Saturday, April 30, 2011

बच्चों के लिए 'बाल वाटिका'

पत्रिका: बाल वाटिका, अंक: अप्रैल2011,, स्वरूप: मासिक, संपादक: भेरूलाल गर्ग, पृष्ठ: 96, मूल्य: 15रू(वार्षिक 150रू.), ई मेल: balvatika96@gmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 01482.250401, सम्पर्क: नंद भवन, कांवाखेड़ा पार्क, भीलवाड़ा राजस्थान

बच्चों के विकास के लिए समर्पित देश की अग्रणी पत्रिका बाल वाटिका के इस अंक में ग्रीष्मकाल के में बच्चों की रूचि की सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अंक में प्रकाशित बाल कहानियों में रामकुमार आत्रेय, लीला मोदी, जसवंत सिंह विरदी, गोवर्धन यादव, अरनी राबर्टस, उज्ज्वला केलकर, रमा तिवारी तथा मुकेश नौटियाल की कहानियां विशिष्ट महत्व की हैं। रावेन्द्र कुमार रवि, भगवती प्रसाद गौतम, राजा चैरसिया, राजनारायण चैधरी, योगेन्द्र सिंह भाटी, भगवती प्रसाद द्विवेदी तथा किशोर कुमार कौशल की कविताएं बाल मनोविज्ञान को समझ कर लिखी गई रचनाएं हैं। सत्यनारायण सत्य, रमेश मयंक व चक्रधर नलिन के आलेख भी स्तरीय व पठनीय हैं। शकंुतला कालरा का यात्रा विवरण, अन्य स्थायी स्तंभ व समीक्षाएं भी ध्यान आकर्षित करती हैं। बच्चों के विकास तथा चरित्र निर्माण में यह अंक सहायक है।

Friday, April 29, 2011

समानवर्तन का अप्रैल2011 अंक

पत्रिका: समावर्तन, अंक: अप्रैल2011,, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू(वार्षिक 250रू.), ई मेल: samavartan@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी, 120, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.

पत्रिका का समीक्षित अंक ख्यात कवि केदारनाथ अग्रवाल पर एकाग्र है। अंक मंे उन पर उपयोगी व संग्रह योग्य जानकारी का प्रकाशन किया गया है। रमेश दवे, प्रयाग शुक्ल, मुश्ताक अली, उर्मिला शुक्ल के लेख विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। केदारनाथ अग्रवाल जी की कविताएं तथा रचनाएं व उनसे साक्षात्कार उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर अच्छी तरह से प्रकाश डालते हैं। राजेन्द्र शर्मा, सुरेश उजाला, जहीर कुरैशी व किशन तिवारी की कविताएं नयापन लिए हुए हैं। सुनीति रावत की कहानी तथा निरंजन श्रोत्रिय जी द्वारा चयनित विमलेश त्रिपाठी की कविताएं स्तरीय व पाठकों के लिए जानकारीपरक हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ व रचनाएं भी पठनीय व स्तरीय हैं।

Thursday, April 28, 2011

पाठक मंच बुलेटिन का नया अंक

पत्रिका: पाठक मंच बुलेटिन , अंक: मार्च 2011,, स्वरूप: मासिक, संपादक: मानस रंजन महापात्र, पृष्ठ: 42, मूल्य: 5रू(वार्षिक 50रू.), ई मेल: nbtindia@ndb.vsnl.net.in ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: प्रकाशित नहीं, सम्पर्क: राष्ट्रीय बाल साहित्य केन्द्र, नेशनल बुक ट्रस्ट, नेहरू भवन, 5 इन्स्टीट्यूशनल एरिया, वसंत कंुज फेस 2, नई दिल्ली भारत

यह पत्रिका हिंदी के साथ साथ अंगे्रजी में भी प्रकाशित की जाती है। इस अंक में प्रकाशित बाल कहानियों में शैलेन्द्र अवस्थी, थंगमनि, संजीव कौशल, मीता, सुरेन्द्र श्रीवास्तव, रूपनारायण काबरा तथा दीप्ति बाला झा बालमन की समझ को विकसित करने में काफी हद तक सक्षम रचनाएं हैं। सुरेश आनंद, जगदीश चंद्र शर्मा, राजेश जैन, कमल सिंह चैहान, शिवमोहन यादव तथा शंकर सुलतानपुरी की कविताएं बच्चों के विकास व शिक्षा मंे सहायक हैं। पत्रिका की साज सज्जा व संयोजन प्रभावित करता है।

Wednesday, April 27, 2011

साहित्य के लिए ‘पाण्डुलिपि’

