Wednesday, July 27, 2011

हिंदी साहित्य के ‘निकट’

पत्रिका: निकट, अंक: नवम्बर, अंक 4, स्वरूप: अर्द्धवार्षिक, संपादक: कृष्ण बिहारी, पृष्ठ: 84, मूल्य: 50रू (वार्षिक 100 रू.), ई मेल: krishnatbihari@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 00971505429756, सम्पर्क: P.O. Box No. 52088, Abudhabi, UAE

संयुक्त अरब अमीरात से प्रकाशित पत्रिका निकट केवल 4 वर्ष में ही देश की प्रमुख साहित्य पत्रिकाओं की श्रेणी में शामिल हो गई है। पत्रिका का समीक्षित अंक महिला विशेषांक है। पत्रिका का संपादक मंडल तथा विश्व में ब्यूरों प्रमुख जाने माने लेखक व साहित्यकार हैं, इससे पत्रिका की गंभीरता व उसकी स्वीकार्यता का पता चलता है। ख्यात लेखिका नासिरा शर्मा से अमरीक सिंह दीप की बातचीत साहित्य के साथ साथ वर्तमान साहित्यिक रूझान की ओर भी संकेत करती है। उन्होंने लेखन की विचारधारा से संबंधित प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया है, ‘‘लेखक के नजरिए से मैंने धर्म और विचारधाराओं को समझने की कोशिश जरूरत के अनुसार की है। मगन इनसे प्रभावित होकर लेखन कभी नहीं किया है।’’ यह बात नासिरा जी जैसी कथाकार ही कह सकती हैं, अन्यथा लेखक तो बातों को शब्दजाल में लपेटकर बात को गोलमोल कर जाते हैं। पत्रिका की एक नहीं सभी कहानियां विशिष्ठ हैं। उनमंें समाज की बुनावट को समझने की चेष्टा के साथ साथ आधुनिक परिवेश को भारतीय संदर्भ में व्यक्त करने का सफल प्रयास महिला विषयक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए दिखाई देता है। जया जदवानी, रजनी गुप्त, गीताश्री, इला प्रसाद, विजय शर्मा, सुधा ओम ढीगरा, उषा राय एवं अर्चना पून्थूली जैसे रचनाकारों के नाम नए नहीं है। लता शर्मा व राजवंश राय की लघुकथाएं लघु होते हुए भी विस्तृत केनवास को नेपथ्य में समेटती है। अंजना संधीर, रचना श्रीवास्तव, जोराम आनिया ताना, सुशीला पुरी, रेखा मैत्रा एवं प्रज्ञा पाण्डेय की कविताओं में भी भारतीय समाज के कल्याण का भाव दिखाई देता है। आकांक्षा पारे व बलवंत कौर के लेख स्तरीय व पठनीय हैं। पत्रिका का कलेवर व साज सज्जा प्रभावित करती है।

2 comments:

  1. अखिलेश जी
    आपने निकट की पठनीयता को उजागर करते हुए पत्रिका की बहुत सुन्दर की समीक्षा है
    पत्रिका के सारे अंगों को बेहद संतुलित तरीके से रखा है . बहुत खुशी हुई . आभार और आपको धन्यवाद भी .

    ReplyDelete
  2. आपका बहुत बहुत धन्यवाद अखिलेश जी ! आपने निकट के महिला विशेषांक की समीक्षा करते हुए सार्थक परिचय दिया है ! वास्तव में साहित्य की मुख्य धारा को संजोये हुए यह पत्रिका अपने आप में एक विशिष्ट स्थान रखती है ! आभार !

    ReplyDelete