Sunday, July 31, 2011

पत्रिका हिमप्रस्थ का जून 2011 अंक

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: जून 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 64, मूल्य: 6 रू.(वार्षिक 50 रू.), ई मेल: , ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: हिमाचल प्रदेश प्रिटिंग प्रेस परिसर, घोड़ा चौकी शिमला 5

विगत 57 वर्ष से केवल 5 रू कीमत पर उत्कृष्ट साहित्य उपलब्ध करवाना हर किसी के वश की बात नहीं है। लेकिन इस पत्रिका ने यह साबित किया है कि इस महंगाई के समय में भी अच्छा साहित्य कम कीमत पर प्रकाशित किया जा सकता है। पत्रिका के इस अंक में गौतम शर्मा, लीला भण्डारी, श्रीनिवास, रामनारायण सिंह मधुर, विजय कुमार पुरी, विश्म्भर लाल सूद, आर.के. शुक्ला, विवेक निझावन तथा सुशील कुमार फुल्ल के उपयोगी व जानकारीपरक आलेखों का प्रकाशन किया गया है। भानुप्रताप कुठियाला, संदीप शर्मा एवं शंकर सुल्तानपुरी की कहानियांे में हिमाचल के जनजीवन को महसूस किया जा सकता है। जसविंदर शर्मा की लघुकथाएं अधिक प्रभावित करती हैं। सुरेश आनंद, मीना गुप्ता, दिनेश चमोला, रमेश सोबती तथा सुमन बाला की कविताओं में आज के समाज का परिवर्तित रूप दिखाई देता है। विजय तेलंग का व्यंग्य व श्रीकांत की पुस्तक समीक्षा अच्छी है व पाठकों को एक नये संग्रह से परिचित कराती है।

Saturday, July 30, 2011

साहित्य के साथ ‘‘भाषा स्पंदन’’

पत्रिका: भाषा स्पंदन, अंक: 24, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डॉ. सरगुकृष्णमूर्ति, डॉ. मंगल प्रसाद, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी नहीं, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 100), ई मेल: karnatakahindiacademy@yahoo.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09886241853, सम्पर्क: कर्नाटक हिंदी अकादमी, 853 आठवां क्रास, 8वां ब्लाक, कोरमंगला, बेंगलूरू, कर्नाटक 560.095

हिंदी साहित्य के साथ साथ भाषा के विकास के लिए कर्नाटक से प्रकाशित यह पत्रिका निरंतर प्रयत्नशील है। पत्रिका के प्रत्येक अंक में नवीनतम जानकारी तथा सामग्री का प्रकाशन लगातार किया जा रहा है। इस अंक में प्रकाशित लेखों में मोहन भारतीय, रवि शर्मा, रामफेर त्रिपाठी, प्रो. आशा कपूर, राजेन्द्र परदेसी, नारायण सिंह, सुरेश उजाला, डॉ. आकांक्षा यादव एवं नितिन वाजपेयी के लेख प्रमुख हैं। मनीष कुमार सिंह की कहानी बड़ी कोठी के बाशिंदें नये परिवेश के अंतर्गत बुनी गई एक विस्तृत कथानक की कहानी है। अक्षत गोजा, महेन्द्र अग्रवाल, ओम नागर, रा.सा.ला. शर्मा, कृष्ण कुमार यादव, खुर्शीद नवाब, जयंत थोरात, जुबेदा अनवर, सुरेश उजाला एवं दिनेश त्रिपाठी की कविताएं उल्लेखनीय है। अखिलेश शुक्ल का व्यंग्य ‘‘हारे को हरिनाम है’’ वर्तमान संदर्भ मंे एक सटीक व्यंग्य है। पत्रिका में प्रकाशित प्रतिक्रियाएं, संपादकीय आदि भी अच्छे व जानकारीपरक हैं।

साहित्यिक पत्रिका शुभ तारिका का हिमांक विशेषांक

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: अर्प्रैल011, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 38, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी नहीं, मूल्य: 12रू.(वार्षिक 120), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप ए-47, शास्त्री कालानी अंबाला छावनी 133001 हरियाणा