पत्रिका: पाण्डुलिपि, अंक: जनवरी-मार्च 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: जयप्रकाश मानस, पृष्ठ: 422, मूल्य: 25रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: pandulipatrika@gmail.com , वेबसाईट: http://www.pramodverma.com/ , फोन/मोबाईल: 09424182664, सम्पर्क: एफ-3, छ.ग. मा.शि.मं. आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर 492001 छ.ग.
पाण्डुलिपि के अभी तक केवल तीन अंक ही प्रकाशित हुए हैं। पत्रिका ने एक वर्ष से कम समय में साहित्य जगत में अपनी अच्छी उपस्थिति दर्ज करायी है। इस अंक में विविधतापूर्ण अच्छी साहित्यिक सामग्री का प्रकाशन किया गया है। चंद्रकांत देवताले, नंद चतुर्वेदी, श्रीप्रकाश मिश्र, दिविक रमेश तथा प्रवासी कवि सुभाष काक की कविताएं विशिष्ठ हैं। सदानंद शाही, गोविंद माथुर, अमरजीत कांके, निर्मला पुतुल, हरेप्रकाश उपाध्याय, अशोक कुमार पाण्डेय, जसबीर चावला, कुमार सुरेश एवं मोहन सगोरिया की कविताएं पाठक को आस्वस्त करती हैं कि कविता को मरती हुई विधा समझना भारी भूल होगी। विमर्श के अंतर्गत शंभु गुप्त, ज्योतिष जोशी, प्रफुल्ल कोलख्यान के लेख पत्रिका के इस अंक को स्वरूचिपूर्ण बनाते हैं। शरद सिंह, विनोद मिश्र, जयश्रीराय तथा इंदिरा दांगी की कहानियों में विषय प्रस्तुतिकरण का अनोखा अंदाज पाठक को बांधे रखने में सफल रहा है। अख्तर अली, विजय शर्मा व डाॅ. पदमा शर्मा के लेखों में समसामयिक मुद्दों को उठाया गया है। पुरषोत्तम अग्रवाल, गंगासहाय मीणा, रूपचंद्र शास्त्री मयंक, हरि ठाकुर, गौतम सचदेव की विधाविविधता युक्त रचनाएं लेखन में नई सोच का परिणाम है। छंद रचनाओं में बुद्धिनाथ मिश्र, ज्ञानप्रकाश विवेक, योगेश शर्मा व्योम एवं महावीर शर्मा के गीतों में सांगीतिकता है। दो आब का कवि(प्रमोद वर्मा), बुलबुल और गुलाब(आस्कर वाइल्ड-अनुवादः द्विजेन्द्र द्विज), उड़िया कविताएं(अनुवाद-दिनेश माली) एवं तोलस्तोय और साइकिल(डाॅ. अभिजात) जैसी रचनाएं देश की किसी भी साहित्यिक पत्रिका में नहीं मिलेंगी। बलराम अग्रवाल, राजेन्द्र सोनी व सुशील अग्रवाल की लघुकथाएं तथा शंभुलाल शर्मा की बाल कविताएं भी उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त पत्रिका में कमल किशोर गोयनका, अच्युतानंद मिश्र, सुरेश पडित, बालकवि बैरागी, प्रताप सहगल, जगदीश चतुर्वेदी के विविधतायुक्त लेख जानकारीपरक हैं। एक साथ इतनी अधिक विविधतापूर्ण रचनाओं को जुटाना व संपादन करना वास्तव में दुरूह कार्य है। इस कार्य को जयप्रकाश मानस,अशोक सिंघई व उनकी टीम ने बहुत ही अच्छे ढंग से किया है।

Tuesday, April 26, 2011

सत् साहित्य शोध पत्रिका - ‘साहित्य सागर’

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: april 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, मूल्य: 20रू(वार्षिक 240रू.), ई मेल: kksaxenasahityasagar@rediffmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0755.4260116, सम्पर्क: 161 बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल 462043 म.प्र.

इस पत्रिका के प्रत्येक अंक में किसी एक साहित्यकार लेखक के समग्र्र व्यक्तित्व व कृतित्व पर सामग्री का प्रकाशन किया जाता है। इस अंक में लोकप्रिय साहित्यकार डाॅ. महेश अग्रवाल के समग्र पर अच्छे आलेखों का प्रकाशन किया गया है। उनपर डाॅ. परशुराम विरही, वर्षा सिंह, दिवाकर वर्मा, कुंअर बैचेन, विद्यानंदन राजीव, सत्यव्रत चतुर्वेदी, विनय प्रकाश जैन, चंद्रसेन विराट, हरिप्रकाश जैन तथा लखनलाल खरे ने विस्तृत रूप से लिखा है। पत्रिका की अन्य रचनाओं में भी विशुद्ध हिंदी साहित्य की झलक मिलती है। ब्रहमजीत गौतम तथा भवेश दिलशाद ने हिंदी जगत में ग़ज़लों तथा अलफाज़ को लेकर काफी कुछ कहा है। स्वामी श्यामानंद सरस्वती, पृथ्वीराज दुआ, अरूण अपेक्षित, प्रेमबहादुर अजय, संयोगिता गोसाई, अशोक गीते तथा रामस्नेही शर्मा की ग़ज़लें ग़ज़ल के पैरामीटर पर खरी उतरती हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है।

