Monday, February 27, 2012

एक बेहतर संवाद पत्रिका ‘आसपास’

पत्रिका: आसपास, अंक: फरवरी 2012, स्वरूप: मासिक, सम्पादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 32, मूल्य: 5 रू.(वार्षिक 50 रू.), मेल: , वेबसाईट: , फोन/मो. 0755.2775129, सम्पर्क: एच 3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर, भोपाल .प्र.
संवाद पत्रिका के इस अंक में प्रो. अक्षय कुमार जैन के निधन का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का आलेख ‘आशा भोसले का तमाचा’ अपने शीषर्क से प्रभावित करता है। सुधाकर आशावादी का भारत भूषण पर एकाग्र आलेख पत्रिका की उपलब्धि कही जा सकती है। इसके अतिरिक्त प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, अहमदाबाद में विश्व हिंदी आयोजन, बस्तर की लोकबोलियों का सम्मान के समाचार अच्छे व जानकारीपरक हैं। हिंदी लेखिका संघ का सम्मान समारोह, समृद्ध हो चुका है हिंदी में विज्ञान साहित्य, स्पंदन समारोह आदि में भी नवीनता है। पत्रिका के अन्य समाचार, जानकारी तथा सूचनाएं साहित्यप्रेमियों के मध्य संवाद स्थापित करने में सहायक हैं।

Sunday, February 26, 2012

पत्रिका साहित्य सागर का फरवरी 2012 अंक

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: मार्च 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 20रू(वार्षिक 250रू.), मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.4260116, सम्पर्क: 161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल .प्र.
पत्रिका का समीक्षित अंक ख्यात साहित्यकार रमेश सोबती जी पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व व कृतित्व पर सारगर्भित सामग्री का प्रकाशन किया गया है। जवाहर धीर, धर्मपाल साहिल, कुलभूषण कालका, हरमहेन्द्र सिंह बेदी, फूलचंद्र मानव, हर्ष कुमार हर्ष, उदयभानु हंस, राजेन्द्र टोकी, यशवीर दाहिया, पशुपति नाथ उपाध्याय, रामनिवास मानव, के आलेख अच्छी व चिंतनपरक रचनाएं हैं। इसके अतिरिक्त मुकेश अनुरागी, सुरेन्द्र भारद्वाज, यतीन्द्र नाथ राही, गार्गीशंकर मिश्र, की रचनाओं में नवीन विचारधारा के साथ साथ समयानुकूल विश्लेषण है। शरदनारायण खरे, कुंवर किशोर टण्डन, कमल सक्सेना, राधावल्लभ आचार्य, स्वामी श्यामानंद सरस्वती तथा कांति शुक्ला की कविताएं प्रभावित करती है।

Wednesday, February 22, 2012

साहित्यिक पत्रिका "पाठ" का नया अंक

पत्रिका: पाठ, अंक: 28, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: देवांशु पाल, पृष्ठ: 68, मूल्य: 20रू (वार्षिक: 80 रू.), रेखाचित्र/आवरण: अलीक, मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 09907126350, सम्पर्क: गायत्री विहार, बिनोबा नगर, बिलासपुर छतीसगढ़ 495001
साहित्यिकता से भरपूर इस पत्रिका में संश्लेषित विचार योग्य रचनाओं का प्रकाशन किया जाता है। समीक्षित अंक मंे स्व. यादवेन्द्र शर्मा, राधेलाल बिजघावने की कविताएं अच्छी व समय के साथ संवाद करती रचनाएं हैं। प्रभा दीक्षित का शमशेर की रचनात्मकता पर संस्मरण एवं सुरेश पंडित तथा राजेन्द्र परदेसी के आलेखों में साहित्य के माध्यम से सामान्य पाठक को सरसता प्रदान की गई है। सीताराम गुप्ता व सिद्धेश्वर की लघुकथाएं अच्छी रचनाओं में शामिल की जा सकती है। कहानी अंतराल(सतीस दुबे) तथा टाइटल(रश्मि खुराना) में भी आम जन के दुख दर्द सिद्दत के साथ उभरकर सामने आए हैं। अन्य रचनाएं, समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।

