Thursday, December 20, 2012

पत्रिका ‘‘शब्द ब्रम्ह के साधक’’ का नया अंक

पत्रिका-शब्दब्रम्ह के साधक, अंक-नवम्बर2012, स्वरूप-वार्षिक, संपादक-प्रतापसिंह सोढ़ी, पृष्ठ-32, रेखंाकन/ग्राफिक्स -नारोलिया ग्राफिक्स, मूल्य- ....रू.,(वार्षिक .....रू.), वेवसाइट -उपलब्ध नहीं , फोन: 9009567297, ईमेल-उपलब्ध नहीं, संपर्क: सुखमणि प्रकाशन, 5, सुखशांति नगर, इंदौर म.प्र.
    पत्रिका का समीक्षित अंक ख्यात साहित्यकार द्वय श्री समिर दोष व श्री राजेन्द्र परदेसी जी पर एकाग्र है। साहित्यजगत में इन दोनों साहित्यकारों के योगदान पर पत्रिका में विश्लेषणात्मक ढंग से विचार किया गया है। अंक में प्रकाशित आलेखों में ओमप्रकाश कादयान, शैली बलजीत के लेख परदेसी जी के साहित्यिक योगदान की विस्तार से समीक्षा है। परदेसी जी का सोहनलाल द्विवेदी जी पर लिखा गया आलेख पत्रिका की मूल भावना व्यक्त करता है। श्रीरामदवे, पुरूषोत्म लाल दुबे, के. एल. दीवान, दीपंकर नियोगी, वेदप्रकाश कुशवाहा, की रचनाएं प्रभावित करती है। सिमर दोष की लघुकथाएं कविताएं व अन्य रचनाएं आज के समाज को दिशा देती दिखाई
पड़ती है। पंकस अकादमी पर उनका आलेख इस संस्था की साहित्यिक गतिविधियों पर संक्षेप में प्रकाश डालता है। परदेसी जी की कविताएं, आलेख, लघुकथाएं कहानियां आदि स्तरीय व संग्रह योग्य है। अंक में श्री प्रतापसिंह सोढ़ी जी द्वारा लिखे गए संपादकीय भी साहित्य की वर्तमान दशा व उसके भविष्य पर विचार करते दिखाई पड़त हैं।

Tuesday, October 30, 2012

द्विव्यालोक का वार्षिक अंक

पत्रिका-द्विव्यालोक, अंक-अर्द्धवार्षिक 2012, स्वरूप-वार्षिक, संपादक-जगदीश किंज्लक, पृष्ठ-102, रेखंाकन/ग्राफिक्स -अम्बिका प्रसाद द्विव्य,  मूल्य-60रू.,(वार्षिक 120.रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 0755.2494777, ईमेल- , संपर्क: 145ए, साहित्य सदन, सांईनाथ नगर, सी सेक्टर, कोलार भोपाल म.प्र.
    ख्यात साहित्यकार,  लेखक समीक्षक व नाटककार स्व. श्री अम्बिका प्रसाद द्विव्य जी की स्मृति मंे वर्ष में दो बार प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका का स्वरूप पूरी तरह से साहित्यिक है। इस अंक में इंदिरा दांगी, निरूपमा राय, कमल कपूर एवं स्वाति तिवारी की मार्मिक कहानियों का प्रकाशन किया गया है। प्रेम जनमेजय, बृजकिशोर पटेल व एम.एल खरे के व्यंग्य प्रभावित करते हैं। सुधा ओम ढीगरा, पदमा सिंह, आशमा कौल, कैलाश पचैरी, शैलेन्द्र शर्मा एवं यतीन्द्र नाथ राही की कविताएं भी समसामयिक व मंथन योग्य हैं। अजय अज्ञान एवं आशीष दशोतर की ग़ज़लें विशेष रूप से प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं समीक्षाएं भी अच्छी व रोचक हैं।

पत्रिका सुखनवर में साहित्यिक अभिरूचि क समागम

पत्रिका-सुखनवर, अंक-जुलाई-अगस्त 2012, स्वरूप-द्वैमासिक, संपादक-अनवारे इस्लाम, पृष्ठ-52, रेखंाकन/ग्राफिक्स -रूपिन्दर कौर,  मूल्य-25रू.,(वार्षिक 200रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 09893663536, ईमेल- , संपर्क: सी 16, सम्राट कालोनी, अशोेक गार्डन भोपाल म.प्र.
    हिंदी व उर्दू साहित्य के लिए समान रूप से समर्पित पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्य को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। अंक में विजेन्द्र शर्मा, मुख्तार शमीम व विनय उपाध्याय के आलेख प्रमुखता से प्रकाशित किए गए हैं। प्रकाशित कहानियों में नईम कौसर, अंजुल उस्मानी ने अच्छा समय व समाज के मध्य  अच्छा समन्वय प्रस्तुत किया है। मनोज श्रीवास्तव की कविता, शमीम बीकानेरी, नवीन माथुर व माणिक वर्मा की ग़ज़लें एवं असलम चिश्ती की समीक्षा भी उल्लेखनीय है। पत्रिका की अन्य रचनाएं  भी प्रभावित करती है।

Monday, October 29, 2012

समय के साखी का नया अंक

समय के साखी का नया अंक
पत्रिका-समय के साखी, अंक-जून-जुलाई 2012, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. आरती, पृष्ठ-52, रेखंाकन/ग्राफिक्स -के. रवीन्द्र ,  मूल्य-20रू.,(वार्षिक 200रू.), वेवसाइट- www.samaykesakhi.in, फोन: 0755.4030221, ईमेल- samaysakhi@gmail.com, संपर्क: बी-308, सोनिया गांधी काम्पलेक्स, हजेला हाॅस्पिटल के पास, भोपाल म.प्र.
    विविधतापूर्ण साहित्यक पत्रिका समय के साखी के इस अंक में भी अच्छी व जानकारीपरक रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में लीलाधर मण्डलोई जी की डायरी, प्रो. विजय अग्रवाल का स्मृति आलेख एवं अंजली तुकाराम कुम्भारे का विरासत लेख प्रभावशाली है। केशव तिवारी, विनोद बिहारी लाल, चंद्रकला त्रिपाठी, स्वर्णा दीक्षित एवं निर्मला मोदी की कविताएं प्रकाशित की गई है। मुरारी शर्मा की कहानी रिहर्सल, शहरी(इंदिरा दांगी) एवं बलि(सूर्यकांत नागर) पत्रिका के इस अंक की अन्य विशेषता है।

Sunday, October 28, 2012

आज की ही नहीं समकाल की भी ‘‘समकालीन अभिव्यक्ति’’

पत्रिका-समकालीन अभिव्यक्ति, अंक-अक्टूबर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-उपेन्द्र कुमार मिश्र, पृष्ठ-52, रेखंाकन/ग्राफिक्स - ,  मूल्य-15रू.,(वार्षिक 60रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 26645001, ईमेल- , संपर्क: 5, तृतीय तल, 984 वार्ड नं. 7, महरौली, नई दिल्ली
    साहित्य के लिए गंभीर रूप से चितिंत एवं कार्यरत पत्रिका के इस अंक में अनेक रचनाएं वर्तमान समय और समाज को प्रतिबिंबित करती है। अंक में अमिताभ शंकर राय चैधरी, प्रभात दुबे तथा मनीष कुमार सिंह की कहानियांे का समाज समकालीन समाज है जिसके बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करने का समय आने पर भी विचार नहीं हो रहा है। आलेखों में कृष्ण कुमार यादव, डी. सत्यलता, सीताराम गुप्ता एवं सुमन वर्मा के विविध आलेख ज्ञानार्जन करते हैं। पत्रिका का प्रमुख आकर्षण ख्यात कथाकार साहित्यकार डाॅ. रामदरश मिश्र से साक्षात्कार है। अनिल डबराल ने धरोहर के अंतर्गत रोचक ढंग से अपनी बात रखी है। कृष्ण मोहन, आचार्य भगबत दुबे, रामनाथ शिवेन्द्र, महाश्वेता चतुर्वेदी, जी.पी. दुबे, नवल जायसवाल, सुभाष रस्तोगी की कविताएं प्रभावित करती है। सरोज गुप्ता एवं जिनेन्द्र जैन की लघुकथाएं भी समसामयिक हैं। पत्रिका की समीक्षाएं, अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

ख्यात पत्रिका साहित्य सागर का गीत विशेषांक


पत्रिका-साहित्य सागर, अंक-अगस्त 2012, स्वरूप-मासिक, संपादक-कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ-52, रेखंाकन/ग्राफिक्स - ,  मूल्य-20रू.,(वार्षिक 240रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 0755.4260116, ईमेल- , संपर्क: 161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र.
    साहित्य जगत की ख्यात पत्रिका साहित्य सागर का गीत विशेषांक संग्रह योग्य उपयोगी सामग्री से युक्त है। अंक में ख्यात हस्तियों के संदेश के साथ साथ गीत पर उपयोगी सामग्री प्रकाशित की गई है। पशुपति नाथ उपाध्याय, श्रीकृष्ण शर्मा, शरदनारायण खरे, मालती शर्मा एवं सनातन कुमार वाजपेयी के आलेख विशेष महत्व के हैं। मूलाराम जोशी, परशुराम विरदी, विद्यानंदन राजीव, सुरेश गौतम, श्यामबिहारी सक्सेना, कमलकांत सक्सेना, प्रो, उमा त्रिपाठी की गीतिक्षकांए प्रभावित करती है। पत्रिका का हर अंक नवीनतम सामग्री व प्रस्तुतीकरण से युक्त होता है व यही इसकी विशेषता है।

Thursday, October 25, 2012

दक्षिण की ख्यात पत्रिका ‘‘अहल्या’’ का दहेज प्रथा विशेषांक


पत्रिका-अहल्या, अंक-अक्टूबर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-श्रीमती आशादेवी सोमाणी, पृष्ठ-64, रेखंाकन/ग्राफिक्स - ,  मूल्य-20रू.,(वार्षिक 80रू.), वेवसाइट - ,  फोन: 040.24804000, ईमेल- , संपर्क: अहल्या, 14-4-408, ज्ञानबाग रोड़, प्रकाश रोड़ लाइन्स के सामने, पान मण्डी के पास, हैदराबाद आंध्रप्रदेश
    हैदराबाद से प्रकाशित नारीविषयक समीक्षित पत्रिका के प्रत्येक अंक में किसी विशेष विषय अथवा व्यक्तित्व पर संग्रह योग्य सामग्री का प्रकाशन किया जाता है। समीक्षित अंक को दहेज प्रथा विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया गया है। अंक में इस विषय पर प्रकाशित सामग्री मंे नवीनतम दृष्टिकोण व विचारधारा का समावेश होने के कारण अंक की उपयोगिता बढ़ गई है। स्व. डाॅ. पी.एन. कुटटन पिल्लै, रेणुका नैयर, अर्चना वर्मा, मीना रानी, राकेश कुमार सिंह, रतन जैन, आशा शैली, रूखसाना सिद्दीकी के आलेखों में गहन विश्लेषण व समाज में इस प्रथा के कारण उत्पन्न विषमता को उदघाटित किया गया है। विद्याभास्कर वाजपेयी का धारावाहित उपन्यास ‘मझली रानी’, काल कोठरी(प्रभात दुबे), मलिना(सरला शर्मा), आलोकित यात्री(रामनारायण मिश्र), अवशेष नाद(अंजु दुआ जैमिनी), नन्हु की सही सोच(सुकीर्ति भटनागर) की रचनाओं में साहित्यिकता के साथ साथ गंभीर चिंतन दिखाई पड़ता है। लघुकथाओं में सिद्धेश्वर, रामचरण यादव, मुकेश जैन, सुनीता शर्मा में सरसता है। रामस्नेहीलाल शर्मा, सुधा(तेलुगु कविता का अनुवाद), रामजीवन राम, राजेश यादव, गीता चैहान की कविताओं में भी दहेज विरोधी भाव दिखाई देता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व लेख आदि भी प्रभावित करते हैं।

