Sunday, March 31, 2013

कनाड़ा से प्रकाशित हिंदी चेतना

पत्रिका : हिंदी चेतना,  अंक :जनवरी मार्च 2013वर्ष : 13,  स्वरूप : त्रैमासिक, प्रमुख संपादक : श्याम त्रिपाठी, संपादक : सुधा ओम ढीगरा, पृष्ठ : 84, मूल्य : प्रकाशित नहीं, र्इ मेल : ,वेबसार्इट : , फोनमोबार्इल : , सम्पक
समीक्षा : क्रमश:

केरल हिंदी साहित्य अकादमी शोध पत्रिका का नया अंक

पत्रिका-केरल हिंदी साहित्य अकादमी शोध पत्रिका, अंंक-जुलार्इ 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-एस. चंदशेखर नायर, पृष्ठ-44, मूल्य-20रू.,(वार्षिक  80 रू.60), फोन : 0571.2541355, संपर्क : श्रीनिकेतन, लक्ष्मीनगर, पटटम पालस पोस्ट, तिरूवन्नतपुरम, केरल
समीक्षा क्रमश:

पत्रिका संबोधन का काशीनाथ सिंह जी पर एकाग्र अंक

पत्रिका-संबोधन, अंंक-जनवरी 2013, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक- क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ-64, मूल्य-20रू.,(वार्षिक 80) ,
समीक्षा क्रमश:
इ-मेल : ,फोन : 02952.223221, संपर्क : पो. कांकरोली, जिला राजसमंद, राजस्थान

पत्रिका कथन का जनवरी-मार्च 2013 अंक

पत्रिका-कथन, अंंक-जनवरी-मार्च 2013, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-संज्ञा उपाध्याय, पृष्ठ-96, रेखांकनग्राफिक्स -जानकारी उपलब्ध नहीं,  मूल्य-25रू.,(वार्षिक 100रू.), वेवसाइट - NA ,  फोन : 01125268341, इमेल- kathanpatrika@hotmail.com
    पत्रिका कथन का यह अंक अन्य पूर्ववर्ती अंकों के समान उपयोगी व विचारयोग्य रचनाओं से युक्त है। समीक्षित अंक में प्रकाशित आलेख भारतीरय संस्Ñति के निर्माण में विभिन्न जातियों का योग (भगवतशरण उपाध्याय) व कामतानाथ जी पर एकाग्र संस्मरण विशिष्ठ रचनाएं हैं। ख्यात कथाकार व कथन के पूर्व संपादक रमेश उपाध्याय, प्रियदर्शन तथा अनिरूद्ध पाण्डे की कहानियां वर्तमान समय की जरूरतों तथा बदलाव पर विस्तार से प्रकाश डालती है। यश मालवीय, कौशल किशोर, शंकरलाल मीणा, देवयानी भारद्वाज एवं चंद्रशेखर की कविताए भी नवबाजारवाद के आगे लगे प्रश्नचिन्ह व उसके महत्व पर विचार करती है। ख्यात आलोचक मैनेजर पाण्डेय व रमेश उपाध्याय जी विशेष प्रस्तुति पठनीय व ज्ञानवर्धक है। जितेन्द्र भाटिया का कथानुवाद प्रभावित करता है। सुरेन्द्र मनन, जवरीमल्ल पारख, उत्पल कुमार के स्तंभों की जानकारी पत्रिका के पूर्ववर्ती अंकों के समान संग्रह योग्य हैं पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं। 
, संपर्क : 107, साक्षरा अपार्टमेंटस, ए-3, पशिचम विहार, नर्इ दिल्ली 110063

