमे सभी विधाओं को सम्मलित कर लिया गया है। पत्रिका को पर्याप्त समय देकर इससे अतीत से वर्तमान तक का बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।

Tuesday, January 13, 2009

अंचल भारती(काशी अंक)................हमारी अस्मिता की पहचान

पत्रिका-अंचल भारती, अंक-1,2 काशी अंक, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-डॉ। जयनाथ मणि त्रिपाठी, मूल्य-20रू। वार्षिक-50 रू। सम्पर्क-अंचल भारती पे्रस, राजकीय औद्योगिक आस्थान, गोरखपुर मार्ग, देवरिया उ।प्र।)
पत्रिका अंचल भारती का यह अंक काशी पर एकाग्र है। अंक में काशी की संत एवं धार्मिक परंपरा को डॉ। नीरजा माधव ने अपने आलेख में बाखूबी प्रस्तुत किया है। काशी के जीवन दर्शन, मेले-उत्सव तथा हास्य परंपरा पर डॉ। जितेन्द्र नाथ मिश्र, अरूणेश, धर्मशील चतुर्वेदी तथा डॉ। रामसुधार सिंह ने गंभीरता पूर्वक विचार किया है। काशी की गलियों और शिवलिंग के साथ-साथ जयशंकर प्रसाद जी का भी नाता है। उसपर आनंद स्वरूप श्रीवास्तव, पंकज कुमार सिंह, डॉ. देवीप्रसाद कुंवर तथा किरण मराली ने अपने विशेष आलेखों में खोजपरक टिपण्णी की है। पत्रिका के सभी स्थायी स्तंभ तथा पत्र विचार ध्यान आकर्षित करते हैं।

Monday, January 12, 2009

इप्टा वार्ता...............................(कला/संस्कृति पत्रिका)

पत्रिका-इप्टा वार्ता, अंक-25, स्वरूप-मासिक, संपादक-हिमांशु राय, संपादक मंड़ल-कमलेश सक्सेना, वसंत कुमार काशीकर, मूल्य-5रू। वार्षिक-30 रू। सम्पर्क-पी।डी।4, परफेक्ट एनक्लेव, स्नेह नगर, जबलपुर (म।प्र।)
इप्टावार्ता मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से प्रकाशित होने वाला प्रमुख मासिक है। इस अंक में स्वराज संस्थान संचालनालय भोपाल में (आदिवासी नाट्य समारोह के अंतर्गत) मुक्ति संग्राम 1857 के प्रभावशाली मंचन की रिपोर्ट विस्तृत रूप से प्रकाशित की गई है। विख्यात नाट्य निदेशक अलखनंदन ने भारतेन्दु नाट्य अकादेमी लखनऊ के कलाकारों से जीवंत अभिनय कराया है। हिंमाशु राय का रंगलेख ॔वो जज़्बा ही कुछ और था’ में नुक्कड़ नाटक व थियेटर पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया है। विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) पर नाटककार, अभिनेता, फिल्म नाट्य निदेशक शैवेर लापाज का अंतर्राष्ट्रीय संदेश नाट्य कला के अस्तित्व तथा अस्मिता पर चिंतन प्रस्तुत करता है। निदा फाजली की ग़़ज़लों व रंगखबर ने अंक को सौन्दर्य को बिखेरा है। रंग समीक्षा के बहाने गंगेश गुंजन ने ॔हबीव के यहां’ में भारत रत्न भार्गव की पुस्तक की समीक्षा की है। यह समीक्षा हवीब तनवीर के नाट्य जगत में योगदान के विभिन्न पहलूओं को सामने लाती है।

Sunday, January 11, 2009

प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाएं...............(साक्षात्कार)

