Friday, June 19, 2009

पहाड़ों से उतरता हिंदी साहित्य का दरिया-चिनाब

पत्रिका-चिनाब, अंक-मई.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-सिमर सदोष, पृष्ठ-44, संपर्क-पंजाब कला साहित्य अकादेमी(रजि.) 186/डब्ल्यू,बी., बाजार शेखां, जालंधर 144.001 (भारत)
पंजाब कला साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका चिनाब का यह प्रवेशांक है। अंक भरोसा दिलाता है कि इसमें भविष्य में और भी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाएं प्रकाशित होंगी। समीक्षित अंक में प्रकाशित सुरेश सेठ का आलेख ‘अकेले पथ के साथी’ सिमर सदोष के साहित्य के प्रति अनुराग को प्रगट करता है। ललित सुरजन का संस्मरण उनके जीवन संघर्ष की दास्तान है जो उन्होंने देशबंधु समाचार पत्र को स्थापित करते समय प्राप्त किए हैं। राजेन्द्र परदेसी की कहानी ‘विश्वास का अंकुर’ आम पाठक के मन में विश्वास जगाती है कि वह हिम्मत न हारे। डाॅ. अजित गुप्ता का व्यंग्य एक अच्छी हास्य प्रधान रचना है जो नामों के रास्ते से पाठकों को गुदगुदाती है। सुरेश उजाला की कविता मनुष्य के मनोविकार और प्रवृति को व्यक्त करने में सक्षम रही है। उषा बजाज की कविताएं तथा डाॅ. अमरेन्द्र का समीक्षा आलेख में अभी और विस्तार की आवश्यकता थी। अखिलेश शुक्ल की कहानी ‘परिवर्तन’ ग्रामीण वातावरण में व्यप्त कुरीतियों के वबंडर से पाठक को निकालने का प्रयास करती हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ तथा रचनाएं भी पाठकोपयोगी व संग्रह योग्य हैं। कथा चक्र परिवार पत्रिका चिनाब के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।

1 comment:

  1. चिनाव के प्रवेशांक को बधाई ...
    आपने इतनी तारीफ़ की है कि
    अब तो बाज़ार मे चिनाव को ढूँढना
    ही पड़ेगा

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