Friday, November 11, 2011

साहित्य का एक और ‘पुष्पक’

पत्रिका: पुष्पक , अंक: 01, वर्ष: 15, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डाॅ. अहिल्या मिश्र, पृष्ठ: 112, मूल्य: 75रू (वार्षिक: 250 रू.), ई मेल: mishraahilya@yahoo.in ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 040.23703708, सम्पर्क: 93 सी, राजसदन, वेंगलराव नगर, हैदराबाद आंध्र प्रदेश

साहित्य के क्षेत्र में विख्यात पत्रिका पुष्पक के समीक्षित अंक में समाज के विकास व उन्नति का संदेश देकर उसे विकास की मुख्य धारा में लाने वाली कहानियों का प्रकाशन किया गया है। एल.एन. अग्रवाल, देवेन्द्र कुमार मिश्रा, शांति अग्रवाल की कहानियों मेें इसे महसूस किया जा सकता है। अशोक जैन, रामशंकर चंचल, रामनिवास मानव, सुरेन्द्र मिश्र, पवित्रा अग्रवाल, प्रेमबहादुर कुलश्रेष्ठ की लघुकथाएं अच्छी व ध्यान देने योग्य हैं। सुरेश चंद्र, जया उपाध्याय, कुंज बिहारी गुप्ता, विजय विशाल, ज्ञानेद्र साज, ज्योति नारायण, रमा द्विवेदी, ऋषभ देव शर्मा, अभिराम सत्यज्ञ, विनीता शर्मा, मीना मुथा, ओम रायजादा, कुंदन सिंह सजल, आशा सैली, बी.पी. दुबे, सुषमा भण्डारी, आर, शांता सुंदरी एवं मागेलाल तायल की कविताएं, ग़ज़लें तथा नवकविताएं प्रभावित करती हैं। सरिता सुराणा जैन, नरेश शर्मा का व्यंग्य तथा सुरेश उजाला, नृपेन नाथ गुप्त, संपत देवी मुरारका, प्रेमकुमारी कटियार, प्रो. उषा सिन्हा, विनोदिनी गोयनका, सीता मिश्रा, अशोक कुमार शैरी, पंवार राजस्थानी, जगदीश चंद्र शर्मा, नम्रता बजाज, प्रेमचंद्र सहजबाला की रचनाएं पठनीय व साहित्य के शोधार्थियों के लिए उपयोगी हैं।

Saturday, November 5, 2011

पत्रिका ‘‘शुभ तारिका’’ का नया अंक

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: अक्टूबर 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 34, मूल्य: 12रू (वार्षिक: 120रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप ए-47, शास्त्री कालोनी अंबाला छावनी ब133001 हरियाणा

साहित्यिक पत्रिका शुभ तारिका का समीक्षित अंक साहित्यिक रचनाओं से युक्त है। अंक में प्रकाशित लघुकथाएं मनुष्य के उज्ज्वल भविष्य का संकेत करती है। शराफत अली खान, रमेश चंद्र, ओम प्रकाश, नरेन्द्र नाथ, साबिर हुसैन, किशनलाल शर्मा, नरेन्द्र कौर छाबड़ा, सत्यनारायण एवं शमीम की लघुकथाओं का भाव आज के मानव को अभिव्यक्ति देना है। ख्यात साहित्यकार डाॅ. महाराजकृष्ण जैन से संबंधित जानकारी साहित्य के नए जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी है। माला वर्मा, दिव्या लंघवाल, राजीव कुमार, अकेला चंद्र, शैलजा पाठक, हितेश कुमार शर्मा की कविताएं प्रभावित करती है। शैल वर्मा की कहानी व अर्जुन सिंह का व्यंग्य अच्छी रचना कही जा सकती है। अनूप घई पर एकाग्र लेखक परिशिष्ठ लेखक के संबंध में उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। पत्रिका के अन्य स्थाई स्तंभ, समीक्षाएं, आलेख तथा समाचार भी जानकारीपरक हैं।

