Friday, March 29, 2013

हिंदी साहित्य की विशिष्ठ खूबियों वाली पत्रिका समावर्तन

पत्रिका-समावर्तन, अंंक-मार्च2013, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-रमेश दवे, मुकेश वर्मा, पृष्ठ-90, रेखांकनग्राफिक्स : अक्ष्य आमेरिया, मूल्य- 30रू. (वार्षिक 360 रू.), वेवसाइट -उपलब्ध नहीं, फोन : 0734.2524457, इमेल- , संपर्क : माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
    समावर्तन साहित्य की प्रमुख पत्रिका है। पत्रिका दिनप्रतिदिन नए मुकाम हासिल करती जा रही है। वर्तमान अंक में पूर्ववर्ती अंकों के समान विशिष्ठ रचनाओं का समावेश किया गया है। अंक को आंशिक रूप से ख्यात कवि दिनकर सोनवलकर व रंगकर्मी विष्णु पाठक पर एकाग्र किया गया है। दिनकर जी पर एकाग्र रचनओं में रमेश चंद्र खरे, प्रमोद त्रिवेदी, मीरा सोनवलकर, वनिता उपासनी, आर्इशा खान, सतीश श्रोत्रिय, प्रभात भटटाचार्य, शिव चौरसिया, व निरंजन श्रोत्रिय से दिनकर जी की बातचीत प्रमुख है। रघुनंदन चिले, तारिक असलम की लघुकथाएं तथा सुदर्शन पिय्रदर्शनी की कहानी विशेष रूप से प्रभावित करती है। कविताओं में राधेलाल विजघावने, मणि मोहन, वेद हिमांशु, हरीश दुबे की कविताएं उल्लेखनीय है। विष्णु पाठक जी पर एकाग्र रचनाओं में अंजना चतुर्वेदी, भोलाराम भारतीय, राजेश श्रीवास्तव के लेख प्रमुख हैं। आदित्य विक्रमसिंह, गफूर तायर, श्रीराम दवे तथा मुकेश वर्मा के स्तंभ पत्रिका के अन्य अंकों की तरह नयापन लिए हुए हैं। पत्रिका का कलेवर, साज सज्जा व प्रस्तुति प्रभावित करती है।

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