Wednesday, October 24, 2012

‘‘हिंदुस्तानी जबान’’ और गांधी साहित्य का संगम

पत्रिका-हिंदुस्तानी जबान, अंक-जुलाई-सितम्बर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-माधुरी छेड़ा, पृष्ठ-96, मूल्य-20रू.,(वार्षिक 80रू.), फोन: 22812871, ईमेल- hp.sabha@hotmail.com , वेवसाइट - www.hindustanipracharsabha.com   संपर्क: महा. गांधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर, महा. गांधी बिल्ंिडग, 7 नेताजी सुभाष मार्ग, मुंबई महाराष्ट्र
    गांधी साहित्य के लिए समर्पित पत्रिका का प्रत्येक अंक विशिष्ठ सामग्री से युक्त होता है। समीक्षित अंक मंे भी गांधीवादी विचारधारा से ओतप्रोत अनेक रचनाएं प्रकाशित की गई है। इनमें उषा ठक्कर, शिवकुमार मिश्र, देवेन्द्र चैबे, तथा आकांक्षा यादव की रचनाओं में भारतीय अतीत तथा वर्तमान की चुनौतियों का गहन विश्लेषण है। गोपालसिंह नेपाली की कविता तथा ख्यात कथाकार कमलेश्वर की कहानी पुनः स्मरण में लाने के लिए पत्रिका ने सार्थक पहल की है। प्रज्ञा शुक्ल की समीक्षा सहित अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

Sunday, October 14, 2012

कर्नाटक से हिंदी में ‘‘भाषा स्पंदन’’


पत्रिका-भाषा स्पंदन, अंक-28, वर्ष -2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक- मंगल प्रसाद, पृष्ठ-64, मूल्य-25रू.,(वार्षिक 100) , ई-मेल: karnatakahindiacademy@yahoo.com, फोन: 080.25710355, संपर्क: 853, 8वां क्रास, 8वां ब्लाक, कोरमंगला, बेंगलूर कर्नाटक
    कर्नाटक से प्रकाशित हिंदी की अहम पत्रिका भाषा स्पंदन का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से युक्त है। अंक का संपादकीय हिंदी भाषा के भविष्य व उसके विकास में अनावश्यक सलाह देने वाले लोगों से सचेत करता है। प्रकाशित आलेखों में हिंदी के प्रति उदासीनता(परमानंद पांचाल), हिंदीः कल आज और कल(एस.के. तिवारी), बदलते दौर के साहित्य के सरोकार(कृष्ण कुमार यादव), भारतीय नारी पूर्व अवधारणा एवं नई परिभाषा(दीपिका जैन) एवं आज की शिक्षा प्रणाली और गांधी जी के विचार(श्रीमती तारा सिंह) शोध छात्रों के साथ साथ आम हिंदी पाठकों के लिए भी समान रूप से उपयोगी हैं। सुषम मुनीद्र तथा रघुनंदन प्रसाद तिवारी की कहानियां आम जीवन की कहानियां है। विश्वनाथ, रमेश चंद शर्मा चंद्र, दरवेश भारती, कमलसिंह चैहान, सुरेश उजाला, घनश्याम अग्रवाल, ज्ञानेन्द्र साज, बी.पी. दुबे, मधुर गंजमुरादाबादी, यायावर, मोहन तिवारी, आर.सी. शर्मा, प्रकाश गौड एवं महाश्वेता चतुर्वेदी की कविताएं, ग़ज़लें प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा लेख आदि भी विशिष्ठ हैं।

Saturday, October 13, 2012

साहित्य में ‘‘साहित्य में ‘‘संबोधन’’

पत्रिका-संबोधन, अंक-जुलाई-सितम्बर 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक- क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ-64, मूल्य-20रू.,(वार्षिक 80) , ई-मेल: N.A. ,फोन: 02952.223221, संपर्क: पो. कांकरोली, जिला राजसमंद, राजस्थान
    साहित्य जगत में स्थापित पत्रिका संबोधन का समीक्षित यह 45वें वर्ष का 4था अंक है। पत्रिका के अन्य अंकों के समान यह अंक भी साहित्यिक व पठन योग्य सामग्री से युक्त है। अंक में विशिष्ठ कवि के अंतर्गत वरिष्ठ कवि व साहित्यकार हरीश करमचंदानी की तीन कविताएं समयानुकूल हैं व उनमें आज के समाज का अच्छा व सकारात्मक प्रस्तुतिकरण है। उमेश अपराधी, सुशांत सुप्रिय, त्रिलोकी मोहन पुरोहित की कविताओं में भी आज का समाज दिखाई देता है। विष्णुचंद्र शर्मा का आलेख ‘‘मैं वही तारीख हूं’’ अनेकानेक बार सोेचने के लिए विवश करता है। निशांत आलम की कहानी पवित्रता तथा रूपसिंह चंदेल का संस्मरण आत्मीय सुख देता है। मेकश अजमेली तथा सुभाष मित्तल सत्यम की ग़ज़लों में नव-समाज के कल्याण का भाव है। ख्यात साहित्यकार शैलेन्द्र चैहान से बातचीत तथा राजाराम भादू का सिनेमा पर लिखा गया आलेख संग्रह योग्य है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।    

Saturday, September 29, 2012

साहित्य परिक्रमा के इस अंक में नवीनता व साहित्यिकता


पत्रिका: साहित्य परिक्रमा, अंकः जुलाई-सितम्बर 2012, स्वरूप: त्रौमासिक, संपादक: जीत सिंह जीत, मुरारी लाल गुप्ता, मूल्य: 15रू. (वार्षिक 60 रू.), ई मेल:  , वेवसाइट: उपलब्ध नहीं, फोन: 09425407471, सम्पर्क:   राष्ट्रोत्थान भवन, माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क ग्वालियर म.प्र. 
 अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास द्वारा विगत 13 वर्ष से निरंतर प्रकाशित की जा रही पत्रिका साहित्य परिक्रमा का प्रत्येक अंक विशेषांक होता है। समीक्षित अंक में भी संग्रह योग्य पठ्नीय रचनाओं का प्रकाशन किया गया हैै। इनमें साहित्यिकता के साथ साथ समाज को जोड़ने वाले विचारों की प्रचुरता है। प्रकाशित कहानियों में संध्या की ओर(इंदु गुप्ता) तथा आंगन की रोशनी(डाॅ. कामिनी) विशेष रूप से वर्तमान बदलते समाज की कहानियां हैं। महेश पाण्डेय तथा संजय शर्मा की लघुकथाएं सार्थक तथा समयानुकूल रचनाएं हैं। सपंतदेवी मुरारका का यात्रा विवरण रोचकता से भरपूर है। अब्बासखान के व्यंग्य में कटाक्ष की कमी रह गई, इस व्यंग्य के लेखन में अभी ओर  समय दिया जाना चाहिए था। डाॅ. अवधेश चंसोलिया तथा आचार्य भगवत दुबे के आलेखांे में अच्छा विषयगत विश्लेषण है। डाॅ. शैलेन्द्र स्वामी, सतीश चतुर्वेदी, मोतीलाल विजयवर्गीय, डाॅ. एन.एस. शर्मा तथा संजय जोशी के शोधपरक आलेख शोधार्थी के साथ  साथ आम पाठक के लिए भी समान रूप से उपयोगी हैं। कविताओं  में डाॅ. रामस्वरूप खरे, मधुर गंजमुरादाबादी, देवेन्द्र आर्य, भानुदत्त त्रिपाठी, जगदीश श्रीवास्तव की कविताएं, गीत व ग़ज़ल प्रभावित करते हैं। अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी रोचक व समसामयिक हैं। 

Thursday, September 27, 2012

मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका का नया अंक


पत्रिका-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक-सितम्बर 2012, स्वरूप-मासिक, संपादक-आर. चंद्रशेखर, मनोहर भारती, पृष्ठ-64, मूल्य-5रू.,(वार्षिक 50) , ई-मेल: ,फोन: 080.23404892, संपर्क: 58, वेस्ट आॅफ कोर्ट रोड़, राजाजी नगर, बेंगलूर कर्नाटक 
पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित रचनाएं हिंदी साहित्य एवं भाषा का प्रतिनिधित्व करती हैं। अंक में प्रकाशित प्रमुख रचनाओं में रामचरण यादव, छेबी शाह, देवदत्त शर्मा , हितेश कुमार शर्मा, लालता प्रसाद मिश्र, साबिया मोहम्मद रफीक तथा गोविंद शैनाय की रचनाओं में नवीनता तथा साहित्यिकता है। अन्य रचनाओं में पदमप्रिया, लालतप्रसाद मिश्र, संतोष काम्बले, नरेन्द्र सिंह परिहार, रामसेवक शुक्ल, राधेलाल नवचक्र, श्रीमती वनिता, देवेन्द्र कुमार मिश्रा, नलिनीकांत, प्रो. बी. बै. ललिताम्बा की रचनाएं आधुनिक समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं। अन्य रचनाएं भी पठनीय व स्तरीय हैं।

Sunday, September 23, 2012

माॅरिशस से प्रकाशित ‘‘विश्व हिंदी समाचार’’ पत्रिका का विश्व हिंदी दिवस विशेषांक


पत्रिका: विश्व हिंदी समाचार, अंकः 17 मार्च 2012, स्वरूप: त्रौमासिक, संपादक: श्रीमती पूनम जुनेजा, गंगाधर सिंह सुखलाल, मूल्य: प्रकाशित नहीं, ई मेल: whsmauritius@intnet.mu, sgwhs@intnet.mu, whsmauritius@gmail.com  , वेवसाइट: , फोन: 230.6761196, सम्पर्क: स्विफ्ट लेन, फाॅरेस्ट साइट, माॅरिशस 
                                    माॅरिशस से प्रकाशित समाचार प्रधान पत्रिका का यह अंक विविधतापूर्ण जानकारी से युक्त है। अंक में मुखपृष्ठ पर भारत के प्रधानमंत्राी मनमोहन सिंह का संदेश प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। माॅरिशस में 10 जनवरी 2012 को आयोजित होने वाले समारोह का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है। समाचार में स्पष्ट किया गया है कि माॅरिशस में हिंदी का प्रचार प्रसार तथा उपयोग वहां के आमजन से जुड़ा हुआ है। इसे लोगों से अलग करना संभव नहीं है। पत्रिका ने विश्व भर में हिंदी दिवस के आयोजन का समाचार अन्य पृष्ठों पर प्रकाशित किया है। इसके अंतर्गत भारत, कुवैत, पुर्तगाल, जापान, इज़राइल, पोर्ट आॅफ स्पेन, गुयाना, दोहा, भूटान, श्रीलंका एवं अमरीका में आयोजित होने वाले हिंदी दिवस समारोह की जानकारी प्रभावित करती है। 11 फरवरी 2012 को महात्मा गांधी संस्थान के सुब्रमण्यम भारती सभागार में विश्व हिंदी ससचिवालय ने अपने आधिकारिक कार्यारंभ की चतुर्थ वर्षगांठ मनाई, पत्रिका की प्रधान संपादक श्रीमती पूनम जुनेजा ने अतिथियों का स्वागत किया। ख्यात साहित्यकार व लेखक श्री विभूतिनारायण राव जी का स्वागत करते हुए कहा कि विभूति नारायण राव ने वर्तमान साहित्य पत्रिका का संपादन  करने के साथ साथ साहित्य जगत के लिए जो कार्य किए हैं वे अनंतकाल तक याद किए जाएंगे। कार्यक्रम का संचालन श्री गंगाधर सिंह सुखलाल ने किया। 
जापान के तोकियो विश्वविद्यालय के विभाग फाॅरेन स्टडीज में भी द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन  के आयोजन की रिपोर्ट हिंदी के वैश्विक स्वरूप व उसके उपयोग की विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। स्पेन में15 से 17 मार्च2012 तक आयोजित यूरोपीय हिंदी संगोष्ठी में विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षणः परिदृश्य विषय पर परिचर्चा का समाचार योरोप में हिंदी के विकास की सकारात्मक प्रस्तुति है। इसके अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय हिंदी उत्सव के अकादमिक सत्रों का शुभारंभ, भोपाल में धर्मवीर भारती फैलोशिप शुरू, नांदेड (भारत) में लेखक सम्मेलन, ख्यात सिने तारिका रानी मुखर्जी द्वारा अरब के पहले हिंदी रेडियो स्टेशन का शुभारंभ, दिल्ली के प्रगति मैदान में पुस्तक मेला सम्पन्न, डाॅ. पांचाल का दक्खिनी हिंदी पर व्याख्यान सहित अन्य समाचार पत्रिका की अन्य विशेषता है। पत्रिका की प्रधान संपादक श्रीमती पूनम जुनेजा का सह कथन समसामयिक है, ‘‘हिंदी शिक्षण के फैलाव को बढ़ाने के साथ साथ उसका आधुनिकीकरण करना होगा  जिससे कि नई युवा पीढ़ी भी इसकी ओर आकर्षित हो।’’ पत्रिका का कलेवर, साज सज्जा तथा रचनात्मकता उच्च कोटि की है।  

