
हिंदी व उर्दू जबान में विगत 43 वर्ष से निरंतर प्रकाशित इस पत्रिका का प्रत्येक अंक गांधीवादी साहित्य के साथ साथ आम पाठकों को हिंदी से जुडे विभिन्न विषयों पर जानकारीपरक लेख उपलब्ध कराता है। समीक्षित अंक में गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर पर एकाग्र आलेख पत्रिका की विशेष उपलब्धि है। इंद्रनाथ चौधरी तथा रणजी त सिंह साहा ने उनके समग्र व्यक्तित्व पर अच्छा विश्लेषण प्रस्तुत किया है। इसके अतिरिक्त भारतीय साहित्य की अवधारणा(डॉ. नरहरि प्रसाद दुबे), सर्वहारा वर्ग के समर्थकःकेदारनाथ अग्रवाल(डॉ. अमर सिंह वधान), राही की शायरी(राजेन्द्र वर्मा) एवं सूफी कविता और भारतीय विचारधारा(रजनीथ एम) शोधार्थियों के साथ साथ आम साहित्यप्रेमियों के लिए विशिष्ट महत्व के हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, पुस्तक समीक्षाएं तथा पत्र-समाचार आदि स्तरीय हैं। पत्रिका का उर्दू खण्ड भी अच्छी पठनीय सामग्री उपलब्ध करा रहा है।
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