Saturday, October 13, 2012

साहित्य में ‘‘साहित्य में ‘‘संबोधन’’

पत्रिका-संबोधन, अंक-जुलाई-सितम्बर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक- क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ-64, मूल्य-20रू.,(वार्षिक 80) , ई-मेल: N.A. ,फोन: 02952.223221, संपर्क: पो. कांकरोली, जिला राजसमंद, राजस्थान
    साहित्य जगत में स्थापित पत्रिका संबोधन का समीक्षित यह 45वें वर्ष का 4था अंक है। पत्रिका के अन्य अंकों के समान यह अंक भी साहित्यिक व पठन योग्य सामग्री से युक्त है। अंक में विशिष्ठ कवि के अंतर्गत वरिष्ठ कवि व साहित्यकार हरीश करमचंदानी की तीन कविताएं समयानुकूल हैं व उनमें आज के समाज का अच्छा व सकारात्मक प्रस्तुतिकरण है। उमेश अपराधी, सुशांत सुप्रिय, त्रिलोकी मोहन पुरोहित की कविताओं में भी आज का समाज दिखाई देता है। विष्णुचंद्र शर्मा का आलेख ‘‘मैं वही तारीख हूं’’ अनेकानेक बार सोेचने के लिए विवश करता है। निशांत आलम की कहानी पवित्रता तथा रूपसिंह चंदेल का संस्मरण आत्मीय सुख देता है। मेकश अजमेली तथा सुभाष मित्तल सत्यम की ग़ज़लों में नव-समाज के कल्याण का भाव है। ख्यात साहित्यकार शैलेन्द्र चैहान से बातचीत तथा राजाराम भादू का सिनेमा पर लिखा गया आलेख संग्रह योग्य है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।    

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  1. पंडित नरेन्द्र शर्मा ' सम्पूर्ण रचनावली ' तैयार है। कृपया अधिक जानकारी के लिए देखें :
    परितोष नरेंद्र शर्मा
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    ई मेल : panditnarendrasharma@gmail.com

    प्रेषक : - लावण्या दीपक शाह


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