Sunday, April 29, 2012

पत्रिका साहित्य सागर में साहित्य


पत्रिका: साहित्य सागर,  अंक: अप्रेल 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 240 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: , सम्पर्क: 161 बी. शिक्षक कांगे्रस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र. 
पत्रिका साहित्य सागर का प्रत्येक अंक आंशिक रूप से किसी न किसी साहित्यकार अथवा रचनाकार पर एकाग्र होता है। उसी तारतम्य में समीक्षित अंक भी ख्यात रचनाकार मयंक श्रीवास्तव पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व पर अच्छे आलेखों का प्रकाशन किया गया है। पत्रिका में आशा सक्सेना व अर्चना प्रकाश के गीत तथा प्रभुदयाल मिश्र का वेद विमर्श प्रभावित करता है। आकांक्षा सक्सेना व सुरेन्द्र भारद्वाज का आलेख अच्छा व पठनीय है। मयंक जी पर विद्यानंदन राजीव, समसनेही लाल यायावर, मधुकर अष्ठाना, ओमप्रकाश सिंह, यतीन्द्र नाथ राही, कमलकांत सक्सेना, राधेश्याम शुक्ल, जंगबहादुर श्रीवास्तव तथा सुरेश गौतम के आलेख संग्रह योग्य हैं। दिवाकर वर्मा का आलेख मेरा गीत है मयंक श्रीवास्तव एक सस्वर कवितापाठ सा आनंद देता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व आलेख भी विशेष महत्व के हैं। 

पत्रिका ‘‘समय के साखी’’ के साथ साहित्य यात्रा

पत्रिका: समय के साखी,  अंक: अप्रैल 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: आरती,  आवरण/रेखाचित्र: के. रवीन्द्र, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 220 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09713035330, सम्पर्क: बी. 308, सोनिया गांधी काम्पलेक्स, हजेला हास्पिटल के सामने भोपाल म.प्र.
                           पत्रिका समय के साखी के इस अंक में रोचक तथा ज्ञानवर्धक साहित्य का प्रकाशन किया गया है। अंक में सेवाराम त्रिपाठी का लिखा रामकुमार वर्मा पर आलेख पत्रिका की विशिष्ठ उपलब्धि है। श्रीराम, गणेशचंद्र राही एवं नूर मोहम्मद नूर की कविताएं प्रभावित करती है। कुमार शर्मा एवं विजयशंकर की कहानियां आज के वातावरण व उससे उपजी पीड़ा को सटीक अधिव्यक्ति देती है। चंद्रसेन विराट एवं मधुर जी की ग़ज़लें व नज़्मंे प्रभावशाली है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी उपयोगी है।

हिंदी साहित्य का समावर्तन


साहित्य संदेशवाहक पत्रिका

पत्रिका: समावर्तन,  अंक: अप्रैल 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे,  आवरण/रेखाचित्र: अज्ञय आमेरिया, पृष्ठ: 64, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 250 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान उज्जैन म.प्र. 
हिंदी जगत में प्रतिष्ठित हो चुकी इस पत्रिका का प्रत्येक अंक नवीनता लिए हुए होता है। पत्रिका साहित्य एवं कलाजगत पर उपयोगी सामग्री का निरंतर प्रकाशन कर रही है। इस अंक में ख्यात गीतकार नईम पर सामग्री अनूठी व संग्रह योग्य है। कुबेर दत्त, कुमारी रवीन्द्र, श्रीकांत उपाध्याय, नईम जी के ख़त, बेटी समीरा की ग़ज़लें, आदि उपयोगी व संग्रह योग्य रचनाएं हैं। प्रकाश कांत, विक्रम सिंह तथा दीक्षा दुबे ने विविधतापूर्ण ा आलेख लिखे हैं। जीवन सिंह ठाकुर, दिनेश पटेल व सुनील चतुर्वेदी की रचनाएं व उनका शिल्प प्रभावित करता है। प्रमोद उपाध्याय, सत्यनारायण पटेल, रीतेश जोशी की कविताएं अच्छी व समसामयिक रचनाएं हैं। बहादुर पटेल की कविताओं पर निरंजन श्रोत्रिय के विचार से प्रायः हर पाठक सहमत होगा? कलापनि पर एकाग्र भाग भी इस कलाकार के जीवन पर संक्षेप में प्रकाश डालता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं आदि भी रोचक हैं। 