Monday, April 25, 2011

विविधतापूर्ण साहित्य-पत्रिका -‘नया ज्ञानोदय’

पत्रिका: नया ज्ञानोदय, अंक: april 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रवीन्द्र कालिया, पृष्ठ: 128, मूल्य: 30रू(वार्षिक 360रू.), ई मेल: jnapith@satyam.net.in ,वेबसाईट: http://www.jnapith.net/ , फोन/मोबाईल: 011.24626467, सम्पर्क: 18, इन्स्टीट्यूटनल एरिया, लोदी रोड़, नई दिल्ली 110003

इस प्रतिष्ठित पत्रिका के प्रत्येक अंक में प्रकाशित रचनाओं में कुछ न कुछ अलग हटकर होता है। इस अंक में गुलजार, भारत भारद्वाज एवं कृष्ण कुमार जैसे ख्यात लेखकों-साहित्यकारों के आलेख प्रकाशित किए गए हैं। प्रकाशित कहानियों में रैम्बल(प्रदीप पंत) तथा सन्नाटा(जयशंकर) विशिष्ठ कहानियां हैं। अंशु त्रिपाठी, प्रतापराव कदम तथा शुभमश्री की कविताएं काव्य के निश्चित प्रतिमानों से अलग समाज के लिए सोचती हैं। देशकाल के अंतर्गत विश्वास पाटिल, शशांक दुबे, प्रांजल धर तथा श्रीगोपाल काबरा ने साहित्येत्तर विषयों का अच्छा विश्लेषण किया है। द्रोणवीर कोहली का उपन्यास ‘खाड़ी में खुलती खिड़की’ पढ़कर यह समझना कठिन हो जाता है कि आखिर क्यों संपादक ने इसे इतनी अधिक तवज्जो दी है। भगवान सिंह, अजय तिवारी तथा विजय मोहन सिंह के साहित्यालेख प्रभावित करते हैं।

Sunday, April 24, 2011

बाल साहित्य पत्रिका ‘सुमन सागर’

पत्रिका: सुमन सागर, अंक: अप्रैल-जून2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: संजीव बिहारी आलोक, पृष्ठ: 42, मूल्य: 10रू(वार्षिक 40रू.), ई मेल: ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 9835053651 , सम्पर्क: विनीता भवन, सवेरा सिनेमा चैक, काजी चक्र बाढ़ 803213 बिहार

बाल साहित्य के लिए समर्पित इस पत्रिका में बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए अच्छी रचनाएं प्रकाशित की जा रही हैं। इनमें जयकृष्ण भारती, नरेन्द्र देवांगन, तारा सिंह, पुष्पेश कुमार पुष्प, विष्णु पंत मंगरूलकर, गिरीश प्रसाद गुप्ता, उषा किरण त्रिपाठी, अजय चतुर्वेदी, संजीव आलोक तथा रामरतन यादव की रचनाओं का बालपरक दृष्टिकोण प्रभावशाली है। दिलीप भाटिया, जसवंत सिंह विरदी, नयन कुमार राठी व संजीव कुमार आलोक की रचनाएं बाल विषयक दृष्टिकोण को और अधिक स्पष्ट करते हैं।

Saturday, April 23, 2011

शुभ तारिका का मार्च 2011 अंक

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: मार्च 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 38, मूल्य: 12रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: urmi.klm@gmail.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्ण दीप, ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी, 133001 हरियाणा

विगत 39 वर्ष से लगातार प्रकाशित पत्रिका शुभ तारिका के इस तीसरे अंक में अच्छे व विचार करने योग्य व्यंग्य प्रकाशित किए गए हैं। आकांक्षा पारे, अरविंद तिवारी, अजातशत्रु, प्रो. चंद्रभानु आर्य, मनजीत कौर, आलोक सेतिया के व्यंग्यों की विषयवस्तु प्रभावित करती है। डाॅ. महाराज कृष्ण जैन का व्यंग्य अथ सेवा माहत्मय परसाई जी के व्यंग्यों की कोटि का है। पूर्णिमा मित्रा, शरतचंद्र वाष्र्णेय, सीताराम गुप्ता, आकांक्षा यादव तथा आलोक भारती की लघुकथाएं उल्लेखनीय हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व सामग्री भी प्रभावित करती है।