पत्रिका ‘‘इप्टा वार्ता’’ का नाट्य समारोह अंक


पत्रिका: इप्टा वार्ता, अंकः 10, स्वरूप: त्रौमासिक, संपादक: हिमांशु राय, मूल्य: प्रकाशित नहीं, ई मेल: iptavarta@rediffmail.com   , फोन: 0761.241771, सम्पर्क: पी.डी. 4, परफेक्ट एन्कलेव, स्नेह नगर, जबलपुर 02 म.प्र. 
पत्रिका इप्टा वार्ता के समीक्षित अंक में अठ्ारहवें राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। कार्यक्रम के लिए म.प्र. नाट्य विद्यालय भोपाल के निदेशक श्री संजय उपाध्याय ने इस समारोह में प्रमुख भूमिका का निर्वाहन किया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के आयोजनों को आमजन ने सराहा। इस दौरान मंचित नाटकों के चित्रा भी पत्रिका द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। नरेश सक्सेना की कविता तथा निर्मिश ठाकर का रेखाचित्रा भी पत्रिका का प्रमुख आकर्षण है। 

Wednesday, August 22, 2012

समय के साखी का नया अंक


पत्रिका-समय के साखी, अंक-मई 2012, स्वरूप-मासिक, संपादक-ड़ाॅ. आरती, पृष्ठ-64, मूल्य-25रू.,(वार्षिक 250) , ई-मेल: samaysakhi@gmail.com ,फोन: 09713236330, संपर्क: बी-308, सोनिया गाॅधी काम्पलेक्स, हजेला हाॅस्पिटल के सामने भोपाल म.प्र. 
साहित्य जगत की इस स्थापित पत्रिका में प्रकाशित रचनाओं का स्तर हमेशा उत्कृष्ट रहा है। समीक्षित अंक में ओम भारती, प्रभुनाथ सिंह आजमी, प्रेमशंकर रघुवंशी, राजीव कुमार त्रिपाठी तथा संदीप अवस्थी की कविताएं प्रभावित करती है। रतनलाल एवं एस.एस. पटेल की अनुदित रचनाओं में मौलिकता का आभास होता है। सुबोध कुमार श्रीवास्तव, भवानी सिंह तथा राजेन्द्र परदेसी की कहानियों में वर्तमान समाज में आ रहे बदलाव के दर्शन होते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं, पत्र आदि भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। 

साहित्य में सुखनवर


पत्रिका-सुखनवर, अंक-मई-जून 2012, स्वरूप-द्वैमासिक, संपादक-अनवारे इस्लाम, पृष्ठ-44, मूल्य-25रू.,(वार्षिक 100) , ई-मेल: sukhanwar12@gmail.com ,फोन: 09893663536 , संपर्क- सी-16, सम्राट कालोनी, अशोका गार्डन, भोपाल म.प्र. 
हिंदी व उर्दू साहित्य में समान रूप से दखल रखने वाली इस पत्रिका का प्रत्येक अंक पठनीय होता है। नवीन विचारधारा व अद्यतन विचारों को समय समय पर यह पत्रिका प्रस्तुत करती रही है। समीक्षित अंक में सुरेश पण्डित, उमा चोपड़ा, अहमद जगलोल, राजेश जोशी, अशोक मिजाज, जसवीर जख्मी, सत्यप्रकाश शर्मा की रचनाएं अपनी छाप छोड़ती है। रघु ठाकुर, कौशल कुमार, प्रो. मुख्तार शमीम, लालजी श्रीवास्तव तथा फिराक मिर्जा की गद्य रचनाओं में आज का समाज व उसके वैचारिक मतभेद दिखाई पड़ते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा आलेख आदि भी विशेष महत्व के हैं। 

Tuesday, August 21, 2012

पत्रिका ‘‘हिंदुस्तानी जबान’’ में भारतीय दर्शन तथा विचार



पत्रिका-हिंदुस्तानी जबान, अंक-जुलाई-अगस्त 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-माधुरी छेड़ा, पृष्ठ-54, मूल्य-20रू.,(वार्षिक 60) ,फोन: उपलब्ध नहीं, संपर्क- महात्मा गाॅधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर, महात्मा गाॅधी बिल्ंिडग, 7 नेताजी सुभाष मार्ग, मुम्बई महाराष्ट्र
मुम्बई से प्रकाशित इस गाॅधीवादी साहित्य पत्रिका का प्रत्येक अंक संग्रह योग्य रचनाओं से युक्त होता है। इस अंक में उषा ठक्कर, विमलेश कांति वर्मा, रंजना अरगड़े, एवं मनोज सोनकर के लेख विशिष्ठ हैं। अन्य रचनाओं में प्रकाश पर्थेकर की कोकड़ी कहानी, भावना सक्सेना की कहानी ‘एक उधार बाकी है’, हस्तीमल हस्ती मकी ग़ज़ल, पारूल रावत एवं श्रीमती एस.एम. कासिम्बी के लेख कविताएं तथा अली अब्बास रिजवी का देश गान प्रभावित करता है। 

केरल हिंदी साहित्य अकादमी शोध पत्रिका का नया अंक


पत्रिका-केरल हिंदी साहित्य अकादमी शोध पत्रिका, अंक-जुलाई 2012, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-एस. चंदशेखर नायर, पृष्ठ-44, मूल्य-20रू.,(वार्षिक  80 रू.60), फोन: 0571.2541355, संपर्क: श्रीनिकेतन, लक्ष्मीनगर, पट्टम पालस पोस्ट, तिरूवन्नतपुरम, केरल 
                              केरल से प्रकाशित हिंदी साहित्य की इस पत्रिका का प्रत्येक अंक नवीनतम साहित्यिक रचनाओं से युक्त होता है। समीक्षित अंक में साहित्य की विभिन्न विधाओं पर देश भर के लेखकों द्वारा भेजी गई रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। इनमें कुछ रचनाएं साहित्यिक व सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व की हैं। बद्रीनारायण तिवारी, चंद्रशेखर नायर, रमा उण्णिातान, राजपुष्पम, रामकुमार वर्मा, मधु धवन की रचनाओं में साहित्यिकता के तत्व प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। कुलशेखर, रामस्नेहीलाल वर्मा, सजिता पी.एस. तथा ख्यात न्यायविद एम. आर. हरिहरन नायर ने रचनाओं में भावों को सुंदर ढंग से पिरोया है। के.जी. प्रभाकरण, जाधव सुनील गुलाब सिंह, प्रीतारमणीटी.आई., लीलाकुमार एस., एन.जी.देवकी सहित अन्य लेखकों की रचनाओं में भी विशिष्टता है।

Tuesday, July 31, 2012

इस बार ‘वटवृक्ष’ की छांव में


पत्रिका: वटवृक्ष,  अंक: मई 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: रवीन्द्र प्रभात, रश्मि प्रभा,  आवरण/रेखाचित्र: अपराजिता कल्याणी, , पृष्ठ: 64, मूल्य: 20 रू.(वार्षिक 80 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट:  , फोन/मोबाईल: 0522.2730672, सम्पर्क: एम 1, 107, परिकल्पना, सेक्टर एम 1, संगम होटल के पास, अलीगंज, लखनऊ उ.प्र. 
पत्रिका वटवृक्ष नवीनतम पत्रिका होते हुए भी साहित्यिकता से भरपूर है। अंक में कुछ अच्छी व चुनी हुई रचनाओ का प्रकाशन किया गया है। इनमें साहित्यिकता के साथ साथ वर्तमान समयबोध भी निहित है। दीपिका रानी, कविता विकास, संगीता स्वरूप, निधि टण्डन, रचना श्रीवास्तव, साधना वैद, हिमानी, अमृता तन्मय की रचनाओं में गंभीरता व पठनीयता है। अन्य रचनाओं में जिनमें प्रमुख रूप से राजेश उत्साही, नरेन्द्र व्यास, एम. वर्मा, दिनेश कुमार चैहान, कपिल देव सिंह, सलिल वर्मा ने कुछ नए प्रयोग किए हैं जो समय के साथ साथ  आज की पीढ़ी पर खरे उतरते हैं। पूजा उपाध्याय, वाणी शर्मा, प्रीत अरोड़ा, लावण्या दीपक शाह, यतीन मोहन मोहंती , विनय दास, श्याम संुदर दीक्षित एवं मुकेश पाण्डेय ने कुछ अच्छे प्रयोग किए हैं। 

साहित्य में अहल्या


पत्रिका: अहल्या,  अंक: मई 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: आशादेवी सोमाणी,  आवरण/रेखाचित्र: भारत की विदेश सचिव निरूपमा राव, , पृष्ठ: 64, मूल्य: 20 रू.(वार्षिक 240 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 040.24804000, सम्पर्क: 14.4.498/ए, ज्ञानबाग रोड़, प्रकाश रोड़ लाईंस के सामने, पान मण्डी के पास हैदराबाद आंध्रप्रदेश
साहित्य के साथ साथ विविधतापूर्ण सामग्री से युक्त पत्रिका के इस अंक में नवीनतम रचनाओं का समावेश किया गया है। अंक में मालती शर्मा, ओमप्रकाश बजाज, विश्वमोहन तिवारी, गजानन पाण्डेय व चंद्रमोलेश्वर प्रसाद की रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। सीताराम गुप्ता, हेमवती शर्मा, प्रो. श्यामलाल कौशल,  कृष्ण कुमार यादव, किशोरीलाल व्यास, विद्याभास्कार वाजपेयी, किरण राजपुरोहित व रीता सिंह की रचनाएं साहित्येत्तर होते हुए भी सरसता से भरपूर हैं। राजेन्द्र परदेसी जी की कहानी दुष्चक्र, ताऊ शेखावटी(ममता), रोहित यादव(लघुकथाएं) तथा अरूण नैथानी का भारतीय विदेश सचिव पर एकाग्र आलेख प्रभावित करता है। श्यामलाल उपाध्याय, रामनिवास मानव, सजीवन मयंक, ओम रायजाद, बी.एल. अग्रवाल, शिवचरण सेन, नरेश हामिलपुरकर, टी. मोहनसिंह एवं माता प्रसाद शुक्ल की कविताओं में नयापन है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा आलेख भी प्रभावित करते हैं। 