पत्रिका का समीक्षित अंक हिंमांक के रूप में प्रकाशित किया गया है। अंक को हिमाचल अंक भी कहा गया है। इस अंक में अनंत आलोक, आशा शैली, प्रतीक्षा भाटिया, धर्मपाल साहिल, अनिल कुमार जैन, मृदुला हालन, कमलेश ठाकुर, गीता जैन, वीरेन्द्र गोयल, मुहम्मद सुलेमान, सीताराम त्रिपाठी, उत्तम चंद्र शर्मा, चिन्मय सागर, रमेश प्रसून, प्रमीला गुप्ता एवं अशोक दर्द के आलेखों का प्रकाशन किया गया है। प्रायः सभी आलेखों में हिमाचल की संस्कृति, रहन सहन, खान पान आदि का विस्तृत रोचक विवरण प्रस्तुत किया गया है। सुदर्शन ठाकुर का संस्मरण तथा उषा मेहता एवं देवचंद्र मस्ताना की लोककथाएं पढ़ने में आनंदित करती हैं। पंकज बटु एवं विनोद धब्याल की कहानियां वहां की संस्कृति व जीवन शैली को कथानक के माध्यम से सामने लाती है। राजेन्द्र मानव, लेखराम शर्मा, एवं गंगाराम राजी की लघुकथाओं में एक अच्छी कथा के समान पैनापन है। प्रकाशित कविताओं में रामगोपाल शर्मा, शेर सिंह मेरूपा, दीनदयाल वर्मा, रत्नचंद्र निर्झर, नलिनी विभा, उदयभानु हंस, तेजराम शर्मा, कपिल बाली वाले, टी.सी. सावन एवं अरूण कुमार शर्मा की कविताएं अच्छी व पठनीयता से भरपूर हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व संपादकीय भी प्रभावित करते हैं।

Thursday, July 28, 2011

वर्तमान साहित्य की साक्षी -- पत्रिका ‘पाखी’

पत्रिका: पाखी, अंक: जुलार्ह 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ: 96, मूल्य: 20रू(वार्षिक 240रू.), ई मेल: pakhi@pakihi.in , वेबसाईट: http://www.pakhi.in/ , फोन/मो. 0120.4070300, सम्पर्क: इंडिपेडेंट मीडिया इनीशियेटिव सोसायटी, बी-107, सेक्टर 63, नोएड़ा 201303 उ.प्र.

पत्रिका पाखी का समीक्षित अंक पूर्व के अंकों के समान कहानियों व अन्य विधा की रचनाओं से भरपूर है। अंक में प्रकाशित कहानियों में स्वप्नजीवी(वल्लभ डोभाल), कच्चे आम की महक(संजय कुमार कुंदन), अतरघट(राजकमल), बंद मुट्ठी(स्वाति तिवारी), बेटी बेचवा(जयश्री राय) एवं सात फेरों की शरण में(आद्या प्रसाद पाण्डेय) प्रमुख हैं। जयश्री राय एवं स्वाति तिवारी को छोड़कर अन्य रचनाकारों की कहानियों में यह पढ़कर बड़ा अजीब सा लगता है कि आखिर क्यों कहानियों को आजकल वर्तमान समाज का विश्लेषण करने की प्रयोगशाला बनाया जा रहा है? पत्रिका की कविताएं कहानियों की अपेक्षा अधिक असरदार है। नीलाभ, पूनम सिंह, चंद्रसेन यादव, अश्वघोष एवं संजय सुमन की कविताएं सिद्ध करती हैं कि कविता केवल कविता न होकर सामाजिक परिवर्तन का विशिष्ठ माध्यम है। पत्रिका के इस अंक में अरसे बाद एक अच्छी ग़ज़ल पढ़ने में आयी है जिसे प्रेमरंजन अनिमेष ने लिखा है, यह ग़ज़ल इस विधा के पैरामीटर पर भी काफी हद तक ठीक है। राजकुमार एवं वीरेन नंदा के लेख ठीक ठाक कहे जा सकते हैं। प्रसन्ना, राजीव रंजन गिरि, विनोद अनुपम के स्तंभ की सामग्री में भी नयापन है। कथाकार अखिलेश का स्मरण लो वह दिखाई पड़े हुसैन पत्रिका की उपलब्धि कही जा सकती है। अजीत कुमार एवं राजेन्द्र रावत की लघुकथाएं भी प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी स्तरीय हैं।

Wednesday, July 27, 2011

हिंदी साहित्य के ‘निकट’

पत्रिका: निकट, अंक: नवम्बर, अंक 4, स्वरूप: अर्द्धवार्षिक, संपादक: कृष्ण बिहारी, पृष्ठ: 84, मूल्य: 50रू (वार्षिक 100 रू.), ई मेल: krishnatbihari@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 00971505429756, सम्पर्क: P.O. Box No. 52088, Abudhabi, UAE