Monday, February 20, 2012

मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका का नया अंक

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: जून2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: आर. चंद्रशेखर, मनोहर भारती, पृष्ठ: 54, मूल्य: 5रू (वार्षिक: 50 रू.), मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 080.23404892, सम्पर्क: 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजी नगर बेंगलूर कर्नाटक 560.010
पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्य के साथ साथ साहित्येत्तर सामग्री का भी जानकारीपरक प्रकाशन किया गया है। अंक में ओमप्रकाश बंशीलाल झवर, कृष्णपाल सिंह गौतम, डाॅ. राकेश कुमार, एम.विमला, टी.जी. प्रभाश्ंाकर पे्रमी, प्रो. बी.वै. ललिताम्बा, जी.पी. साले एवं हितेष कुमार शर्मा के जानकारीपरक आलेख प्रभावित करते हैं। पत्रिका में प्रकाशित व्यंग्य ये आजकल के गुरूजी बेचारे अच्छी रचना है। ए.लक्ष्मीनारायण, कमला वर्मा, नरेन्द्र सिंह सिसोदिया की कविताएं तथा बी. गोविंद शेनाय की लघुकथाएं अच्छी बन पड़ी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समाचार आदि भी रोचक हैं।

Tuesday, February 14, 2012

पत्रिका ‘‘कथाबिंब’’ की कथायात्रा

पत्रिका: कथाबिंब, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: माधव सक्सेना अरविंद, आवरण/रेखाचित्र: वंशीलाल परमार , पृष्ठ: 64, मूल्य: 15 रू.(वार्षिक 50 रू.), मेल: kathabimb@yahoo.com ,वेबसाईट: www.kathabimb.com , फोन/मोबाईल: 2551.5541, सम्पर्क: -10, बसेरा आॅफ दिनक्वारी रोड़, देवनार, मुम्बई 400088
कथाप्रधान काव्यात्मक पत्रिका के समीक्षित अंक में विचार योग्य कहानियों का प्रकाशन किया गया है। अंक में प्रकाशित कहानियों में कैसे हंसू?(सुशांत सुप्रिय), शायद आसिफ भी यही सोच रहा होगा(रमाकांत शर्मा), टुकड़े टुकड़े कागज(भाग्यश्री गिरी), कंबलदान(प्रशांत कुमार सिन्हा) एवं रामलखन का ... (निरूपमा राय) विशेष हैं। आलोक कुमार सातपुते, आनंद बिल्थरे एवं ज्ञानदेव सुकेश की लघुकथाएं अपना अलग महत्व रखती है। कविताओं ग़ज़लों में घनश्याम अग्रवाल, नसीम अख्तर, दीपक खेतरवाल, अनिल पठानकोठी, अंकित सफर, वीनस केसरी तथा संतोष कुमार तिवारी की रचनाएं प्रभावित करती है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, समाचार तथा रचनाएं भी नवीनता लिए हुए है।

Sunday, February 12, 2012

साहित्य के लिए शुभ तारिका

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: जनवरी, वर्ष: 40, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू (वार्षिक: 150रू.), मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0171.2631068, सम्पर्क: कृष्णदीप 47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी 133001 हरियाणा
पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्य की अनेक विधाओं की रचनाएं शामिल की गई है। पत्रिका के इस अंक की लघुकथाएं विशेष रूप से प्रभावित करती है। अंक में मालती वसंत, अनिल शर्मा, हीरालाल मिश्र, विकास अरोड़ा, नीतू सुदीप्ती, प्रदीप गुप्ता, रूखसाना सिद्दकी एवं कुलभूषण कालड़ा की लघुकथाएं शामिल की गई है। कविताओं में राजीव कुमार, ललित फरक्का, प्रेम कुमार, श्याम गोइन्का, लोक सेतिया एवं सत्यनारायण प्रभावित करते हैं। ओम प्रकाश मंजुल का व्यंग्य ठीक ठाक है। शैली किरण की कहानी तथा डा. महाराज कृष्ण जैन के पत्रकारिता पर विचार प्रभावित करते हैं। पत्रिका इस अंक से 40 वें वर्ष में प्रवेश कर रही है, बधाई इस आशा के साथ कि पत्रिका इसी तरह साहित्य जगत का मार्गदर्शन करती रहेगी।