सोच विचार का नया अंक


पत्रिका: सोच विचवार,  अंक: अप्रैल 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: नरेन्द्र नाथ मिश्र,  आवरण/रेखाचित्र: राजेन्द्र परदेसी, सिद्धेश्वर, , पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 225 रू.), ई मेल:  ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0542.2111586, सम्पर्क: के. 67/135 ए ईश्वरगंगी, वाराणसी 
साहित्य की इस नवीन पत्रिका में हिंदी साहित्य की प्रायः सभी विधाआंे की रचनाएं प्रकाशित की जाती है। समीक्षित अंक में आचार्य चंद्रबली पाण्डेय पर एकाग्र उपयोगी व सार्थक आलेखों का प्रकाशन किया गया है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व पर वेदप्रकाश उपाध्याय, जगदीश प्रसाद वरणवाल, पारसनाथ गावर्धन ने अच्छे व जानकारी परक आलेख लिखे हैं। धरोहर उपन्यास के अंश इसे पढ़ने तथा लेखक के संबंध में अधिक जानने की इच्छा जाग्रत करते हैं। सुधाकर अदीब, राजेन्द्र परदेसी, राजेन्द्र यादव, विनय श्रीवास्तव, तारिक असलम तस्नीम, नेत्रपाल सिंह की कहानियों में नयापन है। विनय कपूर गाफिल, उमा श्री, शिवचरण दुबे, राजकमल, रमेश मनोहरा, अमरनाथ अज्ञेय, रामशंकर चंचल, एस.बी. भारती, मुकेश घनघोरिया, विद्याकेशव चिटको, प्रभात कुमार धवन, अवनीश सिंह चैहान, सिद्धेश्वर, प्रकाश श्रीवास्तव, शिवनांद सिंह, गौतम अरोरा, के गीत ग़ज़ल आदि प्रभावित करते हैं। मिथिलेश धर दुबे, मदन मोहन वर्मा, नीरजा माधव, उपमा मेहरोत्रा के समसामयिक आलेख आज के समाज को विस्तार से सामने रखकर विचार करते जान पड़तेे हैं। अजय मिश्र का रेखाचित्र, अश्विनी कुमार, मोहन लोधिया, राजकुमार सिंह एवं अशोक अंजुम की लघुकथाएं अच्छी हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं, विचार, प्रश्न आदि भी जानकारी परक व उपयोगी है। 

Saturday, April 21, 2012

समकालीन अभिव्यकित

पत्रिका : समकालीन अभिव्यकित,  अंक : 40, स्वरूप : त्रैमासिक, संपादक : उपेन्द्र कुमार मिश्र,  आवरणरेखाचित्र : जानकारी उपलब्ध नहीं, , पृष्ठ : 64, मूल्य : 10रू.(वार्षिक 40 रू.), र्इ मेल : ,वेबसार्इट : उपलब्ध नहीं , फोनमोबार्इल : 011.26645001, सम्पर्क :  5, तृतीय तल, 984, वार्ड नं. 7, महरौली, नर्इ दिल्ली 30
    काव्य प्रधान पत्रिका के इस अंक में समकालीन विचारों से युक्त रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में कुमार शर्मा अनिल, महावीर सिंह, गोवर्धन यादव की कहानियां समकालीन विचारों को पोषित करती है। डा. कमल किशोर गोयनका, प्रभाकर सिंह, रविशंकर राय तथा योगेश चंद्र बहुभुज के आलेख साहित्य के साथ साथ वर्तमान समाज को अभिव्यकित प्रदान करते हैं। विष्णु दत्त भटट का व्यंग्य अधिक प्रभावित नहीं कर सका है। कोणार्क के सूर्य मंदिर पर अनिल डबराल के लेख में और विश्लेषण की आवश्यकता थी, लेख में विवरणात्मकता होने से यह रूचिकर तो है पर साहित्य के नए जिज्ञासुओं के लिए अधिक उपयोगी नहीं है। रामस्नेही लाल शर्मा, संजीवन मयंक, लीना मलहौत्रा तथा सुरेश उजाला की कविताएं पठनीय व उपयोगी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, स्थायी स्तंभ आदि भी प्रभावित करते हैं।