संयुक्त अरब अमीरात से प्रकाशित पत्रिका निकट केवल 4 वर्ष में ही देश की प्रमुख साहित्य पत्रिकाओं की श्रेणी में शामिल हो गई है। पत्रिका का समीक्षित अंक महिला विशेषांक है। पत्रिका का संपादक मंडल तथा विश्व में ब्यूरों प्रमुख जाने माने लेखक व साहित्यकार हैं, इससे पत्रिका की गंभीरता व उसकी स्वीकार्यता का पता चलता है। ख्यात लेखिका नासिरा शर्मा से अमरीक सिंह दीप की बातचीत साहित्य के साथ साथ वर्तमान साहित्यिक रूझान की ओर भी संकेत करती है। उन्होंने लेखन की विचारधारा से संबंधित प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया है, ‘‘लेखक के नजरिए से मैंने धर्म और विचारधाराओं को समझने की कोशिश जरूरत के अनुसार की है। मगन इनसे प्रभावित होकर लेखन कभी नहीं किया है।’’ यह बात नासिरा जी जैसी कथाकार ही कह सकती हैं, अन्यथा लेखक तो बातों को शब्दजाल में लपेटकर बात को गोलमोल कर जाते हैं। पत्रिका की एक नहीं सभी कहानियां विशिष्ठ हैं। उनमंें समाज की बुनावट को समझने की चेष्टा के साथ साथ आधुनिक परिवेश को भारतीय संदर्भ में व्यक्त करने का सफल प्रयास महिला विषयक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए दिखाई देता है। जया जदवानी, रजनी गुप्त, गीताश्री, इला प्रसाद, विजय शर्मा, सुधा ओम ढीगरा, उषा राय एवं अर्चना पून्थूली जैसे रचनाकारों के नाम नए नहीं है। लता शर्मा व राजवंश राय की लघुकथाएं लघु होते हुए भी विस्तृत केनवास को नेपथ्य में समेटती है। अंजना संधीर, रचना श्रीवास्तव, जोराम आनिया ताना, सुशीला पुरी, रेखा मैत्रा एवं प्रज्ञा पाण्डेय की कविताओं में भी भारतीय समाज के कल्याण का भाव दिखाई देता है। आकांक्षा पारे व बलवंत कौर के लेख स्तरीय व पठनीय हैं। पत्रिका का कलेवर व साज सज्जा प्रभावित करती है।

Tuesday, July 26, 2011

साहित्य परिक्रमा का गुजराती साहित्य विशेषांक

पत्रिका: साहित्य परिक्रमा, अंक: जुलाई-सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मुरारी लाल गुप्त गीतेश, पृष्ठ: 128, मूल्य: 15रू (द्वैवार्षिक 100 रू.), ई मेल: shridhargovind@gmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 09425407471, सम्पर्क: राष्ट्रोस्थान भवन, माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क, ग्वालियर म.प्र.

