Friday, April 16, 2010

आत्मीयता और अपनेपन के पाथेय की ‘साहित्य परिक्रमा’

पत्रिका: साहित्य परिक्रमा, अंक: अपै्रल-जून10, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मुरारीलाल गुप्त ‘गीतेश’, पृष्ठ: 92, मूल्य:15(दो वर्ष:100 रू.), ई मेल:shridhargovind@gmail.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0751.2422942, सम्पर्क: राष्ट्रोत्थान भवन, माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क ग्वालियर म.प्र.
साहित्य परिक्रमा का 41 वां अंक पंजाबी लेखक विशेषांक है। अधिकांश रचनाएं पंजाबी की हैै जिनका कुशलतापूर्वक अनुवाद श्री अश्विनी गुप्ता ने किया है। अंक में पंजाबी भाषा एवं साहित्य से जुड़े लेखकों को स्थान दिया गया है। पत्रिका में प्रकाशित रचनाओं की पठनीयता व सहज सरल संरचना मनमोहक है। अंक में प्रकाशित कहानियों में धर्मसंकट(बलबीर सिंह राणा), कला कंुज(विश्व ज्योति धीर), आलू खोजी(गुरमीत कडियालवी), मौत के पल(ओम वर्मा), कासनी के फूल(सांवल धामी), गिरती दीवारें(जतिन्द्र सिंह हांस) एवं रावत(जसवीर कलसी) शामिल हैं। पत्रिका में विवेक, इंद्रजीत चंदन एवं डाॅ. राजेन्द्र साहिल की लघुकथाएं भी उल्लेखनीय है। पत्रिका के व्यंग्य समाज व उसकी उदासीनत पर प्रहार करते दिखाई पड़ते हैं। मंगत कुलजिंदर एवं हरी कारीयान के व्यंग्यों में देखा जा सकता है। जतिनदर परवाज, हरविंदर राणा, त्रैलोचन लोसी, अनु बाला, कुलविंदर कुलाह, कविंद्र चांद, डाॅ. हरप्रीत रूबी, सुशील रहेजा की काव्य रचनाएं एवं ग़ज़लें आज के संदर्भो से पूरी तरह जुड़ी हुई हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं व समीक्षाएं भी आकर्षक है। संपादकीय आत्मीय और अपनेपन का पाथेय पत्रिका का सार तत्व प्रस्तुत करता है।

6 comments:

  1. bahut bahut shukria,
    lagta hai aapki patrika ki parikrama karni padegi.lifafa dekh ke mazmoon ka andaza to ho gaya hai.

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  2. aapki pratikriya ke liye dhanyavad
    murarilal gupt (sampadak sahitya parikrama)

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  3. hamara blog ka nam akhil bhartiya sahitya parishad hai.

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  4. sahitya parikrama ka panjabi sahitya per kendrit ank panjab ki samkaleen rachnaon ka mahatvpurn sankalan hai
    prakashan hetu badhai

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  6. sadasya banne ke echuk logon ki suvidha ke liye prakashak ka pata dena acha rahega

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