Tuesday, April 19, 2011

रचनाकारों के ‘आसपास’

पत्रिका: आसपास, अंक: अपै्रल 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 32, मूल्य: 5रू(वार्षिक 50रू.), ई मेल:shabdashilpi@yahoo.com ,वेबसाईट: http://www.dharohar.com/ , फोन/मोबाईल: 0755.2775129, सम्पर्क: एच-3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर, भोपाल म.प्र. रचनाधर्मियों की संवाद पत्रिका के इस अंक में साहित्यकारों के लिए उपयोगी जानकारी का प्रकाशन किया गया है। अंक में कुमार अम्बुज का संस्मरण(ख्यात लेखक व साहित्यकार स्व. कमला प्रसाद पर एकाग्र) प्रभावशाली रचना है। दुष्यंत कुमार स्मृति संग्रहालय का पांच दिवसीय पुस्तक पर्व समाचार भी इस आयोजन की विस्तृत जानकारी देता है। आलेख ‘मरते दम तक लिखने की ख्वाहिशः नीरज’ पाठकों को प्रेरित करता है। प्रमोद वर्मा संस्थान का पुर्नगठन, गीताकार सोम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का समाचार सहित अन्य जानकारियां उपयोगी व सम्पर्क स्थापित करने योग्य हैं।

Monday, April 18, 2011

‘परिकथा’ का नवलेखन अंक

पत्रिका: परिकथा, अंक: जनवरी-फरवरी 2011, स्वरूप: द्वैमासिक, संपादक: शंकर, पृष्ठ: 125, मूल्य: 35रू(वार्षिक 275रू.), ई मेल: parikatha.hindi@gmail.com ,वेबसाईट: http://www.parikathahindi.com/ , फोन/मोबाईल: 0129 4116726, सम्पर्क: 96, बेंसमेंट, फेस-3, इरोज गार्डन, सूरजकुण्ड रोड़, नई दिल्ली 110044
परिकथा ने अल्प समय में ही साहित्य जगत में अपनी पहचान कथा साहित्य के माध्यम से स्थापित की है। अंक में प्रमुख रूप से कहानियां प्रकाशित की गई है। अधिकांश कहानीकार युवा हैं, संभवतः इसलिए इस अंक को नवलेखन अंक कहा गया है। प्रायः सभी कहानियों में विषय की अपेक्षा विषय वस्तु के प्रस्तुतिकरण पर अधिक ध्यान दिया गया है। यह आजकल के कहानीकारों द्वारा विशेष रूप से चलन में लाया गया निरर्थक प्रयास है। इससे कहानी लम्बे समय तक प्रभावित करने में सफल नहीं हो पाती है। लेकिन फिर भी सरसता व कथा तत्व के कारण इन कहानियों में विशिष्ठता है। प्रमुख कहानियां है - इस मोड़ पर आता हूं(गौतम राजऋषी), दाहिनी आंख(इंदिरा दांगी), चांदी का रूपया(ओम भारद्वाज), धरती मां(मो. अनवर खान), चांद, रोटी और चादर की सलवटें(उमा), दीनानाथ जी सठिया गए हैं(शिवअवतार पाल), मुक्ति(अनु सिंह) एवं परिगमन(जितेन्द्र बिसारिया) प्रमुख है। अरविंद, मनोज पाण्डेय, रूपाली सिन्हा, दीपक मशाल, राजीव रंजन, आशुतोष चंदन, ओम नागर, राजेश हर्षवर्धन, सुमन सिंह तथा कपिल देव पाण्डेय की कविताएं नव कविता कही जा सकती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं अपेक्षित प्रभाव डालने में असफल रही है।

Sunday, April 17, 2011

हिंदी साहित्य जगत की लब्धप्रतिष्ठित पत्रिका ‘वागर्थ’