पत्रिका-साक्षात्कार, अंक-अक्टूबर 08, स्वरूप-मासिक, सलाहकार-मनोज श्रीवास्तव(सचिव, संस्कृति विभाग), पवन श्रीवास्तव(संचालक, संस्कृति विभाग), देवेन्द्र दीपक(निदेशक, प्रधान संपादक साहित्य अकादेमी भोपाल), हरि भटनागर (संपादक) मूल्य-15रू. वार्षिक 150 रू. सम्पर्क-साहित्य अकादेमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन वाण गंगा भोपाल म.प्र.
पत्रिका साक्षात्कार पुनः अपनी लय में आती हुई दिखाई दे रही है। इसकी रचनाओं का स्तर अंग्रेजी की पत्रिकाओं में प्रकाशित साहित्य के स्तर का है। प्रभु जोशी, कृष्ण चराटे, अमृतलाल वेगड, अपनी-अपन रचनाओं में विषय वस्तु को बांधे रखे हैं। पुष्पा तिवारी तथा मनीष वैद्य की कहानी प्रभावित करती है। हेनरी ओएल की जीवनी का वल्लभ सिद्घार्थ ने बहुत ही सटीक अनुवाद किया है। पत्रिका ने ओमप्रकाश मेहरा, प्रभुदयाल अग्रिहोत्री तथा भानुदेव शुक्ल को याद किया है। रमानाथ त्रिपाठी से बातचीत में उनकी साहित्यिक यात्रा के दर्शन होते हैं। प्रकाश मनु का संस्मरण, दिवाकर सिंह तथा कर्मेन्दु शिशिर का आलेख कुछ अधिक ही विस्तार पाकर कुछ बिखरा-बिखरा सा लगता है। सुधीर मेहता, उमाशंकर चौधरी तथा सुमन की कविताएं समय का सच्चा प्रतिनिधित्व करती है। अन्य रचनाएं भी अच्छी तथा पठ्नीय है। ईश्वर से कामना है कि यह उत्कृष्ट पत्रिका शीघ्र ही नियमित रूप से प्रकाशित होने लगे।

प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाएं..........मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका

पत्रिका-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक-दिसम्बर08, स्वरूप-मासिक, प्रधान संपादक-डॉ। बी. रामसंजीवैया, संपादक-डॉ. मनोहर भारती, मूल्य-5रू. वार्षिक 50 रू. मैसूर हिंदी प्रचार परिषद्, 58, वेस्ट ऑफ कार्ड रोड़, राजाजीनगर बेंगलूर (कर्नाटक)
दक्षिण में हिंदी के प्रचार प्रसार में लगी इस पत्रिका में डॉ. एन.एस. शर्मा, डॉ. अमर सिंह बधान, डॉ. एम शेषन गणेश गुप्त व मधु धवन के आलेखों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। एस.के. जैन, सेवाराम गुप्ता, अंजु दुआ जैमिनी, ओम रायजादा की कविताएं उल्लेखनीय हैं। पत्रिका की विशेषता इसका हिंदी कन्नड़ के समानार्थी कहावतों पर डॉ. टी.जी. प्रभाकर प्रेमी का विवरण है। कैलाश चंद्र पंत द्वारा प्रेषित ॔हिंदी का वर्तमान भविष्य की दृष्टि’ संगोष्ठी विवरण परिषद के दृष्टिकोण की पुष्टि करता है।

प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाएं..........(शुभ तारिका)

पत्रिका-शुभ, तारिका अंक-दिसम्बर08, स्वरूप-मासिक, संपादक-श्रीमती उर्मि कृष्ण, सहयोगी-रत्नचंद निर्झर,मूल्य-10रू। वार्षिक 120 रू. सम्पर्क-शुभ तारिका, कृष्णदीप, ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी, (हरियाणा)

हरियाणा से प्रकाशित यह पत्रिका प्रदेशों के साहित्य पर आधारित प्रमुख अंक देती रही है। पत्रिका में बालाजी तिवारी, सत्यपाल, आलोक भारती,संतोष सुपेकर, मनोरमा मोहन, पवित्रा अग्रवाल की लघुकथाएं शामिल की गई है। जयश्री राय की कहानी तथा दिलीप भाटिया पर केन्द्रित परिशिष्ट पत्रिका का प्रमुख आकर्षण है। सभी स्थाई स्तंभ पत्रिका की उपयोगिता को सिद्ध करते हैं।


प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाएं..........(भाषा स्पंदन)


पत्रिका-भाषा स्पंदन, अंक-15, स्वरूप-मासिक, प्रधान संपादक-डॉ। सरगु कृष्णमूर्ति, संपादक-डॉ. मंगल प्रसाद, मूल्य-वार्षिक 100 रू., आजीवन-1000रू. सम्पर्क-कर्नाटकहिंदी अकादेमी, विनायका 127, एमआईजी/केएचबी 5वां ब्लांक, कोरमंगला बेंगलूर (कर्नाटक)