प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका साहित्य परिक्रमा का समीक्षित अंक 46 वां अंक है। इसे गुजराती साहित्य विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया गया है। अंक में गुजराती साहित्य की रचनाओं को अच्छे व पठनीय अनुवाद के साथ देवनागरी लिपि में प्रकाशित किया गया है। अंक का संयोजन व प्रस्तुतिकरण आकर्षित करता है। अंक में भक्ति साहित्य में गुजरात के योगदान पर विशेष सामग्री का प्रकाशन किया गया है। नरसिंह मेहता, गंगासती दयाराम, भ्वन शंकर एवं भवन दुला काम की रचनाएं प्रासंगिक हैं व पत्रिका की उपयोगिता पर विचार स्पष्ट करती है। झवेरचंद मेधानी, जयंत पाठक, झीणाभाई देसाई, उमाशंकर जोशी, राजेन्द्र शाह, मनोज खंडेरिया, माधव रामानुज, चिनु मोदी, निरंजन भगत रावजी पटेल, जगदीश जोशी, राजेन्द्र शुक्ल, पन्ना नायक, महेन्द्र सिंह जडेजा की कविताओं के अनुवाद सटीक व पठनीयता से भरपूर हैं। इनके अनुवाद क्रांति कनाटे तथा पारूल मशर द्वारा किए गए हैं। मीनाक्षी चंदाराणा, पारूल मशर, वंदना शांतुइंदु एवं निर्झरी मेहता ने स्वयं अनुवाद कर कविता की मूल भावना को हिंदी में ज्यों का त्यों प्रस्तुत करने में शतप्रतिशत सफलता हासिल की है। सितांशु यशचंद्र की कविता ‘‘यों मुस्कुराते रहो’’ का मूल भाव पाठक के मन को असीम शांति प्रदान करता है। हसिल बूच, चंद्रकांत बक्षी, माय डियर जयु, इला आरब मेहता, हिमांशी शैलत, अश्विन चंद्रराणा की अच्छी कहानियां चुनकर उनके अनुवाद को सरसता प्रदान करने में संपादक को सफलता हासिल हुई है। सामान्यतः अनुवाद प्रायः दुरूह व भारी भरकम हो जाते हैं लेकिन इस पत्रिका में प्रायः सभी अनुवाद भाषा एवं भाव दोनों स्तर पर पाठकों को बांधे रखने में सफल कहे जा सकते हैं। सुरेश जोशी, गुणवंत शाह व शिरीष पांचाल के अनुवाद को यदि अनुवाद न लिखा जाता यह रचनाएं हिंदी की रचनाएं ही समझ में आती है जिससे इनके अनुवाद के कुशल स्तर का पता चलता है। अन्य लेखों में चिनु मोदी, लव कुमार देसाई, शिवदान गढ़वी, मीनाक्षी एवं अश्विन चंद्रराणा, बलवंत जानी, बंसीधर के लेख विशिष्ठ कहे जा सकते हैं। मनुभाई पंचोली व दिनकर जोशी के उपन्यास अंश के साथ साथ भगवत कुमार शर्मा की आत्मकथा एवं वंदना शांतुइंदु, निर्झरी मेहता की रचनाएं पत्रिका के भारतीय भाषा एंव साहित्य की अनूठी पत्रिका का दर्जा प्रदान करती है। संपादकीय ‘आंख का पानी’ इस अंक के संबधं में पाठकों को रचनाएं पढ़ने से पूर्व ही बहुत कुछ स्पष्ट कर देता है। अच्छा व सहेजने योग्य अंक प्रकाशित करने के लिए अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास बधाई का पात्र है।

साक्षात्कार का नया अंक

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: मई 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: त्रिभुवननाथ शुक्ल, पृष्ठ: 122, मूल्य: 25रू (वार्षिक 200 रू.), ई मेल: sahityaacademy@gmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0755ण्2554782, सम्पर्क: साहित्य अकादमी म.प्र. संस्कृति परिषद, वाण गंगा, भोपाल म.प्र.

म.प्र. से प्रकाशित वर्षो पुरानी यह पत्रिका अब नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। अंक में ख्यात साहित्य मर्मज्ञ डॉ. प्रेम भारती से कमला प्रसाद चौरसिया की बातचीत विशिष्ठ है। सच्चे साहित्य को लेकर भारती जी का कहना है कि जो मूल्यों के क्षरण को रोके वही सच्चा साहित्य है। यह कथन वर्तमान संदर्भ में पूर्णतः सत्य है। अंक में प्रकाशित प्रमुख आलेखों में भाषा के विकास में जन और अभिजन की भूमिका(श्याम सुंदर घोष), मेरे स्त्री पात्रों का संसार(सूर्यबाला), सप्तसूत्रीय समीक्षा के सूत्रधारःडॉ. नंददुलारे वाजपेयी(योगेन्द्र नाथ शर्मा) एवं तेलुगु साहित्य पर अरविंद का प्रभाव(एस. शेषारत्नम्) के साथ साथ उदय प्रताप सिंह व डॉ. श्रीराम परिहार के आलेख संग्रह योग्य हैं। डॉ. नीरजा माधव, ओम प्रभाकर, कुंअर सिंह टण्डन एवं अंजनी शर्मा की कविताएं बाजारीकरण के विरूद्ध आम आदमी की झटपटाहट व्यक्त करती है। मृदुला सिन्हा की कहानी मुआवजा तथा मंगला जोशी की कहानी साधु और सरपंच में कथानक भले ही प्राचीन हो पर इन कहानियों में प्रस्तुतिकरण में नवीनता है। पत्रिका का संपादकीय शिक्षा विद्या और साहित्य विद्या अद्वितीय व सहेजकर रखने योग्य है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी प्रभावित करते हैं। पत्रिका अंक दर अंक निखरती जा रही है यह साहित्य के पाठकों के लिए संतोष का विषय है।

Sunday, July 24, 2011

मॉरिशस के विश्व हिंदी समाचार

पत्रिका: विश्व हिंदी समाचार, अंक: मार्च 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: गंगाधर सिंह सुखलाल, पृष्ठ: 20, मूल्य: प्रकाशित नहीं, ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 230.6761196,

