Friday, December 4, 2009

साहित्य के क,ख, ग से ‘अक्षरा’ तक

पत्रिका-अक्षरा, अंक-नवम्बर..दिसम्बर.09, स्वरूप-द्वैमासिक, प्रधान संपादक-कैलाश चंद्र पंत, प्रबंध संपादक-सुशील कुमार केडिया, संपादक-डाॅ. सुनीता खत्री, पृष्ठ-120, मूल्य-20रू, (वार्षिक 120रू.), सम्पर्क-म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, हिंदी भवन, श्यामला हिल्स, भोपाल म.प्र. फोनः(0755)2661087,
पत्रिका के इस अंक में लोहिया जी ख्यात आलोचक श्री रमेश चंद्र शाह का आलेख धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकताःसंदर्भ लोहिया प्रमुख आलेख के रूप में प्रकाशित किया गया है। अन्य आलेखों में मिशनरी आक्रमण और म्यूनिख भावना(शंकर शरण), हिंदी बाल कविता अभिव्यक्ति के नए रंग और छवियां(प्रकाश मनु), निर्गुण कवियों की सामाजिक दृष्टि(सुधांशु कुमार मालवीय) प्रमुख हैं। स्त्री विमर्श पर करूणाशंकर उपाध्याय का आलेख कुछ अधूरा सा लगता है। इसमें वह गंभीर चिंतन नहीं है जिसकी अपेक्षा की जाती है। बालकवि बैरागी जी का संस्मरण पठ्नीय तथा रोचक बन पड़ा है। नियति सप्रे का यात्रा वृत्तांत ‘मेरी यादों में बसा ईराक’ बहुत हद तक रिपोतार्ज जैसा हो गया है जिससे सामान्य पाठक को इसे पढ़ने में यात्रा सा आनंद प्राप्त नहीं होता। तोलस्ताय की कहानी ‘प्रेम एक पुर्नजन्म’(विश्वप्रसिद्ध उपन्यास युद्ध और शांति का एक अंश) का अनुवाद पढ़कर लगता है लेखक को रूसी भाषा एवं साहित्य की जानकारी नहीं है। यह अनुवाद रूस से अंग्रेजी में अनुवादित उपन्यास ‘युद्ध और शांति’ से किया गया लगता है। इसकी वजह से अनुवाद दुरूह हो गया है। कला जोशी की कहानी अनुबंध अच्छी है। ख्यात कवि लेखक रामदरश मिश्र, देवव्रत जोशी एवं रामकुमार आत्रेय की कविताएं आज के संदर्भो से जुडी दिखाई देती है। विद्या गुप्ता की कहानी स्वप्न जया... एवं सतीश दुबे की लघुकथा तेल की धार अंक की अच्छी रचनाओं में शामिल की जा सकती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं समीक्षाएं व पत्र आदि भी स्तरीय व समसामयिक हैं।

2 comments:

  1. अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

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  2. बहुत सुंदर जानकारी

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