Thursday, March 31, 2011

बच्चों के लिए ‘अभिनव बालमन’

पत्रिका: अभिनव बालमन, अंक: जनवरी-मार्च 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: निश्चल, पृष्ठ: 96, मूल्य: 15रू(वार्षिक 60रू.), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09719007153, सम्पर्क: शारदायतन, 17/238, जेड 13/59, पंचनगरी, सासानीगेट अलीगढ़ उ.प्र.
बच्चों के लिए समर्पित इस पत्रिका में रामगोपाल राही, राजपाल गुलिया, कुलभूषण लाला माखीजा, गार्गीशंकर मिश्र मराल, अशोक अंजुम, कविता जैन, ज्ञानेन्द्र साज एवं लखन कुमार की अच्छी कविताओं का प्रकाशन किया गया है। कलेण्डर की कहानी, नए साल की दावत, जीना सिखा रही है शेखा की झील बच्चों के मन को छू लेने वाले लेख हैं। शिवचरण चैहान, कालीचरण पे्रमी, दामिनी तोमर की कहानियां प्रभावित करती है। पत्रिका में अनावश्यक रूप से कैसे पाएं परीक्षा में बेहतर अंक देकर पृष्ठ भरने का प्रयास किया गया है।

Wednesday, March 30, 2011

साहित्य से पाठकों का साक्षात्कार

पत्रिका : साक्षात्कार, अंक : फरवरी 2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : त्रिभुवन नाथ शुक्ल, पृष्ठ : 120, मूल्य : 25रू(वार्षिक 250रू.), ई मेल : sahityaacademy.bhopal@gmail.com , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.2554782, सम्पर्क : साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन, वाणगंगा भोपाल 03,
साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा प्रकाशित यह पत्रिका साहित्य जगत की एक प्रतिष्ठित पत्रिका है। इस अंक में तेलुगु के ख्यात लेखक बालशौरि रेड्डी से सुनील जोशी की बातचीत पत्रिका की उपलब्धि कही जा सकती है। ओम भारती एंव प्रेमशंकर शुक्ल की कविताएं ग्राम्य जीवन व उससे जुड़ी विषमताओं को सामने लाती है। राजेश झरपुरे, सुरेश कुमार वर्मा, चंद्रभान राही एवं कला जोशी की कहानियों में मानवीय मूल्यों को पुनस्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है। डॉ. दादूराम शर्मा, विवेकी राय एवं दिनेश प्रभात के लेख अपने विषयों के साथ न्याय करते हैं। पत्रिका की समीक्षाएं तथा अन्य रचनाएं भी प्रभावित करती है। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जन संदेश, कानपुर में प्रकाशित हो चुकी है।)

Tuesday, March 29, 2011

गणित के साथ साथ अब साहित्य में भी समावर्तन

पत्रिका : समावर्तन, अंक : मार्च 2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : रमेश दवे, पृष्ठ : 98, मूल्य : 25रू(वार्षिक 250रू.), ई मेल : samavartan@yahoo.com , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0734.2524457, सम्पर्क : माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन 456010 (म.प्र.)
साहित्यसंस्कृति पत्रिका समावर्तन का यह अंक आंशिक रूप से ख्यात कवि अज्ञेय जी पर एकाग्र है। संपादक रमेश दवे ने उन्हें शताब्दी का ॔शब्द पुरूष’ कहा है। यह अज्ञेय जी के संदर्भ में एक सटीक कथन हैं नंद दुलारे वाजपेयी, रीतारानी पालीवाल, विद्यानिवास मिश्र, नयना डेरीवाला, कृष्ण बिहारी मिश्र एवं कृष्ण दत्त पालीवाल के अज्ञेय जी के समग्र व्यक्तित्व पर लिखे गए आलेख प्रभावित करते हैं। पत्रिका ने रघुवीर सहाय द्वारा उनसे लिया गया साक्षात्कार साहित्य के नए पाठकों के लिए पुनप्रकाशित किया है। दिनकर कुमार, रमेश शर्मा एवं रवीन्द्र स्वप्निल प्रजापति की कविताएं जन सामान्य की काव्यात्मक अभि व्यक्ति कही जा सकती है। देवांशु पाल, संतोष सुपेकर की लघुकथाओं के साथ ही रंजना जायसवाल की कहानी आज के बदलते परिवेश को स्पष्ट करने में सफल रही है। पत्रिका का दूसरा खण्ड विश्वप्रसिद्ध चित्रकार वॉन गाग पर एकाग्र है। उनके भाई थियों को लिखे गए पत्र मार्मिक व प्रेरणास्पद हैं। पाश्चात्य कला समीक्षक एल्बेयर ऑरियर का लेख इस अंक की प्रमुख कला उपलब्धि कही जा सकती है। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जन संदेश, कानपुर में प्रकाशित हो चुकी है।)

