Friday, February 28, 2014

हम भारतवासियों की ‘‘हिंदुस्तानी जबान’’

पत्रिका: हिंदुस्तान जबान,  अंक: दिसम्बर2013, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डाॅ. सुशीला गुप्ता, मुहम्मद हुसैन परकार, आवरण/रेखाचित्र: निरंजन जोशी, अभिषेक आचार्य, पृष्ठ: 44, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 80रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: , फोन/मोबाईल: 22812871, सम्पर्क: महात्मा गाॅधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर, महात्मा गाॅधी बिल्ंिडग, 7 नेताजी सुभाष रोड़, मुम्बई महाराष्ट्र
हिंदी व उर्दू जबान में विगत 45 वर्ष से निरंतर प्रकाशित हो रही यह पत्रिका हिंदी ही नहीं भारतीय  साहित्य की प्रमुख पत्रिका है। पत्रिका के समीक्षित अंक में कनक तिवारी, रणजीत साहा, संजीव कुमार दुबे के आलेख साहित्य की गाॅधीवादी विचारधारा का उम्दा प्रस्तुतिकरण है। डाॅ. श्रीराम परिहार का ललित निबंध बचाल ले थोड़ी सी धरती थोड़ा सा आकाश सरस व पढ़ने में रूचिकर है। ख्यात कवि लेखक लीलाधर जगूडी, लेखिका व साहित्यकार सुधा अरोड़ा एवं सविता भार्गव की कविताएं उत्कृष्ट हैं। मुर्शरफ आलम जौकी की कहानी समाज की मतभिन्नताओं व समानताओं पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं। पद्मजा शर्मा की कहानी किस्सागो अंदाज में आगे बढ़ती हुई आदि से अंत तक बांधे रखती है। 
ऋता शुक्ल का उपन्यास अंश, ख्यात साहित्यकार गंगाप्रसाद विमल से कला नाथ मिश्र जी की बातचीत पत्रिका के अन्य आकर्षण हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, स्थायी स्तंभ व समाचार आदि भी उल्लेखनीय है। उर्दू खण्ड की रचनाएं भाषागत विशेषताओं के साथ साथ भारतीय समाज का अच्छा चित्रण प्रस्तुत करता है। 

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