Friday, September 18, 2009

एक सुंदर संतुलित अंक- संदर्भ सृजन पथ 07

पत्रिका-सृजन पथ, अंक-07 वर्ष.09, स्वरूप-अनियतकालीन, संपादक-रंजना श्रीवास्तव, पृष्ठ-74, मूल्य-25रू.(वार्षिक 100रू.), संपर्क-श्री पल्ली लेन नं. 02, पो. आॅ. सिलीगुड़ी बाजार, सिलीगुड़ी(प. बंगाल) मो. 09933946886 ई मेलः ranjananishant@yahoo.co.in

समीक्षित पत्रिका सृजनपथ का अंक कविता अंक है। पत्रिका की रचनाएं प्रभावशाली व पठ्नीयता से भरपूर है। गुलज़ार की खुबसूरत नज़्में मन को छू लेती है। मैत्रेयी के लेखन पर रंजना श्रीवास्तव का आलेख उनके लेखन की परिपूर्णता को उजागर करता है। इमरोज का रचना विमर्श तथा डाॅ. परमानंद श्रीवास्तव का आलेख पत्रिका की गंभीर व विचारणीय रचनाएं हैं। लोक साहित्य के अंतर्गत जिस बेबाकी से विद्या सिन्हा ने अपने आलेख ‘अंगिका लोक गीत मंे व्यक्त किया है वह पढ़ने योग्य है। नरेन्द्र पुण्डरीक तथा योगेन्द्र कृष्णा के आलेख भी सहेज कर रखने योग्य हैं। अनामिका, कमलेश्वर साहू, नीलोत्पल, मोहन कुमार डहेरिया, रमेश प्रजापति तथा प्रत्यक्षा की कविताएं समकालीन विचारों को व्यक्त करती हैं। जया जादवानी का आत्म कथ्य किसी कथा से कम नहीं है। कंचन शर्मा, मुनव्वर राणा, इन्दु श्रीवास्तव, अशफ़ाक अहमद सिद्दकी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। पत्रिका के संुदर संतुलित तथा उपयोगी अंक के लिए बधाई।

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