Monday, March 28, 2011

साहित्य के लिए "पाखी"

पत्रिका : पाखी, अंक : मार्च 2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ : 96, मूल्य : 20रू(वार्षिक 240रू.), ई मेल : pakhi@pakhi.in , वेबसाईट : http://www.pakhi.in/ फोन/मो. 0120.4070300, सम्पर्क : इंडिपेडेंट मीडिया इनीशियेटिव सोसायटी, बी107, सेक्टर 63, नोएड़ा 201303 उ.प्र.
पाखी के मार्च अंक में विविधतापूर्ण रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में ख्यात फिल्मकार, लेखक व गीताकार गुलजार की कहानी हिल्सा, बहन जी चुप थी(संतोष सिंह धीर), उसका रोना(बद्री सिंह भाटिया), थिंक पाजिटिव(आद्या प्रसाद पाण्डे), लौट आइए चंदर भाई(राकेश दुबे) एवं एक ताजा खबर(स्वाति तिवारी) की कहानियां प्रकाशित की गई है। इन सभी कहानियों में समाज के मसले, लोकहित, दामपत्य जीवन एवं सूखती संवेदनाओं को प्रमुखता से उठाया गया है। सुशील सिद्घार्थ का उपन्यास अंश (मैं इनकार करता हूं) इसे पॄने के लिए प्रेरित करता हैं। ख्यात कवि लीलाधर मंडलोई, ओम प्रकाश वाल्मिकी, हरि मृदुल, मिथलेश राय एवं श्रद्घा की कविताएं वर्तमान सामाजिक स्वरूप की विद्रूपताओं को सामने लाती हैं। राजीव रंजन गिरि, विनोद अनुपम, एवं प्रतिभा कुशवाहा के स्तंभ की सामग्री में नवीनता है। पत्रिका पिछले कुछ समय से लगातार समसामयिक राजनीतिक मुद्दों को उठा रही है। इससे आम पाठक के लिए यह निर्णय करना कठिन हो जाता है कि पाखी साहित्यिक पत्रिका है अथवा सामाजिक विषयों की राजनीतिक विचारधारा युक्त पत्रिका? पत्रिका के एक पाठक (गौरीशंकर वैश्य, सीतापुर उ.प्र.) ने इसे हंस बनने की उतावली’ कहकर और भी स्पष्ट किया है। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जन संदेश, कानपुर में प्रकाशित हो चुकी है।)

Sunday, March 27, 2011

हिमाचल से ‘हिमप्रस्थ’

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: फरवरी 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 96, मूल्य: 5रू(वार्षिक 50रू.), ई मेल: himprasthahp@gmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. नहीं, सम्पर्क: हिमाचल प्रदेश पिं्रटिंग प्रेस परिसर, घोड़ा चैकी, शिमला 5 हिमाचल प्रदेश
पत्रिका के समीक्षित अंक में प्रमुखतः विविधतापूर्ण आलेखों का प्रकाशन किया जाता है। इस अंक में शमी शर्मा, दादू राम शर्मा, ललितमोहन शर्मा, अमिता पाण्डेय, सुनीता, गोपल जी गुप्त, कंचन कुमारी तथा सिम्मी सिंह के विविध विषयों पर लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया गया है। सुरेन्द्र चंचल, मनोज श्रीवास्तव तथा पीयूष गुलेरी की कहानियां अच्छी व पढ़ने योग्य हैं। नरेन्द्र भारती, देशराज पुष्प तथा अखिलेश शुक्ल की लघुकथाएं समसामयिक विषयों पर संक्षिप्त किंतु सार्थक चिंतन है। स्नेहलता, नंदिता बाली, उदय ठाकुर एवं रमेश कुमार सोनी की कविताएं भी स्तरीय हैं। अशोक गौतम का व्यंग्य तथा दायकराम ठाकुर का यात्रा विवरण ठीक ठाक है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी रूचिपूर्ण कही जा सकती है।

Tuesday, March 22, 2011

वर्तमान ‘समय के साखी’