Monday, July 30, 2012

समाचार प्रधान पत्रिका आसपास


पत्रिका-आसपास, अंक-जुलाई 2012, स्वरूप-मासिक, संपादक-राजुरकर राज, पृष्ठ-24, मूल्य-5रू.,वार्षिक  60 रू.60, संपर्क- एच.03, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर, भोपाल म.प्र. (भारत)
समाचार प्रधान पत्रिका के इस अंक में ख्यात उर्दू कथाकार सहादत हसन मंटो पर विशेष सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अभिलाष को मिले दादा साहब फालके पुरस्कार का समाचार पत्रिका का अन्य आकर्षण है। इसके अतिरिक्त ख्यात संपादक व लेखक धर्मवीर भारती पर एकाग्र आलेख विशेष व संग्रह योग्य है। अंक की अन्य रचनाओं में प्रदीप सौरभ को मिला सम्मान, रस्किन बांड की उपलब्धियां, भोपाल में धर्मवीर भारती पर फैलोशिप, युवा रचनाकारों का काव्य विनोद, ताशकंद में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन तथा ख्यात कथाकार तेजेन्द्र शर्मा के भोपाल के संबंध में विचार पत्रिका को सार्थक व सर्वस्वीकार्य बनाते हैं। यह आश्चर्य का विषय है कि कम दामों में उपलब्ध रचनाकारों के जीवन व समाचारों से जुड़ी इस पत्रिका का पाठक वर्ग अभी तक स्थिर बना हुआ है। 

साहित्य में समावर्तन


पत्रिका: समावर्तन,  अंक: जुलाई 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू (वार्षिक 250 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0734ण्2524457, सम्पर्क: 129, माधवी दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
पत्रिका का समीक्षित अंक आंशिक रूप से ख्यात कथाकार व साहित्यकार अमरकांत पर एकाग्र है। अंक में उनके व्यक्तिव पर प्रकाशित रचनाओं में रमेश दवे, रामकली सर्राफ के आलेख व अनिता गोपेश द्वारा उनसे लिया गया साक्षात्कार विशेष रूप से प्रभावित करता है। सरोकार के अंतर्गत ख्यात रंगकर्मी सत्यमोहन पर प्रकाशित आलेखों में मनोहर वर्मा, जितेन्द्र हेनरी, छविनाथ तिवारी तथा नरेन्द्र दुबे से उनकी बातचीत विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अंक की अन्य रचनाओं मेें प्रज्ञा रावत की कविताएं, प्रतापसिंह सोढी व वाणी दवे की लघुकथाएं, कला जोशी की कहानी बाबू एवं त्रिलोक महावर, पुरूषोत्तम दुबे, अर्चना जोशी की कविताआंे में नवीनता है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, रचनाएं व समाचार आदि भी विशिष्ठ हैं। 

‘शुभ तारिका’ पत्रिका का नया अंक


पत्रिका: शुभ तारिका,  अंक:जुलाई 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 64, मूल्य: 12रू (वार्षिक: 120रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी, 133001 हरियाणा
पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्य की विविध विधाओं की रचनाओं को शामिल किया गया है। अंक में चंद्रमोलेश्वर, आशीष दलाल, हंसमुख रामदेपुत्रा, अखिलेश शुक्ल, विद्याशंकर, अरविंद अवस्थी, अलका मित्तल, श्लेष कुमार एवं रोहित राय की लघुकथाओं को स्थान दिया गया है। कविताओं के अंतर्गत रामस्नेहीलाल शर्मा, अशोक सिंह, रश्मि गोयल, उपाध्याय चद्रशेखर, कमर रईस, माधव अशोक एवं अशोक भारती की अच्छी कविताओं को शामिल किया गया है। विजय तिवारी की कहानी तथा दीप्ति मित्तल का व्यंग्य प्रभावित करते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, स्तंभ आदि भी उपयोगी व जानकारीपरक हैं। 

Tuesday, July 24, 2012

साहित्य सागर का नया अंक


पत्रिका: साहित्य सागर,  अंक: जुलाई , वर्ष: 11,  स्वरूप: मासिक, संपादक: कमल कांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20 रू.(वार्षिक 240 रू.), वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, ईमेल: , फोन/मोबाईल: 0755.4260116, सम्पर्क:  161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर , बाग मुगलियां, भोपाल म.प्र. 
पत्रिका का समीक्षित अंक ख्यात व्यंग्यकार लेखक व साहित्यकार रमेश चंद्र खरे पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व पर रामकुमार बेहार, राधावल्लभ आचार्य, विजय लक्ष्मी विभा, प्रो. रमाकांत श्रीवास्तव, कपिल कुमार, मूलाराम जोशी, परसुराम शुक्ल तथा संतोष खरे ने विचार किया है। अंक की अन्य रचनाओं में प्रभुदयाल मिश्र, ब्रहमजीत गौतम, सुरेन्द्र भारद्वाज तथा आकांक्षा सक्सेना के आलेख प्रभावित करते हैं। किशोर काबरा, रामेश्वर शर्मा, रामस्नेहीलाल गर्ग, वीरेन्द्र आस्तिक, घनश्यामदास सोनी, प्रेमलता नीलम की कविताएं विशिष्ठ हैं। पत्रिका के अन्य स्तंभ, समाचार आदि भी उल्लेखनीय हैं। 

Saturday, July 21, 2012

पत्रिका प्रोत्साहन का नया अंक


पत्रिका: प्रोत्साहन,  अंक: अपै्रल-जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: कमला जीवितराम सेतपाल,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 36, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 022.26365138, सम्पर्क: ई 3/307, इन्लैक्स नगर, वारी रोड़ वर्सोवा, अंधेरी पश्चिम मुम्बई महाराष्ट्र
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स्व. श्री सेतपाल जी द्वारा स्थापित तथा संपादित इस पत्रिका का स्तर श्रीमती कमला जी ने ज्यो का त्यों बरकरार रखा है। इसलिए पत्रिका प्रत्येक पाठक के लिए सहेजकर रखने योग्य है। अंक में जीवितराम जी का  नेता पुराण साहित्य के नवीन पाठकों के लिए उपयोगी व पठनीय रचना है। राम दलाल की कहानी, सुरेश आनंद का व्यंग्य तथा हरि मोटवानी की रचना बारूद पत्रिका की विशिष्ठ रचनाएं हैं। देवेन्द्र विमल, मिर्जा हसन नासिर,  बहादुर चैहान, रामचरण यादव, श्रीकृष्ण सैनी तथा देवेन्द्र कुमार मिश्रा की कविताएं प्रभावित करती है। प्रो. श्यामलाल कौशल, रामशंकर चंचल, गौरीशंकर श्रीवास्तव एवं आकांक्षा यादव की लघुकथाएं स्तरीय व पठनीय है। पत्रिका की अन्य रचनाओं में भी सरसता है। 


साहित्य में ‘‘समकालीन अभिव्यक्ति’’


पत्रिका: समकालीन अभिव्यक्ति,  अंक: अपै्रल-जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: उपेन्द्र कुमार मिश्र,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 011.26645001, सम्पर्क: फ्लैट नं. 5, तृतीय तल, 984 वार्ड नं. 7, महरौली, नई दिल्ली 30 
समीक्षित पत्रिका समकालीन  अभिव्यक्ति का यह अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से युक्त है। अंक में साहित्य जगत के नवोदित तथा स्थापित रचनाकारों को समान रूप से स्थान देने का प्रयास किया गया है। प्रमुख रचनाओं में कहानियों व आलेखों को सम्मलित किया जा सकता है। के.एल. दिवान, कृष्ण कुमार भगत, पूरन सिंह की कहानियों में आज के मानव के उस रूप से दर्शन होते हैं जिसके बारे में सामान्यतः लोग कम ही सोचते हैं। ए. सन्यासि राव, वरूण कुमार तिवारी के लेख तथा विजय कुमार सम्पति का व्यंग्य पाठकों को अच्छे लगेगें। स्तंभ धरोहर के अंतर्गत अनिल डबराल का आलेख इस बार विशेष प्रभावित नहीं कर सका है। रश्मि वर्णवाल, नवल किशोर भट्ट, ज्ञानेश कुमार, किशन तिवारी व राजीव कुमार तिवारी की कविताओं में ताजगी है। विश्वमोहन तिवारी का यात्रा वृतांत रोचक व जानकारीपरक है। मीना गुप्ता व मोहन लोधिया की लघुकथाओं में कथातत्व के लक्षण भी मौजूद हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है। 

वर्तमान ‘‘समय के साखी’’


पत्रिका: समय के साखी,  अंक: जनवरी-फरवरी संयुक्तांक 2012, , स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. अनीता,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 240रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09713035330, सम्पर्क: बी 308, सोनिया काम्पलेक्स, हजेला हास्पिटल के सामने, भोपाल 3, म.प्र. 
पत्रिका समय के साखी ने कम समय में भी वह मुकाम हासिल किया जिसे पाने मंे साहित्य जगत की अन्य पत्रिकाओं को वर्षो लगे हैं। यह इस पत्रिका की संपादक डाॅ. अनिता के कठोर परिश्रम का फल है। इस अंक में राजेश जोशी, ओम भारती, नरेन्द्र जैन, संतोष चैबे, राजेन्द्र शर्मा, राग तैलंग, वेद प्रकाश तथा प्रभा मजूमदार की कविताएं प्रकाशित की गई है। संतोष अलेक्स का भाषान्तर के अंतर्गत प्रकाशित आलेख पत्रिका की एक शोधपरक व अच्छी रचना है। व्यासमणि त्रिपाठी, सुरेश पंडित के लेखों में कसावट व नवीनता है। निशांत व प्रतिमा जौहरी की कहानी भी अच्छी बन पड़ी है। अनिरूद्ध सिन्हा की ग़ज़ल में नई सोच दिखाई पड़ती हैं। पत्रिका की समीक्षाएं व अन्य रचनाएं भी अहम है। 

Sunday, July 15, 2012

हिंदी साहित्य में ‘‘हिंदुस्तानी जबान’’

पत्रिका: हिंदुस्तानी जबान,  अंक: जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: माधुरी छेड़ा, आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 80रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 22810126, सम्पर्क:  महात्मा गाॅधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर, महात्मा गाॅधी बिल्ंिड़ग, 7 नेताजी सुभाष रोड़, मुम्बई महाराष्ट्र
    साहित्य जगत में हिंदी व उर्दू जबान में एकसाथ प्रकाशित की जा रही इस पत्रिका के प्रत्येक अंक में गाॅधीवादी साहित्य से संबंधित सामग्री का प्रमुख रूप से प्रकाशन किया जाता है। समीक्षित अंक में उषा ठक्कर, सकीना अख्तर, शुलभ चैरे तथा रवीन्द्र कात्यायन के आलेख विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। सुरिन्दर नीर की कहानी लवासे एक अच्छी पृष्ठभूमि पर रचे बनुे गए कथानक युक्त रचना है। रहमान राही, अर्श सहबाई, पद्मासचदेव तथा सौरभ साईकिया की कविताएं गाॅधीवादी दृष्टिकोण को विस्तार देने में सफल हैं। पत्रिका के उर्दू खण्ड की रचनाएं भी उच्च कोटि की हैं तथा हिंदी के साथ साथ उर्दू साहित्य का प्रतिनिधित्व करती हैं।

