Thursday, October 27, 2011

संबोधन का जुलाई-सितम्बर अंक

पत्रिका: संबोधन, अंक: जुलाई-सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: कमचर मेवाड़ी, पृष्ठ: 190, मूल्य: 20रू (वार्षिक: 80रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 02952223221, सम्पर्क: पोस्ट कांकरोली, जिला राजसमंद राजस्थान

पत्रिका संबोधन का समीक्षित अंक महिला कथाकार विशेषांक है। अंक में प्रायः प्रत्येक वर्ग की प्रतिनिधि रचनाओं को स्थान दिया गया है। अंक की कहानियों में प्रमुख साम्य यह है कि वे इन कथाकारों की प्रतिनिधि कहानियां है। इन कहानियों को पुनः पढ़ना एक सुखद अनुभव है। युवा समीक्षक आलोचक पल्लव का समीक्षात्मक लेख पत्रिका में प्रकाशित कहानियों पर संक्षेप में प्रकाश डालता है। इन कहानियों में एक प्लेट सैलाब(मन्नू भण्डारी), इमाम साहब(नासिरा शर्मा), प्रेम(ममता कालिया), भूख(चित्रा मुदगल), कांसे का ग्लास(सुधा अरोडा), प्रमुख स्त्री के बीच(ज्योत्सना मिलन), गृह प्रवेश(मालती जोशी), चीख(उर्मिला शिरीष), स्वयं से किय ाग या वादा(स्वाति तिवारी), केयार आॅफ स्वात घाटी(मनीषा कुलश्रेष्ठ), अललटप्पू(सुषमा मुनीन्द्र), अपनी तरफ लौटते हुए(जयश्री राय) तथा जिसे में फोन नहीं करती(इंदिरा दांगी) प्रमुख हैं। वहीं दूसरी ओर सीमा थापक, मीनाक्षी स्वामी, शाइस्ता फ़ाखरी, रूचि बागड़देव तथा नीता श्रीवास्तव की कहानियों में वह पैनापन नहीं लगा जिसके लिए कहानी विधा जानी पहचानी जाती है। पत्रिका का कलेवर, साज सज्जा सादगीपूर्ण है व सहज ही आकर्षित करता है।

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