Saturday, July 30, 2011

साहित्य के साथ ‘‘भाषा स्पंदन’’

पत्रिका: भाषा स्पंदन, अंक: 24, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डॉ. सरगुकृष्णमूर्ति, डॉ. मंगल प्रसाद, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी नहीं, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 100), ई मेल: karnatakahindiacademy@yahoo.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09886241853, सम्पर्क: कर्नाटक हिंदी अकादमी, 853 आठवां क्रास, 8वां ब्लाक, कोरमंगला, बेंगलूरू, कर्नाटक 560.095

हिंदी साहित्य के साथ साथ भाषा के विकास के लिए कर्नाटक से प्रकाशित यह पत्रिका निरंतर प्रयत्नशील है। पत्रिका के प्रत्येक अंक में नवीनतम जानकारी तथा सामग्री का प्रकाशन लगातार किया जा रहा है। इस अंक में प्रकाशित लेखों में मोहन भारतीय, रवि शर्मा, रामफेर त्रिपाठी, प्रो. आशा कपूर, राजेन्द्र परदेसी, नारायण सिंह, सुरेश उजाला, डॉ. आकांक्षा यादव एवं नितिन वाजपेयी के लेख प्रमुख हैं। मनीष कुमार सिंह की कहानी बड़ी कोठी के बाशिंदें नये परिवेश के अंतर्गत बुनी गई एक विस्तृत कथानक की कहानी है। अक्षत गोजा, महेन्द्र अग्रवाल, ओम नागर, रा.सा.ला. शर्मा, कृष्ण कुमार यादव, खुर्शीद नवाब, जयंत थोरात, जुबेदा अनवर, सुरेश उजाला एवं दिनेश त्रिपाठी की कविताएं उल्लेखनीय है। अखिलेश शुक्ल का व्यंग्य ‘‘हारे को हरिनाम है’’ वर्तमान संदर्भ मंे एक सटीक व्यंग्य है। पत्रिका में प्रकाशित प्रतिक्रियाएं, संपादकीय आदि भी अच्छे व जानकारीपरक हैं।

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