Sunday, October 4, 2009

समकालीन साहित्य और आज का समाज-समकालीन अभिव्यक्ति

पत्रिका-समकालीन अभिव्यक्ति, अंक-30.31, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-उपेन्द्र कुमार मिश्र, पृष्ठ-64, मूल्य-15(वार्षिक-50रू.), संपर्क-फलेट नं. 5, तृतीय तल, 984, वार्ड नं.07, महरौली नई दिल्ली 30(भारत) फोनः (011)26645001,
ई मेलः samkaleen999@gmail.com
पत्रिका के समीक्षित अंक में आज के सामाजिक संदर्भ से जुड़ी रचनाओं को शामिल किया गया हैै। प्रकाशित प्रमुख आलेखों में राहुल सांस्कृतायन आजमगढ़ के(गुंजेश्वरी प्रसाद), दिनकर की कविता में वैचारिक क्रांति(डी. सत्यलता) एवं क्या वृद्धावस्था अभिशाप है(विश्वमोहन तिवारी) प्रमुख हंै। कहानियों में दर्द के रिश्ते(डाॅ. महावीर सिंह), हार-जीत(अखिलेश निगम ‘अखिल’) मजबूर(डाॅ. पूरन सिंह) एवं सुबह की रोशनी(हरीश चन्दर सेठ) आज की समस्याओं को पाठक के सामने जाहिर करने में पूर्णतः सफल रही है। पत्रिका में प्रकाशित अनिल डबराल का आलेख ‘नरवर चढ़े न बेड़नी’ ने सबसे अधिक प्रभावित किया। कविताओं में इस बार वह विशेषता नहीं आ पाई जो इस पत्रिका की विशेषता है। फिर भी केवल गोस्वामी की कविताएं अच्छी बन पड़ी हैं। विवेकी राय का ललित निबंध एवं हरिशंकर राढ़ी का यात्रा वृतांत जानकारी प्रद हैं । पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ व रचनाएं भी स्तरीय व संग्रह योग्य हैं।

1 comment:

  1. इस पत्रिका का नाम तो कभी सुना था लेकिन अन्य विवरन की जानकारी नही थी । इस परिचय के लिये धन्यवाद

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