पत्रिका: समय के साखी, अंक: जनवरी 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. आरती, पृष्ठ: 119, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 20रू(वार्षिक 240रू.), ई मेल: samaysakhi@gmail.com , वेबसाईट: http://www.samaykesakhi.in/ , फोन/मो. 09713035330, सम्पर्क: बी-308, सोनिया गांधी काॅम्पलेक्स, हजेला हाॅस्पिटल के पास, भोपाल 462003 म.प्र.
समय के साखी का यह अंक ख्यात वरिष्ठ कवि केदारनाथ अग्रवाल के व्यक्तित्व पर एकाग्र है। अंक में उनके कृतित्व पर विश्लेषणात्मक ढंग से विचार किया गया है। केदारनाथ जी की कविताएं, आलेख, अनुवाद तथा अपने समकालीन रचनाकारों को लिखे गए पत्र सहेजकर रखने योग्य हैं। शमशेर बहादुर सिंह, प्रभाकर माचवे तथा त्रिलोचन ने उनके सृजन व रचना प्रक्रिया पर जो कुछ कहा है उसे पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। वर्तमान कवियों नचिकेता, राजेश जोशी तथा केशव तिवारी द्वारा केदारनाथ जी पर व्यक्त किए गए विचारों में नयापन है। वर्तमान आलोचक केदारनाथ जी को प्रगतिशीलता के साथ साथ श्रमिकों के लिए जूझता कवि मानते हैं। आलोचक शिवकुमार मिश्र, जीवन सिंह, डाॅ. सेवाराम त्रिपाठी तथा अवधेश नारायण मिश्र ने कविताओं के विश्लेषण के आधार पर उनकी विचारधारा स्पष्ट की है। डाॅ. पदमा शर्मा, ज्योति किरण तथा नरेन्द्र पुण्डरीक उन्हें लोक संवेदना तथा जीवन बोध का कवि मानते हैं। पत्रिका की रचनाएं स्तरीय है व पाठक को बांधे रखने में सफल रही हैं।

Sunday, March 20, 2011

शब्दशिल्पियों के आसपास का नया अंक

पत्रिका : आसपास, अंक : मार्च2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : राजुरकर राज, पृष्ठ : 38, रेखा चित्र/छायांकन : जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य : 5रू(वार्षिक 50रू.), ई मेल shabdashilpi@yahoo.com , वेबसाईट : http://www.dharohar.com/ , फोन/मो. 9425007710, सम्पर्क : एच 3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर भोपाल म.प्र.
संवाद पत्रिका के इस अंक में उपयोगी व संदर्भ परक जानकारी का प्रकाशन किया गया है। अंक में वरिष्ठ गीताकार विनोद तिवारी पर पत्रिका के संपादक राजुरकर राज ने अच्छा जानकारीपरक आलेख लिखा है। रवीन्द्र भारती का संस्मरण बड़ी रिजनहार थीं मोकी रानी प्रभावित करता है। डॉ. पे्रमजनमेजय का आलेख कितने विज्ञापन दिलवाएंगे आप? विचारयोग्य रचना है। शाहरोज आफरीदी का आलेख ॔भारत भवन को चाहिए डायनामिक सीईओ’ भारत भवन के स्वर्णिम दिनों को लौटाने की वकालत करता है। आलोक आनंद का लेख ॔सांसदों के माड़साहब’ प्रो. विश्वनाथ मिश्रा के योगदान पर विचार करता है। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी व ख्यात साहित्यकार पंकज राग की भोपाल वापसी, सिनेमा में काशी का अस्सी(सुनील मिश्र) एवं स्क्रीन पर दिखेगी दादा की पत्रकारिता(सर्जना चतुर्वेदी) उल्लेखनीय हैं। पत्रिका की अन्य जानकारियां, समाचार तथा पत्र, सूचना आदि भी रचनाकर्मियों के लिए उपयोगी हैं।

