Saturday, April 18, 2009

पत्रिका समकालीन परिदृश्य का आईना है। (संदर्भ प्रगतिशील आकल्प)

पत्रिका-प्रगतिशील आकल्प, अंक-जनवरी-मार्च.09, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-डाॅ. शोभनाथ यादव, पृष्ठ-20, मूल्य-आजीवन रू.1000, संपर्क-पंकज क्लासेस, पोस्ट आॅफिस बिल्ंिडग, जोगेश्वरी (पूर्व) मुम्बई (भारत)
पत्रिका के समीक्षित अंक में डाॅ. शिवनारायण को आत्म संघर्ष सहित दो महत्वपूर्ण कहानियां शामिल हैं। कहानी शिकार(बिपिन विहारी) तथा मोमी चूर के लड्डू(श्याम कुमार पोकरा) जीवन संघर्ष की कहानियां हैं। डाॅ. बालशौरि रेड्डी का आलेख राष्ट्रभाषा हिंदी और महात्मा गाॅधी’ गाॅधी का राष्ट्रभाषा के विकास के लिए योगदान को विस्तार से बताता है। युगेश शर्मा, कौशल चंद्र पाण्डेय तथा देवेन्द्र सौरभ की लघुकथाएं वर्तमान परिस्थियों पर केन्द्रित सृजन है। हूबनाथ पाण्डेय, कुतल कुमार जैन, जगमोहन आजाद केशव शरण तथा अशोक भाटिया की कविताएं कम्प्यूटर युग का प्रतिनिधित्व करती हैं। अन्य स्थायी स्तंभ भी पत्रिका को उत्कृष्ट बनाते हैं। पत्रिका समकालीन लेखन परिदृश्य का आईना है।
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