मॉरिशस से प्रकाशित इस पत्रिका में दुनिया भर के साहित्यिक समाचार प्रकाशित किए जाते हैं। इस अंक में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 10 जनवरी विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर संदेश का प्रकाशन किया गया है। इसी अवसर पर मॉरिशस गणराज्य के महामहिम सर अनिरूद्ध जगन्नाथ के विचार भी महत्वपूर्ण हैं। इस पुनीत अवसर पर विश्व हिंदी पत्रिका 2010 का भी लोकापर्ण किया गया। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय हिंदी प्रतियोगिता का आयोजन किए जाने का समाचार भी सुंद ढंग से प्रकाशित किया गया हैै। पत्रिका के माध्यम से यह जानकर सुखद लगता है कि दुनिया भर में इस दिवस को धूमधाम से मनाया जाता है। पत्रिका के पृष्ठ 4 एवं 5 पर दोहा, न्यूयार्क, बेइजिंग, कैरो, देहरादून, ओमान, कुबैत, सूरीनाम तथा नोएडा में इस दिवस को मनाने का समाचार आकर्षक प्रस्तुति है। विश्व हिंदी सचिवालय की तीसरी वर्षगांठ का समाचार इस संस्था के कियाकलापों के संबंध में बहुत कुछ स्पष्ठ करता है। सचिवालय द्वारा इस अवसर पर दो दिवसीय हिंदी संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 11 एवं 12 फरवरी कोे किया गया। आयोजन का विस्तृत समाचार गोष्ठी की सफलता के संबंध में जानकारी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त सूचना प्रोद्योगिकी में हिंदी की बढ़त, मॉरिशस में हिंदी बाल चित्र समारोह, संस्था कथ यूके सम्मानित, अंतर्राष्ट्रीय पुश्किन सम्मान कवि आलोक श्रीवास्तव को मिला समाचार भी पत्रिका को जानकारी परक व ज्ञानवर्धक बनाते हैं। पत्रिका के संपादक गंगाधर सिंह सुखलाल का कथन, ‘हिंदी कौन बोलता है? इस छोटे से प्रश्न में हिंदी के वैश्विक रूप के उद्घाटन की कुंजी निहित है।’ संपादकीय का केन्द्रीय बिंदु है जिसपर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। पत्रिका का कलेवर, साज सज्जा व आकर्षक प्रस्तुति प्रभावित करती है।

अनूठी साहित्यिक पत्रिका व्यंग्य यात्रा

पत्रिका: व्यंग्य यात्रा, अंक: जून2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: प्रेम जनमेजय, पृष्ठ: 112, मूल्य: 20रू (वार्षिक: 80 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 011.25264227, सम्पर्क: 73, साक्षर अपार्टमेंट, ए-3, पश्चिम विहार, नई दिल्ली 110.063

व्यंग्य विधा पर एकाग्र साहित्य की इस पत्रिका का प्रत्येक अंक किसी न किसी व्यंग्यकार पर आंशिक रूप से एकाग्र होता है। समीक्षित अंक भी श्रेष्ठ व्यंग्यकार हरीश नवल पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व पर त्रिकोणीय के अंतर्गत अच्छे व सारगर्भित लेखों का प्रकाशन किया गया हैै। पत्रिका के संपादक प्रेम जनमेजय ने उनके विशिष्ठ अंदाज को अपने लेखन का आधार बनाया है। इस लेख में उनके समूचे लेखन को संक्षेप में समेटने का प्रयास किया गया है। सुभाष चंदर एवं नरेन्द्र मोहन के आलेख के नवल जी पर एकाग्र संस्मरणात्मक आलेख अच्छे हैं व प्रभावित करते हैं। मधुसूदन पाटिल व सविता राणा ने भी अपने अपने आलेखों में नवल जी के व्यक्तित्व के अनछुए पहलूओं पर विचार किया है। पाथेय के अंतर्गत मराठी की चुनी हुई श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाओं का प्रकाशन किया गया हैै। श्रीपाद कृष्ण कोल्हटकर, रामगणेश गडकरी एवं पु.ल. देशपाण्डे की रचनाएं व्यंग्य की अंतर्रात्मा के साथ भलीभांति न्याय कर सकी हैं। मराठी व्यंग्य पर उषा दामोदर कुलकर्णी, मीरा वाडे एवं श्याम सुुंदुर घोष के लेख सहेज कर रखने योग्य हैें। व्यंग्य रचनाओं में प्रदीप पंत, सुशील सिद्धार्थ, समीर लाल समीर, सुधीर ओखडे, उमा बंसल एवं लाल्यित ललित के व्यंग्य सटीक कहे जा सकते हैं। नरेश सांडिल्य, नवल जायसवाल, विश्वनाथ एवं उपेंद्र कुमार की व्यंग्य कविताएं भले ही नागार्जुन के व्यंग्य स्तर को न स्पर्श कर सकीं हो पर अपनी छाप छोड़ने मेें बहुत हद तक सफल कही जा सकती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व आलेख भी स्तरीय हैं जिनमें साहित्य के विशुद्ध पाठक के लिए काफी कुछ है।

