Tuesday, May 29, 2012

साहित्य में एक जरूरी अविराम


पत्रिका: अविराम,  अंक: मार्चा 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मध्यमा गुप्ता,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 36, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09045437142, सम्पर्क: एफ 488,/2, गली नंम्बर 11 राजेन्द्र नगर, रूड़की जिला हरिद्वार 247667
     पत्रिका अविराम का समीक्षित अंक कविता तथा लघुकथाओं पर एकाग्र है। अंक में रूचिपूर्ण रचनाओं का समावेश किया गया है। इन रचनाओं में समसामयिक विषयों के साथ साथ पिछली शताब्दी के गंभीर मुददों को भी रचना का आधार बनया गया है। पृथ्वी राज अरोरा, महेश पुनेठा, अंजु दुआ जैमिनी सहित अन्य रचनाओं का शामिल किया गया है। रतन चंद्र चंदे्रश तथा हरदयाल उपाध्याय की रचनाएं प्रभावित करती है। विमर्श के अंतर्गत अच्छी व पठनीय रचनाएं हैं। पत्रिका का कथाप्रवाह तथा अन्य कालम उपयोगी व रचनात्मक है। पत्रिका निरंतर अच्छी रचनाओं को सामने ला रही है।

1 comment:

  1. पत्रिका प्रकाशित करना कभी भी आसान काम नहीं रहा। उमेश महादोषी और (श्रीमती) मध्यमा गुप्ता यह काम कितने श्रम के साथ कर रहे हैं, इस तथ्य का अंदाजा पत्रिका के अंकों को देखकर आसानी से लग जाता है। 'अविराम' के सभी अंक स्तरीय सामग्री से परिपूर्ण रहे हैं। यह पत्रिका निरंतर रचनात्मक और आर्थिक सहयोग की सही अर्थों में अधिकारिणी है।

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