दक्षिण भारत से प्रकाशित यह पत्रिका साहित्य की प्रमुख पत्रिका है। इसमें सम्मलित रचनाओं में हिंदी साहित्य तथा भाषा पर बहुत ही महत्वपूर्ण लेख दिए गए हैं। जिनमें ओम प्रकाश सेठी, प्रो. आशा कपूर, डॉ. राहुल, विजय कुमार मल्होत्रा, मंजु सांडिल्य प्रमुख है। प्रदीप कुलकर्णी तथा कृष्ण शंकर सोनाने की कहानियां आज के आम आदमी की व्यथा कथा है। ग़ज़लों व कविताओं में चांद ॔शेरी’, रमेश कुमार सोनी, खुर्शीद नवाब, डॉ. अशोक गुलशन तथा नलिनीकांत विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। आकर्षक छपाई पत्रिका की एक अन्य विशेषता।

Saturday, January 10, 2009

प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाएं..........(समापवर्तन)

पत्रिका-समापवर्तन, अंक-जनवरी।09,स्वरूप-मासिक संस्थापक-प्रभात कुमार भट्टाचार्य, प्रधान संपादक-रमेश दवे, प्रबंध संपादक-रमेश सोनी, सम्पादक-निरंजन श्रोत्रिय, मुकेश वअर्मा, मूल्य-15 रू. सम्पर्क-माधवी, 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र।

मध्यप्रदेश से प्रकाशित इस नवोदित पत्रिका ने अल्प समय में ही राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की है। जगदीश शर्मा का सच्चे सुख का मूल मंत्र तथा अमृत लाल वेगड़ की रचनाएं विशेष रूप से उल्लेखनीय है। नर्मदा पर उनके द्वारा लिखे गए लेख पत्रिका की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कृष्णकांत निलोसे, कमलेश्वर साहू, ब्रज श्रीवास्तव, चन्द्रभान भारद्वाज की कविताएं तथा आशीष की ग़ज़लें सरसता लिए हुए हैं। ख्यात चित्रकार एवं साहित्यकार अखिलेश से पीयूष दहिया की बातचीत तथा उनपर केन्द्रित अन्य रचनाएं प्रभावशाली हैं। परमानंद श्रीवास्तव, विष्णुदत्त नागर, जुगलबंदी के अंतर्गत निरंजन श्रोत्रिय की कविता ने समावर्तन को महत्तम किया है। ख्यात संस्मरणकार कांति कुमार जैन, अष्टभुजा शुक्ल, तथा मुकेश वर्मा की कहानी प्रभावशाली रचनाएं हैं। पत्रिका ने श्रीराम दवे ने कथा चक्र के चार अंकों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया है। जिसमें इस पत्रिका द्वारा अल्प समय में प्राप्त उपलब्धियों पर विचार किया गया है। अन्य रचनाएं भी पठ्नीय तथा संग्रह योग्य हैं।


प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाएं..........(अक्षरा)

पत्रिका-अक्षरा, अंक-जन॥फर।09 पूर्णाक-99, स्वरूप-द्वैमासिक प्रधान संपादक-कैलाश चन्द्र पंत, प्रबंध संपादक-सुशील कुमार केडिया,संपादक-डॉ. सुनीता खत्री मूल्य-रू20एक प्रति वार्षिक-120 रू. विदेशों में-3 डालर प्रति अंक वार्षिक-15 डालर सम्पर्क- म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, हिंदी भवन, श्यामला हिल्स भोपाल म..प्र.
मध्यप्रदेश से प्रकाशित होने वाली प्रमुख साहित्यिक पत्रिका का यह 99 वां अंक है। इस अंक का प्रमुख आलेख रमेश चन्द्र शाह का है जिसमें उन्होंने वर्तमान में सांस्कृतिक बहुलतावादी प्रवृत्तियों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया है। अजीत कुमार राय तथा नीरजा माधव के आलेख तथा बरिष्ठ कवि तथा आलोचक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी से बातचीत पत्रिका की प्रमुख उपलब्धि है। अमिताभ शंकर राय चौधरी का नाटक मालाबार एक्सप्रेस तथा सुर्दशन वशिष्ट का व्यंग्य ॔डाक साब’ पठनीय रचनाएं हैं। नताश अरोड़ा तथा प्रेम कुमारी नाहटा की कहानियां तथा अन्य रचनाओं के अनुवाद से पत्रिका की खूबियों को उभारा है। श्रीकांत प्रसाद सिंह, विवेक रंजन श्रीवास्तव, विनोद कुमार ॔नयन’ रामशंकर चंचल, रमेश कुमार त्रिपाठी कविताओं में प्रभावित करते हैं। पुस्तक समीक्षाओं में युगेश शर्मा, डॉ. सुनीता खत्री, प्रमोद त्रिवेदी, फारूक आफरीदी तथा माताचरण मिश्र ने गंभीरता पूर्वक विचार किया है। अन्य रचनाएं भी पाठकों का ध्यान आकर्षित करती हैं।

