Saturday, February 26, 2011

ग्वालों के काव्य की जमीनी सांस्कृतिकता-‘प्रचार परिषद पत्रिका’

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: जनवरी 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. वि.रामसंजीवैया, डाॅ. मनोहर भारती, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी नहीं, मूल्य: 5रू.यह अंक(वार्षिक 50), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 080.23404892, सम्पर्क: 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजीनगर, बेंगलूर कर्नाटक
कर्नाटक से प्रकाशित हिंदी साहित्य की इस महत्वपूर्ण पत्रिका में जन-उपयोगी आलेखों का प्रकाशन किया गया है। अंक में राज सक्सेना, विजय प्रकाश बेरी, विद्याश्री, डाॅ. मित्रेश कुमार गुप्त, गणेश गुप्त, सोनवणे राजेन्द्र अक्षत, डाॅ. राठोड एम.डी., विलास सालुके, डाॅ. परमानंद पांचाल, पटेल शर्मिला जी तथा दुर्गाशंकर त्रिवेदी के विचारपूर्ण आलेखों का प्रकाशन किया गया है। देवेन्द्र कुमार मिश्रा, किशन लाल शर्मा एवं रमाकांत श्रीवास्तव की कविताएं प्रभावशली हैं। पत्रिका की विश्लेषणात्मक विचारणीय रचना प्रो. बी.वै. ललिताम्बा का आलेख ‘ग्वालों के काव्य की ज़मीनी सांस्कृतिकता’ है।

1 comment:

  1. इस सुंदर जानकारी के लिये धन्यवाद

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