Saturday, June 30, 2012

कथा यात्रा की सनद


पत्रिका: सनद,  अंक: 12, वर्ष: 3,  स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: फ़जल इमाम मलिक, पृष्ठ: 84, मूल्य: 25 रू.(वार्षिक 100 रू.), वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, ईमेल: , फोन/मोबाईल: 9868018472 , सम्पर्क: 4बी, फ्रेंडस अपार्टमेंट्स, मधु विहार, गुरूद्वारा के पास, पटपड़गंज नई दिल्ली 110092
साहित्यिक पत्रिका सनद के समीक्षित अंक में विचारयोग्य कहानियों को प्रकाशन किया गया है। अंक में विपिन विहारी, जितेंद्र कुमार, मनीष कुमार सिंह, नदीम अहमद, पुष्पलता कश्यप की कहानियां विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अफ़जल इमाम, श्रिम खेडि़या, नवल जायसवाल, शैली खत्री, सुलतान अहमद, शैल कुमारी, रितेंद्र अग्रवाल, प्रमोद त्रिवेदी, रति सक्सेना, अलीक, भगवानदास एजाज तथा कृपाशंकर शर्मा अचूक के गीत ग़ज़ल तथा कविताओं में नवीनता हैं दस्तावेज के अंतर्गत फैज अहमद फैज का आलेख प्रभावित करता है। रमणिका गुप्ता का आलेख स्त्री मुक्ति के सपनों का यथार्थ वर्तमान नारी मुक्ति आंदोलन पर नए सिरे से विचार है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा आलख्ेा भी विशिष्ठ हैं। 

साहित्य सागर का नया अंक


पत्रिका: साहित्य सागर,  अंक: जून , वर्ष: 11,  स्वरूप: मासिक, संपादक: कमल कांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20 रू.(वार्षिक 240 रू.), वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, ईमेल: , फोन/मोबाईल: 0755.4260116, सम्पर्क:  161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर , बाग मुगलियां, भोपाल म.प्र. 
साहित्य सागर के समीक्षित अंक में हिंदी जगत की ख्यात कथाकार मालती वसंत के समग्र व्यक्तित्व को समेटने 
का सार्थक प्रयास किया गया है। अंक में उनके व्यक्तित्व पर कृष्ण कमलेश, सतीश दुबे, सतीश राज पुष्करणा, महेश सक्सेना, अक्षय कुमार जैन, लीला मौरे, दिवाकार शर्मा, विद्यासागर जोशी, कमलकांत सक्सेना, युगेश शर्मा, आशीश कुमार धुलधौये तथा शरदनारायण खरे के आलेख प्रभावित करते हैं। अन्य रचनाओं में ब्रहम्जीत गौतम, आकांक्षा सक्सेना, डाॅ. उपाध्याय, चद्रसेन विराट से साक्षात्कार तथा भवेश दिलशाद की समीक्षा विशिष्ठ है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है। 