Wednesday, November 2, 2011

साहित्य में ‘‘हिंदी चेतना’’

पत्रिका: हिंदी चेतना, अंक: जुलाई सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, प्रमुख संपादक: श्याम त्रिपाठी, संपादक: सुधा ओम ढीगरा, पृष्ठ: 68, ई मेल: hindichetna@yahoo.ca ,वेबसाईट: http://www.vibhom.com/ , फोन/मोबाईल: 905.4757165, सम्पर्क: 6 Larksmere Court, Markhem, Ontario, L3R 3R1

हिंदी प्रचारिणी सभा कैनेड़ा द्वारा विगत 13 वर्ष से निरंतर प्रकाशित हो रही पत्रिका हिंदी चेतना अकेली ऐसी पत्रिका है जिसने दुनिया के हिंदीप्रेमियों को भारत से जोड़े रखने का अहम कार्य किया है। पत्रिका पाठकों को मोगरे की खुशबू, गेंदे की सुनहरी आभा, मक्के की रोटी और सरसों का साग तथा पलाश के सौन्दर्य से बांधे रखकर हिंदी साहित्यजगत में अहम स्थान हासिल कर चुकी है। अंक में प्रकाशित कहानियों में फरिश्ता(पंकज सुबीर), कच्चा गोश्त(ज़कीबा जुबेरी) तथा केतलीना(अर्चना पेन्यूल) में निहित खुशबू को इन रचनाओं को पढ़कर महसूस किया जा सकता है। पत्रिका की संपादक डाॅ. सुधा ओम ढीगरा का लेख ‘अमरीका के हिंदी कथा साहित्य में अमेरिकी परिवेश शोध छात्रों के साथ साथ सामान्य पाठक के लिए समान रूप से उपयोगी है। आलेख से अमरीका में रह रहे हिंदी कथाकारों के सृजन की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। ओंमकारेश्वर पाण्डेय हिंदी को वैश्विक मुद्दों से जोड़े जाने की जरूरत बताते हुए आज के संदर्भ में उसकी उपादेयता पर भी विचार करते हैं। प्रकाशित कविताओं, ग़ज़लों, गीतों में कृष्ण कुमार यादव, सर्वेश आस्थाना, अलका सैनी, भगवत शरण, अमित कुमार सिंह, प्रकाश वर्मा, नित्यानंद तुषार, नरेन्द्र व्यास, रमेश रौनक, विजया सती, रेखा भाटिया, दीपक मशाल एवं अमित कुमार शर्मा ने कविता/ग़ज़ल विधा की मर्यादाओं का पालन करते हुए वर्तमान को अतीत से जोड़कर नवीन ढंग से विचार किया है। सुधा भार्गव की बाल कहानी नाग देवता बच्चों के साथ साथ अधिक उम्र के पाठकों का मनोरंजन करने में पूरी तरह से सक्षम है। सुकेश साहनी, सतीश राज तथा श्याम संुदर अग्रवाल की लघुकथाएं आमजन को अभिव्यक्ति देती दिखाई पड़ती है। हिंदी को दुनिया के कोने कोने में पहुंचाने का भाव लिए हुए प्रमुख संपादक श्याम त्रिपाठी जी का संपादकीय पठनीय व ज्ञानवर्धक है। साहित्य सृजन व पठन को ध्यान में रखते हुए संपादक सुधा जी का आखिरी पन्ना पत्रिका के आगामी अंक की प्रतीक्षा व उत्सुकता को जगाने मेें पूर्ण रूप से सहायक है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा समाचार भी प्रभावित करते हैं। हिंदी चेतना की साज सज्जा, कलेवर तथा सामग्री संयोजन काबिले तारीफ है। हिंदी साहित्य जगत में ऐसी पत्रिकाएं गिनी चुनी हैं जो आधुनिक तकनीक व नवाचारों का उपयोग कर हिंदी के लगातार विकास तथा विस्तार में लगी हुई हैं।