Thursday, September 23, 2010

साहित्य में प्रासंगिकता सदैव विद्यमान रहती है-‘हिमप्रस्थ’

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: अगस्त 2010, स्वरूप: मासिक, संपादकः रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 56, मूल्य:5रू.(.वार्षिक 50रू.), ई मेल: himprasthahp@gmail.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: हिमाचल प्रदेश प्रिटिंग प्रेस परिसर, घोड़ चैकी, शिमला 5
हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित पत्रिका हिमप्रस्थ देश भर की साहित्यिक प्रतिभाओं को प्रमुखता से स्थान देती रही है। पत्रिका के इस अंक में किन्नौर में विवाह प्रथा(दिनेश कुमारी), हिमाचल की संघर्ष यात्रा(देवेन्द्र गुप्ता), डाॅ. यशवंत सिंह परमार: एक स्मृति शेष(श्रीनिवास श्रीकांत), क्वींस बेटन रिले का रोमांचकारी सफर(शमा राणा), पं. चंद्रधर शर्मा गुलेरी कालजयी कहानीकार(जयकरण) एवं हिमाचल प्रदेश प्रगति एवं स्वाबलंबन की ओर अग्रसर(मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल) लेख आकर्षित करते हैं। कहानियांे में चाबी(डाॅ. दिनेश चमोला ‘शैलेश’) एवं धरती मां का शाप(साधुराम दर्शक) सहित हन्दा(जसविंदर शर्मा) अच्छी व पठनीय हैं। मदमोहन शर्मा एवं प्रेम बिज की लघुकथाएं स्तरीय हैं। वंदना राणा, वीणा रैना, डाॅ. आदर्श, पवन चैहान, रचना गौड़ भारती एवं देवांशु पाल की कविताएं आम आदमी को खास बनने के लिए प्रेरित करती हैं। डाॅ. ओमप्रकाश सारस्वत का व्यंग्य आम आदमी खास आदमी’ कुछ अधूरा सा लगता हैं। अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी पढ़ने योग्य हैं।

3 comments:

  1. आप की समीक्षाएं हमेशा की तरह बहुत सुंदर, धन्यवाद

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  2. इतनी सुंदर और सस्ती सरकारी पत्रिका इस देश में और कोई नहीं है।

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  3. Is patrika me navodit lekhkon ko bhi avsar diya jata hai.himalayai sanskriti se judi atayant sunder hai.

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