मारिशस से प्रकाशित विश्व हिंदी समाचार का नया अंक

पत्रिका-विश्व हिंदी समाचार, अंंक-दिसम्बर2012, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रधान संपादक-श्रीमती पूनम जुनेजा, संपादक- गंगाधर सिंह सुखलाल, पृष्ठ-12, रेखांकनग्राफिक्सआवरण -जानकारी उपलब्ध नहीं,  मूल्य-प्रकाशित नहीं, वेवसाइट - www.vishwahindi.com, फोन : 230.6761196, इमेल- info@vishwahindi.com  , संपर्क : स्वीफट लेन, फारजेट साइट, मारिशस
    मारिशस से प्रकाशित इस समाचार पत्रिका का प्रत्येक अंक संग्रह योग्य होता है। समीक्षित अंक में भी वैशिवक स्तर पर हिंदी साहित्य व भाषा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यो व कार्यक्रमों का समावेश किया गया है। पत्रिका के मुखपृष्ठ पर प्रकाशित निराला स्मृति समारोह हिंदी साहित्य के क्षेत्र में वहां किए जा रहे कार्यो का झलक प्रस्तुत करता है। विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा अक्टूबर 2012 में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री सत्येदेव टेंगर, मेघा गणपत, सुश्री अनुपमा चमन सहित अन्य विशिष्ठजन उपसिथत थे। हिंदी कहानी जगत के प्रतिषिठत हस्ताक्षर तेजेन्द्र जी के व्यकितव व Ñतित्व पर आयोजित कार्यक्रम एशियन कम्युनिटि हाल लंदन में आयोजित किया गया। कार्यकम में अपने उदबोधन में ख्यात कथाकार व हंस के संपादक श्री राजेन्द्र यादव ने कहा, ''तेजेन्द्र शर्मा मुख्यधारा के कहानीकार हैं और उनकी कहानियों ने हिंदी कहानी को नए कथानक दिए हैं।
    महात्मा गांधी संस्थान के सुब्रमण्यम भारती सभागार में आयोजित वसंत ओर रिमझिम साहितियक प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण समारोह से समाचार आश्वस्त करता है कि हिंदी भाषा व उसका साहित्य व दुनिया को अंतर्मन तक प्रभावित करने लगा है। यह जानकार पाठकों को सुखद अनुभूति होगी कि मारिशस का हिंदी साहित्य अब कविताकोश पर उपलब्ध हो गया है। वातायन पोयट्री सम्माान का समाचार बि्रटे्रन में हिंदी के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यो की जानकारी  देता है। कनाडा से प्रकाशित पत्रिका के संपादक श्री श्याम त्रिपाठी जी का मिले सरस्वती सम्मान का समाचार पत्रिका का प्रमुख आकर्षण है। श्याम त्रिपाठी एवं श्रीमती सुधा ओम ढीगरा ने विश्वस्तर पर हिंदी साहित्य व भाषा को सुव्यवसिथत ढंग से स्थापित करने का जो भागीरथी प्रयास किया है उसके लिए उन्हें भारत में भी सम्मानित किया जाना चाहिए। आधारसिला संस्था द्वारा मारिशस में हिंदी सम्मेलन तथा फेसबुक मैत्री सम्मेलन का समाचार पत्रिका में प्रकाशित अच्छी जानाकारी है। भारतीय मानक देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का लोकपर्ण, दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन, आशीर्वाद द्वारा लगातार 24 घण्टे कवि सम्मेलन का आयोजन करना आदि समाचार हिंदी के प्रति स्वीकार्यरता तथा निष्ठा प्रदर्शित करते हैं। साहित्य मण्डल नाथद्वारा का सम्मान समारोह अपने आप में विशिष्ठ आयोजन है, जिस हिंदी प्रेमी ने इस आयोजन को देखा है वह कभी उसे  भुला नहीं पाएगा। डा. सुरेश शुक्ल चंद्र एवं प्रतिभा राय हिंदी के ऐसे हस्ताक्ष्ज्ञर हैं जिनके योगदान पर अभी बहुत कार्य किया जाना शेष है। स्व. भवानी प्रसाद मिश्र जी के जन्मशताब्दी समारोह की अखिलेश शुक्ल द्वारा भेजी गर्इ रिपोर्ट इस कार्यक्रम की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत करती है। पत्रिका के अन्य समाचार भी अपने आप में ज्ञानवर्धक, जानकारीपरक तथा रोचक हैं। गंगाधर सिंह सुखलाल द्वारा लिखा गया संपादकीय 'हिंदी के मूल्य और हिंदी का मूल्य हिंदी को नए सिरे से संवारने की जरूरत पर बल देते हैं।