Saturday, March 19, 2011

"शुभ तारिका" पत्रिका का नया अंक

पत्रिका : शुभ तारिका, अंक : फरवरी2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : उर्मि कृष्ण, पृष्ठ : 38, रेखा चित्र/छायांकन : जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य : 12रू(वार्षिक 120रू.), ई मेल urmi.klm@gmail.com , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0171.2610483, सम्पर्क : कृष्णदीप, ए47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी, हरियाणा
शुभ तारिका का समीक्षित अंक अच्छी लघुकथाओं व कविताओं से युक्त है। अंक में डॉ. मलिक, अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, श्याम नारायण, देशपाल सिंह, जगवीर वर्मा, आनंद दीवान, सनत जैन, अलका मित्तल, मुकुन्द लाल एवं अनिल सुदर्शन गौड़ की लघुकथाएं प्रभावित करती हैं। प्रेमचंद्र श्रीवास्तव, महेन्द्र मेहतो, सूरज तिवारी, रमेश ा प्रसून, श्याम विद्यार्थी तथा कृष्णकुमार सिंह की कविताएं उल्लेखनीय हैं। अनूप घई तथा पवित्रा अग्रवाल की रचनाएं भी पत्रिका के स्तर के अनुरूप है। अन्य स्थायी स्तंभ, समीक्षाएं, समाचार पत्र आदि प्रभावित करते हैं। का : शुभ तारिका, अंक : फरवरी2011, स्वरूप : मासिक, संपादक : उर्मि कृष्ण, पृष्ठ : 38, रेखा चित्र/छायांकन : जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य : 12रू(वार्षिक 120रू.), ई मेल, वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0171.2610483, सम्पर्क : कृष्णदीप, ए47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी, हरियाणा शुभ तारिका का समीक्षित अंक अच्छी लघुकथाओं व कविताओं से युक्त है। अंक में डॉ. मलिक, अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, श्याम नारायण, देशपाल सिंह, जगवीर वर्मा, आनंद दीवान, सनत जैन, अलका मित्तल, मुकुन्द लाल एवं अनिल सुदर्शन गौड़ की लघुकथाएं प्रभावित करती हैं। प्रेमचंद्र श्रीवास्तव, महेन्द्र मेहतो, सूरज तिवारी, रमेश ा प्रसून, श्याम विद्यार्थी तथा कृष्णकुमार सिंह की कविताएं उल्लेखनीय हैं। अनूप घई तथा पवित्रा अग्रवाल की रचनाएं भी पत्रिका के स्तर के अनुरूप है। अन्य स्थायी स्तंभ, समीक्षाएं, समाचार पत्र आदि प्रभावित करते हैं।

Thursday, March 17, 2011

साहित्यिक पत्रिका ‘कथाबिंब’ का एक सामान्य अंक

पत्रिका: कथाबिंब, अंक: 112 वर्ष2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: मंजुश्री, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, आवरण चित्र: नमिता सक्सेना, मूल्य: 15रू(वार्षिक 60रू.), ई मेल, वेबसाईट: , फोन/मो. 09819162648, सम्पर्क: ए-14, बसेरा आफ दिन क्वारी रोड़, देवनार मुम्बई 400088
कथाप्रधान साहित्यिक पत्रिका कथाबिंब के समीक्षित अंक में सामाजिक सरोकारों से युक्त कहानियों का प्रकाशन किया गया है। प्रकाशित प्रमुख कहानियों में नील पाखी(अनुज प्रभात), एक परिचय अंतहीन(सतीश दुबे), कर्जा-वसूली(रमेश यादव), जन्म दिन मुबारक(इला प्रसाद) एवं पांचवीं कक्षा(निरूपमा राय) प्रमुख हैं। लघुकथाओं में पूरन सिंह, मंगला रामचंद्रन, ज्ञानदेव मुकेश तथा किशनलाल शर्मा की लघुकथाएं प्रभावित करती है। गोपालदास नीरज के सिवाय अन्य कवियों की कविताएं स्तरहीन व अप्रभावी हैं। इस तरह की कविताओं के प्रकाशन का कोई औचित्य नहीं है। पत्रिका के सतंभ की सामग्री भी सामान्य ही है। कंल मिलाकर कथाबिंब का यह अंक एक साधारण अंक है जो अपनी कोई छाप नहीं छोड़ सका है।

Tuesday, March 15, 2011

नारी चेतना की प्रगतिशील पत्रिका-‘नारी अस्मिता’