Friday, July 22, 2011

आपके ‘आसपास’

पत्रिका: आसपास, अंक: जुलाई2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 22, मूल्य: 5रू (वार्षिक 50 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट http://www.dharohar.com/ , फोन/मोबाईल: 0755ण्2775129, सम्पर्क: एच.3, उद्ववदास मेहता परिसर, नेहरू नगर, भोपाल म.प्र.

समाचार प्रधान पत्रिका के इस अंक में विविधतापूर्ण समाचारों का प्रकाशन किया गया है। अंक में शताब्दी वर्ष के अंतर्गत हिंदी के ख्यात कवि बाबा नागार्जुन पर उषा किरण द्वारा लिखित जानकारीपरक आलेख प्रकाशित किया गया है। राष्ट्रकवि दादा माखनलाल चतुर्वेदी जी पर रेनू तिवारी का आलेख एवं ममता तिवारी के कविता संग्रह पर चर्चा अच्छी जानकारी है। माधवराव सपे्र संग्रहालय से संबंधित जानकारी प्रदेश स्तर पर संग्रहालयों की उपयोगिता व उनकी स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालती है। अन्य स्थायी स्तंभ सम्मान/पुरस्कार, हलचल, लोकापर्ण/प्रकाशन आदि भी साहित्यकारों से संबंधित जानकारी सहज ही प्रदान करते हैं।

Thursday, July 21, 2011

साहित्य में समावर्तन

पत्रिका: समावर्तन, अंक: जुलाई2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू (वार्षिक 250 रू.), ई मेल: samavartan@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0734ण्2524457, सम्पर्क: 129, माधवी दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.

साहित्य जगत की अग्रणी पत्रिका समावर्तन के इस अंक में विविधतापूर्ण साहित्य का प्रकाशन प्रमुखता से किया जाता है। इस अंक को आंशिक रूप से ख्यात कथाकार साहित्यकार सूर्यकांत नागर तथा रंगकर्मी श्याम सुंदर निगम पर एकाग्र किया गया है। अंक में इसके अतिरिक्त अन्य रचनाओं का प्रकाशन भी किया गया है। नागर जी के व्यक्तित्व पर प्रभाकर श्रोत्रिय, रमेश दवे, चैतन्य त्रिवेदी एवं प्रमोद त्रिवेदी ने सार्थक व उपयोगी आलेख लिखे हैं। संपादक निरंजन श्रोत्रिय जी द्वारा चयनित प्राजंल धर की कविताएं विशेष रूप से प्रभावित करती है। अमर गोस्वामी की कहानी गठरी भी समसामयिक विषयों का निर्विवाद प्रस्तुतिकरण है। कहानी हरम का अनुवाद जे.एल. रेडडी ने सटीक किया है। सुनीता जैन, हीरालाल पारस, कुमार सुरेश तथा राघवेन्द्र तिवारी की कविताएं उल्लेखनीय है। निगम जी की रचनाओं के साथ साथ दुर्गाप्रसाद झाला का आलेख मोहन गुप्त के विचार तथा श्रीराम दवे से उनकी बातचीत समय के साथ साथ साहित्येत्तर विषयों पर भी विचार करती है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ रचनाएं तथा समीक्षाएं भी विशिष्ठ हैं। अंक में नवीनता के साथ साथ गति भी है जो स्वागत योग्य है।

Saturday, July 16, 2011

साहित्य अभियान पत्रिका के दो अंक

पत्रिका : साहित्य अभियान, अंक : मई, जून 2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : सनत, पृष्ठ : 22, मूल्य : 10रू (वार्षिक 100 रू.), ई मेल : ,वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल : 9301492734, सम्पर्क : साहित्य निकेतन, जूट मिल थाना के पीछे, बगल गली, हनुमान मंदिर के पास, राजग़(छतीसगढ़)