Friday, June 29, 2012

कनाड़ा से प्रकाशित हिंदी चेतना


पत्रिका: हिंदी चेतना,  अंक: 52, वर्ष: 13,  स्वरूप: त्रैमासिक, प्रमुख संपादक: श्याम त्रिपाठी, संपादक: सुधा ओम ढीगरा, पृष्ठ: 84, मूल्य: प्रकाशित नहीं, ई मेल: ,वेबसाईट: , फोन/मोबाईल: , सम्पर्क 6 Larksmera Court, Markham, Ontario L3R, 3R1 
हिंदी चेतना का समीक्षित अंक हिंदी साहित्य ही नहीं विश्व की किसी भी  भाषा व उसके साहित्य के लिए बेजोड़ अंक है। पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्य की लगभग प्रत्येक विधा की रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। ख्यात कथाकार एच.आर. हरनोट से संपादक सुधा ओम ढीगरा की बातचीत है। यह बातचीत रचना विशेषकर कथा में प्रयोगधर्मिता का विरोध करती है। पत्रिका में प्रकाशित कहानियों में मरीचिका(सुदर्शन प्रियदर्शनी), सफेद चादर(अनिल प्रभाकुमार) एवं बांझ(शाहिदा बेगम शाहीन) मंे कथानक का नयापन बरबस मोह लेता है। डाॅ. सुरेश अवस्थी का व्यंग्य आलेख तथा अखिलेश शुक्ल का हरिशंकर परसाई जी पर संस्मरण पत्रिका के अन्य आकर्षण हैं। नीरज मैथानी, सुधा भार्गव तथा रामकुमार आत्रेय की लघुकथाएं पठनीयता लिए हुए हैं। रश्मि प्रभा, कादम्बिनी मेहरा, शशि पाधा, नरेन्द्र सिंहा, निर्मल गुप्ता, शकुन्तल बहादुर, श्यामल सुमन की कविताएं समसामयिक विषयों की श्रेष्ठतम प्रस्तुति है। मोहम्मद आजम, नवीन सी चतुर्वेदी, कंचन चैहान, रचना श्रीवास्तव, वंदना मुकेश एवं मंजु मिश्रा की ग़ज़लें क्षणिकाएं उल्लेखीय हैं। सभी स्तंभों के अंतर्गत प्रकाशित आलेख विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। मधु अरोड़ा, विजय शर्मा, दया दीक्षित, स्टीवन गुगर्दी, रमेश रोनक, संध द्विवेदी, शानू सिन्हा तथा चित्र काव्यमाला में अन्य अंकों के समान आकर्षण है। साहित्य मंे अनावश्यक मुददों को वेवजह प्रस्तुति को लेकर संपादक सुधा ओम ढीगरा का संपादकीय विचारणीय है। विश्व में हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति तथा प्रचार प्रसार पर प्रधान संपादक श्याम त्रिपाठी जी का आलेख चिंतन के नए द्वार खोलता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है। 

Monday, June 25, 2012

त्रैमासिक पत्रिका साहित्य परिक्रमा का नया अंक


पत्रिका: साहित्य परिक्रमा,  अंक: अपै्रल-जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: जीत सिंह जीत, मुरारी लाल गुप्त,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09425.407471, सम्पर्क:  राष्ट्रोस्थान भवन माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क ग्वालियर म.प्र. 
साहित्य जगत की स्थापित पत्रिका साहित्य परिक्रमा का समीक्षित अंक ख्यात साहित्यकार लेखक कवि आलोचक रामनारायण त्रिपाठी पर्यटक जी पर एकाग्र है। उनके समग्र व्यक्तित्व पर अच्छे संग्रह योग्य आलेख पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं। इन आलेखों में डाॅ. बलवंत जानी, नरेन्द्र कोहली, श्रीधर पराड़कर, यतीन्द्र तिवारी, मोहन आनंद, विनय दीक्षित के लेख प्रमुख है। समकालीन विषयों पर उदय प्रताप सिंह, हमलता जायसवाल तथा रवीन्द्र कुमार उपाध्याय के लेख प्रभावित करते हैं। सुरेखा शर्मा, रामगोपाल भावुक, नरेन्द्र चतुर्वेदी ओम वर्मा की कविताएं विशिष्ट हैं। गार्गीशंकर मिश्र, शिवचरण सेन, मनोहरलाल आनंद की लघुकथाओं मेें नवीनता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती हैं। 

Sunday, June 24, 2012

आपके लिए लगातार 46 वर्ष से साहित्य में ‘‘संबोंधन’’