पत्रिका: नारी अस्मिता, अंक: जनवरी 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रचना निगम, पृष्ठ: 48, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 12रू(वार्षिक 100रू.), ई मेल: nari_asmita1994@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0266.6545817, सम्पर्क: 15, गोयागेट सोसायटी, शक्ति अपार्टमेंट, बी-ब्लाक, द्वितीय तल, एस/3, प्रतापनगर बडोदरा 390004, गुजरात
स्त्री विषयक पत्रिका इस पत्रिका में प्रायः सभी वर्ग के पाठकों के लिए अच्छी सामग्री का प्रकाशन किया जाता है। अंक में कुछ अच्छे आलेख प्रकाशित किए गए हैं। उनमें प्रमुख हैं- बेटियों के अधिकार का यथार्थ(प्रभा दीक्षित), कितना अर्थ छिपा है सात फेरों में(राजशेखर व्यास), शक्ति का योगदान एक विहंगम दृष्टि(रचना निगम) एवं महिला होने पर गर्व करें(आकांक्षा यादव)। ख्यात साहित्यकार व लेखिका डाॅ. सुधा अरोड़ा से बातचीत प्रभावित करती है। कहानियों में सुबह को भूला(गीतांजली चटर्जी), मंथन जारी है(ज्योति जैन) तथा मेरा कसूर क्या है?(स्नेह लता) अच्छी व पढ़ने योग्य हैं। शुक्ला चैधरी, शैल चन्द्रा तथा विनोदिनी गोयनका की लघुकथाएं पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं। गीत/ग़ज़लों में सुरेखा शर्मा, उषा यादव, सुरेश आनंद तथा उमा श्री प्रभावित करते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी स्तरीय हैं व साहित्य को उपलब्ध कराने के साथ साथ समाज को दिशा देने में सक्षम हैं। पत्रिका का संपादकीय पाठकों को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करता है।

Monday, March 14, 2011

पत्रिका साहित्य सागर का नया अंक

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: मार्च 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 20रू(वार्षिक 250रू.), ई मेल: kksaxenasahityasagar@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.4260116, सम्पर्क: 161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र. साहित्य जगत की शीर्ष पत्रिका साहित्य सागर का समीक्षित अंक ख्यात साहित्यकार लेखक डाॅ. रामवल्लभ आचार्य पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र सृजन पर अनेक विद्वान लेखकों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। नवल जायसवाल, सुरेश तांतेड़ ने आचार्य जी के कृतित्व का सार्थक विश्लेषण किया है। पत्रिका में रमेश चंद्र खरे, सतीश चतुर्वेदी, राजेन्द्र मिलन, रमेश चंद्र पण्डित तथा सनातन कुमार वाजपेयी की रचनाएं भी विविधता लिए हुए है। पत्रिका की अन्य रचनाएं बहुत अधिक प्रभावित नहीं कर सकी हैं।

Sunday, March 13, 2011

साहित्य की प्रगति के लिए ‘संबोधन’

पत्रिका: संबोधन, अंक: जनवरी-मार्च 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ: 96, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, आवरण चित्र : स्वाति तिवारी, मूल्य: 20रू(वार्षिक 80रू.), ई मेल: not avilable , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09829161342, सम्पर्क: पोस्ट कांकरोली, जिला राजसमंद 313324 राजस्थान
विगत 45 वर्ष से राजस्थान के एक छोटे से कसबे से निरंतर प्रकाशित हो रही इस पत्रिका का प्रत्येक अंक संग्रह योग्य होता है। समीक्षित अंक में भी विविधतापूर्ण रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अभिनेत्री मधुबाला के प्रशंसक व समर्थक मध्यप्रदेश के कवि नरेन्द्र गौड़ की उन्नीस कविताएं प्रकाशित की गई हैं। श्रीनिवास शर्मा का आलेख हिंद स्वराज और विकास का पश्चिमी माडल देश की अर्थव्यवस्था को वर्तमान सदंर्भ में परखता है। ख्यात कवि संजीव बख़्शी से साक्षात्कार में कविताओं के विषय, संगीत तथा प्रेमानुभूति पर विचार किया गया है। कहानी सड़क शर्मसार(रूपलाल बेदिया), डायरी सैन डियेगो(दामोदर दत्त दीक्षित) एवं संस्मरण सनोवर(कृष्ण कुमार भगत) विषय से बांधे रखने में सफल रही है। नित्यानंद तुषार, अरूण कुमार शर्मा तथा एस.एन. सक्सेना की ग़ज़लों में ताजगी है। गोविंद माथुर की कविताएं तथा त्रिलोक सिंह ठकुरेला की लघुकथा प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी उपयोगी व जानकारीपरक हैं।

Saturday, March 12, 2011

एक और ‘जनपथ’