साहित्य अभियान पत्रिका के मई तथा जून 2011 में प्रकाशित अंक साहित्यिक रचनाओं से भरपूर है। दोनों अंकों में प्रकाशित आलेखों में इंकलाब गांधी, गणेश कछवाहा, ओम प्रकाश बजाज, मीरा मिश्रा, राधकांत अंधवाल, श्याम नारायण श्रीवास्तव, सुबोध महंतो विशेष हैं। हर्ष सिंह ठाकुर की कहानी (जनशताब्दी एक्सप्रेस) क्षेत्रीय रचना होते हुए भी देश भर के साहित्य का प्रतिनिधित्व करती है। निदा ुफाजली, अंजनी कुमार, सुंदरलाल भटट, केशव दिव्य, अमित कुमार दुबे एवं राजा चौरसिया की कविताएं उल्लेखनीय है। संतोष सेन का व्यंग्य तथा सतीश व्यास, सनत कुमार नायक, राजेश ठक्कर, संतोष सुपेकर, भजनलाल गुप्ता, जेम्स एक्का, ओमप्रकाश बजाज तथा नरेन्द्र नाथ लाहा की लघुकथाओं में नवीनता है। अंकों की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

Thursday, July 14, 2011

साहित्य के लिए ‘प्रगतिशील आकल्प’

पत्रिका: प्रगतिशील आकल्प, अंक: मार्च2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डाॅ. शोभनाथ यादव , पृष्ठ: 22, मूल्य: रू (आजीवन 1000रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 28376108, सम्पर्क: पंकज क्लासेस, पोस्ट आफिस बिल्ंिडग, जोगेश्वरी पूर्व मुम्बई 400060

टैब्लाइड आकार में प्रकाशित यह पत्र समसामयिक व जन सामान्य से जुड़ी रचनाओं का प्रकाशन विगत 11वर्ष से लगातार कर रहा है। अंक में आत्म संघर्ष के अंतर्गत मोहन सपरा के जीवन संघर्ष का प्रकाशन किया गया है। कहानियों में डान(श्याम कुमार पोकरा), सूरज(दर्शन सिंह धीर) एवं जो सुनना चाहती हैं औरते?(घनश्याम रंजन) विशेष रूप से प्रभावित करती है। ख्यात कवि केदारनाथ अग्रवाल पर एकाग्र प्रो.जगदीश्वर चतुर्वेदी का आलेख अच्छा व जानकारीपरक है। डाॅ. शिवनारायण एवं केशव शरण की कविताएं नयापन लिए हुए हैं। शीतांशु भारद्वाज की लघुकथाएं बदलता चरित्र एवं खरबूजी रंग आज के समाज की कुरीतियों व दिखावे के चरित्र को उजागर करती हैं। घनश्याम रंजन की लघुकथा आज भी ठीक ठाक कही जा सकती है।

Monday, July 11, 2011

सत साहित्य शोध मासिकी ‘साहित्य सागर’

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: जुलाई 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20रू (वार्षिक: 240 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0755.4260116, सम्पर्क: 161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र.

पत्रिका साहित्य सागर का यह अंक प्रतिष्ठित साहित्यकार डाॅ. प्रेमलता नीलम पर एकाग्र है। अंक मं उनके समग्र कृतित्व पर अनेक उपयोगी आलेख प्रकाशित किए गए हैं। इनमें संतोष तिवारी, दामोदर वर्मा, विठ्ठल भाई पटैल, मोहन शशि तथा सुरेरश नीरव के आलेख प्रमुख हैं। काव्य सागर के अंतर्गत कपिल कुमार, रमेश कुमार शर्मा, शरद नारायण खरे, रामस्नेही लाल शर्मा यायावर, मुकेश अनुरागी, देवेन्द्र कुमार मिश्रा, मालती शर्मा, अर्चना प्रकाश, सतीश श्रोत्रिय, भवेश दिलशाद तथा अशोक गीते की कविताएं प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी स्तरीय हैं।

Sunday, July 10, 2011

मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका का नया अंक

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: जून2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. वि. रामसंजीवैया, मनोहर भारती, पृष्ठ: 54, मूल्य: 5रू (वार्षिक: 50 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 080.23404892, सम्पर्क: 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजी नगर बेंगलूर कर्नाटक 560.010

पत्रिका के इस अंक में ख्यात कथाकार मन्नू भण्डारी की कहानियांे के नारी चरित्र पर मनीष गोहिल का आलेख तथा समकालीन हिंदी महिला लेखिकाओं में नारी विमर्श(सायनाभाई बी. सतोल) आलेख प्रभावित करते हैं। एम. शेषन, अनुराधा रा. कुलकर्णी, मनजीत भावडिया, बाबूराम वर्मा, प्रो. बी.बै. ललिताम्बा तथा प्रभाशंकर के लेख अच्छे व पठनीय हैं। आई.ए. कुरेशी तथा गोविंद शेनाय की लघुकथाएं एवं बालकवि बैरागी, रामनिवास मानव की कविताएं उल्लेखनीय हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी स्तरीय हैं।

Saturday, July 9, 2011

समावर्तन का नया विशेषांक

पत्रिका: समावर्तन, अंक: जून2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 250 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0734ण्2524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.