Saturday, June 30, 2012

कथा यात्रा की सनद


पत्रिका: सनद,  अंक: 12, वर्ष: 3,  स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: फ़जल इमाम मलिक, पृष्ठ: 84, मूल्य: 25 रू.(वार्षिक 100 रू.), वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, ईमेल: , फोन/मोबाईल: 9868018472 , सम्पर्क: 4बी, फ्रेंडस अपार्टमेंट्स, मधु विहार, गुरूद्वारा के पास, पटपड़गंज नई दिल्ली 110092
साहित्यिक पत्रिका सनद के समीक्षित अंक में विचारयोग्य कहानियों को प्रकाशन किया गया है। अंक में विपिन विहारी, जितेंद्र कुमार, मनीष कुमार सिंह, नदीम अहमद, पुष्पलता कश्यप की कहानियां विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अफ़जल इमाम, श्रिम खेडि़या, नवल जायसवाल, शैली खत्री, सुलतान अहमद, शैल कुमारी, रितेंद्र अग्रवाल, प्रमोद त्रिवेदी, रति सक्सेना, अलीक, भगवानदास एजाज तथा कृपाशंकर शर्मा अचूक के गीत ग़ज़ल तथा कविताओं में नवीनता हैं दस्तावेज के अंतर्गत फैज अहमद फैज का आलेख प्रभावित करता है। रमणिका गुप्ता का आलेख स्त्री मुक्ति के सपनों का यथार्थ वर्तमान नारी मुक्ति आंदोलन पर नए सिरे से विचार है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा आलख्ेा भी विशिष्ठ हैं। 

साहित्य सागर का नया अंक


पत्रिका: साहित्य सागर,  अंक: जून , वर्ष: 11,  स्वरूप: मासिक, संपादक: कमल कांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20 रू.(वार्षिक 240 रू.), वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, ईमेल: , फोन/मोबाईल: 0755.4260116, सम्पर्क:  161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर , बाग मुगलियां, भोपाल म.प्र. 
साहित्य सागर के समीक्षित अंक में हिंदी जगत की ख्यात कथाकार मालती वसंत के समग्र व्यक्तित्व को समेटने 
का सार्थक प्रयास किया गया है। अंक में उनके व्यक्तित्व पर कृष्ण कमलेश, सतीश दुबे, सतीश राज पुष्करणा, महेश सक्सेना, अक्षय कुमार जैन, लीला मौरे, दिवाकार शर्मा, विद्यासागर जोशी, कमलकांत सक्सेना, युगेश शर्मा, आशीश कुमार धुलधौये तथा शरदनारायण खरे के आलेख प्रभावित करते हैं। अन्य रचनाओं में ब्रहम्जीत गौतम, आकांक्षा सक्सेना, डाॅ. उपाध्याय, चद्रसेन विराट से साक्षात्कार तथा भवेश दिलशाद की समीक्षा विशिष्ठ है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है। 

Friday, June 29, 2012

कनाड़ा से प्रकाशित हिंदी चेतना


पत्रिका: हिंदी चेतना,  अंक: 52, वर्ष: 13,  स्वरूप: त्रैमासिक, प्रमुख संपादक: श्याम त्रिपाठी, संपादक: सुधा ओम ढीगरा, पृष्ठ: 84, मूल्य: प्रकाशित नहीं, ई मेल: ,वेबसाईट: , फोन/मोबाईल: , सम्पर्क 6 Larksmera Court, Markham, Ontario L3R, 3R1 
हिंदी चेतना का समीक्षित अंक हिंदी साहित्य ही नहीं विश्व की किसी भी  भाषा व उसके साहित्य के लिए बेजोड़ अंक है। पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्य की लगभग प्रत्येक विधा की रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। ख्यात कथाकार एच.आर. हरनोट से संपादक सुधा ओम ढीगरा की बातचीत है। यह बातचीत रचना विशेषकर कथा में प्रयोगधर्मिता का विरोध करती है। पत्रिका में प्रकाशित कहानियों में मरीचिका(सुदर्शन प्रियदर्शनी), सफेद चादर(अनिल प्रभाकुमार) एवं बांझ(शाहिदा बेगम शाहीन) मंे कथानक का नयापन बरबस मोह लेता है। डाॅ. सुरेश अवस्थी का व्यंग्य आलेख तथा अखिलेश शुक्ल का हरिशंकर परसाई जी पर संस्मरण पत्रिका के अन्य आकर्षण हैं। नीरज मैथानी, सुधा भार्गव तथा रामकुमार आत्रेय की लघुकथाएं पठनीयता लिए हुए हैं। रश्मि प्रभा, कादम्बिनी मेहरा, शशि पाधा, नरेन्द्र सिंहा, निर्मल गुप्ता, शकुन्तल बहादुर, श्यामल सुमन की कविताएं समसामयिक विषयों की श्रेष्ठतम प्रस्तुति है। मोहम्मद आजम, नवीन सी चतुर्वेदी, कंचन चैहान, रचना श्रीवास्तव, वंदना मुकेश एवं मंजु मिश्रा की ग़ज़लें क्षणिकाएं उल्लेखीय हैं। सभी स्तंभों के अंतर्गत प्रकाशित आलेख विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। मधु अरोड़ा, विजय शर्मा, दया दीक्षित, स्टीवन गुगर्दी, रमेश रोनक, संध द्विवेदी, शानू सिन्हा तथा चित्र काव्यमाला में अन्य अंकों के समान आकर्षण है। साहित्य मंे अनावश्यक मुददों को वेवजह प्रस्तुति को लेकर संपादक सुधा ओम ढीगरा का संपादकीय विचारणीय है। विश्व में हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति तथा प्रचार प्रसार पर प्रधान संपादक श्याम त्रिपाठी जी का आलेख चिंतन के नए द्वार खोलता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है। 

Monday, June 25, 2012

त्रैमासिक पत्रिका साहित्य परिक्रमा का नया अंक


पत्रिका: साहित्य परिक्रमा,  अंक: अपै्रल-जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: जीत सिंह जीत, मुरारी लाल गुप्त,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09425.407471, सम्पर्क:  राष्ट्रोस्थान भवन माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क ग्वालियर म.प्र. 
साहित्य जगत की स्थापित पत्रिका साहित्य परिक्रमा का समीक्षित अंक ख्यात साहित्यकार लेखक कवि आलोचक रामनारायण त्रिपाठी पर्यटक जी पर एकाग्र है। उनके समग्र व्यक्तित्व पर अच्छे संग्रह योग्य आलेख पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं। इन आलेखों में डाॅ. बलवंत जानी, नरेन्द्र कोहली, श्रीधर पराड़कर, यतीन्द्र तिवारी, मोहन आनंद, विनय दीक्षित के लेख प्रमुख है। समकालीन विषयों पर उदय प्रताप सिंह, हमलता जायसवाल तथा रवीन्द्र कुमार उपाध्याय के लेख प्रभावित करते हैं। सुरेखा शर्मा, रामगोपाल भावुक, नरेन्द्र चतुर्वेदी ओम वर्मा की कविताएं विशिष्ट हैं। गार्गीशंकर मिश्र, शिवचरण सेन, मनोहरलाल आनंद की लघुकथाओं मेें नवीनता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती हैं। 

Sunday, June 24, 2012

आपके लिए लगातार 46 वर्ष से साहित्य में ‘‘संबोंधन’’


पत्रिका: संबांधन,  अंक: अप्रैल-जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: कमचर मेवाड़ी,  आवरण/रेखाचित्र: मीना पुरवार, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 80रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 02962.223221, सम्पर्क: संबोधन त्रैमासिक, पोस्ट कांकरोली, जिला राजसमंद, राजस्थान 
46 वर्ष पुरानी पत्रिका संबांधन का समीक्षित अंक साहित्य की श्रेष्ठतम रचनाओं से युक्त है। अंक में महेन्द्र नेह, मकबूल फिदा हुसैन तथा नूर मोहम्मद नूर की कविताएं समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है जिसपर प्रायः कम ही ध्यान दिया जाता है। प्रशंगवश के अंतर्गत विमर्शो के चक्रवात मंे तीन नाम आलेख जानकारीपरक है। राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष वेद व्यास से हुसैनी बोहरा की बातचीत साहित्य के संदर्भो की जांच पड़ताल करती है। कृष्णा अग्निीहोत्री की डायरी के पृष्ठ पाठकों को अपने से जान पड़ते हैं। सतीश दुबे की कहानी व शमोएल अहमद का संस्मरण स्तरीय व पठनीय है। इंदिरा दांगी कहानी की कहानी करिश्मा ब्यूटी पार्लर नवसमाज की विसंगतियों की ओर संकेत कर उनपर प्रहार करती है। अख्तर यूसूफ की कविताएं भी पत्रिका के कलेवर का सहजता व सरसता प्रदान करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व आलेख व उल्लेखनीय हैं। 

साहित्य में ‘‘अविराम’’


पत्रिका: अविराम,  अंक: अपै्रल-जून 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मध्यामा गुप्ता,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 32, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 090543712, सम्पर्क: एफ 488/2, गलीन नम्बर 11, राजेन्द्र नगर, रूड़की जिला हरिद्वार उ.खण्ड 
साहित्य की नवीन पत्रिका अविराम का समीक्षित अंक लघुकथा विशेषांक है। वर्तमान में लघुकथा विधा को लेकर अन्य कई पत्रिकाओं ने विशेष अंक निकाले हैं जिनमें समसामयिक विषयों को उठाते हुए अनेक लघुकथाएं प्रकाशित की गई है। उसी क्रम में पत्रिका की लघुकथाएं भी एक अच्छा प्रयास है। अंक में लघुकथा विधा पर अनेक आलेख, समीक्षाएं, लघुकथाएं तथा विचार आदि प्रकाशित किए गए हैं। अंक में छोटे से स्थान पर जानकारीपरक तथा संग्रह योग्य साहित्य उपलब्ध कराने का पत्रिका का प्रयास सराहनीय है।

Thursday, June 14, 2012

साहित्य की उत्कृष्ट पत्रिका ‘‘परिधि’’


पत्रिका: परिध 10,  अंक: जनवरी 2012, स्वरूप: अनियतकालीन, संपादक: सुरेश आचार्य, अनिल कुमार जैन,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 82, मूल्य: 30रू.(वार्षिक --रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 07582233140, सम्पर्क: पुराना पोस्ट आॅफिस के पास, बड़ा बाजार, सागर म.प्र. 
हिंदी तथा उर्दू जबानों की खुबसूरती को सहेजकर प्रस्तुत करने वाली पत्रिका परिधि का समीक्षित अंक समसामयिक रचनाओं से युक्त है। अंक में प्रमुख रूप से ग़ज़लों, लघुकथाओं तथा कहानियों को प्रमुख रूप से स्थान दिया गया है। आनंद स्वरूप श्रीवास्तव, सैयद अली मजर हासिमी, सुरेश आचार्य के लेख तथा व्यंग्य प्रभावित करते हैं। कहानियों में मंजूर एहतेशाम की कहानी विशिष्ठ है। निरंजना जैन, कुमार शर्मा, वल्लभ लाल बच्चन तथा रघुनंदन चिले की कहानियों में नवीनता है। ग़ज़लों में चंद्रसेन विराट, क्रांति जबलपुरी, अशोक गुलशन सहित अन्य रचनाकारों की ग़ज़लें उत्तम है। पत्रिका केे गीत कविताएं, मुक्तक तथा अन्य रचनाएं भी स्तरीय है। 

