Sunday, March 9, 2014

हिंदी साहित्य में भाषा स्पंदन

पत्रिका: भाषा स्पंदन,  अंक: 32-33, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डाॅ. मंगल प्रसाद, आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 44, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 100रू.), ई मेल: karnatakahindiacademy@yahoo.com
,वेबसाईट: , फोन/मोबाईल: 9886241853, सम्पर्क: कर्नाटक हिंदी अकादमी, 853, 8वां क्रास, कोरमंगला, बेंगलूर  560.095
पत्रिका का समीक्षित अंक भाषा विशेषांक है। अंक में हिंदी भाषा व साहित्य पर विशेष सामग्री का प्रकाशन किया गया है। प्रकाशित रचनाओं में अमृतांशु, डाॅ. अमर सिंह वधान, सुरिन्दरजीत कौर, सुरेन्द्र अग्निहोत्री, राष्ट्र किंकर, नृपेन्द्र नाथ गुप्त एवं फादर कामिल बुल्के के आलेख प्रभावित करते हैं। इन आलेखों में हिंदी भाषा के विकास, स्वरूप व लोकव्यापिकरण को लेकर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया गया है। चित्रेश की कहानी सपना मानव जीवन के मूल्यों व उसके क्षरण को लेरक गंभीर चिंता व्यक्त करती है। 
पत्रिका के संपादक डाॅ. मंगलप्रसाद की रचना आप बीति चिकित्सा जगत में व्याप्त विसंगतियों की ओर संकेत करती है। जसविंदर शर्मा व वेंकटेश कुमार के आलेख हिंदी भाषा के वैश्विकीकरण का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हैं। डाॅ. अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, नरेन्द्र परिहार, मोहन तिवारी, श्रीमती निर्मला गुप्ता, सत्यकाम पहारिया एवं डाॅ. महाश्वेता देवी की कविताएं, ग़ज़लें, गीत आदि प्रभावित करते हैं। दक्षिण से प्रकाशित ‘‘भारतीय भाषा, साहित्य और सामासिक संस्कृति को राष्ट्रीय स्वर देने वाली हिंदीतर भाषा की लोकप्रिय पत्रिका’’ भाषा स्पंदन का  प्रत्येक अंक संग्रहयोग्य व पठनीय है। 

3 comments:

  1. Patrika ke naye ank per badhi. Padhne se pata chale ki kise he patrika. Is it avileble in delhi. Manisha jain Delhi

    ReplyDelete
  2. सुन्दरम ।Seetamni. blogspot. in

    ReplyDelete