Saturday, February 11, 2012

पत्रिका ‘‘तेवर राग भोपाली’’ का कवि ओम भारती पर एकाग्र अंक

पत्रिका: राग भोपाली, अंक: 03, वर्ष 16, स्वरूप: मासिक, संपादक: शैलेन्द्र कुमार शैली, पृष्ठ: 120, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 250रू.), मेल: ,वेबसाईट: , फोन/मोबाईल: 9425023669, सम्पर्क: 22, एच. के. होम्स, बंजारी, कोलार रोड़, भोपाल .प्र.
पत्रिका राग भोपाली का समीक्षित अंक ख्यात कवि व साहित्यकार ओम भारती जी पर एकाग्र है। पत्रिका का यह अंक उनके समग्र व्यक्तिव की झलक दिखाने में पूर्णतः सफल रहा है। यह अंक में प्रकाशित रचनाओं व साहित्यकारों से उनके संबंधों के माध्यम से जाना जा सकता है। आत्म कथ्य में उनका कहना है कि उन्होंने ‘‘आखिरी दम तक रचते रहने की आकांक्षा पाल रखी है।’’ यह आकांक्षा अब वटवृक्ष बनकर नवोदित रचनाकारों का मार्गदर्शन कर रही है यह साहित्यजगत के लिए गौरव व हर्ष का विषय है। देवांशु पाल के प्रश्न के उत्तर में वे स्त्री विमर्श के संबंध में कहते हैं, ‘‘मेरी कविता मंे स्त्री विमर्श का वह रूप है, जो स्त्री को निर्वस्त्र किए बगैर उसकी बराबरी स्वीकारता है।’’ उनकी इस स्वीकारोक्ति से स्पष्ट हो जाता है कि वे तथाकथिन स्त्रीविमर्श के पैरोकारों से कितने अलग और संजीदा हैं। ख्यात समीक्षक, आलोचक पूर्णचंद्र रथ का मानना है कि, ‘‘ओम भारती की काव्य भाषा की विशेषता है कि वे नितांत रूढ़ अर्थ परिभाषित कर चुके शब्दों के विन्यास से नए अर्थ हासिल कर लेते हैं। वह भी भावों के तनावों और क्रम के साथ।’’ इसलिए ओम भारती आज के उन असंख्य तथाकथित कवियों से अलग नजर आते हैं जो किसी बेतुके विमर्श अथवा विमर्श की आड़ में चर्चा में बने रहना चाहते हैं। सुबोध श्रीवास्तव, मलय तथा प्रहलाद अग्रवाल भी उनके व्यक्तिव से उन विशेषताओं को खोजकर सामने रखते हैं जो अब तक उनके सम्पर्क में रहे साहित्यमर्मज्ञों भी नहीं जानते होगें? समीक्षा खण्ड के अंतर्गत विजय बहादुर सिंह, वीरेद्र मोहन, ओम निश्चल, लीलाधर मंडलोई, प्रेमशंकर रघुवंशी, प्रज्ञा रावत, हरिशंकर अग्रवाल, डाॅ. रेवती रमण सहित सभी विद्वानों के विचार ओम भारती जी के सृजन की गहराइयों से पाठकों का परिचित कराने में सफल रहे हैं। श्रीराम निवारिया का समीक्षालेख उनके कविता संग्रह ‘वह छटवां तत्व’ की समीक्षा पूर्वनिर्धारित मानदण्डों की अपेक्षा नए विधान गढ़कर करता दिखाई पड़ता है। जिसमें कलात्मकता के साथ साथ प्रगतिशीलता के तत्वों का समावेश भलीभांति हुआ है। माताचरण मिश्र तथा मोहन सिंह ठाकुर के आलेख भी उनके सृजन की विशेषताएं अपने ढंग से रखते हैं। पत्रिका का यह अंक ओम भारती जी पर एकाग्र होने से कविता विधा पर अनुसंधाकत्ताओं के लिए संग्रह योग्य हो गया है।

