Friday, September 30, 2011

सरस्वती सुमन का लघुकथा अंक

पत्रिका: सरस्वती सुमन, अंक: जुलाई-सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: आनंद सुमन सिंह, अतिथि संपादक: कृष्ण कुमार यादव, पृष्ठ: 180, मूल्य: प्रकाशित नहीं, मेल: saraswatisuman@rediffmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0135.2740060, सम्पर्क: 1, छिब्बर मार्ग,(आर्यनगर), देहरादून 248001
पत्रिका का समीक्षित अंक लघुकथा विशेषांक है। अंक में 126 लघुकथाकारों की लघुकथाओं को उनके परिचय के साथ प्रकाशित किया गया है। इसके अतिरिक्त लघुकथा विधा पर आलेख भी प्रमुखता से प्रकाशित किए गए हैं। लघुकथाओं पर वैसे तो बहुत सी पत्रिकाओं के अंत पिछले कुछ वर्षो में प्रकाशित हुए हैं। पर सरस्वती सुमन का यह अंक रचनाओं की बुनावट तथा कसावट के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। इसके साथ ही नए लघुकथाकारों को लघुकथा विधा से परिचित कराने के साथ साथ उन्हें लघुकथा लिखने के लिए प्रेरित करता है। अंक में अकेला भाई, अनिल कुमार, अनुराग, अब्ज, अशोक अज्ञानी, अशोक भाटिया, अशोक वर्मा, अशोक सिंह, अश्विनी कुमार आलोक, आकांक्षा यादव, भगवत दुबे, आनंद दीवान, आशा खत्री लता, आशीष दशोतर, उषा महाजन, दर्द ओमप्रकाश, कमल कपूर, कमल चोपड़ा, कपिल कुमार, कालीचरण प्रेमी, किशोर श्रीवास्तव, कुअंर बैचेन, कुमार शर्मा, कुलभूषण कालड़ा, कुंअर प्रेंमिल, कुंवर विक्रमादित्य एवं कौशलेन्द्र पाण्डेय की लघुकथाओं सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कृष्ण कुमार यादव, कृष्णानंद कृष्ण, कृष्णलता यादव, गोवर्धन यादव, घमंडी लाल अग्रवाल, जगतनंदन सहाय, जितेन्द्र सूद, जयबहादुर शर्मा, ज्योति जैन, जवाहर किशोर प्रसाद, तारा निगम, तारिक अस्लम तस्लीम, दीपक चैरसिया मशाल, देवेन्द्र कुमार मिश्रा, नरेन्द्र कौर छाबड़ा, नमिता राकेश, नवनीत कुमार, नीतिपाल अत्रि, पंकज शर्मा, प्रकश सूना, प्रभात दुबे, पासर दासोत, पूरन सिंह, पुष्पा जमुआर, बलराम अग्रवाल, माला वर्मा, मिथिलेश कुमारी मिश्र, रमाकांत श्रीवास्तव, रश्मि बडथ्वाल, राजेन्द्र परदेसी, सत्यनारायण भटनागर, सतीश दुबे, समीर लाल, सुकेश साहनी, सुरेश उजाला, संतोष सुपेकर, हरिप्रकाश राठी एवं संतोष श्रीवास्तव की लघुकथाएं किसी भी बड़ी विशाल कैनवास युक्त कहानी की अपेक्षा अधिक प्रभावित करती है। प्रकाशित आलेखों में कमल किशोर गोयनका, बलराम अग्रवाल, श्याम सुंदर दीप्ति, रामनिवास मानव, माधव नागदा एवं रामेश्वर कांबोज हिमांशु के लेख लघुकथा विधा की चर्चा करते हुए उसे साहित्य में एक नवीन व प्रभावशाली विधा के रूप में प्रतिष्ठित करते दिखाई देते हैं।