Saturday, March 30, 2013

सार्थक व्यंग्य की रचनात्मतक त्रैमासिकी "व्यंग्य यात्रा" का अभिनव अंक

पत्रिका-व्यंग्य यात्रा, अंक-दिसम्बर2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-प्रेम जनमेजय, पृष्ठ-96, रेखांकनग्राफिक्सआवरण -विपिन कुमार,  मूल्य- 20 रू.(वार्षिक 80 रू.) , वेवसाइट -जानकारी उपलब्ध नहीं, फोन : 011.25264227, र्इमेल- , संपर्क : 73, साक्षर अपार्टमेंट, ए-3, पशिचम विहार, नर्इ दिल्ली 110063
    विगत सात वर्ष से निरंतर प्रकाशित व्यंग्य साहित्य की इस पत्रिका ने अनेक संग्रह योग्य विशेषांक प्रकाशित किए हैं। समीक्षित अंक में ख्यात कवि चंद्रकांत देवताले से ओम भारती की चर्चा साहित्य जगत की वर्तमान गतिविधियाें पर गंभीर विमर्श है। अमृतराय, हरिशंकर परसार्इ, नरेन्द्र कोहली, सूरज प्रकाश की कालजयी रचनाएं पत्रिका ने आकर्षक ढंग से पाठकों के लिए पुन: प्रकाशित की है। दिलीप तेतरवे, पे्रमजनमेजय, ज्ञान चतुर्वेदी, प्रदीप पंत, अरविंद तिवारी एवं हरिजोशी के उपन्यास अंश इन Ñत्तियों के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित करते हैं। प्रकाशित व्यंग्य रचनाओं में सुरेन्द्र वर्मा, शरद तेलंग, सुधा आचार्य, सतीश भाटिया, लालित्य ललित, एवं गोविंद शर्मा की रचनाओं का व्यंग्य वर्तमान सामाजिक परिसिथतियों, परिवर्तन तथा उठापटक का अच्छा विश्लेषण प्रस्तुत करता है। रामदरश मिश्र, नरेन्द्र मोहन, घनश्याम अग्रवाल, राम मेश्राम एवं कुवंर स्वरूप की कविताओं में व्यंग्य इन कविताओं की विषय वस्तु    को ध्यान में रखने पर सहज ही प्रगट हो जाता है। अन्य कविताओं में व्यंग्य क्षणिक रूप से ही सही पर अपनी उपसिथति अवश्य ही दर्ज कराता है। व्यंग्य में संवेदना को लेकर बहुत दिनों के पश्चात कोर्इ आलेख पढ़ने में आया है। रमेश चंद्र खरे ने अथक परिश्रम से इसे तैयार किया है। श्यामसुंदर घोष एवं देवमणि पाण्डेय लेख भी विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी स्तरीय व जानकारीपरक हैं। व्यंग्य यात्रा के एक और अच्छे अंक के लिए संपादक तथा उनकी टीम बधा
इ की पात्र है। 

Friday, March 29, 2013

ख्यात शासकीय पत्रिका अणुकन्या

पत्रिका-अणुकन्या, अंंक-05ए वर्ष :र् 2013, स्वरूप-वार्षिक पत्रिका, संपादक-एम.निश्चल एवं अन्य, पृष्ठ-90, रेखांकनग्राफिक्स -जानकारी उपलब्ध नहीं,  मूल्य- प्रकाशित नहीं, वेवसाइट -जानकारी उपलब्ध नहीं, फोन : 04637282128, इमेल-  , संपर्क : कुडनकुलम न्यूकिलयर पावर प्रोजेक्ट, कुडनकुलम पोस्ट, राधापुरम तालुक, तिरूनेलवेली, तमिलनाडू 627106
    केन्द्रीय विभाग की इस पत्रिका का अंक आकर्षक साज सज्जा से युक्त है। अंक में हिंदी भाषा एवं साहित्य को समान रूप से स्थान दिया गया है। पत्रिका के इस अंक में केकेएनपीपी परियोजना की जानकारी विशेष रूप से प्रकाशित की गर्इ है। भ्रष्टाचार की समस्या पर आयोजित प्रतियोगिता की जानकारी व सामग्री को बहुत अच्छे ढंग से प्रकाशित किया गया है। विभाग के हिंदी पखवाडे़ व हिंदी कार्यशाला की जानकारी अन्य शासकीय विभागों के लिए अनुकरणीय है। मोहम्मद जमशीन, ए. अशोक कुमार, सुमन कुमार सुदर्शन, भृगु पाण्डे, अरूण कुमार शर्मा, दिलीप भाटिया, अजय दुबे, व पत्रिका की अन्य जानकारियां विशेष रूप से ज्ञानवर्धक व रोचक है। पत्रिका का कलेवर साज सज्जा में परिश्रम झलकता है।