Wednesday, May 30, 2012

गणित के बाद साहित्य में समावर्तन


 
पत्रिका: समावर्तन,  अंक: मई 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे,  आवरण/रेखाचित्र: अक्षय आमेरिया, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 250रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 07342524457, सम्पर्क: 129, माधवी दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र. 
हिंदी साहित्य जगत की अग्रणी पत्रिका समावर्तन का समीक्षित अंक रोचक रचनाओं से युक्त है। पत्रिका में ख्यात आलोचक समीक्षक प्रमोद वर्मा तथा हिंदी साहित्य के ख्यात विद्वान चंद्रकांत बांदिवडे़कर पर एकाग्र रचनाएं पत्रिका की प्रमुख विशेषता है। अंक में प्रमोद वर्मा पर अक्षय कुमार जैन, धनंजय वर्मा, विश्वरंजन, रमेश दवे तथा वंदना केंगरानी से उनकी बातचीत हिंदी साहित्य की आलोचना तथा समीक्षा पर विमर्श प्रस्तुत करती है। ज्योति चावला पर संपादक निरंजन श्रोत्रिय की टिप्पणी ध्यान आकर्षित करती है। प्रमोद कुमार बंधोपाध्याय की यात्रा कथा लेखक के साथ यात्रा की अनभुति कराती है। दिनेश अत्रि की कहानी सिल का शिल्प तथा कथ्य प्रभावित करता है। सुनिता जैन गौतम राजरिशी की कविताएं स्तरीय हैं। 
चंद्रकांत बांडिवेड़कर पर एकाग्र आलेखों में लीला बांडिवेड़कर, प्रदीपचंद्रकांत के लेख तथा ख्यात लेखिका सूर्यबाला से उनकी बातचीत वर्तमान सहित्य व समाज के आंतरिक पक्षों पर विचार विमर्श है। संतोष चैबे, सूर्यकांत नागर तथा मुकेश वर्मा के स्तंभ पत्रिका के अन्य अंकों की तरह उपयोगी व समसामयिक है। 

गागर में ‘‘साहित्य सागर’


पत्रिका: साहित्य सागर,  अंक: मई 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 240रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0755.42602783, सम्पर्क: 161 बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र. 
पत्रिका का समीक्षित अंक दोहा अंक है। कबीर, रहीम, तुलसीदास तथा बिहारी के इस विधा में योगदान की उपयोगिता सिद्ध की गई है। अंक में दोहा विधा पर विचार करते हुए इसे फिर से पुर्नजीवित करने का प्रयास किया गया है। अंक में प्रकाशित प्रमुख रचनाओं में यतीन्द्रनाथ राही, सनातन कुमार वाजपेयी, पं. गिरीमोहन गुरू, दिवाकर वर्मा, शंकर सक्सेना, आशा सोलंकी, आशा सक्सेना, के.पी. सक्सेना दूसरे, सौम्या जैन के दोहे व रचनाएं  वर्तमान समय को प्रतिबिम्बित करते हैं। साधन वलबटे ने शरदा जोशी को स्मरण करते हुए उनके रचनात्मक योगदान पर प्रकाश डाला है। 
पत्रिका का दूसरा खण्ड बुन्देलखण्ड के ख्यात रचनाकार राज गोस्वामी पर एकाग्र है। उनके समग्र व्यक्तित्व पर मंजु गोस्वामी, युगेश शर्मा, कंुवर किशोर टण्डन, मुरारीलाल गुप्त, हरिकृष्ण हरि, कामिनी, दिवाकर वर्मा, परशुराम शुक्ल, अवध किशोर सक्सेना, शरदनारायण खरे, डी.आर. राहुल, हुकुमपाल सिंह विकल, आलोक सोनी, ब्रजेश द्विवेदी तथा हरिकृष्ण हरि के लेख जानकारी परक हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं, समाचार पत्र आदि भी प्रभावित करते हैं। 

Tuesday, May 29, 2012

साहित्य में एक जरूरी अविराम


पत्रिका: अविराम,  अंक: मार्चा 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मध्यमा गुप्ता,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 36, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09045437142, सम्पर्क: एफ 488,/2, गली नंम्बर 11 राजेन्द्र नगर, रूड़की जिला हरिद्वार 247667
     पत्रिका अविराम का समीक्षित अंक कविता तथा लघुकथाओं पर एकाग्र है। अंक में रूचिपूर्ण रचनाओं का समावेश किया गया है। इन रचनाओं में समसामयिक विषयों के साथ साथ पिछली शताब्दी के गंभीर मुददों को भी रचना का आधार बनया गया है। पृथ्वी राज अरोरा, महेश पुनेठा, अंजु दुआ जैमिनी सहित अन्य रचनाओं का शामिल किया गया है। रतन चंद्र चंदे्रश तथा हरदयाल उपाध्याय की रचनाएं प्रभावित करती है। विमर्श के अंतर्गत अच्छी व पठनीय रचनाएं हैं। पत्रिका का कथाप्रवाह तथा अन्य कालम उपयोगी व रचनात्मक है। पत्रिका निरंतर अच्छी रचनाओं को सामने ला रही है।

Sunday, May 27, 2012

पत्रिका एक और अंतरीप का नया अंक



पत्रिका: एक और अंतरीप,  अंक: जनवरी मार्च 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: प्रेम कृष्ण शर्मा,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 136, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 100रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09414055811, सम्पर्क: 1, न्यू कालोनी झोटवाड़ा, पंखा जयपुर राजस्थान 
    साहित्य जगत की स्तरीय पत्रिका के इस अंक में ज्ञानवर्धक आलेखों का प्रकाशन किया गया है। अंक में नवल किशोर, अरूण कुमार, राजाराम भादू, दिवाकर गरवा, मोहम्मद अजहर ढेरीवाला के साहित्यिक लेख पठनीय व जानकारीपरक हैं। ख्यात साहित्यकार व लेखक दुर्गाप्रसाद अग्रवाल से रजनीश भारद्वाज की बातचीत साहित्य जगत के साथ साथ वर्तमान साहित्यिक परिवेश पर भी विचारोत्तेजक चर्चा है। राजकुमार कुम्भज, केशव शरण, आशीष दशोत्तर, आकांक्षा यादव, चांद शैरी, सुरेश उजाला तथा ओम नागर की कविताएं समसामयिक विषयों का अलग ढंग से प्रस्तुतीकरण है। मनोज कुमार मिश्र, आशा शर्मा तथा पूरन सिंह की कहानियों में भी वर्तमान समाज के संघर्ष स्पष्ट रूप से सामने आते हैं। साहित्यिक समाचार, समीक्षा खण्ड तथा अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है। पत्रिका का समीक्षित अंक स्तरीय व साहित्यिक सामग्री से परिपूर्ण है। 

Sunday, April 29, 2012

पत्रिका साहित्य सागर में साहित्य


पत्रिका: साहित्य सागर,  अंक: अप्रेल 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना,  आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 240 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: , सम्पर्क: 161 बी. शिक्षक कांगे्रस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र. 
पत्रिका साहित्य सागर का प्रत्येक अंक आंशिक रूप से किसी न किसी साहित्यकार अथवा रचनाकार पर एकाग्र होता है। उसी तारतम्य में समीक्षित अंक भी ख्यात रचनाकार मयंक श्रीवास्तव पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व पर अच्छे आलेखों का प्रकाशन किया गया है। पत्रिका में आशा सक्सेना व अर्चना प्रकाश के गीत तथा प्रभुदयाल मिश्र का वेद विमर्श प्रभावित करता है। आकांक्षा सक्सेना व सुरेन्द्र भारद्वाज का आलेख अच्छा व पठनीय है। मयंक जी पर विद्यानंदन राजीव, समसनेही लाल यायावर, मधुकर अष्ठाना, ओमप्रकाश सिंह, यतीन्द्र नाथ राही, कमलकांत सक्सेना, राधेश्याम शुक्ल, जंगबहादुर श्रीवास्तव तथा सुरेश गौतम के आलेख संग्रह योग्य हैं। दिवाकर वर्मा का आलेख मेरा गीत है मयंक श्रीवास्तव एक सस्वर कवितापाठ सा आनंद देता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व आलेख भी विशेष महत्व के हैं। 

पत्रिका ‘‘समय के साखी’’ के साथ साहित्य यात्रा

पत्रिका: समय के साखी,  अंक: अप्रैल 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: आरती,  आवरण/रेखाचित्र: के. रवीन्द्र, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 220 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09713035330, सम्पर्क: बी. 308, सोनिया गांधी काम्पलेक्स, हजेला हास्पिटल के सामने भोपाल म.प्र.
                           पत्रिका समय के साखी के इस अंक में रोचक तथा ज्ञानवर्धक साहित्य का प्रकाशन किया गया है। अंक में सेवाराम त्रिपाठी का लिखा रामकुमार वर्मा पर आलेख पत्रिका की विशिष्ठ उपलब्धि है। श्रीराम, गणेशचंद्र राही एवं नूर मोहम्मद नूर की कविताएं प्रभावित करती है। कुमार शर्मा एवं विजयशंकर की कहानियां आज के वातावरण व उससे उपजी पीड़ा को सटीक अधिव्यक्ति देती है। चंद्रसेन विराट एवं मधुर जी की ग़ज़लें व नज़्मंे प्रभावशाली है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी उपयोगी है।

हिंदी साहित्य का समावर्तन


साहित्य संदेशवाहक पत्रिका

पत्रिका: समावर्तन,  अंक: अप्रैल 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे,  आवरण/रेखाचित्र: अज्ञय आमेरिया, पृष्ठ: 64, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 250 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान उज्जैन म.प्र. 
हिंदी जगत में प्रतिष्ठित हो चुकी इस पत्रिका का प्रत्येक अंक नवीनता लिए हुए होता है। पत्रिका साहित्य एवं कलाजगत पर उपयोगी सामग्री का निरंतर प्रकाशन कर रही है। इस अंक में ख्यात गीतकार नईम पर सामग्री अनूठी व संग्रह योग्य है। कुबेर दत्त, कुमारी रवीन्द्र, श्रीकांत उपाध्याय, नईम जी के ख़त, बेटी समीरा की ग़ज़लें, आदि उपयोगी व संग्रह योग्य रचनाएं हैं। प्रकाश कांत, विक्रम सिंह तथा दीक्षा दुबे ने विविधतापूर्ण ा आलेख लिखे हैं। जीवन सिंह ठाकुर, दिनेश पटेल व सुनील चतुर्वेदी की रचनाएं व उनका शिल्प प्रभावित करता है। प्रमोद उपाध्याय, सत्यनारायण पटेल, रीतेश जोशी की कविताएं अच्छी व समसामयिक रचनाएं हैं। बहादुर पटेल की कविताओं पर निरंजन श्रोत्रिय के विचार से प्रायः हर पाठक सहमत होगा? कलापनि पर एकाग्र भाग भी इस कलाकार के जीवन पर संक्षेप में प्रकाश डालता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं आदि भी रोचक हैं। 

सोच विचार का नया अंक


पत्रिका: सोच विचवार,  अंक: अप्रैल 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: नरेन्द्र नाथ मिश्र,  आवरण/रेखाचित्र: राजेन्द्र परदेसी, सिद्धेश्वर, , पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 225 रू.), ई मेल:  ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0542.2111586, सम्पर्क: के. 67/135 ए ईश्वरगंगी, वाराणसी 
साहित्य की इस नवीन पत्रिका में हिंदी साहित्य की प्रायः सभी विधाआंे की रचनाएं प्रकाशित की जाती है। समीक्षित अंक में आचार्य चंद्रबली पाण्डेय पर एकाग्र उपयोगी व सार्थक आलेखों का प्रकाशन किया गया है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व पर वेदप्रकाश उपाध्याय, जगदीश प्रसाद वरणवाल, पारसनाथ गावर्धन ने अच्छे व जानकारी परक आलेख लिखे हैं। धरोहर उपन्यास के अंश इसे पढ़ने तथा लेखक के संबंध में अधिक जानने की इच्छा जाग्रत करते हैं। सुधाकर अदीब, राजेन्द्र परदेसी, राजेन्द्र यादव, विनय श्रीवास्तव, तारिक असलम तस्नीम, नेत्रपाल सिंह की कहानियों में नयापन है। विनय कपूर गाफिल, उमा श्री, शिवचरण दुबे, राजकमल, रमेश मनोहरा, अमरनाथ अज्ञेय, रामशंकर चंचल, एस.बी. भारती, मुकेश घनघोरिया, विद्याकेशव चिटको, प्रभात कुमार धवन, अवनीश सिंह चैहान, सिद्धेश्वर, प्रकाश श्रीवास्तव, शिवनांद सिंह, गौतम अरोरा, के गीत ग़ज़ल आदि प्रभावित करते हैं। मिथिलेश धर दुबे, मदन मोहन वर्मा, नीरजा माधव, उपमा मेहरोत्रा के समसामयिक आलेख आज के समाज को विस्तार से सामने रखकर विचार करते जान पड़तेे हैं। अजय मिश्र का रेखाचित्र, अश्विनी कुमार, मोहन लोधिया, राजकुमार सिंह एवं अशोक अंजुम की लघुकथाएं अच्छी हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं, विचार, प्रश्न आदि भी जानकारी परक व उपयोगी है। 

