Thursday, February 27, 2014

ख्यात पत्रिका समावर्तन का फरवरी अंक

पत्रिका: समापवर्तन,  अंक: फरवरी2014, स्वरूप: मासिक, संपादक: मुकेश वर्मा, निरंजन श्रोत्रिय,  आवरण/रेखाचित्र: अक्षय आमेरिया, पृष्ठ: 64, मूल्य: 150रू.(वार्षिक 1500रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0734.2524457, सम्पर्क: ‘‘माधवी’’ 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
विगत छः वर्ष से लगातार हिंदी साहित्य की अग्रणी पंक्ति में शामिल इस पत्रिका का स्वरूप निरंतर निखरता गया है। इस ब्लाग पर पत्रिका के अनेक ख्यातअंकों की समीक्षा की गई है। यह अंक भी अपने पूर्ववर्ती अंकों के समान साहित्यमर्मज्ञों तथा आम पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी व संग्रह योग्य है। यह अंक ख्यात साहित्यकार अभिमन्यु अनत तथा सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित रघुनाथ सेठ पर एकाग्र है। अनत जी का आत्मकथ्य ‘‘मैं जब चरित्रहीन पढ़ रहा था’’ उनके लेखक होने की पीड़ा का मार्मिक दस्तावेज है। उनकी कविताएं विशेष रूप से गंूगा इतिहास, चार भाव विचारयोग्य है। माॅरिशस तथा काफी हाउस पर उनके विचार देश विदेश में हिंदी साहित्य के विकास व विस्तार पर विचार है। गोयनका जी ने उनका साक्षात्कार लिया है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि सृजन प्रक्रिया भोगी हुई पीढ़ा की पुनरावृत्ति होती है। कथन स्पष्ट करता है कि वे साहित्य के लिए किस हद तक व कितने अधिक समर्पित हैं। अविनाश मिश्र की कविताएं (संपादक निरंजन श्रोत्रिय का चयन), ख्यात आलोचक धनंजय वर्मा का दर्दे बयां ‘‘खुतूत से नुमाया तक’’, विनय मिश्र, संजय कुंदन की ग़ज़लें कविताएं दिन ब दिन बदल रहे हालातों पर सच्ची प्रतिक्रिया है। रमेश दवे, प्रभाकर श्रोत्रिय जी के आलेख धर्मपाल की रचना पत्रिका के अन्य आकर्षण हैं। ख्यात आलोचक लेखक कृष्णदत्त पालीवाल, विनोद शाही, नर्मदा मर्मज्ञ अमृतलाल बेंगड़ का भाषान्तर अंतर्मन की गहराई तक पाठक को प्रभावित करते हैं। स्व. डाॅ. हरिकृष्ण देवसरे का आलेख बांसुरी की सरसता तथा मधुरता का मार्मिक चित्रण है। पंडित रघुनाथ सेठ के संगीत योगदान पर जगदीश कौशल का लेख तथा उनसे रफी शब्बीर एवं सुनीरा कासलीवाल की बातचीत सातों सुर की मधुरता संजोए हुए है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है। पत्रिका समावर्तन के संग्रह योग्य सृजन प्रस्तुतिकरण के लिए माननीय श्री प्रभात कुमार भटटाचार्य जी विशेष रूप से बधाई के पात्र हैं जिनके अथक प्रयासों से हिंदी को अमूल्य व संग्रह योग्य रचनाएं प्राप्त हो रही है।

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