समावर्तन का नया अंक

पत्रिका: समावर्तन, अंक: सितम्बर 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 250रू.), मेल: samavartan@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी, 129 दशहरा मैदान, उज्जैन .प्र.
अल्प समय में ही प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका समावर्तन के इस अंक में बहुत कुछ नया व पठनीय प्रकाशित किया गया है। अंक आंशिक रूप से ख्यात कथाकार मालती जोशी पर एकाग्र है। उनके समग्र व्यक्तिव पर प्रकाशित आलेखांे में सूर्यकांत नागर, मंगला रामचंद्रन, ज्योति जैन, सुधा अरोड़ा, राजेन्द्र सिंह चैहान एवं सच्चिदानंद जोशी के आलेख विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। निरंजन श्रोत्रिय जी द्वारा चयनित महेश वर्मा की कविताएं नयापन लिए हुए हैं। राधेलाल बिजघावने, सुदिन श्रीवास्तव, जहीर कुरेशी एवं भूमिका द्विवेदी की कविताओं में सार्थकता व समयानूकूल भाव छिपा हुआ हैै। श्याम मुुंशी की कहानी ‘किसकी मौत?’ एक अच्छी कहानी है। ललित सुरजन जी पर एकाग्र भाग में भी गहन गंभीर रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। उनके साहित्य से चुने हुए अंश तथा रमाकांत श्रीवास्तव, त्रिभुवन पाण्डेय के आलेखों में सुरजन जी से पाठक का व्यक्तिगत साक्षात्कार हो जाता है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, श्रीराम दवे, परमानंद श्रीवास्तव, विनय उपाध्याय की समीक्षाएं व आलेख पत्रिका के अन्य अंकों की तरह स्तरीय हैं।

Wednesday, September 28, 2011

‘शुभ तारिका’ के साथ

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: अगस्त 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 64, मूल्य: 12रू (वार्षिक: 120रू.), मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 9171.261083, सम्पर्क: कृष्णदीप, -47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी हरियाणा
पत्रिका के इस कहानी अंक में अच्छी व पठनीय कहानियों का समावेश किया गया है। अंक में इसके अतिरिक्त अन्य रचनाओं को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। प्रकाशित लघुकथाओं में सुरेन्द्र गगल, अखिलेश शुक्ल, राधेश्याम भारतीय, आनंदप्रकाश आर्टिस्ट की लघुकथाएं प्रभावित करती है। रूपाली दास, निर्मला जौहरी, श्याम विद्यार्थी, अब्बास खान, प्रियंका शर्मा, कुलभूषण कालड़ा एवं चिन्मय सागर की कविताएं नवीनता लिए हुए हैं। राधेश्याम जोशी, संजय जनागल, अलका सैनी, प्रदीप शर्मा, इंदिरा किसलय, राजेश पंकज तथा मनीष कुमार सिंह की कहानियों में वर्तमान समाज को संघर्ष से उबरने के लिए प्रेरित करने की दिशा में प्रयास निरूपित किया जा सकता है। लेखक परिशिष्ट के अंतर्गत केदारनाथ सविता से संबंधित जानकारी ज्ञानवर्धक है। लोकसेतिया का व्यंग्य एक अच्छी रचना कही जा सकती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व लेख आदि भी रोचकता लिए हुए हैं।

Tuesday, September 27, 2011

साहित्य से ‘साक्षात्कार’

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: अगस्त 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: त्रिभुवननाथ शुक्ल, पृष्ठ: 120, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 250रू.), मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0755.2554782, सम्पर्क: .प्र. संस्कृति परिषद, वाण गंगा, भोपाल मध्यप्रदेश
साहित्य की सर्वाधिक लोकप्रिय व रचनाकारों की प्रिय पत्रिका का समीक्षित अंक भविष्य में साहित्य के माध्यम से परिवर्तनशील रचनाकारों की रचनाओ से युक्त है। अंक में ख्यात कवि तथा साहित्य मर्मज्ञ नंद किशोर आचार्य जी से ब्रजरतन जोशी की बातचीत साहित्य के साथ साथ वर्तमान परिस्थितियों व उससे उत्पन्न विषमताओं पर गहन विमर्श है। आचार्य भगवत दुबे एवं सुरेन्द्र विक्रम उच्च कोटि के हैं। संपादक ने पता नहीं क्यों सत्यनारायण भटनागर की लघु कहानियों को अंक में स्थान दिया है। जबकि इन रचनाओं में न तो सरसता है और न ही वर्तमान से किसी प्रकार का संवाद ही है। मैं नदिया फिर भी प्यासी(सुरेन्द्र कुमार सोनी) तथा चलत े चलते(जीवन सिंह ठाकुर) कहानियां अपेक्षाकृत रूप से अधिक प्रभावशाली है। रश्मि रमानी की कविता तथा नरेश सांडिल्य के दोहे सटीक हैं। वहीं दूसरी ओर लगता हैै विनय मिश्र पूर्ण तन्मयता से लेखन नहीं कर पा रहे हैं। राजेन्द्र कुमार का यात्रा वृतांत अच्छा बन पड़ा है। नई कलम के अंतर्गत स्वाति आकांक्षा सिंह प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं प्रभावित करती है। शुक्ल जी के संपादन में पत्रिका में काफी निखार आया है, लेकिन अभी यह निखार रचना की उत्कृष्टता के रूप में आना शेष है।