प्रतिष्ठित पत्रिका समावर्तन का यह अंक संयुक्त रूप से नागार्जुन एवं शरद जोशी जी पर एकाग्र है। यह भी संयोग है कि दोनों ही व्यंग्य विधा के अप्रतिम हस्ताक्षर हैं। जहां नागार्जुन का व्यंग्य कविता के माध्यम से आम जन तक पहुंचता है वहीं दूसरी ओर शरद जोशी का व्यंग्य शब्दों के माध्यम से पाठक के अंतर्मन को विलोड़ित करता है। इस अंक में इन दोनों ख्यात साहित्यकारों पर प्रकाशित सामग्री सहेजकर रखने योग्य है। रमेश दवे, नामवर सिंह, बागेश्री चक्रधर, निवेदिता शर्मा, अनामिका तथा ख्यात कवि लीलाधर मंडलोई के नागार्जुन के समग्र साहित्य पर एकाग्र आलेख पत्रिका की उपलब्धि है। इंदिरा दांग्री की कहानी शहरी एक अच्छी व समाज के आमजन से जुड़ी रचना है। जिसमें वह सब कुछ है जिसकी अपेक्षा हर कोई करता है। मनोज कुमार झा की निरंजन श्रोत्रिय जी द्वारा चुनी गई कविताएं व उर्दू कहानी चश्मदीद गवाह(अनुवाद फरहत जहां) से पाठक को बहुत कुछ मिलता है। श्रीकांत जोशी, ब्रज श्रीवास्तव, बनाकर चंद्र, मनोज जैन ज्ञानप्रकाश विवेक की कविताएं रचनाएं अच्छी हैं। शरद जोशी जी पर प्रकाशित आलेखों में रमेश दवे, शिव शर्मा, सूर्यबाला तथा सूर्यकांत नागर के लेख अच्छे व जानकारीपरक हैं। रंगशीर्ष के अंतर्गत नरेश सक्सेना जी पर गिरीराज किशोर जी, राजशेखर व्यास के लेख प्रभावित करते हैं। राग तेलंग, विनय उपाध्याय, मुकेश वर्मा तथा अमरीक सिंह दीप के स्तंभ सहित अन्य सामग्री में पठनीयता है। इस अच्छे अंक के लिए पत्रिका से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति बधाई का पात्र है।

Sunday, July 3, 2011

‘अंतराल दस साल’ और शुभ तारिका

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: जून 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 52, मूल्य: 12रू (वार्षिक: 120 रू.), ई मेल: , ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीिं, फोन/मोबाईल: 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप, ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी, 133001 हरियाणा

प्रतिष्ठित पत्रिका शुभ तारिका का यह अंक ख्यात साहित्यकार व पत्रिका के संस्थापक डॉ. महाराज कृष्ण जैन पर एकाग्र है। उनके समग्र व्यक्तित्व व कृतित्व पर पत्रिका में उपयोगी आलेखों का प्रकाशन किया गया है। अंक में स्मृति दर्पण के अंतर्गत कमलेश ठाकुर, सुशीला जैन, संत कुमार जैन, मुक्ता, रत्नचंद जैन, अनूप सिंह, राघवेन्द्र दुबे, दीनदयाल वर्मा, सुभाष बंसल, लक्ष्मी रूपम, अनिल, सुमति जैन, अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, अरविंद सिंह, शैल वर्मा, संतोष शर्मा, जनक अरोड़ा, मदन मोहन श्रीवास्तव, रमेश प्रसून, रूखसाना सिद्दकी, सतयनारायण सत्तन, दिलीप भाटिया, पंकज शर्मा, किशनलाल शर्मा, गोविंद चावला, प्रमीला गुप्ता लेखराम वर्मा, विजय कुमार, दिनेश कुमार छाजेड़ एवं रामदुलारी श्रीवास्तव के आलेख प्रमुख हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं व स्तंभ आदि भी प्रभावित करते हैं। संपादक उर्मि कृष्ण ने अपने संपादकीय में उन्हें ‘अंतराल दस साल’ के रूप में याद किया है।