पत्रिका: जनपथ, अंक: 02 वर्ष 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: अनंत कुमार सिंह, पृष्ठ: 142, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 50रू(वार्षिक 200रू.), ई मेल: janpathpatrika@gmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 09431847568, सम्पर्क: सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक, मंगल पाण्डेय पथ, भोजपुर आरा, 802301 बिहार
साहित्य जगत की प्रमुख पत्रिका जनपथ का समीक्षित अंक बिहार की रचनाशीलता पर एकाग्र है। अंक में बिहार के साहित्यकारों लेखकों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। प्रकाशित प्रमुख रचनाओं में विरासत के अंतर्गत जवाहर पाण्डेय, मृत्यंुजय सिंह, राम आह्लाद चैधरी, ब्रजभूषण तिवारी तथा रणविजय कुमार के आलेख आकर्षक हैं। अनिश अंकुर का संस्मरण तथा मधुकर सिंह की समकालीन रचना प्रभावित करती है। दृष्टि स्तंभ के अंतर्गत प्रकाशित रचनाओं में रीता सिन्हा एवं गुलरेज सहजाद के लेख उपयोगी हैं। हषीकेश सुलभ तथा राकेश कुमार सिंह के कथालेख पत्रिका का नया प्रयोग है। विजयकांत, जाबिर हुसैन, शीन हयात, पंखुरी सिन्हा, प्रेम भारद्वाज एवं सुभाष शर्मा की कहानियां तत्कालीन समाज के उन बिन्दुओं का स्पर्श करती है जिनपर अब तक विचार नहीं किया गया है। ख्यात समीक्षक डाॅ. गोपाल राय से पूनम सिन्हा की बातचीत साहित्य जगत की वर्तमान स्थिति पर वैचारिक वार्तालाप है। विनय कुमार, कुमार नयन, गायत्री सहाय, अनिरूद्ध कुमार सिन्हा, जितेन्द्र कुमार, अरूाा सीतेश, श्रीकांत प्रसून, राजेन्द्र परदेसी, बालभद्र, जनार्दन मिश्र, सुधीर सुमन, राजककिशोर राजन, राजेश राजमणि तथा अर्चना श्रीवास्तव की कविताएं नयापन लिए हुए हैं। इसके अतिरिक्त पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं पाठक को नयी जानकारियों से अवगत कराती है।

Friday, March 11, 2011

सुमन सागर का आकर्षक अंक

पत्रिका: सुमन सागर, अंक: दिसम्बर 10, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: श्याम बिहारी आलोक, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 10रू(वार्षिक 80रू.), ई मेल: skalok_25dec@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09835053651, सम्पर्क: विनीता भवन, सवेरा सिनेमा चैक, कालीचक्र बाढ़, 803213 बिहार
बच्चों के विकास के लिए प्रकशित पत्रिका सुमन सागर का समीक्षित अंक अच्छा व संग्रह योग्य है। अंक में राकेश कुमार सिन्हा, पुष्पेश कुमार पुष्प, उमेश कुमार साहू, स्वरूप सिंह की रचनाएं अच्छी व आकर्षक हैं। रामजी मिश्र, नयन कुमार राठी, उषा किरण त्रिपाठी, चेतन आर्य, अनुराग, जे.एस. राज, कुमार शर्मा, जयकृष्ण भारती प्रभावित करते हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ तथा रचनाएं भी अच्छी व ज्ञानवर्धक हैं।

Thursday, March 10, 2011

साहित्य समाज का दर्पण नहीं.....‘साक्षात्कार’

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: अक्टूबर-नवम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल, पृष्ठ: 120, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 50रू(वार्षिक 250रू.), ई मेल: sahityaacademy.bhopal@gmail.com , वेबसाईट: नहीं , फोन/मो. 0755.2554782, सम्पर्क: साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन, वाण गंगा, म.प्र. भोपाल-03
मध्यप्रदेश से प्रकाशित यह पत्रिका साहित्य जगत की प्राचीन प्रतिष्ठित पत्रिका है। समीक्षित अंक में ख्यात साहित्यकार देवेन्द्र दीपक से जया केतकी की बातचीत साहित्य के साथ साथ उसके निरंतर बदलते परिवेश पर एक सार्थक पहल है। उनकी कविताओं में अद्यतन भारत के दर्शन होते हैं। प्रमुख रूप से थ्रू प्रापर चेनल, अंतर, हमें कुछ कहना है तथा क़लम उल्लेखनीय कविताएं है। दया प्रकाश सिन्हा, डाॅ. शिवकांत त्रिपाठी तथा डाॅ. प्रमोद वर्मा के लेख हमारी विरासत व संस्कृति तथा कला को नए संदर्भो में विश्लेषित करते हैं। प्रकाशित कहानियों में मुंडेर की धूप(मनोहर काजल), सड़क की कराह(मीनाक्षी स्वामी) में वर्तमान समय की निस्सारता को ध्यान में रखते हुए बहुत कुछ कहने का प्रयास किया गया है। शरद नारायण खरे, हरपाल सिंह अरूष, के.जी. बालकृष्ण पिल्लै तथा सुरेश सेन निशांत की कविताएं बदलते विषयों की धंुधली होती तस्वीरों को साफ करने का एक अच्छा प्रयास है। इंदुप्रकाश कानूनगो द्वारा किए गए अनुवाद में वही कमियां हैं जो प्रायः अनुदित रचनाओं में मिलती हैं। डाॅ. एन. संुदरम ने ख्यात कवि डाॅ. हरिवंश राय बच्चन को बहुत अच्छे ढंग से याद किया है। संगम पाण्डेय ने लगता है तोलस्तोय की जीवनियां तथा साहित्य बहुत गंभीरता से पढ़ा नहीं है लेकिन फिर भी उनका आलेख प्रभावित करता है। वर्तमान में गीत व ग़ज़लों में कुछ कहने करने के लिए शेष बचा नहीं है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा पत्र आदि उपयोगी हैं। संपादकीय में साहित्य को समाज का अर्पण कहा गया है। संपादकीय पढ़कर उसमें दिए गए सुझावों पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाना चाहिए।