Thursday, January 8, 2009

कथा चक्र का पुस्तक समीक्षा अंक

पत्रिका का अप्रैल-जून 2008 अंक
पत्रिका के इस अंक में अन्तोन चेखव, नंद किशोर नवल, डॉ मैनेजर पाण्डेय, उर्मिला शिरीष, कांतिकुमार जैन, रमेश उपाध्याय, कमलेश बख्शी,चन्द्रकांत वागडिया, जीवितराम सेतपाल, भगवती प्रसाद द्विवेदी, राजेन्द्र परदेसी, गीतांजलि श्री, मधुराज मधु, डॉ. परमलाल गुप्त, ध्रुव शुक्ल, देवेन्द्र आर्य, हरेराम समीप, ऋषिवंश, डॉ. ओम भारद्वाज, सजीवन मयंक, सदाशिव कौतुक, डॉ. प्रेमचंद पाण्डेय, चतुर्भुज काबजा, राजीव भटनागर, डॉ. वरूण कुमार तिवारी, पं. गिरी मोहन गुरू आदि विद्वान लेखकों की पुस्तकों पर विचार किया गया है।
अखिलेश शुक्ल
संपादक

Monday, January 5, 2009

कथा चक्र की तालिका अंक जन. मार्च २००९

आलेख :--
कठगुलाब की मुरझायी स्मिता और मरियन डॉ रेशमी पांड़ा मुखर्जी
ग्रामीण जीवन के यथार्थएवं की परख :॔दूसरा महाभारत’ श्रीकांत बाबू पाटिल डॉ रवीन्द्र सी. पाटिल
हिंदी साहित्य में नारी विमर्श के अन्तर्द्वन्द्व डॉ. वीरेन्द्र सिंह यादव
॔स्वस्ति लय बन चुकी जो आज उर कम्पन हमारी’! डॉ. कुमार विमल
कहानियां :--
झांकी ओम प्रकाश मेहरा
हे राम सुशान्त सुप्रिय
कांटों में खिला गुलाब डॉ नलिनी श्रीवास्तव
डायन देवेन्द्र कुमार मिश्रा
धर्म डॉ सुनील अग्रवाल
लघुकथाएं :--
नौकरी चाहिए? डॉ अशोक गुजराती
दाना व मुर्गा, विनती डॉ योगेन्द्रनाथ शुक्ल
कमाई सतीश उपाध्याय
समझौता डॉ धनंजय चौहान
कैद पक्षी राधेलाल ॔नवचक्र’
कवि और कविता :--
नीलेश रघुवंशी और कविता ॔कथा चक्र’ विशेष
कविताएं :--
आने वाले दिनों में राजकुमार कुम्भज
सकारात्मक सोच, राजेन्द्र पाण्डेय
किताब और किताबी प्रार्थना कुछ अच्छे शब्दों मार्टिन जॉन लिए,
जब संस्कृति पैदा हुई बच्चे और युद्ध डॉ रेखा व्यास
प्रवेश वर्जित है रमेश कुमार सोनी
एक खुली किताब सी है यह जिंदगी, हमें नहीं अहसास कि सुरभि नामदेव
ग़ज़लें :--
दो ग़ज़ल चांद ॔शेरी’
दो ग़ज़ल कृपाशंकर शर्मा॔अचूक’
डायरी :-- बुले खां.... बुले खां... अलीक
समीक्षा वीथिका :--
भया कबीर उदास : देश सम्पूर्णता के आइने में पूनम सिंह
संगीता गुप्ता का सृजन पुनश्च की प्रस्तुति डॉ विजय लक्ष्मी राय
सामाजिक यथार्थ की अभिव्यक्ति है : टुकड़े टुकड़े सच आनंद प्रकाश ॔आर्टिस्ट’
॔तीसरे आदमी’ से प्रश्न करती कविता : ॔देश खड़ा चौराहे पर’ अखिलेश शुक्ल
परिक्रमा :-- साहित्यिक पत्रिकाओंमें॥ सुचेता शुक्ल
समाचार :-- साहित्य जगत से संस्थाओं द्वारा प्रेषित
पतिक्रियाएं :-- आपके पत्र एवं सुझाव
आवरण छाया चित्र साभार
प्राप्त रेखाचित्र दिनेश सिंह