दक्षिण से प्रकाशित पत्रिका अहल्या का नया अंक

पत्रिका : अहल्या, अंक: जनवरी 2013, स्वरूप : मासिक, संपादक : श्रीमती आशादेवी सोमाणी, मूल्य : 25 रू.(वार्षिक),इ मेल :  , फोन : 0402424804000, सम्पर्क : 14.1.498ए ज्ञानबाग रोड़, प्रकाश रोड़ लार्इन्स के सामने, पान मण्डी के पास, हैदराबाद (आं.प्र.)   
    हैदराबाद से प्रकाशित अहल्या स्त्राीविषयक विषयों के साथ साथ हिंदी साहित्य के वैशिवक स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती है। समीक्षित अंक में रामकुमार गोयल, उमाकांत मालवीय, सुमित पी.वी., के आलेख उल्लेखनीय है।रामसहाय वर्मा का व्यंग्य 'नया पुराना वर्ष अहिंदीभाषी पाठकों के लिए भी समान रूप से उपयोगी है। हरिÑष्ण निगम, विजय कुमार, राहुल रोहिताश्व, रवीन्द्र श्रीवास्तव तथा डा. ताराचंद्र के विविध विषयों पर एकाग्र आलेख पत्रिका की मंशा के अनुरूप हैं। विधाभास्कर वाजपेयी का धारावाहिक उपन्यास 'मझली रानी का समापन स्वागत योग्य है। सुरेखा शर्मा, डा. पूरन सिंह, श्यामा गुप्ता व माया शर्मा की कहानियां, महेन्द्र सिंह शेखावत, अमित कुमार राही, लीला मोदी की लघुकथाएं अच्छी व पठनीय हैं। कविताओं में दिवाकर पाण्डेय, आचार्य भगवत दुबे, रामशंकर चंचल, अशोक अंजुम, कैलाश निगम, सुनीता शर्मा, श्यामलाल कौशल, जितेन्द्र सुकुमार, उमेश कुलश्रेष्ठ एवं ओमप्रकाश बजाज प्रभावित करते हंै। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी स्तरीय व पाठकों के लिए जानकारीपरक है।