Sunday, March 6, 2011

हिंदी के लिए एक और ‘साहित्य अभियान’

पत्रिका: साहित्य अभियान, अंक: 01 वर्ष 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: सनत, पृष्ठ: 24, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 10 रू(वार्षिक 100 रू.), ई मेल: उपलब्ध नहीं, वेबसाईट: नहीं , फोन/मो. 09301492734, सम्पर्क: साहित्य निकेतन, जूटमिल थाना के पीछे, हनुमान मंदिर के पास, रायगढ़ (छतीसगढ़)
नवोदित पत्रिका साहित्य अभियान को अभी लम्बी यात्रा पूरी करना है। अंक की रचनाएं स्वयं अपनी उपयोगिता सिद्ध करती हैं। डाॅ. गार्गीशंकर मिश्र, डाॅ. प्रणव पण्डया, सुजीत कर, अबरार रहमानी, विश्वरंजन तथा नरेन्द्र नाथ लाहा के अच्छे विचारयोग्य आलेखों का प्रकाशन किया गया है। गीता नायक, बलदेव अशोक, आनंद बिल्थरे, विजय लक्ष्मी सिंह, नारायण बोरकर, श्याम नारायण श्रीवास्तव एवं रमेश चंद्र शर्मा की कविताएं प्रभावित करती हैं। सनत कुमार नायक, आकांक्षा यादव तथा प्रो. शामलाल कौशल की लघुकथाएं भी अच्छी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं अपेक्षित प्रभाव छोड़ने में नाकामयाब रही है।

Saturday, March 5, 2011

परसाई स्वतंत्र भारत का असली चेहरा(ज्ञानरंजन)-‘इप्टा वार्ता’

पत्रिका: इप्टा वार्ता, अंक: 02 वर्ष 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: हिमांशु राय, पृष्ठ: 10, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: प्रकाशित नहीं, ई मेल: , वेबसाईट: , फोन/मो. 0751.2417711, सम्पर्क: पी.सी. 4 , परफेक्ट एनक्लेव, स्नेह नगर, जबलपुर 02, म.प्र.
समाचार पत्रिका का समीक्षित अंक नवीनतम नाट्य समाचारों से युक्त है। अंक में मुखपृष्ठ पर परसाई प्रसंग समाचार प्रकाशित किया गया है। ख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई जी का एक अनउपलब्ध लेख ‘दस फार एंड नो फर्दर’ पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा अशोकनगर द्वारा आयोजित बाल नाट्य कार्यशाला का समाचार अच्छी जानकारी उपलब्ध कराता है। अन्य समाचारों में रायगढ़ इप्टा का ग्रीष्मकालीन नाट्य प्रशिक्षण शिविर, बाल रंग शिविर तथा जनकवि नारायण सुर्वे के निधन के समाचार प्रकाशित किए गए हैं। पत्रिका हिंदी साहित्य में विलोपित हो रही नाट्य विधा के पुर्नजागरण के लिए अथक प्रयास कर रही है तथा इस प्रयास में वह सफल भी हो रही है।

Friday, March 4, 2011

नारी अस्मिता पर पुनर्विचार-‘प्रेरणा’