पत्रिका: वागर्थ,अंक: अप्रैल 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: एकांत श्रीवास्तव, कुसुम खेमानी, पृष्ठ: 129, मूल्य: 320रू(वार्षिक 200रू.), मेल: bbparishad@yahoo.co.in , वेबसाईट: http://www.bhartiyabhashaparishad.com/ , फोन/मोबाईल: 033.22879962, सम्पर्क: भारतीय भाषा परिषद, 36ए, शेक्सपियर सरणी, कोलकाता 700017
ख्यात साहित्यिक पत्रिका वागर्थ का अप्रैल 2011 अंक साहित्यिकता से भरपूर है। अंक में प्रदीप सक्सेना, विजय कुमार व सुधीर विद्यार्थी के आलेख प्रकाशित किए गए हैं। विजय कुमार का आलेख ‘क्या कविता का अनुवाद संभव है’ इस विधा के वर्तमान स्वरूप की विस्तृत व्याख्या करता है। प्रकाशित कहानियों में ‘उन विशेषज्ञों को प्रणाम’(विद्यासागर नौटियाल), ‘सफेद फूल’(जाफर मेंहदी जाफरी) तथा ‘रफ़्तार’(हरियश राय) के कथानक तथा विषय वस्तु में नवीनता है। ऋतुराज, दिनेश कुमार शुक्ल तथा प्रेमरंजन अनिमेष की कविताएं प्रकृति तथा समाज को जोड़ती है। ख्यात वरिष्ठ साहित्यकार नंदकिशोर नवल से नताशा की बातचीत ‘राष्ट्र की अस्मिता और भाषा की निजता खतरे में’ भाषा, राष्ट्र व साहित्य पर नए सिरे से विचार करती है। प्रभात त्रिपाठी की डायरी, कमेन्दु शिशिर का यात्रा निबंध तथा मिथिलेश्वर का संस्मरण पत्रिका के अन्य आकर्षण है। अज्ञेय की कहानी हीलीबोन की बत्तखें’ पर प्रेम शशांक के विचार कथा पर नया दृष्टिकोण है। एकांत श्रीवास्तव का संपादकीय ‘काठ की नाव और सोने की नाव’ (रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता सोनार तरी पर एकाग्र) वर्तमान पूंजीवादी दौर के संकट से आगाह करता है।

Saturday, April 16, 2011

प्रवासी भारतीयों की पत्रिका ‘गर्भनाल’

पत्रिका: गर्भनाल, अंक: April 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: सुषमा शर्मा, पृष्ठ: 52, मूल्य: 30रू(वार्षिक 240रू.), ई मेल: प्रकाशित नहीं , वेबसाईट: http://www.garbhnal.com/ , फोन/मो. 08989015017, सम्पर्क: डीएक्सई 23, मीनाल रेसीडेन्सी, जे.के. रोड़, भोपाल म.प्र.
गर्भनाल पत्रिका पूर्व से ही इंटरनेट पर उपलब्ध थी। यह प्रवासी भारतीयों की ख्यात मासिक पत्रिका है। इस अंक मंे विदेशों में रह रहे हिंदी के साहित्यकारों की रचनाएं प्रकाशित की गई हैं जो भारतीय लेखकों व साहित्यकारों की रचनाओं से किसी भी प्रकार से कमतर नहीं है। लेख ‘हिंदी का लेखक क्या करे?’(डाॅ. रवीन्द्र अग्निहोत्री), स्त्री मन की अप्रतिम प्रस्तोता: उषा प्रियंवदा’(डा. कला जोशी) तथा चाल्र्स डार्विन और विकासवाद(नवोदिता) में रचनाकारों की विषय पर पकड़ प्रभावित करती है। अमरीका की ख्यात हिंदी साहित्यकार प्रियदर्शिनी से सुधा ओम ढीगरा की बातचीत विदेशों में रह रहे हिंदी साहित्यकारों की पीड़ा व्यक्त करती है। गंगानंद झा का यात्रा वृतांत ‘क्या है उस पथ की ओर’ तथा राजकिशोर का रिपोतार्ज ‘ये किस देश के लोग हैं?’ संजोकर रखने योग्य रचनाएं हैं। अदिति मजूमदार, शकुन्तला बहादुर, बृजेन्द्र श्रीवास्तव, सोमनाथ नायक, अशोक कुमार व दिपाली सांगवान की कविताओं ग़ज़लों में विशिष्टता है। कहानियों में ‘दो मित्र’(भूपेन्द्र कुमार दुबे) तथा एप्लीक्स(भावना सक्सेना) भारतीय संस्कारों को अप्रवासी नजरिए से देखती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी पठनीय है।

मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका का नया अंक

पत्रिका : मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक : मार्च2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : डॉ. बि. रामवंजीवैया, पृष्ठ : 52, मूल्य : 5रू(वार्षिक 50रू.), ई मेल : brsmhpp@yahoo.co.in ,वेबसाईट : Not avilable , फोन/मोबाईल : 080.23404892, सम्पर्क : 58, वेस्ट ऑफ कोर्ट रोड़, राजाजी नगर बेंगलूर इस पत्रिका के प्रत्येक अंक में साहित्यिक विषयों को नवीन विचारों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। समीक्षित अंक में मित्रेश कुमार गुप्त, श्याम गुप्त, राधागोविंद पातर, पुनीता पचौरी, गिरिजेश श्रीवास्तव बंधु, राज सक्सेना, मिगरगणे अनुराधा, तारा सिंह, एस. के. जैन, विजय कुमार उपाध्याय, गार्गीशंकर मिश्र, अखिलेश शुक्ल व बी. बै. ललिताम्बा के विचारपूर्ण आलेखों का प्रकाशन किया गया है। नरेन्द्र सिसोदिया, देवेन्द्र भारद्वाज, महेश चंद्र शर्मा, रामनिवास मानव व कमल सिंह सोलंकी की कविताएं उल्लेखनीय है। पत्रिका में प्रकाशित अन्य रचनाएं भी उपयोगी व समयानुकूल हैं।

Monday, April 11, 2011

बाल साहित्य विशेषांक "इंगित"

पत्रिका : इंगित, अंक : वार्षिकांक वर्ष 2011, स्वरूप : वार्षिकांक, संपादक : साहित्यकारों का संपादक मंडल, पृष्ठ : 180, मूल्य : उपलब्ध नहीं, ई मेल : , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. , सम्पर्क : म.भा. हिंदी साहित्य सभा ग्वालियर म.प्र.
इस पत्रिका में बाल साहित्य पर विशेष सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अंक में वर्तमान में लिखे जा रहे बाल साहित्य को लेकर गंभीर विमर्श है। कुछ लेखों में प्राचीन भारतीय बाल साहित्य पर उत्कृष्ट सामग्री है। विश्लेषण व वर्णन युक्त इन लेखों में बाल साहित्य की गुणवत्ता, नवीनता तथा स्तरीय ता पर भी विचार किया गया है। श्रीधर पराड़कर, दयाशंकर विजयवर्गीय, जगदीश तोमर, बद्री प्रसाद पंचौली, ओमप्रकाश सारस्वत, मिथिला प्रसाद त्रिपाठी, कन्हैया सिंह, देवेन्द्र दीपक, कृष्ण मुरारी शर्मा के लेखों में बाल साहित्य व इसकी विरासत पर विचार किया गया है। परशुराम विरही, कृष्ण चंद्र गोस्वामी, शिवकुमार पाण्डेय, गार्गीशंकर मिश्र मराल, मीनाक्षी गोस्वामी, रीता सिंह, जूही समर्पिता, प्रमिला मजेजी, महाश्वेता देवी, विजय कुमार महांति, दिवाकर शर्मा, लखनलाल खरे तथा कामिनी ने बाल साहित्य की दशा व दिशा तथा उसके पे्ररक तत्व , भविष्य निर्माण जैसे विषयों को उठाया है। मुरारीलाल गुप्त, पद्मा शर्मा, अवधेश चंसोलिया, अन्नपूर्णा भदोरिया, उर्मिला सिंह तोमर, राजरानी शर्मा, उर्मि कृष्ण, किशोर काबरा, शीला डोगरे, नागेश पाण्डेय, ऊषा यादव, राजकिशोर सिंह, विवेक गोविंद सुरंगे ने बाल कविताओं, नाटक, कला, मूल्य बोध तथा बालमन जैसे विषयों का विश्लेषण किया है। शरद नारायण खरे, नीलम खरे, मंजरी गोस्वामी, विकास दवे, अखिलेश शुक्ल, कुलभूषण लाल माखिजा, राजकिशोर वाजपेयी, एवं वंदना कुशवाहा के लेखों में बाल साहित्य की इंटरनेट पर सुलभता, क्षेत्रीय व स्थानीय भाषाओं में बाल साहित्य एवं बाल गीतों पर उच्च कोटि का लेखन किया गया है। मीना श्रीवास्तव, मंजुलता आर्य, जगदीा गुप्त, विष्णु कुमार अग्रवाल, कैलाश प्रसाद प्रजापति, नमिता त्रिपाठी, दिलीप मिश्रा, अमिता सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह चौहान, कुसुम भदौरिया, अलका मौर्य, कल्पना शर्मा तथा मंदाकिनी शर्मा के लेखों में बाल मन की कहानियों, साहित्य का बाल व्यक्तिव विकास में योगदान, चरित्र निर्माण में बाल साहित्य की उपयोगिता तथा बाल मनोविज्ञान जैसे विषयों पर विचार किया गया है। पत्रिका की सभी रचनाएं बाल साहित्य व बालमन से जुड़ी बातों को विस्तृत रूप से सामने लाने में सफल रही है। विद्वान लेखकों ने बाल साहित्य व उसके स्वरूप को लेकर भी काफी कुछ लिखा है। वर्तमान में बाल साहित्य की दशा व दिशा का प्रतिनिधत्व पत्रिका इंगित बहुत अच्छे ढंग से कर सकी है। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जनसंदेश में प्रकाशित हो चुकी है।)