Friday, September 23, 2011

साहित्य के ‘निकट’

पत्रिका: निकट, अंक: जून-अक्टूबर 2011, स्वरूप: अर्द्ध वार्षिक, संपादक: कृष्ण बिहारी, पृष्ठ: 144, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 100 रू.), मेल: krishnabihari@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 971505429756, सम्पर्क: Po box no. 52088, Abudhabi, UAE
अमीरात से प्रकाशित इस पत्रिका ने प्रारंभ से ही हिंदी साहित्यजगत में अपनी पहचान बना ली है। इसके पांच अंक साहित्य की प्रत्येक विधा में प्रकाशित सामग्री विविधतापूर्ण व जानकारीपरक है। समीक्षित अंक में प्रकाशित रचनाओं का स्तर किसी भी प्रतिष्ठित भारतीय पत्रिका से कमतर नहीं है। इस अंक में प्रकाशित कहानियों में नेपथ्य का नरक(अपूर्व जोशी), ख़सम(हरि भटनागर), सुनो तो पुरबैया(जयश्री राय), आदमी और औत उर्फ बीच रात की डोरी(प्रमोद सिंह), हक(रवि अग्निहोत्री), ढलान पर कुछ पल(प्रताप दीक्षित), सड़क की ओर खुलता मकान(रूपसिंह चंदेल) एवं ससमाप्त(उर्मिला शिरीष), अनभिज्ञ(राजेन्द्र दानी) प्रमुख हैं। प्रत्येक कहानी समसामयिक परिस्थितियों वातावरण को लेकर रची गई है। इनमें समाज के प्रत्येक वर्ग को समुचित महत्व दिया गया है। प्रेमिला सिंह, मोहन सिंह कुशवाहा, उत्पल बनर्जी, मंजरी श्रीवास्तव, प्रदीप मिश्र, आशा श्रीवास्तव, कमलेश भट्ट, अनीता भुल्लर, श्रीप्रकाश श्रीवास्तव, परमिंदर जीत, वीरेन्द्र आस्तिक, यतीन्द्रनाथ राही तथा जगन्नाथ त्रिपाठी की कविताएं प्रभावित करती है। विज्ञान भूषण एवं अमरीक सिंह दीप की लघुकथाएं भी उपयोगी हैं। चंद्रशेखर दयानंद पाण्डेय, संजेश जोशी एवं राजेन्द्र राव के आलेखों में विषय की विविधता के साथ समकालीन परिस्थितियों का पर्याप्त ध्यान रखा गया है। पत्रिका का कलेवर, साज सज्जा व विविधतापूर्ण सामग्री प्रभावशाली है।

Thursday, September 22, 2011

साहित्य में ‘अक्सर’