Saturday, April 21, 2012

समकालीन अभिव्यकित

पत्रिका : समकालीन अभिव्यकित,  अंक : 40, स्वरूप : त्रैमासिक, संपादक : उपेन्द्र कुमार मिश्र,  आवरणरेखाचित्र : जानकारी उपलब्ध नहीं, , पृष्ठ : 64, मूल्य : 10रू.(वार्षिक 40 रू.), र्इ मेल : ,वेबसार्इट : उपलब्ध नहीं , फोनमोबार्इल : 011.26645001, सम्पर्क :  5, तृतीय तल, 984, वार्ड नं. 7, महरौली, नर्इ दिल्ली 30
    काव्य प्रधान पत्रिका के इस अंक में समकालीन विचारों से युक्त रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में कुमार शर्मा अनिल, महावीर सिंह, गोवर्धन यादव की कहानियां समकालीन विचारों को पोषित करती है। डा. कमल किशोर गोयनका, प्रभाकर सिंह, रविशंकर राय तथा योगेश चंद्र बहुभुज के आलेख साहित्य के साथ साथ वर्तमान समाज को अभिव्यकित प्रदान करते हैं। विष्णु दत्त भटट का व्यंग्य अधिक प्रभावित नहीं कर सका है। कोणार्क के सूर्य मंदिर पर अनिल डबराल के लेख में और विश्लेषण की आवश्यकता थी, लेख में विवरणात्मकता होने से यह रूचिकर तो है पर साहित्य के नए जिज्ञासुओं के लिए अधिक उपयोगी नहीं है। रामस्नेही लाल शर्मा, संजीवन मयंक, लीना मलहौत्रा तथा सुरेश उजाला की कविताएं पठनीय व उपयोगी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, स्थायी स्तंभ आदि भी प्रभावित करते हैं।

Saturday, March 31, 2012

साहित्य की अग्रणी पत्रिका ‘पाखी’

पत्रिका: पाखी, अंक: मार्च 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ: 96, मूल्य: 20रू(वार्षिक 240रू.), ई मेल: pakhi@pakihi.in , वेबसाईट:www.pakhi.in , फोन/मो. 0120.4070300, सम्पर्क: इंडिपेडेंट मीडिया इनीशियेटिव सोसायटी, बी-107, सेक्टर 63, नोएड़ा 201303 उ.प्र.
पाखी के इस अंक में मुशर्रफ आलम जौकी, विजय तथा निखिल आनंद गिरि की कहानियां सामाजिक धरातल पर रची बुनी गई है। राकेश कुमार सिंह का उपन्यास अंश इस उपन्यास को पढ़ने की इच्छा जाग्रत करता है। ख्यात कथाकार शैलेन्द्र सागर तथा संदीप मील की रचनाएं वर्तमान शताब्दी में हिंदी कथा साहित्य में नया प्रयोग है जिसमें कथा की सरसता के साथ साथ आलेखों के समान बात को बिना लाग लपेट के कहने का नया तरीका है। संजय कुंदन, प्रत्यक्षा, नीलेश रघुवंशी, असलम हसन, रमेश कुमार वर्णवाल, पावस नीर एवं निशांत भारद्वाज की कविताएं अनेक बार पढ़ने योग्य हैं। ओम राज, रवि वर्मन, मृत्यंुजय प्रभाकर एवं ख्यात समीक्षक, आलोचक विजय बहादुर सिंह के आलेख पत्रिका की विविधता दर्शाते हंै। राजीव रंजन गिरि, भारत भारद्वाज के स्थायी स्तंभ तथा डाॅ. रामप्रकाश एवं डाॅ. रश्मि की लघुकथाएं प्रभावित करती है। ख्यात ग़ज़लकार शहरयार को याद करते हुए ज्ञानप्रकाश विवेक, शेखर जोशी, साधना अग्रवाल तथा रूपसिंह चंदेल ने शहरयार की जीवन शैली को जानने समझने का एक अवसर साहित्य के नए पाठकों व लेखकों को दिया है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

‘शुभ तारिका’ पत्रिका का नया अंक


पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: मार्च 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 64, मूल्य: 12रू (वार्षिक: 120रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी, 133001 हरियाणा
पत्रिका का समीक्षित अंक व्यंग्य विनोद विशेषांक है। अंक में हास्य व्यंग्य युक्त कुछ अच्छी रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। जगवीर शर्मा, श्लेष चन्द्राकर, हसमुख रामदेपुत्रा, बानों सरताज, नीता श्रीवास्तव, इंदिरा किसलय, प्रदीप शर्मा एवं गुडविन मसीह की लघुकथाओं का प्रकाशन किया गया है। वीणा श्रीवास्तव, अशोक अंजुम, गोपीनाथ पारीक, रामस्नेहीलाल, लालता प्रसाद एवं ऋषिवंश की कविताओं में नवीन समाज के दर्शन होते हैं। पंकज शर्मा को लेखक परिशिष्ट के अंतर्गत पढ़कर सुखद अनुभूति होती है। दीप्ति मित्तल, सुरेश गर्ग, लोक सेतिया, रमेश चंद्र, गोपाल नारायण आवटे के व्यंग्य व रामगोपाल वर्मा की कहानियां प्रभावित करती है। देवेन्द्र कुमार मिश्रा की विनोदी रचना हास्य व्यंग्य युक्त है। डाॅ. महाराज कृष्ण जैन का हास्य पर लिखा गया आलेख संग्रह योग्य है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व स्थायी स्तंभ भी प्रभावित करते हैं।

Friday, March 30, 2012

साक्षात्कार का मार्च 2012 अंक

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: फरवरी 2012,स्वरूप: मासिक, संपादक: त्रिभुवननाथ शुक्ल, पृष्ठ: 120, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 250रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0755.2554782, सम्पर्क: म.प्र. संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन, वाणगंगा, भोपाल म.प्र.
पत्रिका के इस अंक में अच्छी व संग्रह योग्य रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में गोविंद प्रसाद शर्मा, श्रीधर पराड़कर, लक्ष्मीकांत शर्मा, डाॅ. बलजीत जानी एवं श्रीराम तिवारी के आलेख शुभारंभ सत्र के अंतर्गत प्रकाशित किए गए हैं। साहित्य के वर्तमान एवं भविष्य को लेकर कार्यक्रम के वक्तव्य तथा प्रथम सत्र में प्रो. त्रिभुवन नारायण शुक्ल, मिथिला प्रसाद तिवारी, एस. शेषारत्नम, व्यासमणि त्रिपाठी, शंकर शरण एवं प्रो. एन. सुंदरम के आलेख विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। द्वितीय सत्र में दिए गए वक्तव्यों में क्षमा कौल, प्रो. अरूण होता, नंद किशोर पाण्डे एवं बलजीत जानी के विचार साहित्य के साथ साथ साहित्येत्तर विषयों को भी सामने लाकर अपना मंतव्य प्रस्तुत करते प्रतीत होत हैं। तृतीय सत्र के अंतर्गत प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज, शत्रुध्नप्रसाद, प्रो. नीरजा माधव, प्रो. यतीन्द्र तिवारी, श्री रमेश पतंगे, अभी सुवेदी, कुसुमलता केडिया, कन्हैया सिंह, डाॅ. मोहनलाल एवं प्रो. एन.जी. देवकी के वक्तव्य विशेष हैं। प्रत्येक सत्र में साक्षात्कार के संपादक प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल का योगदान विशेष रहा है जिसके कारण से यह आयोजन सफल हो सका है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

समावर्तन का नया अंक

पत्रिका: समावर्तन, अंक: मार्च 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, आवरण/रेखाचित्र: अक्षय आमेरिया, , पृष्ठ: 64, मूल्य: 25 रू.(वार्षिक 250 रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान उज्जैन म.प्र.
समावर्तन ने अल्प समय में साहित्य जगत में विशिष्ठ स्थान प्राप्त किया है। यह अन्य पत्रिकाओं के लिए पे्ररणास्पद है। पत्रिका के समीक्षित अंक में ख्यात साहित्यकार रमेश दत्त दुबे के समग्र व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया है। उनका आत्मकथ्य, जनसत्ता की टिप्पणियां तथा लेख आदि साहित्य के विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित करते हंै। उषा भटनागर तथा मुकेश वर्मा से उनकी बातचीत साहित्य की वर्तमान दशा व उसकी परिनियति पर गंभीर विमर्श है। दूसरे भाग में ख्यात संस्मरणकार कांतिकुमार जैन जी की साहित्यिक यात्रा का लेखा जोखा है। उनकी तमाम रचनाएं नवीन ही नहीं साहित्य से जुड़े अन्य लेखकों के लिए मार्गदर्शक रही है। साधना अग्रवाल की उनसे बातचीत साहित्य के वर्तमान स्वरूप को कटघरे में खड़ा करती है। धनंजय वर्मा, हसन जमाल, इला भटट, श्रीराम दवे तथा मुकेश वर्मा के आलेख तथा स्तंभ पत्रिका के अन्य अंकों के समान स्तरीय व पठनीय है।

