Thursday, July 21, 2011

साहित्य में समावर्तन

पत्रिका: समावर्तन, अंक: जुलाई2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, पृष्ठ: 96, मूल्य: 25रू (वार्षिक 250 रू.), ई मेल: samavartan@yahoo.com ,वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मोबाईल: 0734ण्2524457, सम्पर्क: 129, माधवी दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.

साहित्य जगत की अग्रणी पत्रिका समावर्तन के इस अंक में विविधतापूर्ण साहित्य का प्रकाशन प्रमुखता से किया जाता है। इस अंक को आंशिक रूप से ख्यात कथाकार साहित्यकार सूर्यकांत नागर तथा रंगकर्मी श्याम सुंदर निगम पर एकाग्र किया गया है। अंक में इसके अतिरिक्त अन्य रचनाओं का प्रकाशन भी किया गया है। नागर जी के व्यक्तित्व पर प्रभाकर श्रोत्रिय, रमेश दवे, चैतन्य त्रिवेदी एवं प्रमोद त्रिवेदी ने सार्थक व उपयोगी आलेख लिखे हैं। संपादक निरंजन श्रोत्रिय जी द्वारा चयनित प्राजंल धर की कविताएं विशेष रूप से प्रभावित करती है। अमर गोस्वामी की कहानी गठरी भी समसामयिक विषयों का निर्विवाद प्रस्तुतिकरण है। कहानी हरम का अनुवाद जे.एल. रेडडी ने सटीक किया है। सुनीता जैन, हीरालाल पारस, कुमार सुरेश तथा राघवेन्द्र तिवारी की कविताएं उल्लेखनीय है। निगम जी की रचनाओं के साथ साथ दुर्गाप्रसाद झाला का आलेख मोहन गुप्त के विचार तथा श्रीराम दवे से उनकी बातचीत समय के साथ साथ साहित्येत्तर विषयों पर भी विचार करती है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ रचनाएं तथा समीक्षाएं भी विशिष्ठ हैं। अंक में नवीनता के साथ साथ गति भी है जो स्वागत योग्य है।

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