पत्रिका: प्रेरणा, अंक: जनवरी-जून10(संयुक्तांक), स्वरूप: त्रैमासिक, संपादकः अरूण तिवारी, पृष्ठ: 248, मूल्य:20रू.(.वार्षिक 100रू.), ई मेल:, वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.2422109, सम्पर्क: ए-74, पैलेस आर्चड़, फेज़-3, सर्वधर्म के पीछे, कोलार रोड़, भोपाल म.प्र. 462042
ख्यात पत्रिका पे्रेरणा का समीक्षित अंक कविता अंक है। अंक में कविताओं के साथ साथ विभिन्न उपयोगी व पठनीय आलेखों का प्रकाशन भी किया गया है। विमर्श के अंतर्गत साहित्य में माफियावाद(मदन मोहन उपेन्द्र) एवं लेखक संगठनों को मजबूत करने की जरूरत(मुशर्रफ आलम जौकी) तथा छंदबद्ध एवं छंद मुक्त की बहस गैर जरूरी(केवल गोस्वामी) काफी विश्लेषण युक्त आलेख हैं। कविता एवं अन्य विषयों पर प्रकाशित आलेखों में भगवत रावत, कमल किशोर गोयनका, सरेन्द्र वर्मा, श्रीप्रकाश मिश्र, अमिताभ मिश्र, वीरेन्द्र सिंह, उदयभानु हंस एवं अनिरूद्ध सिन्हा ने कविता विधा पर विस्तार पूर्वक विचार व्यक्त किए हैं। आज के वातावरण व संस्कृति में हो रहे पश्चिमीकरण पर चिंतन के अंतर्गत काफी कुछ कहा गया हैै। जयंत देशमुख, रंजना श्रीवास्तव, प्रद्युम्न भल्ला, दया दीक्षित, मुकुट सक्सेना, सुमन केशरी, ललन राजपूत के लेखों में वर्तमान समय की विसंगतियों व विरोधाभाषों का स्वर मुखर हुआ है। अनेक कविताएं अंक को एक सार्थक कविता का संसार युक्त अंक का स्वरूप प्रदान करती है। परमानंद श्रीवास्तव, डाॅ. रामदरश मिश्र, हरदयाल, अजामिल, केवल गोस्वामी, प्रमोद त्रिवेदी, कमर मेवाड़ी, रामकुमार आत्रेय, भरत प्रसाद, पूर्णचंद्र रथ, अरूण शीतांश, शोभनाथ यादव, सुभाष रस्तोगी, संतकुमार टण्डन, शशिभूषण त्रिवेदी, हितेश व्यास, राजेन्द्र परदेसी, हरिशंकर अग्रवाल, प्रेमशंकर रघुवंशी, बलराम गुमास्ता, संतोष चैबे, शिवसिंह पतंग, तसवीर त्यागी, राधेलाल विजघावने, राजेन्द्र वर्मा, मनोज कुमार झा, श्री रंग, केशवशरण, वरूण कुमार तिवारी, रामनाथ शिवेन्द्र, नीरज कुमार, राजेन्द्र जोशी, मुकुट सक्सेना, प्रांजल धर, संजीव ठाकुर, राजेन्द्र जोशी, मंजरी श्रीवास्तव, केशव तिवारी, विजय सिंह, अनवर सुहैल, महेश चंद्र पुनेठा, रमेश प्रजापति, सुरेन्द्र अग्निहोत्री, ओम नागर, राहुल झा, संतोष श्रेयांस, नंद किशोर, राग तेलंग, माधव नागदा, रंजना श्रीवास्तव, नरेन्द्र गौड़, उषा प्रारंब्ध, किरण श्रीवास्तव, सरिता शर्मा, शशि भूषण बड़ोनी, प्रज्ञा रावत, सुशांत सुप्रिय, नूर मोहम्मद नूर, राजेन्द्र ग्रोवर, अनुज शर्मा, नरेश कुमार उदास, जयश्रीराय, मोतीलाल, तारिक असलम तस्लीम, रेणुका शिरहट्टी, पदमा शर्मा, सिद्धेश्वर, विवेक सत्यांशु, ओमप्रकाश मिश्र, तेजराम शर्मा, नील मणि शर्मा, वंदना मिश्र, प्रभा मजूमदार, बसंत सकरगाएं, पूर्णिमा ढिल्लन, दिनेश पाराशर, रजनीकांत पाण्डेय, श्रीमती सुगत कुमारी, कुलविंदर सिंह, शाश्विता, शेख मुहम्मद कल्याण, जोलनी मकीचा, इंद्रअमर्थनयगम, डेरिक वाल्काॅट, जेवहिर स्पेहियू एवं जैकी के की कविताएं प्रत्येक क्षेत्र व वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। गीतों में अनिरूद्ध नीरव, कुमार रवीन्द्र, सुरेन्द्र दीप, निेश अनिकेत, नचिकेता, परशुराम शुक्ल विरही, ओम उपाध्याय, श्रीमती मधु प्रसाद, संजय मालगुजार, चंद्रसेन विराट, सरोनी प्रीतम के गीत प्रमुखता से पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं। अशोक अंजुम, नवल जायसवाल, अश्रवघोष, सीमा फरीदी, अंजुदुआ जैमिनी, भगवानदास जैन, नरेश हमिलपुरकर की ग़ज़लें उम्दा बन पड़ी हैं। विनय उपाध्याय का रंगमंच पर एकाग्र आलेख एवं अभिनव तैलंग का मधुबाला पर लेख पत्रिका की विविधतापूर्ण सामग्री है। पत्रिका में प्रकाशित पुस्तक चर्चा व अन्य रचनाएं भी पाठक के रसास्वादन में वृद्धि करती हैं। पत्रिका के अच्छे अंक व विशेषांक के लिए बधाई।

1 تعليقات

  1. इतने सारे महत्‍वपूर्ण नाम एक साथ, निश्‍चय ही अंक पठनीय और संग्रहणीय होगा.

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