Friday, March 4, 2011

नारी अस्मिता पर पुनर्विचार-‘प्रेरणा’

पत्रिका: प्रेरणा, अंक: 02 वर्ष 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: अरूण तिवारी, पृष्ठ: 204, रेखा चित्र/छायांकन: संदीप राशिनकर, नवल जायसवाल, राजेन्द्र परदेसी व अन्य, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 80), ई मेल: prarna_magazine@yahoo.com , वेबसाईट: http://www.prernamagazine.com/ , फोन/मो. 0755.2422109, सम्पर्क: ए-74, पैलेस आर्चड फेज 3, सर्वधर्म के पीछे, कोलार रोड़, भोपाल म.प्र.
ख्यात साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा का यह समीक्षित अंक नारी अस्मिता अंक के रूप में प्रकाशित किया गया है। इस विषय पर पूर्व में भी अन्य पत्रिकाओं के अंक सामने आ चुके हैं। लेेकिन नारी अस्मिता को लेकर पत्रिका में वर्तमान संदर्भो में विचार किया गया है। अंक में प्रकाशित रचनाओं में नारी की दयनीय दशा की अपेक्षा उसकी तत्कालिक जरूरतों पूर्ति हो। इसके साथ ही उसे समाज में प्रतिष्ठा मिले यह प्रकाशित आलेखों को मूल स्वर है। सूर्य कांत नागर, सुरेश पण्डित, भरत प्रसाद, रंजना जायसवाल, प्रभा दीक्षित, प्रमोद भार्गव, सुश्री शदर सिंह, विनीता रघुवंशी, किरण श्रीवास्तव, दीप्ति गुप्ता, कृष्ण शंकर सोनाने तथा दया दीक्षित के आलेख इस विषय को पुरजोर तरीके से उठाते दिखाई पड़ते हैं। डाॅ. निरूपमा राय, सतीश दुबे, जयश्रीराम एवं हुस्न तब्बस्सुम निहां की कहानियों में भी नारी के उत्थान के साथ साथ सम्मान दिलाने का आग्रह समाज से किया गया है। लता सुमंत, पूरन सिंह, सुरेन्द्र गुप्त एवं ज्ञानदेव मुकेश की लघुकथाएं भी प्रभावित करती हैं। प्रेमशंकर रघुवंशी, प्रकाश मिश्र, ऊषा यादव की कविताओं ने नवीनता व ताजगी महसूस की जा सकती है। दामोदर दत्त दीक्षित, नरेन्द्र गौड़ ने अपने आलेखों में पूरी संजीदगी के साथ विषय को उठाया है। पत्रिका की समीक्षाएं, अन्य रचनाएं व समाचार आदि भी उल्लेखनीय हैं। संपादकीय में संपादक अरूण तिवारी ने प्रारंभ में ही स्पष्ट कर दिया है कि ‘नारी अस्मिता विषय बहुत व्यापक है, अतः इसे संक्षेप में समेटना कठिन है।’ लेकिन फिर भी पत्रिका ने विषय को अच्छी तरह से समेटना का सफल प्रयास किया है।

1 comment:

  1. बहुत सुंदर जी, धन्यवाद

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