Sunday, April 10, 2011

समाज और सोच का ‘पाठ’

पत्रिका: पाठ, अंक: जनवरी-मार्च 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: देवांशु पाल, पृष्ठ: 36, मूल्य: 20रू(वार्षिक 80रू.), ई मेल: उपलब्ध नहीं , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 07752.226086, सम्पर्क: गायत्री विहार, विनोबा नगर, बिलासपुर छ.ग.
हिंदी साहित्य में लघु पत्रिकाओं का योगदान प्रशंसनीय रहा है। उसी क्रम में पाठ ने अपनी भूमिका कुशलतापूर्वक निभायी है। पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित लेखों में अपने जीवन के अंत समय तक(प्रभा दीक्षित) तथा समकालीन काव्य दायित्व का विमर्श(कमलकिशोर श्रमिक) भले ही नामी गिरामी लेखकों द्वारा न लिखे गए हों पर उनमें निहित विषय की निष्पक्षता प्रभावित करती है। साहित्य की दिशा के सवाल पर ख्याल साहित्यकार शंभु बादल से राजेन्द्र परदेसी की बातचीत में विषय पर वर्तमान संदर्भो में विचार किया गया है। गोविंद प्रसाद उपाध्याय की कहानी अंधेरे की परछाई मनुष्य के आम जीवन मंे आ रहे उतार चढ़ाव को अच्छे ढंग से विश्लेषित करती है। सुभाष रस्तोगी, संजीव कुमार, विज्ञान व्रत, विनय मिश्र तथा पंकज परिमल की कविताएं वर्तमान विकास को रोजी रोटी से जोड़ती है। पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित ख्यात कवयित्री सुजाता शिवेन की ओडिया कविता ‘कहां है?’ अंक की विशिष्ट रचना है। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जनसंदेश कानपुर में प्रकाशित है।)

Thursday, April 7, 2011

साहित्य का "मानसरोवर"

पत्रिका: मानसरोवर, अंक: वसंत वर्ष2011, स्वरूप: अनियतकालीन, संपादक: देवेन्द्र सोनी, विनोद कुशवाहा, पृष्ठ: 58, मूल्य: 50रू(वार्षिक 200रू.), ई मेल: youvapravartak@gmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 9425043026, 9827624219, सम्पर्क: पर्व, एल.आई.जी. 85, न्यास कालोनी, इटारसी म.प्र.
साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर का समीक्षित अंक ख्यात पत्रकार व साहित्यकार स्व. श्री प्रेमशंकर दुबे जी पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व पर सार्थक व सारगर्भित जानकारी का प्रकाशन किया गया है। अंक में प्रकाशित रचनाओं में पत्रकारिता के पुरोधा प्रेमशंकर दुबे(मनोहर पटेरिया मधुर), एक अविस्मरणीय पत्रकार प्रेमशंकर दुबे(कमल दीक्षित), पत्रकारिता के प्रकाश स्तंभ श्री प्रेमशंकर दुबे(प्रमोद पगारे), दादा मेरे अवचेतन में आज भी हैं(दिनेश द्विवेदी), पत्रकारिता के पितामाह(चतुभुर्ज काब्जा), दादा गांधीवादी थे(सुरेश जोशी), वे मेरे बड़े भाई नहीं पिता थे(रमेश दुबे), प्रेमशंकर दुबे की सोच सकारात्मक थी(शिव चैबे), दादा शहर के लिए प्रतिबद्ध थे(सुरेश दुबे), दद्दा यानि पत्रकारिता के कबीर(पंकज पटेरिया), प्रेमशंकर दुबे खरे भी थे हरे भी थे(ब्रजकिशारे पटेल), उनसे मिला अपनापन(अखिलेश शुक्ल) एवं स्कूल आफ जर्नलिज्म यानि दादा प्रेमशंकर दुबे(विपिन पवार) में साहित्य, समाज व पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखाई देती है। अंक में बहुत ही अच्छे ढंग से रचनाओं को स्थान दिया गया है। पत्रिका का संपादकीय प्रभावित करता है।

