Thursday, November 25, 2010

मृत्युशास्त्र ही पढ़ने योग्य है(संपादकीय)-‘साहित्य सागर’

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: नवम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, सम्पादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, मूल्य:20रू.(वार्षिक 250रू.), ई मेल: , वेबसाईट: , फोन/मो. 0755.4260116, सम्पर्क: 161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र.
साहित्य सागर का समीक्षित अंक ख्यात रचनाकर्मी राजेन्द्र मिलन पर एकाग्र है। अंक मंे प्रकाशित अन्य रचनाओं में ब्रजबिहारी निगम, रमेश सोबती, माधवशरण द्विवेदी, पशुपति नाथ उपाध्याय, श्रीमती भारती राउत व नर्मदा प्रसाद त्रिपाठी की रचनाएं व आलेख प्रभावित करते हैं। सनातन कुमार वाजपेयी, आचार्य भगवत दुबे, जयसिंह आर्य, रामसहाय बरैया, चन्द्रसेन विराट, दामोदर शर्मा, मनोज जैन मधुर, कमला सक्सेना, गिरिमोहन गुरू एवं पे्रमलता नीलम की कविताएं आज के वातावरण को सटीक अभिव्यक्ति प्रदान करती है। पुष्पारानी गर्ग व प्रभात दुबे की लघुकथाएं भी स्तरीय व पठनीय हैं। डाॅ. राजेन्द्र मिलन पर प्रो. शरदनारायण खरे का लेख व उनके लेखन पर विभिन्न अभिमत अच्छी जानकारी प्रदान करते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी समयानुकूल व उपयोगी हैं।

1 comment: