Tuesday, October 30, 2012

द्विव्यालोक का वार्षिक अंक

पत्रिका-द्विव्यालोक, अंक-अर्द्धवार्षिक 2012, स्वरूप-वार्षिक, संपादक-जगदीश किंज्लक, पृष्ठ-102, रेखंाकन/ग्राफिक्स -अम्बिका प्रसाद द्विव्य,  मूल्य-60रू.,(वार्षिक 120.रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 0755.2494777, ईमेल- , संपर्क: 145ए, साहित्य सदन, सांईनाथ नगर, सी सेक्टर, कोलार भोपाल म.प्र.
    ख्यात साहित्यकार,  लेखक समीक्षक व नाटककार स्व. श्री अम्बिका प्रसाद द्विव्य जी की स्मृति मंे वर्ष में दो बार प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका का स्वरूप पूरी तरह से साहित्यिक है। इस अंक में इंदिरा दांगी, निरूपमा राय, कमल कपूर एवं स्वाति तिवारी की मार्मिक कहानियों का प्रकाशन किया गया है। प्रेम जनमेजय, बृजकिशोर पटेल व एम.एल खरे के व्यंग्य प्रभावित करते हैं। सुधा ओम ढीगरा, पदमा सिंह, आशमा कौल, कैलाश पचैरी, शैलेन्द्र शर्मा एवं यतीन्द्र नाथ राही की कविताएं भी समसामयिक व मंथन योग्य हैं। अजय अज्ञान एवं आशीष दशोतर की ग़ज़लें विशेष रूप से प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं समीक्षाएं भी अच्छी व रोचक हैं।

पत्रिका सुखनवर में साहित्यिक अभिरूचि क समागम

पत्रिका-सुखनवर, अंक-जुलाई-अगस्त 2012, स्वरूप-द्वैमासिक, संपादक-अनवारे इस्लाम, पृष्ठ-52, रेखंाकन/ग्राफिक्स -रूपिन्दर कौर,  मूल्य-25रू.,(वार्षिक 200रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 09893663536, ईमेल- , संपर्क: सी 16, सम्राट कालोनी, अशोेक गार्डन भोपाल म.प्र.
    हिंदी व उर्दू साहित्य के लिए समान रूप से समर्पित पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्य को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। अंक में विजेन्द्र शर्मा, मुख्तार शमीम व विनय उपाध्याय के आलेख प्रमुखता से प्रकाशित किए गए हैं। प्रकाशित कहानियों में नईम कौसर, अंजुल उस्मानी ने अच्छा समय व समाज के मध्य  अच्छा समन्वय प्रस्तुत किया है। मनोज श्रीवास्तव की कविता, शमीम बीकानेरी, नवीन माथुर व माणिक वर्मा की ग़ज़लें एवं असलम चिश्ती की समीक्षा भी उल्लेखनीय है। पत्रिका की अन्य रचनाएं  भी प्रभावित करती है।

Monday, October 29, 2012

समय के साखी का नया अंक

समय के साखी का नया अंक
पत्रिका-समय के साखी, अंक-जून-जुलाई 2012, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. आरती, पृष्ठ-52, रेखंाकन/ग्राफिक्स -के. रवीन्द्र ,  मूल्य-20रू.,(वार्षिक 200रू.), वेवसाइट- www.samaykesakhi.in, फोन: 0755.4030221, ईमेल- samaysakhi@gmail.com, संपर्क: बी-308, सोनिया गांधी काम्पलेक्स, हजेला हाॅस्पिटल के पास, भोपाल म.प्र.
    विविधतापूर्ण साहित्यक पत्रिका समय के साखी के इस अंक में भी अच्छी व जानकारीपरक रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में लीलाधर मण्डलोई जी की डायरी, प्रो. विजय अग्रवाल का स्मृति आलेख एवं अंजली तुकाराम कुम्भारे का विरासत लेख प्रभावशाली है। केशव तिवारी, विनोद बिहारी लाल, चंद्रकला त्रिपाठी, स्वर्णा दीक्षित एवं निर्मला मोदी की कविताएं प्रकाशित की गई है। मुरारी शर्मा की कहानी रिहर्सल, शहरी(इंदिरा दांगी) एवं बलि(सूर्यकांत नागर) पत्रिका के इस अंक की अन्य विशेषता है।

Sunday, October 28, 2012

आज की ही नहीं समकाल की भी ‘‘समकालीन अभिव्यक्ति’’

