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हिंदी साहित्य जगत की लब्धप्रतिष्ठित पत्रिका ‘वागर्थ’

पत्रिका: वागर्थ,अंक: अप्रैल 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: एकांत श्रीवास्तव, कुसुम खेमानी, पृष्ठ: 129, मूल्य: 320रू(वार्ष…

अरे! मैं तो अप्रवासी था(संपादकीय)-‘वागर्थ’

पत्रिका: वागर्थ, अंक: नवम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, सम्पादक: विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ: 120, मूल्य:20रू.(वार्षिक 200रू.), ई…

‘वागर्थ’ का अक्टूबर 2010 अंक

पत्रिका: वागर्थ, अंक: अक्टूबर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ: 120, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 200 रू.),…

साहित्य का दस्तावेज-‘वागर्थ’

पत्रिका : वागर्थ, अंक: जून2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ: 122, मूल्य:20रू.(.वार्षिक 200रू.), ई मे…

मार्कण्डेय जी पर विशेष सामग्री युक्त ‘वागर्थ’ का मई 10 अंक

पत्रिका: वागर्थ, अंक: मई2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ: 126, मूल्य:20रू. (वार्षिक 200रू.), ई…

सैमसुंगःयह भी कोई मुद्दा है(संपादकीय)-वागर्थ

पत्रिका: वागर्थ, अंक: अपै्रल10, स्वरूप: मासिक, संपादक: विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ: 122, मूल्य:20रू.(वार्षिक 200रू.), ई मेल…

आप हम साहित्य और ‘वागर्थ’

पत्रिका: वागर्थ, अंक: मार्च 10, स्वरूप: मासिक, संपादक: विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ: 122, मूल्य:20 रू.(वार्षिकः 200रू.), ई म…

बुद्धिवादी नाटकों की रौनक क्यों शेक्सपियर के नाटकों की तुलना मंे फीकी पड़ती दिखाई दे रही है-वागर्थ

पत्रिका: वागर्थ, अंक: फरवरी.10, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ: 134, मूल्य: 20रू.(वार्षिकः 200), ई…

नव वर्ष में साहित्यजगत से आग्रह करता--वागर्थ

पत्रिका -वागर्थ, अंक-जनवरी.2010, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ-146,मूल्य-20रू.(वार्षिक200रू.),फोनः(…

एक चिंगारी कहीं से ढूढ लाओ दोस्तों(दुष्यंत कुमार)--संदर्भ ‘वागर्थ’ संपादकीय

पत्रिका -वागर्थ, अंक-दिसम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ-138, मूल्य-20 रू.(वार्षिक 200रू.), स…

हिंद स्वराज पर विशेष सामग्री-वागर्थ

पत्रिका -वागर्थ, अंक-नवम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ-130, मूल्य-20रू.(वार्षिक 200रू.), सम्…

एक और उपयोगी अंक--संदर्भ वागर्थ

पत्रिका-वागर्थ, अंक-171, अक्टूबर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ-146, मूल्य-रू.20(वार्षिक 200रू.), सम्…

‘मैं जब खुश होता हूं तो पंजाब मेल हो जाता हूं’--संदर्भ(वागर्थ..विनय दुबे)

पत्रिका-वागर्थ, अंक-सितम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. विजय बहादुर सिंह, प्रबंध संपादक-कुसुम खेमानी, पृष्ठ-138, मूल्…

उत्कृष्ट पत्रिका का सार्थक अंक---वागर्थ

पत्रिका-वागर्थ, अंक-जुलाई09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ-138, मूल्य-रू.20 (वार्षिक रू.200)संपर्क-…

‘मीडिया हमारे समय का सबसे हिंसक शिकारी है और बेरहम दलाल भी’ (संदर्भ वागर्थ)

पत्रिका-वागर्थ, अंक-अप्रैल09, स्वरूप-मासिक, संपादक-विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ-146, मूल्य-20रू.(वार्षिक200रू.), संपर्क-भारत…

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