Thursday, March 29, 2012

कनाड़ा से प्रकाशित हिंदी चेतना

पत्रिका: हिंदी चेतना, अंक: 53, वर्ष: 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, प्रमुख संपादक: श्याम त्रिपाठी, संपादक: सुधा ओम ढीगरा, पृष्ठ: 84, मूल्य: प्रकाशित नहीं, ई मेल: hindichetna@yahoo.ca ,वेबसाईट: http://hindi-chetna.blogspot.com/ , फोन/मोबाईल: (905) 4757165 , सम्पर्क : 6 Larksmere Court, Markham, Ontario, L3R 3R1
कनाड़ा से प्रकाशित हिंदी चेतना ने उत्कृष्ट व सुरूचिपूर्ण रचनाओं का प्रकाशन कर साहित्य जगत में विशिष्ठ पहचान बनाई है। पत्रिका का प्रत्येक अंक साज सज्जा, कलेवर व प्रस्तुतिकरण के दृष्टिकोण से हिंदी प्रेमियों व साहित्य मर्मज्ञों के लिए सहेजकर रखने है। हिंदी चेतना की दूसरी प्रमुख विशेषता इसका इंटरनेट पर पाठकों के लिए मुफ्त उपलब्ध होना है। इसकी वजह से पत्रिका ने दुनिया भर में हिंदी जानने समझने वालों की संख्या के प्रचार प्रसार में अहम योगदान दिया है। पत्रिका का समीक्षित अंक हिंदी साहित्य की भारत से प्रकाशित होने वाली पत्रिकाओं से कहीं से भी कम नहीं है। यह वड़े हर्ष का विषय है कि इसमें किसी मत-मतांतर, विचारधारा, दृष्टिकोण अथवा हस्ती की अपेक्षा रचना की श्रेष्ठता, मौलिकता व समाज पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को ध्यान में रखकर प्रकाशित किया जाता है। इस अंक में ख्यात साहित्यकार रामेश्वर काम्बोज से पत्रिका की संपादक सुधा आंेम ढीगरा की बातचीत विचार योग्य है। एक प्रश्न के उत्तर में उनका कहना है, ‘‘लेकिन एक बात मुझे खटकती है कि कभी कभी प्रवासी श्रेणी में रखकर बहुत से अच्छे रचनाकारों को दरकिनार कर दिया जाता है।’’ यह हिंदी को वैश्विक व स्वीकार्य भाषा बनानें की राह में एक प्रमुख बाधा है। शीघ्र ही हमें जुगाड़धर्म से मुक्ति पा लेना चाहिए अन्यथा हम दुनिया से पिछड़ जाएंगे। शैल अग्रवाल की कहानी ‘‘आम आदमी’’ अपनी पारी आने के इंतजार में पंक्ति में खड़े अंतिम आदमी की कहानी है। यह वही आदमी है जो वर्षो से अपने उत्थान की बाट जोह रहा है। वहीं दूसरी ओर सुमन सारस्वत ‘‘डोंट टेल टू आंद्रे’’ में बहुत कुछ कह देती है, जिसे समझने के लिए दुनिया बेचैन है। गुल्ली डंडा और सियासतदारी’’ में मनोज श्रीवास्तव मनुष्य के बदलाव व इस बदलाव के लिए जिम्मेदार तत्वों की खबर लेते हैं। भावना सक्सेना ‘‘उसका पत्र’’ पढ़कर लगता है अधिक भावुक हो उठीं हैं। रवीन्द्र अग्निहोत्री ने हिबू्र भाषा से प्रेरणा लेने की आवश्यकता पर बल दिया है, अन्यथा हिंदी भाषा व साहित्य को भविष्य में कोई पूछने वाला भी नहीं रहेगा। कहानी संग्रह ‘‘कौन सी जमीन अपनी’’ परन मो. आसिफ व भानु चैहान का शोधपत्र इस संग्रह की बारीक पड़ताल करता दिखाई देता है। देवी नागरानी, नीरज गोस्वामी, राजीव भरोल की ग़ज़लें सिद्ध करती हैं कि हिंदी ग़ज़लें अब पूरी तरह से परिपक्व हो चुकी है, जिनकेे विषय आमजन से जुडे़ हुए हैं। दीपका मशाल की लघुकथा ‘‘जिजीविषा’’, सुमन घई(विवशता) तथा श्याम सुंदर दीप्ति(बूढ़ा रिक्शेवाला) में दैनिक जीवन की कश्मकश तथा आकांक्षा व्यक्त करते हैं। अनीता कपूर, रमेश मित्तल, पूर्णिमा वर्मन, पंकज त्रिवेदी, प्रतिभा सक्सेना, दिपाली सांगवान, जितेन्द्र जौहर, रश्मि प्रभा, स्वर्ण ज्योति, भावना कुंअर तथा हरदीप कौर संधु की कविताएं जीवन की समस्याओं तथा रोजमर्रा के विषयों से जुड़ी हुई कविताएं हैं। इनमें जहां एक ओर भारतीय पंरपरा, संस्कृति व समाज है वहीं दूसरी ओर इस समाज को आकाश के अनंत छोर तक ले जाने का दृढ़ संकल्प भी है। ख्यात कथाकार डाॅ. अचला शर्मा की कहानियों पर विजय शर्मा का आलेख उन्हें और अधिक पढ़ने केे लिए प्रेरित करता है। विजय सती की समीक्षा पुस्तक ‘‘वेयर डू आई बिलांग’’ के उद्देश्यों से अवगत कराती है। रमेश शौनक का काव्यानुवाद तथा नवांकुर अमित लव की रचनाएं स्तरीय हैं। अमिता रानी, राजकुमारी सिन्हा, सुरेन्द्र पाठक, सुधा मिश्रा, प्रेम मलिक, अदिति मजुमदार, राज माहेश्वरी ने बहुत सुंदर ढंग से कविता को अन्य कलाओं से जोड़ने का प्रशंसनीय कार्य किया है। पत्रिका के प्रमुख संपादक श्याम त्रिपाठी की हिंदी के भविष्य के प्रति चिंता आज आम हिंदी प्रेमी की चिंता है। संपादक सुधा ओंम ढीगरा रचनाकारों से आग्रह करती हैं कि वे इंटरनेट अथवा अन्य माध्यमों में अपने प्रकाशित होने की जल्दबाजी में न रहें। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।

Monday, March 26, 2012

साहित्य सागर और हिंदी साहित्य

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: मार्च 2012, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना, आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, , पृष्ठ: 64, मूल्य: 20 15रू.(वार्षिक 240 रू.), मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0755.4260116, सम्पर्क: 161 बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल .प्र.
साहित्य सागर के इस अंक में अच्छी व समसामयिक रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में अनेक रचनाएं दोहा विधा के साधक जयजयराम आनंद पर एका्रग हैं। आशा सक्सेना, प्रभुदयाल मिश्र, सुरेन्द्र भारद्वाज, शरदनारायण खरे, हर्षवर्धन पाठक की रचनाएं भारतीय समाज को प्रतिबिम्बित करती है। हरिकृष्ण तैलंग, सतीश श्रोत्रिय, एवं साधन वलवटे के व्यंग्यों में अच्छा कटाक्ष निहित है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी उपयोगी व जानकारीपरक है।

Sunday, March 25, 2012

साहित्य परिक्रमा का नया अंक

पत्रिका: साहित्य परिक्रमा, अंक: जनवरी-मार्च 2012, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मुरारीलाल गुप्त गीतेश, आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, , पृष्ठ: 64, मूल्य: 25 15रू.(वार्षिक 60 रू.), मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 09425407471, सम्पर्क: राष्ट्रोस्थान भवन, माधव महाविद्यालय के सामने, नई सड़क ग्वालियर .प्र.
साहित्य की स्थापित पत्रिका साहित्य परिक्रमा के इस अंक में संग्रह योग्य सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अंक में आशुतोष कुमार, श्रीधर पराड़कर, रामेश्वर मिश्र पंकज, शिव कुमार शर्मा, साहेबलाल दशरिए सरल, प्रणव शास्त्री, सरोज गुप्ता एवं सुखबीर आर्य के जानकारीपरक व रोचक आलेखों का प्रकाशन किया गया है। सुभाषिनी रायजादा की कहानी तथा संजय जनागल की लघुकथाएं प्रभावित करती है। अनुपमणि त्रिपाठी का व्यंग्य, व्यंग्य न होकर सरस निबंध के अधिक समीप है। रमेश चंद्र शाह, गोपीकुमार दास, देवेन्द्र दीपक, उमेश कुमार सिंह, द्वारका लाल गुप्त, रामनारायण त्रिपाठी, श्रीमती मृणालिनी घुले की कविताएं, गीत समसामयिक व आधुनिक समाज का दिशा निर्देशन करने में सहायक हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

शब्दशिल्पियों के आसपास

पत्रिका: शब्दसिल्पियों के आसपास, अंक: मार्च 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, आवरण/रेखाचित्र: जानकारी उपलब्ध नहीं, , पृष्ठ: 22, मूल्य: 5 रू.(वार्षिक 60 रू.), मेल: shabdashilpi@yahoo.com ,वेबसाईट: www.dharohar.com , फोन/मोबाईल: 0755.2775129, सम्पर्क: एच 3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर भोपाल .प्र.
समाचार प्रधान पत्रिका के इस अंक में ख्यात ग़ज़लकार शहरयार को याद किया गया है। संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा का राष्ट्रगौरव सम्मान का समाचार जानकारीपरक है। पत्रिका का विचार है कि विद्यासागर नौटियाल बेजोड़ और प्रतिबद्ध कथाकार थे। अलखनंदन के संबंध में आलोक चटर्जी ने लिखा है कि वह खुद उपजा नाटककार था। चर्चा में के अंतर्गत गुम चीज है फेज की आखिरी फिल्मःसलीमा, रश्दी के एक और उपन्यास पर फिल्म, विष्णु प्रभाकर मार्ग, हिंदी विश्वविद्यालय दिनकर के गांव में समाचार प्रकाशित किए गए हैं। ख्यात कथाकार रामदरश मिश्र को व्यास सम्मान, साहित्य अकादमी के अनुवाद पुरस्कार घोषित, ममता तिवारी को मिलेगा माहेश्वरी पुरस्कार, भारतीय कलाओं के लेखक सम्मानित समाचार विशिष्ठ व जानकारीपरक हैं।

हिमप्रस्थ का नया अंक

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: फरवरी 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणवीर सिंह राणा, आवरण/रेखाचित्र: सर्वजीत सिंह, , पृष्ठ: 64, मूल्य: 5 रू.(वार्षिक 60 रू.), मेल: himprasthahp@gmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0177.2633145, सम्पर्क: हिं.प्र. प्रिटिंग प्रेस परिसर, घोड़ा चैकी, शिमला 5
हिमप्रस्थ का समीक्षित अंक साहित्य के साथ साथ समाज से जुड़े अन्य विषयांे की रचनाओं से युक्त है। अंक में सुदर्शन वशिष्ठ, योगेशचंद्र शर्मा, राजीव कुमार, शशि भूषण शलभ, रमाकांत, मनोज शर्मा, अमरीका सिंह, एवं मुख्यमंत्री जी के आलेख रोचक व ज्ञानवर्धक हैं। कहानियों में पद्म भूषण अमिताभ, सरला अग्रवाल, श्याम सिंह सुना ने कुछ नवीन प्रयोग किए हैं जिन्हें पाठक अवश्य पसंद करेंगे। बनवारी लाल वैश्य का ललित निबंध साहित्यिकता के साथ साथ मार्धुय युक्त है। राजेन्द्र परदेसी की लघुकथा मृग तृष्णा अच्छा संदेश देती है, लीला मोदी ने भी लघुकथा विधा की ‘जिम्मेदारी’ कुशलता से निभाई है। श्याम नारायण श्रीवास्तव, प्रभात एवं सत्यनारायण स्नेही की कविताएं पत्रिका का विशिष्ठ भाग है। जसविंदर शर्मा का व्यंग्य निंदक नियरे राखिए प्रभावित करता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी पठनीय है।

साहित्य में सुख़नवर

पत्रिका: सुख़नवर, अंक: जनवरी-फरवरी 2011, स्वरूप: द्वैमासिक, संपादक: अनवारे इस्लाम, आवरण/रेखाचित्र: पारस दासोत, , पृष्ठ: 48, मूल्य: 25 रू.(वार्षिक 170 रू.), मेल:sukhanwar12@gmail.com ,वेबसाईट: www.patrikasukhanwar.blogspot.com , फोन/मोबाईल: 09893663536, सम्पर्क: सी 16, सम्राट कालोनी, अशोका गार्डन, भोपाल 462023 .प्र.
हिंदी व उर्दू ज़बानों के लिए समान रूप से समर्पित पत्रिका सुख़नवर का समीक्षित अंक रचनात्मकता ये युक्त है। अंक में सुरेश पंड़ित, का लेख कितनी रामायण कैसी रामायण अलग ढंग का विचार है। ग़ज़लों में ओमप्रकाश यति, मलिक जादा जावेद, जिया फारूकी, सईद रहमानी, अकबार जबलपुरी, महबूब राही, एस. ए. जैदी, विजय तिवारी, इश्क सुलतानपुरी महावीर सिंह दुखी प्रभावित करते हैं। अल्ताफ़ सीरोज, सुरेन्द्र प्रकाश, पारस दासोत, विजय कुमार सम्पती, निरंजना जैन मंे नवीन दृष्टिकोण व विचारधारा समाहित है। अंक की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।