Tuesday, March 29, 2011

गणित के साथ साथ अब साहित्य में भी समावर्तन

पत्रिका : समावर्तन, अंक : मार्च 2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : रमेश दवे, पृष्ठ : 98, मूल्य : 25रू(वार्षिक 250रू.), ई मेल : samavartan@yahoo.com , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0734.2524457, सम्पर्क : माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन 456010 (म.प्र.)
साहित्यसंस्कृति पत्रिका समावर्तन का यह अंक आंशिक रूप से ख्यात कवि अज्ञेय जी पर एकाग्र है। संपादक रमेश दवे ने उन्हें शताब्दी का ॔शब्द पुरूष’ कहा है। यह अज्ञेय जी के संदर्भ में एक सटीक कथन हैं नंद दुलारे वाजपेयी, रीतारानी पालीवाल, विद्यानिवास मिश्र, नयना डेरीवाला, कृष्ण बिहारी मिश्र एवं कृष्ण दत्त पालीवाल के अज्ञेय जी के समग्र व्यक्तित्व पर लिखे गए आलेख प्रभावित करते हैं। पत्रिका ने रघुवीर सहाय द्वारा उनसे लिया गया साक्षात्कार साहित्य के नए पाठकों के लिए पुनप्रकाशित किया है। दिनकर कुमार, रमेश शर्मा एवं रवीन्द्र स्वप्निल प्रजापति की कविताएं जन सामान्य की काव्यात्मक अभि व्यक्ति कही जा सकती है। देवांशु पाल, संतोष सुपेकर की लघुकथाओं के साथ ही रंजना जायसवाल की कहानी आज के बदलते परिवेश को स्पष्ट करने में सफल रही है। पत्रिका का दूसरा खण्ड विश्वप्रसिद्ध चित्रकार वॉन गाग पर एकाग्र है। उनके भाई थियों को लिखे गए पत्र मार्मिक व प्रेरणास्पद हैं। पाश्चात्य कला समीक्षक एल्बेयर ऑरियर का लेख इस अंक की प्रमुख कला उपलब्धि कही जा सकती है। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जन संदेश, कानपुर में प्रकाशित हो चुकी है।)

3 comments:

  1. अज्ञेय और शमशेर के शताब्दी वर्ष में इन पर पत्र-पत्रिकाओं में अच्छे लेख पढ़ने को मिल रहे हैं। आपके माध्यम से अच्छी जानकारी मिलती है पत्र-पत्रिकाओं की, यह एक स्तुतीय कार्य है। साधुवाद स्वीकारें:)

    ReplyDelete
  2. आपके माध्यम से अच्छी जानकारी मिलती है पत्र-पत्रिकाओं की

    ReplyDelete