Monday, January 12, 2009

इप्टा वार्ता...............................(कला/संस्कृति पत्रिका)

पत्रिका-इप्टा वार्ता, अंक-25, स्वरूप-मासिक, संपादक-हिमांशु राय, संपादक मंड़ल-कमलेश सक्सेना, वसंत कुमार काशीकर, मूल्य-5रू। वार्षिक-30 रू। सम्पर्क-पी।डी।4, परफेक्ट एनक्लेव, स्नेह नगर, जबलपुर (म।प्र।)
इप्टावार्ता मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से प्रकाशित होने वाला प्रमुख मासिक है। इस अंक में स्वराज संस्थान संचालनालय भोपाल में (आदिवासी नाट्य समारोह के अंतर्गत) मुक्ति संग्राम 1857 के प्रभावशाली मंचन की रिपोर्ट विस्तृत रूप से प्रकाशित की गई है। विख्यात नाट्य निदेशक अलखनंदन ने भारतेन्दु नाट्य अकादेमी लखनऊ के कलाकारों से जीवंत अभिनय कराया है। हिंमाशु राय का रंगलेख ॔वो जज़्बा ही कुछ और था’ में नुक्कड़ नाटक व थियेटर पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया है। विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) पर नाटककार, अभिनेता, फिल्म नाट्य निदेशक शैवेर लापाज का अंतर्राष्ट्रीय संदेश नाट्य कला के अस्तित्व तथा अस्मिता पर चिंतन प्रस्तुत करता है। निदा फाजली की ग़़ज़लों व रंगखबर ने अंक को सौन्दर्य को बिखेरा है। रंग समीक्षा के बहाने गंगेश गुंजन ने ॔हबीव के यहां’ में भारत रत्न भार्गव की पुस्तक की समीक्षा की है। यह समीक्षा हवीब तनवीर के नाट्य जगत में योगदान के विभिन्न पहलूओं को सामने लाती है।

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