हिंदी साहित्य की विशिष्ठ खूबियों वाली पत्रिका समावर्तन

पत्रिका-समावर्तन, अंंक-मार्च2013, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-रमेश दवे, मुकेश वर्मा, पृष्ठ-90, रेखांकनग्राफिक्स : अक्ष्य आमेरिया, मूल्य- 30रू. (वार्षिक 360 रू.), वेवसाइट -उपलब्ध नहीं, फोन : 0734.2524457, इमेल- , संपर्क : माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
    समावर्तन साहित्य की प्रमुख पत्रिका है। पत्रिका दिनप्रतिदिन नए मुकाम हासिल करती जा रही है। वर्तमान अंक में पूर्ववर्ती अंकों के समान विशिष्ठ रचनाओं का समावेश किया गया है। अंक को आंशिक रूप से ख्यात कवि दिनकर सोनवलकर व रंगकर्मी विष्णु पाठक पर एकाग्र किया गया है। दिनकर जी पर एकाग्र रचनओं में रमेश चंद्र खरे, प्रमोद त्रिवेदी, मीरा सोनवलकर, वनिता उपासनी, आर्इशा खान, सतीश श्रोत्रिय, प्रभात भटटाचार्य, शिव चौरसिया, व निरंजन श्रोत्रिय से दिनकर जी की बातचीत प्रमुख है। रघुनंदन चिले, तारिक असलम की लघुकथाएं तथा सुदर्शन पिय्रदर्शनी की कहानी विशेष रूप से प्रभावित करती है। कविताओं में राधेलाल विजघावने, मणि मोहन, वेद हिमांशु, हरीश दुबे की कविताएं उल्लेखनीय है। विष्णु पाठक जी पर एकाग्र रचनाओं में अंजना चतुर्वेदी, भोलाराम भारतीय, राजेश श्रीवास्तव के लेख प्रमुख हैं। आदित्य विक्रमसिंह, गफूर तायर, श्रीराम दवे तथा मुकेश वर्मा के स्तंभ पत्रिका के अन्य अंकों की तरह नयापन लिए हुए हैं। पत्रिका का कलेवर, साज सज्जा व प्रस्तुति प्रभावित करती है।

Wednesday, March 27, 2013

मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका

पत्रिका-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक-मार्च2013, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-आर.चंद्रशेखर, मनोहर भारती,, पृष्ठ-64, रेखंाकन/ग्राफिक्स -जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य- 5रू. (वार्षिक 60 रू.), वेवसाइट -उपलब्ध नहीं, फोन: 080.23404892, ईमेल- , संपर्क: 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजीनगर बेंगलूर कर्नाटक
    कर्नाटक से प्रकाशित इस प्रमुख हिंदी पत्रिका की विशेषता इसके साहित्य में नवीनता है। समीक्षित अंक में राजवीर सिंह, जा. पि. सरस्वती, सुरोशा शर्मा, पंडित बन्ने, सुदरलाल कथूरिया, जी. धनलक्ष्मी, कृष्णाभाई डी. पटैल, लालता प्रसाद मिश्र, एस. कृष्णबाबू के आलेख साहित्य ही नहीं किसी भी भाषा के साहित्य की अपेक्षा नवीनता व अनूठापन लिए हुए हैं। अन्य रचनाओं में जगदीश गांधी, विजय कुमार उपाध्याय, तारा सिंह, देवदत्त शर्मा, प्रो. बी. बै. ललिताम्बा, देवेन्द्र कुमार मिश्रा की रचनाएं  उल्लेखनीय है।    

हिंदी साहित्य के लिए ‘साहित्य परिक्रमा

पत्रिका-साहित्य परिक्रमा, अंक-जनवरी-मार्च2013, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-बलवंत जानी, ऋषिकुमार मिश्र, पृष्ठ-64, रेखंाकन/ग्राफिक्स -जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य- 15रू. (वार्षिक 60 रू.), वेवसाइट -उपलब्ध नहीं, फोन: 09425407471, ईमेल-shridhargovind@gmail.com , संपर्क: राष्टोत्थान भवन, माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क ग्वालियर म.प्र.
    अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा प्रकाशित यह पत्रिका हिंदी साहित्य की प्रमुख पत्रिका है। पत्रिका के इस अंक में श्रीधर पराड़कर, नरेन्द्र कोहली, नागेश्वर मिश्र, महेश चंद्र वर्मा, उमेश चंद्र शर्मा एवं आनंद मिश्रा के जानकारीपरक आलेख प्रमुखता से प्रकाशित किए गए हैं। आदित्य शुक्ला, प्रमोद कुमार महानती, संजीव चट्टोपाध्याय एवं देवेन्द्रचंद्र दास की कविताएं समसामयिक हैं व वर्तमान समाज की बदलती सोच का प्रतिनिधित्व करती है। वाल्ट व्हिटमेन की अंग्रेजी कविता का अनुवाद सुबोध चक्रवर्ती की कहानी प्रारब्ध तथा आशीष दयाल की लघुकथाएं उल्लेखनीय हैं। विवेकरंजन श्रीवास्तव का व्यंग्य प्रभावित करता है। रवीन्द्र शुक्ल, रामगोपाल रायकवार, सी.बी. श्रीवास्तव एवं प्रभाकर वि. कर्पे की रचनाएं पत्रिका के कलेवर व पठनीयता में वृद्वि करती है। अंक संग्रहयोग्य व अच्छी पठनीय रचनाओं से युक्त है। 