पत्रिका: संबांधन,  अंक: अप्रैल-जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: कमचर मेवाड़ी,  आवरण/रेखाचित्र: मीना पुरवार, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 80रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 02962.223221, सम्पर्क: संबोधन त्रैमासिक, पोस्ट कांकरोली, जिला राजसमंद, राजस्थान 
46 वर्ष पुरानी पत्रिका संबांधन का समीक्षित अंक साहित्य की श्रेष्ठतम रचनाओं से युक्त है। अंक में महेन्द्र नेह, मकबूल फिदा हुसैन तथा नूर मोहम्मद नूर की कविताएं समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है जिसपर प्रायः कम ही ध्यान दिया जाता है। प्रशंगवश के अंतर्गत विमर्शो के चक्रवात मंे तीन नाम आलेख जानकारीपरक है। राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष वेद व्यास से हुसैनी बोहरा की बातचीत साहित्य के संदर्भो की जांच पड़ताल करती है। कृष्णा अग्निीहोत्री की डायरी के पृष्ठ पाठकों को अपने से जान पड़ते हैं। सतीश दुबे की कहानी व शमोएल अहमद का संस्मरण स्तरीय व पठनीय है। इंदिरा दांगी कहानी की कहानी करिश्मा ब्यूटी पार्लर नवसमाज की विसंगतियों की ओर संकेत कर उनपर प्रहार करती है। अख्तर यूसूफ की कविताएं भी पत्रिका के कलेवर का सहजता व सरसता प्रदान करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व आलेख व उल्लेखनीय हैं। 

साहित्य में ‘‘अविराम’’


पत्रिका: अविराम,  अंक: अपै्रल-जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मध्यामा गुप्ता,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 32, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 090543712, सम्पर्क: एफ 488/2, गलीन नम्बर 11, राजेन्द्र नगर, रूड़की जिला हरिद्वार उ.खण्ड 
साहित्य की नवीन पत्रिका अविराम का समीक्षित अंक लघुकथा विशेषांक है। वर्तमान में लघुकथा विधा को लेकर अन्य कई पत्रिकाओं ने विशेष अंक निकाले हैं जिनमें समसामयिक विषयों को उठाते हुए अनेक लघुकथाएं प्रकाशित की गई है। उसी क्रम में पत्रिका की लघुकथाएं भी एक अच्छा प्रयास है। अंक में लघुकथा विधा पर अनेक आलेख, समीक्षाएं, लघुकथाएं तथा विचार आदि प्रकाशित किए गए हैं। अंक में छोटे से स्थान पर जानकारीपरक तथा संग्रह योग्य साहित्य उपलब्ध कराने का पत्रिका का प्रयास सराहनीय है।

Thursday, June 14, 2012

साहित्य की उत्कृष्ट पत्रिका ‘‘परिधि’’


पत्रिका: परिध 10,  अंक: जनवरी 2012, स्वरूप: अनियतकालीन, संपादक: सुरेश आचार्य, अनिल कुमार जैन,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 82, मूल्य: 30रू.(वार्षिक --रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 07582233140, सम्पर्क: पुराना पोस्ट आॅफिस के पास, बड़ा बाजार, सागर म.प्र. 
हिंदी तथा उर्दू जबानों की खुबसूरती को सहेजकर प्रस्तुत करने वाली पत्रिका परिधि का समीक्षित अंक समसामयिक रचनाओं से युक्त है। अंक में प्रमुख रूप से ग़ज़लों, लघुकथाओं तथा कहानियों को प्रमुख रूप से स्थान दिया गया है। आनंद स्वरूप श्रीवास्तव, सैयद अली मजर हासिमी, सुरेश आचार्य के लेख तथा व्यंग्य प्रभावित करते हैं। कहानियों में मंजूर एहतेशाम की कहानी विशिष्ठ है। निरंजना जैन, कुमार शर्मा, वल्लभ लाल बच्चन तथा रघुनंदन चिले की कहानियों में नवीनता है। ग़ज़लों में चंद्रसेन विराट, क्रांति जबलपुरी, अशोक गुलशन सहित अन्य रचनाकारों की ग़ज़लें उत्तम है। पत्रिका केे गीत कविताएं, मुक्तक तथा अन्य रचनाएं भी स्तरीय है।