Sunday, April 26, 2009

‘सपनों के बिखरने और संवरने का जीवंत दस्तावेज’-सदंर्भ संबोधन

पत्रिका-सम्बोधन, अंक-जनवरी.मार्च.09, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-कमर मेवाड़ी, पृष्ठ-92, मूल्य-20रू.,वार्षिक100 रू., संपर्क- संबोधन त्रैमासिक, काकरोली, जिला राजसमंद राजस्थान (भारत)Need a friend? Indian Dating at Fropper.com
प्रख्यात कथाकार व नावेलनिगार नासिरा शर्मा के नवीनतम उपन्यास ‘जीरो रोड़’ पर एकाग्र पत्रिका संबोधन का अंक अपने नाम के अनुरूप साहित्य से संबोधन कराने का प्रयास करता है। पत्रिका में कृष्ण विहारी, विष्णु दत्त शर्मा, डाॅ. हुसेनी बोहरा, उषा किरण खान, राम वचन राय तथा डाॅ. पल्लव के जीरो रोड पर विचार इस उपन्यास के बारे में बहुत कुछ कहकर इसे पढ़ने की उत्सुकता जगाते हैं। डाॅ. मलय पानेरी, राजाराम भादू तथा सुधा सिंह के आलेखों में नासिरा जी के लेखन व उनके व्यक्तित्व के कुछ अनझुए पहलूओं पर एक विचार प्रस्तुत किया गया है। संपादक का यह कथन इस उपन्यास की सार्थकता पर विचार करता है जिसमें उन्होंने इसे ‘सपनों के बिखरने और संवरने का जीवंत दस्तावेज’ कहा है। एक सार्थक व उपयोगी अंक के लिए बधाई ।

2 comments:

  1. संबोधन बहुत पुरानी और महत्वपूर्ण पत्रिका है। सूचना के लिए धन्यवाद।

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  2. संबोधन पत्रिका के बारे में पढ़ कर अच्छा लगा .
    आपके प्रयास सराहनीय हैं. हमारी शुभकामनाएं आपको
    -विजय

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