पत्रिका: अक्सर, अंक: जून 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: हेतु भारद्वाज, पृष्ठ: 144, मूल्य: 25रू (वार्षिक: 100 रू.), मेल: aksar.tramasik@gmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मोबाईल: 0141.2760160, सम्पर्क: -243, त्रिवेणी नगर, गोपालपुरा बाईपास, जयपुर 302018 राजस्थान
हिंदी साहित्यजगत में प्रतिष्ठित इस पत्रिका के प्रत्येक अंक मंे नवीनता होती है। इस अंक में भी सार्थक साहित्यिक रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में ख्यात कवि मलय जी की छः कविताएं मन की गहराइयों में उतरकर बहुत कुछ सोचने के लिए प्रेरित करती है। जनोक्ति कवि केदारनाथ अग्रवाल पर रणजीत के आलेख व कवि नंदबाबू की कविताओं पर रामनिहाल गुंजन ने गहरे चिंतन के बाद उत्कृष्ठ लेखन किया है। लक्ष्मण व्यास, मोहम्मद अजहर, लक्ष्मी शर्मा, अरूण कुमार के समीक्षात्मक आलेख सामाजिक व वर्तमान परिवेश के प्रति सचेत रहने का आग्रह करते दिखाई देते हैं। रूपलाल बेदिया की कहानी ‘अपेक्षा’ की अच्छी शुरूआत के पश्चात लगता है कथाकार ने इसे पूर्ण करने में शीघ्रता की जिससे पाठक इसका रसास्वादन करने में बाधा उत्पन्न हुई है। ओम नागर व निशांत की कविताएं सामान्य से विशिष्ठ की ओर ले जाती है। नंद भारद्वाज, विवेक कुमार मिश्रा, सरसेम गुजराल के समीक्षाआलेख अच्छे बन पड़े हैं व प्रभावित करते हैं। साहित्यिक पुरस्कारों को लेकर ख्यात कवि लेखक गोविंद माथुर का आलेख गहन पड़ताल है जिसे अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया गया है। दुर्गाप्रसाद अग्रवाल तथा वरूण कुमार तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक समीक्षाएं इन संग्रहों/पुस्तक को पढ़ने के लिए प्रेरित करने में सफल रही है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती हैं। ख्यात प्रगतिवादी लेखक चिंतक स्व. कमला प्रसाद जी पर एकाग्र समीक्षालेख एक पठनीय रचना है।

Sunday, September 18, 2011

समय के साखी का नया अंक

पत्रिका: समय के साखी, अंक: जुलाइ 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: आरती, पृष्ठ: 64, मूल्य: 20रू (वार्षिक: 220 रू.), ई मेल: samaysakhi@gmail.com ,वेबसाईट: http://www.samaysakhi.in/ , फोन/मोबाईल: 09713035330, सम्पर्क: बी-308, सोनिया गांधी काम्पलेक्स, हजेला हॉस्पिटल के पास, भोपाल 03 म.प्र.

समय के साखी पत्रिका का यह अंक मिश्रित रचनाओं का एक अच्छा अंक है। अंक में प्रकाशित रचनाएं प्रत्येक साहित्यिक विधा का अनुमोदन करती है। अंक में राद्यवेन्द्र तिवारी, रश्मि रमानी, ओमप्रकाश अडिग, कुमार विश्वबंधु एवं रवि प्रताप सिंह की कविताएं प्रकशित की गई हैं। अशोक अंजुम का गीत व इन्दिरा दांगी की कहानी विशिष्ठ है। कृष्ण कुमार यादव के आलेख विजेन्द्र की कविता एक अच्छा शोधपरक आलेख है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र समाचार आदि भी जानकारीपरक हैं।

Saturday, September 10, 2011

साहित्य के लिए ‘कथा बिंब’

पत्रिका: कथाबिंब, अंक: जुलाई-सितम्बर 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मंजुश्री, पृष्ठ: 56, मूल्य: 15रू (वार्षिक: 60रू.), ई मेल: kathabimb@yahoo.com ,वेबसाईट: www.kathabimb.com , फोन/मोबाईल: 25115541, सम्पर्क: ए-10, बसेरा ऑफ दिनक्वांरी रोड़, देवनार मुम्बई 400088

कथाप्रधान इस त्रैमासिकी में समसामयिक विषयों पर एकाग्र कहानियों व लघुकथाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में प्रकाशित प्रमुख कहानियांे में उसका फैसला(पुष्पा सक्सेना), मोक्षदायिनी(सुभाष चंद गांगुली), वापसी(उषा भटनागर), टुटपंुजिया(गोविंद उपाध्याय) एवं बंद ताला(मीनाक्षी स्वामी) प्रमुख कहानियां है। संजय जनागल, सुरेंन्द्र गुप्त, पंकज शर्मा एवं सिराज अली की लघुकथाएं भी प्रभावित करती है। राजेन्द्र निशेष, प्रेमप्रकाश चौबे, मधुप्रसाद, किशोर काबरा, नसीम अख्तर, सुदर्शन प्रियदर्शनी की कविताएं, ग़ज़लें समाज के कमजोर वर्ग को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्ति देने का सटीक प्रयास है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, समाचार पत्र आदि भी उपयोगी व जानकारीपरक हैं।