Wednesday, May 30, 2012

गणित के बाद साहित्य में समावर्तन


 
पत्रिका: समावर्तन,  अंक: मई 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे,  आवरण/रेखाचित्र: अक्षय आमेरिया, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 250रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 07342524457, सम्पर्क: 129, माधवी दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र. 
हिंदी साहित्य जगत की अग्रणी पत्रिका समावर्तन का समीक्षित अंक रोचक रचनाओं से युक्त है। पत्रिका में ख्यात आलोचक समीक्षक प्रमोद वर्मा तथा हिंदी साहित्य के ख्यात विद्वान चंद्रकांत बांदिवडे़कर पर एकाग्र रचनाएं पत्रिका की प्रमुख विशेषता है। अंक में प्रमोद वर्मा पर अक्षय कुमार जैन, धनंजय वर्मा, विश्वरंजन, रमेश दवे तथा वंदना केंगरानी से उनकी बातचीत हिंदी साहित्य की आलोचना तथा समीक्षा पर विमर्श प्रस्तुत करती है। ज्योति चावला पर संपादक निरंजन श्रोत्रिय की टिप्पणी ध्यान आकर्षित करती है। प्रमोद कुमार बंधोपाध्याय की यात्रा कथा लेखक के साथ यात्रा की अनभुति कराती है। दिनेश अत्रि की कहानी सिल का शिल्प तथा कथ्य प्रभावित करता है। सुनिता जैन गौतम राजरिशी की कविताएं स्तरीय हैं। 
चंद्रकांत बांडिवेड़कर पर एकाग्र आलेखों में लीला बांडिवेड़कर, प्रदीपचंद्रकांत के लेख तथा ख्यात लेखिका सूर्यबाला से उनकी बातचीत वर्तमान सहित्य व समाज के आंतरिक पक्षों पर विचार विमर्श है। संतोष चैबे, सूर्यकांत नागर तथा मुकेश वर्मा के स्तंभ पत्रिका के अन्य अंकों की तरह उपयोगी व समसामयिक है। 

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