पत्रिका: प्रेरणा, अंक: 02 वर्ष 2011, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: अरूण तिवारी, पृष्ठ: 204, रेखा चित्र/छायांकन: संदीप राशिनकर, नवल जायसवाल, राजेन्द्र परदेसी व अन्य, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 80), ई मेल: prarna_magazine@yahoo.com , वेबसाईट: http://www.prernamagazine.com/ , फोन/मो. 0755.2422109, सम्पर्क: ए-74, पैलेस आर्चड फेज 3, सर्वधर्म के पीछे, कोलार रोड़, भोपाल म.प्र.
ख्यात साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा का यह समीक्षित अंक नारी अस्मिता अंक के रूप में प्रकाशित किया गया है। इस विषय पर पूर्व में भी अन्य पत्रिकाओं के अंक सामने आ चुके हैं। लेेकिन नारी अस्मिता को लेकर पत्रिका में वर्तमान संदर्भो में विचार किया गया है। अंक में प्रकाशित रचनाओं में नारी की दयनीय दशा की अपेक्षा उसकी तत्कालिक जरूरतों पूर्ति हो। इसके साथ ही उसे समाज में प्रतिष्ठा मिले यह प्रकाशित आलेखों को मूल स्वर है। सूर्य कांत नागर, सुरेश पण्डित, भरत प्रसाद, रंजना जायसवाल, प्रभा दीक्षित, प्रमोद भार्गव, सुश्री शदर सिंह, विनीता रघुवंशी, किरण श्रीवास्तव, दीप्ति गुप्ता, कृष्ण शंकर सोनाने तथा दया दीक्षित के आलेख इस विषय को पुरजोर तरीके से उठाते दिखाई पड़ते हैं। डाॅ. निरूपमा राय, सतीश दुबे, जयश्रीराम एवं हुस्न तब्बस्सुम निहां की कहानियों में भी नारी के उत्थान के साथ साथ सम्मान दिलाने का आग्रह समाज से किया गया है। लता सुमंत, पूरन सिंह, सुरेन्द्र गुप्त एवं ज्ञानदेव मुकेश की लघुकथाएं भी प्रभावित करती हैं। प्रेमशंकर रघुवंशी, प्रकाश मिश्र, ऊषा यादव की कविताओं ने नवीनता व ताजगी महसूस की जा सकती है। दामोदर दत्त दीक्षित, नरेन्द्र गौड़ ने अपने आलेखों में पूरी संजीदगी के साथ विषय को उठाया है। पत्रिका की समीक्षाएं, अन्य रचनाएं व समाचार आदि भी उल्लेखनीय हैं। संपादकीय में संपादक अरूण तिवारी ने प्रारंभ में ही स्पष्ट कर दिया है कि ‘नारी अस्मिता विषय बहुत व्यापक है, अतः इसे संक्षेप में समेटना कठिन है।’ लेकिन फिर भी पत्रिका ने विषय को अच्छी तरह से समेटना का सफल प्रयास किया है।

Tuesday, March 1, 2011

पत्रिका "मोरंगे" के सृजनात्मकता से भरपूर दो अंक’

पत्रिका: मोरंगे, अंक: 15, 16, वर्ष 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रभात, पृष्ठ: 32,34, रेखा चित्र/छायांकन: बच्चों के द्वारा, मूल्य: ..रू.(वार्षिक ...), ई मेल: उपलब्ध नहीं , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. प्रकाशित नहीं है, सम्पर्क: ग्रामीण शिक्षा केन्द्र, 3/155, हाउसिंग बोर्ड सवाईमाधोपुर राजस्थान
यात्रा फाउंडेशन आस्टेªलिया के वित्तीय सहयोग से प्रकाशित पत्रिका के दोनों अंक में बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक रूचिपूर्ण सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अंक 15 में दीपक मीणा, ब्रजेश गुर्जर, अनीता परिहार, राजकिरंता, सुरेश राजपूत, आरती मीना, सेजल, रेनी की बालरूचिपूर्ण रचनाओं का आकर्षक प्रकाशन मन मोह लेता है। बाल नाटिका कुत्तें से बातचीत(कमलेश), कहानी क्यों?(नताशा) एवं बुलबुल पार्टी की चम्पा(कविता शर्मा) रोचक व अच्छी रचनाएं हैं। इसी तरह से अंक 16 में बच्चों की लिखी रचनाओं में हरिओम मीणा, बलबीर गुर्जर, भरतलाल गुर्जर, मोनिका मीणा, सुमेर, सारूक खान, विकास की रचनाएं प्रशंसनीय हैं। एक गधे से बातचीत(अशोक शर्मा), क्या मैं गोली मार दूं?(अनीता परिहार), मटरगस्ती बड़ी सस्ती एवं हमारे हाथ पैर सुन्न क्यों हो जाते हैं? प्रभावित करती है।