Monday, March 25, 2013

हिंदी व साहित्य की प्रतिषिठत पत्रिका हिंदुस्तानी जबान

पत्रिका.हिंदुस्तानी जबानए अंंक.दिसम्बर12ए स्वरूप.त्रैमासिक संपादक.माधुरी छेड़ा पृष्ठ.64ए रेखांकनग्राफिक्स .जानकारी उपलब्ध नहींए मूल्य. 20 रूण् ;वार्षिक 80 रूण्द्धए वेवसाइट . फोन रू 22812871 इमेल.  संपर्क  महात्मा गांधी मेमोरियल  रिसर्च सेंटरए महात्मा गांधी बिलिंडगए 7ए नेताजी सुभाष रोड़ए मुम्बर्इ 400002
    गांधी साहित्य की इस प्रतिषिठत पत्रिका की ख्याति देश विदेश में है। पत्रिका का प्रत्येक अंक विशेषांक के समान होता है। समीक्षित अंक में उषा ठक्कर का आलेख गांधीवादी विचारधारा पर एक अच्छा विमर्श है। आलेखों में आशुतोष पाठकए उषा मिश्राए रामसागर सिंह एवं रवीन्द्र अगिनहोत्री के आलेख नवीनता लिए हुए हैं। ख्यात आलोचक विजयबहादुर सिंहए कवि राजकुमार कुम्भजए रवीन्द्र कात्यायन तथा देवमणि पाण्डेय की कविताएं गांधीवादी विचारधारा को वर्तमान संदर्भ में प्रस्तुत करती है। कमल तेजस की कहानी टेक्सीवाला तथा उर्मिला शिरीष व धीरा वर्मा के विमर्श प्रभावित करते हैं। सुमित्रा अग्रवाल तथा नवांकुर नुजहत फातमा में संभावनाएं दिखार्इ देती है। पत्रिका का उदर्ू खण्ड भी समसामयिक व विचारोत्तेजक रचनाओं से युक्त है।

Sunday, March 24, 2013

हिंदी साहित्य में ‘भाषा स्पंदन’

पत्रिका-भाषा स्पंदन, अंक-30, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-डाॅ. मंगल प्रसाद, पृष्ठ-64, रेखंाकन/ग्राफिक्स -जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य- 25 रू. (वार्षिक 100 रू.), वेवसाइट -उपलब्ध नहीं , फोन: 080.25710355 ईमेल-  , संपर्क: कर्नाटक हिंदी अकादमी, 853, 8वां क्रास, 8 वां ब्लाक, कोरमंगला, बेंगलूर 560095
    भाषा स्पंदन कर्नाटक से प्रकाशित होने वाली साहित्य की प्रमुख पत्रिका है। पत्रिका के समीक्षित अंक में अमरसिंह वधान, राजेन्द्र परदेसी, सुश्री लीला मोदी, एवं संदीप अवस्थी के पठनीय आलेखों का प्रकाशन किया गया है। प्रकाशित कहानियों में संदीप अवस्थी की वेदिका, रघुनंदन प्रसाद तिवारी(गूलर का ठूठ) तथा मनीष कुमार सिंह(गुडडी का सिलेबस) प्रभावित करती है। रामस्नेहीलाल शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, नीरा प्रसाद, लक्ष्मी सिंह ठाकुर, ज्ञानेन्द्र साज, राजीव कुलश्रेष्ठ, मनोज जैन, सुनीता सैनी, संध्या विश्व तथा सूरजपाल चैहान की कविताएं उल्लेखनीय है। विविध स्तंभ के अंतर्गत अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, पंकज शर्मा तथा डाॅ. मंगल प्रसाद के आलेख विशिष्ठ हैं।