Tuesday, April 5, 2011

पत्रिका "इप्टा वार्ता" का नया अंक

पत्रिका : इप्टा वार्ता, अंक : अक्टूबर10(मार्च 2011 में प्रकाशित), स्वरूप : मासिक, संपादक : हिमांशु राय, पृष्ठ : 10, मूल्य : 5रू(वार्षिक 60रू.), ई मेल : , वेबसाईट : , फोन/मो. 0761.2417711, सम्पर्क : पी.डी. 4, परफेक्ट एन्क्लेव, स्नेह नगर, जबलपुर 02, मध्यप्रदेश
इप्टा वार्ता नाट्य एवं कला जगत की गतिविधियों का प्रमुख मुखपत्र है। इस अंक में सत्रहवें राष्ट्रीय नाट्य समारोह की प्रस्तुति "बोलियों के रंगमंच" का बोलबाला’ संग्रह योग्य आलेख है। इसे आयोजन के रंगीन चित्रों के साथ प्रकाशित किया गया है। पत्रिका में प्रकाशित रमेश राजहंस द्वारा लिखा गया रंगालेख "हावभाव एवं भंगिमाएं" संप्रेषण के इस प्राचीन माध्यम की अदभुत प्रस्तुति है। भारत में हिंदी में प्रकाशित नाट्य पत्रिकाओं व समाचार पत्र की कमी को इस पत्रिका ने काफी हद तक पूरा किया है। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जन संदेश कानपुर में प्रकाशित हो चुकी है।)

Monday, April 4, 2011

साहित्य का "पुष्पक"

पत्रिका : पुष्पक, अंक : जनवरीमार्च 2011, स्वरूप : त्रैमासिक, संपादक : डॉ. अहिल्या मिश्र, पृष्ठ : 116, मूल्य : 75रू(वार्षिक 300रू.), ई मेल : mishraahilya@yahoo.in , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 040.23713249, सम्पर्क : 93/सी, राजसदन, वेंगलराव नगर, हैदराबाद आंध्र प्रदेश
कादम्बिनी क्लब हैदराबाद की 14 वर्ष पुरानी इस पत्रिका में कुछ अच्छी व पठनीय रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में प्रकाशित कहानियों में छल(पवित्रा अग्रवाल), प्लीज मम्मी...अब और नहीं(नरेश शर्मा), कुरू कुरू स्वाहा(शांति अग्रवाल) में वर्तमान समाज के यथार्थवादी दृष्टिकोण का चित्रण किया गया है। इसी विचार को सरिता सुराणा, आकांक्षा यादव, एवं मीनाक्षी की लघुकथाओं में व्यक्त किया गया है। डॉ. अहिल्या मिश्र, जया उपाध्याय, विनीता शर्मा तथा ज्योति नारायण की कविताएं समाज की विसंगतियों पर प्रहार करती है। अंक में प्रकाशित लेखों में कबीर की याद दिलाते हैं बाबा नागार्जुन’(मनोहर लाल गोयल), अंडमान निकोबार में समृद्ध होती हिंदी’(कृष्ण कुमार यादव) में प्रस्तुत विवेचन विचार एवं राष्ट्रीयता के मध्य सेतु का कार्य करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी प्रभावी हैं। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जन संदेश कानपुर में प्रकाशित हो चुकी है।)

Sunday, April 3, 2011

साहित्य की भाषा का स्पंदन "भाषा स्पंदन"

पत्रिका : भाषा स्पंदन, अंक : 2223 संयुक्तांक, स्वरूप : त्रैमासिक, संपादक : डॉ मंगल प्रसाद, पृष्ठ : 52, मूल्य : 25रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल : karnatakahindiacademy@yahoo.com , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 9886241853, सम्पर्क : कर्नाटक हिंदी अकादमी, 853, 8वां ब्लाक, कोरमंगला, बेंगलूर कर्नाटक
कर्नाटक हिंदी अकादमी, बेंगलूर द्वारा प्रकाशित यह पत्रिका रचनात्मकता में उत्तर भारत से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिकाओं में से कमतर नहीं है। अंक में प्रकाशित प्रमुख लेखों में वैश्वीकरण, मीडिया और हिंदी(पं. अच्युतानंद मिश्र), लोकतंत्र में प्रेस की भूमिका(गोपाल प्रसाद मिश्र), हिंदी को समाप्त करने का षडयंत्र(प्रभु जोशी), हिंदी पत्रकारिता :नई चुनौतियां एवं जन अपेक्षाएं(सुरेश उजाला) एवं समकालीन हिंदी कविता और उसके खतरे(ओम कुमारी) में अच्छा विश्लेषण है। डॉ. खुर्शीद आलम की कहानी दस्तक अपना प्रभाव छोड़ने में नाकामयाब रही है। ओम रायजादा, लीला मोदी, राम निवास मानव तथा अखिलेश अंजुम की कविताएं सराहनीय हैं। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जन संदेश कानपुर में प्रकाशित हो चुकी है।)