पत्रिका-समकालीन अभिव्यक्ति, अंक-अक्टूबर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-उपेन्द्र कुमार मिश्र, पृष्ठ-52, रेखंाकन/ग्राफिक्स - ,  मूल्य-15रू.,(वार्षिक 60रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 26645001, ईमेल- , संपर्क: 5, तृतीय तल, 984 वार्ड नं. 7, महरौली, नई दिल्ली
    साहित्य के लिए गंभीर रूप से चितिंत एवं कार्यरत पत्रिका के इस अंक में अनेक रचनाएं वर्तमान समय और समाज को प्रतिबिंबित करती है। अंक में अमिताभ शंकर राय चैधरी, प्रभात दुबे तथा मनीष कुमार सिंह की कहानियांे का समाज समकालीन समाज है जिसके बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करने का समय आने पर भी विचार नहीं हो रहा है। आलेखों में कृष्ण कुमार यादव, डी. सत्यलता, सीताराम गुप्ता एवं सुमन वर्मा के विविध आलेख ज्ञानार्जन करते हैं। पत्रिका का प्रमुख आकर्षण ख्यात कथाकार साहित्यकार डाॅ. रामदरश मिश्र से साक्षात्कार है। अनिल डबराल ने धरोहर के अंतर्गत रोचक ढंग से अपनी बात रखी है। कृष्ण मोहन, आचार्य भगबत दुबे, रामनाथ शिवेन्द्र, महाश्वेता चतुर्वेदी, जी.पी. दुबे, नवल जायसवाल, सुभाष रस्तोगी की कविताएं प्रभावित करती है। सरोज गुप्ता एवं जिनेन्द्र जैन की लघुकथाएं भी समसामयिक हैं। पत्रिका की समीक्षाएं, अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

ख्यात पत्रिका साहित्य सागर का गीत विशेषांक


पत्रिका-साहित्य सागर, अंक-अगस्त 2012, स्वरूप-मासिक, संपादक-कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ-52, रेखंाकन/ग्राफिक्स - ,  मूल्य-20रू.,(वार्षिक 240रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 0755.4260116, ईमेल- , संपर्क: 161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र.
    साहित्य जगत की ख्यात पत्रिका साहित्य सागर का गीत विशेषांक संग्रह योग्य उपयोगी सामग्री से युक्त है। अंक में ख्यात हस्तियों के संदेश के साथ साथ गीत पर उपयोगी सामग्री प्रकाशित की गई है। पशुपति नाथ उपाध्याय, श्रीकृष्ण शर्मा, शरदनारायण खरे, मालती शर्मा एवं सनातन कुमार वाजपेयी के आलेख विशेष महत्व के हैं। मूलाराम जोशी, परशुराम विरदी, विद्यानंदन राजीव, सुरेश गौतम, श्यामबिहारी सक्सेना, कमलकांत सक्सेना, प्रो, उमा त्रिपाठी की गीतिक्षकांए प्रभावित करती है। पत्रिका का हर अंक नवीनतम सामग्री व प्रस्तुतीकरण से युक्त होता है व यही इसकी विशेषता है।

Thursday, October 25, 2012

दक्षिण की ख्यात पत्रिका ‘‘अहल्या’’ का दहेज प्रथा विशेषांक


पत्रिका-अहल्या, अंक-अक्टूबर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-श्रीमती आशादेवी सोमाणी, पृष्ठ-64, रेखंाकन/ग्राफिक्स - ,  मूल्य-20रू.,(वार्षिक 80रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 040.24804000, ईमेल- , संपर्क: अहल्या, 14-4-408, ज्ञानबाग रोड़, प्रकाश रोड़ लाइन्स के सामने, पान मण्डी के पास, हैदराबाद आंध्रप्रदेश
    हैदराबाद से प्रकाशित नारीविषयक समीक्षित पत्रिका के प्रत्येक अंक में किसी विशेष विषय अथवा व्यक्तित्व पर संग्रह योग्य सामग्री का प्रकाशन किया जाता है। समीक्षित अंक को दहेज प्रथा विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया गया है। अंक में इस विषय पर प्रकाशित सामग्री मंे नवीनतम दृष्टिकोण व विचारधारा का समावेश होने के कारण अंक की उपयोगिता बढ़ गई है। स्व. डाॅ. पी.एन. कुटटन पिल्लै, रेणुका नैयर, अर्चना वर्मा, मीना रानी, राकेश कुमार सिंह, रतन जैन, आशा शैली, रूखसाना सिद्दीकी के आलेखों में गहन विश्लेषण व समाज में इस प्रथा के कारण उत्पन्न विषमता को उदघाटित किया गया है। विद्याभास्कर वाजपेयी का धारावाहित उपन्यास ‘मझली रानी’, काल कोठरी(प्रभात दुबे), मलिना(सरला शर्मा), आलोकित यात्री(रामनारायण मिश्र), अवशेष नाद(अंजु दुआ जैमिनी), नन्हु की सही सोच(सुकीर्ति भटनागर) की रचनाओं में साहित्यिकता के साथ साथ गंभीर चिंतन दिखाई पड़ता है। लघुकथाओं में सिद्धेश्वर, रामचरण यादव, मुकेश जैन, सुनीता शर्मा में सरसता है। रामस्नेहीलाल शर्मा, सुधा(तेलुगु कविता का अनुवाद), रामजीवन राम, राजेश यादव, गीता चैहान की कविताओं में भी दहेज विरोधी भाव दिखाई देता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व लेख आदि भी प्रभावित करते हैं।