Friday, February 10, 2012

नाट्य पत्रिका ‘रंग अभियान’

पत्रिका: रंग अभियान, अंक: 23 वर्ष 6, स्वरूप: अनियतकालीन, संपादक: अनिल पतंग, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू (वार्षिक: 100रू.), मेल: ,वेबसाईट: , फोन/मोबाईल: 09304796357, सम्पर्क: नाट्य विद्यालय, बाघा, पो. सुहदनगर, बेंगूसराय बिहार 551218
रंग अभियान देश में हिंदी नाट्य साहित्य की गिनी चुनी पत्रिकाओं में से एक है। पत्रिका अनियतकालीन होते हुए भी महत्वपूर्ण नाट्य सामग्री प्रकाशित कर रही है। समीक्षित अंक में बी. चतुर्वेदी, आनंद पाटिल तथा बालकृष्ण पिल्लै के नाट्यालेख प्रभावित करते हैं। विख्यात साहित्यविद् नरेन्द्र कोहली से बातचीत पत्रिका का प्रमुख आकर्षण है। ओम प्रकाश मंजुल की नौटंकी इसे मंचित होते हुए देखने की लालसा जाग्रत करती है। नरेन्द्र कुमार शर्मा तथा अजय चतुर्वेदी ने ज्ञानवर्धक व संग्रह योग्य आलेख लिखे हैं। सुरभि कुमार की नाट्य समीक्षा के साथ साथ अन्य रंगमंच समाचार देश भर में हिंदी पट्टी में नाटकों पर हो रहे कार्यो पर संक्षेप में प्रकाश डालते हैं। पत्रिका छोटी होते हुए भी ज्ञान की पोथी है जिसे रंगमंच से जुड़ा प्रत्येक पाठक अवश्य पढ़ना चाहेगा।

Tuesday, February 7, 2012

पत्रिका "अहल्या" का नया अंक

पत्रिका:अहल्या, अंक: 3 वर्ष 6,स्वरूप: मासिक, संपादक: आशा देवी सोमाणी, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू (वार्षिक: 240रू.), मेल: ,वेबसाईट: , फोन/मोबाईल: 040.24804000, सम्पर्क: 14-1-498 , ज्ञानबाग रोड़, प्रकाश रोड़ लाईन्स के सामने, पान मण्डी के पास हैदराबाद आंध्रप्रदेश
अहल्या दक्षिण भारत के हैदराबाद नगर से प्रकाशित एक पारिवारिक साहित्यिक मासिक पत्रिका है। पत्रिका में साहित्य के साथ साथ अन्य पारिवारिक विषयों पर पर्याप्त सामग्री का प्रकाशन किया जाता है। यह हर्ष का विषय है कि अन्य हिंदीभाषी प्रांतों के साथ साथ अब दक्षिण से भी हिंदी में अच्छा साहित्य प्रकाशित हो रहा है। समीक्षित अंक मंे प्रभा सरस, नरेश शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, मधुहातेकर, बद्रीनारायण तिवारी, ताराचंद्र आहूजा तथा हरिकृष्ण निगम के अच्छे व रोचक आलेख प्रकाशित किए गए हैं। कहानियों में गलती(ओम प्रकाश बजाज), हमारे समय की रफतार(सुरेश आनंद), पश्चाताप के आंसू(विनोदिनी गोयनका) तथा आज शांति नहीं आई(विजया तेलंग) में नयापन तथा वर्तमान समाज की नवीन विचारधाराओ का चित्रण है। अखिलेश शुक्ल का व्यंग्य ‘‘एक अच्छी आत्मकथा’’ तथा विद्याभास्कर वाजपेयी का उपन्यास अंश मझली रानी प्रभावशाली रचनाएं हैं। पत्रिका की कविताओं में नलिनीकांत, ओम रायजादा, मोहन तिवारी आनंद, वीणापाणी जोशी, राजीव कुमार त्रिगती, अभय बजाज, शारदा प्रसाद सुमन तथा एस.के. जैन ने कुछ नए व सार्थक प्रयोग किए हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।