Wednesday, October 24, 2012

‘‘हिंदुस्तानी जबान’’ और गांधी साहित्य का संगम

पत्रिका-हिंदुस्तानी जबान, अंक-जुलाई-सितम्बर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-माधुरी छेड़ा, पृष्ठ-96, मूल्य-20रू.,(वार्षिक 80रू.), फोन: 22812871, ईमेल- hp.sabha@hotmail.com , वेवसाइट - www.hindustanipracharsabha.com   संपर्क: महा. गांधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर, महा. गांधी बिल्ंिडग, 7 नेताजी सुभाष मार्ग, मुंबई महाराष्ट्र
    गांधी साहित्य के लिए समर्पित पत्रिका का प्रत्येक अंक विशिष्ठ सामग्री से युक्त होता है। समीक्षित अंक मंे भी गांधीवादी विचारधारा से ओतप्रोत अनेक रचनाएं प्रकाशित की गई है। इनमें उषा ठक्कर, शिवकुमार मिश्र, देवेन्द्र चैबे, तथा आकांक्षा यादव की रचनाओं में भारतीय अतीत तथा वर्तमान की चुनौतियों का गहन विश्लेषण है। गोपालसिंह नेपाली की कविता तथा ख्यात कथाकार कमलेश्वर की कहानी पुनः स्मरण में लाने के लिए पत्रिका ने सार्थक पहल की है। प्रज्ञा शुक्ल की समीक्षा सहित अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

Sunday, October 14, 2012

कर्नाटक से हिंदी में ‘‘भाषा स्पंदन’’


पत्रिका-भाषा स्पंदन, अंक-28, वर्ष -2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक- मंगल प्रसाद, पृष्ठ-64, मूल्य-25रू.,(वार्षिक 100) , ई-मेल: karnatakahindiacademy@yahoo.com, फोन: 080.25710355, संपर्क: 853, 8वां क्रास, 8वां ब्लाक, कोरमंगला, बेंगलूर कर्नाटक
    कर्नाटक से प्रकाशित हिंदी की अहम पत्रिका भाषा स्पंदन का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से युक्त है। अंक का संपादकीय हिंदी भाषा के भविष्य व उसके विकास में अनावश्यक सलाह देने वाले लोगों से सचेत करता है। प्रकाशित आलेखों में हिंदी के प्रति उदासीनता(परमानंद पांचाल), हिंदीः कल आज और कल(एस.के. तिवारी), बदलते दौर के साहित्य के सरोकार(कृष्ण कुमार यादव), भारतीय नारी पूर्व अवधारणा एवं नई परिभाषा(दीपिका जैन) एवं आज की शिक्षा प्रणाली और गांधी जी के विचार(श्रीमती तारा सिंह) शोध छात्रों के साथ साथ आम हिंदी पाठकों के लिए भी समान रूप से उपयोगी हैं। सुषम मुनीद्र तथा रघुनंदन प्रसाद तिवारी की कहानियां आम जीवन की कहानियां है। विश्वनाथ, रमेश चंद शर्मा चंद्र, दरवेश भारती, कमलसिंह चैहान, सुरेश उजाला, घनश्याम अग्रवाल, ज्ञानेन्द्र साज, बी.पी. दुबे, मधुर गंजमुरादाबादी, यायावर, मोहन तिवारी, आर.सी. शर्मा, प्रकाश गौड एवं महाश्वेता चतुर्वेदी की कविताएं, ग़ज़लें प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा लेख आदि भी विशिष्ठ हैं।

Saturday, October 13, 2012

साहित्य में ‘‘साहित्य में ‘‘संबोधन’’

पत्रिका-संबोधन, अंक-जुलाई-सितम्बर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक- क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ-64, मूल्य-20रू.,(वार्षिक 80) , ई-मेल: N.A. ,फोन: 02952.223221, संपर्क: पो. कांकरोली, जिला राजसमंद, राजस्थान
    साहित्य जगत में स्थापित पत्रिका संबोधन का समीक्षित यह 45वें वर्ष का 4था अंक है। पत्रिका के अन्य अंकों के समान यह अंक भी साहित्यिक व पठन योग्य सामग्री से युक्त है। अंक में विशिष्ठ कवि के अंतर्गत वरिष्ठ कवि व साहित्यकार हरीश करमचंदानी की तीन कविताएं समयानुकूल हैं व उनमें आज के समाज का अच्छा व सकारात्मक प्रस्तुतिकरण है। उमेश अपराधी, सुशांत सुप्रिय, त्रिलोकी मोहन पुरोहित की कविताओं में भी आज का समाज दिखाई देता है। विष्णुचंद्र शर्मा का आलेख ‘‘मैं वही तारीख हूं’’ अनेकानेक बार सोेचने के लिए विवश करता है। निशांत आलम की कहानी पवित्रता तथा रूपसिंह चंदेल का संस्मरण आत्मीय सुख देता है। मेकश अजमेली तथा सुभाष मित्तल सत्यम की ग़ज़लों में नव-समाज के कल्याण का भाव है। ख्यात साहित्यकार शैलेन्द्र चैहान से बातचीत तथा राजाराम भादू का सिनेमा पर लिखा गया आलेख संग्रह योग्य है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।