Monday, May 2, 2011

हिंदी साहित्य के लिए ‘हंस’

पत्रिका: हंस, अंक: April 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजेन्द्र यादव, पृष्ठ: 96, मूल्य: 30रू(वार्षिक 300रू.), ई मेल: editorhans@gmail.com ,वेबसाईट: http://www.hansmonthly.in/ , फोन/मोबाईल: 011.41050047, सम्पर्क: अक्षर प्रकाशन प्रा.लि. 2/36, अंसारी रोड़, दरियागंज, नई दिल्ली-2 भारत

वर्षो पूर्व ख्यात कथाकार उपन्यास सम्राट प्रेमचंद द्वारा स्थापित, संपादित इस पत्रिका के प्रत्येक अंक में प्रमुख रूप से कहानियों के साथ साथ समसामयिक विषयों पर लेख प्रकाशित किए जाते हैं। इस अंक मंे प्रकाशित कहानियों में इंटरनेट-पीढ़ी की अधूरी प्रेमकथा(हरजेन्द्र चैधरी), फुलवा में बास नहीं(कृष्ण बिहारी), जननी...स्वर्गादपि गरीयसि(कुसुम खेमानी), सलीब(प्रतिभा) तथा डर(सपना सिंह) प्रभावित करती है। अरूण यादव, अनुज तथा किरण अग्रवाल की कविताएं पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं। डाॅ. रणजीत, तेजेन्द्र शर्मा तथा चंद्रभान सिंह यादव के लेख साहित्येत्तर विषयों पर संक्षिप्त लेकिन उपयोगी विश्लेषण हैै। बात बोलेगी के अंतर्गत कथाकार संजीव का लेख नजरूल बनाम अज्ञेय तथा संपादकीय यमुना नगर में कुरूक्षेत्र: प्रवासी साहित्य पत्रिका के इस वर्ष प्रकाशित सर्वोत्तम संपादकीय लेख हैं। शीबा असलम फहमी, मुकेश कुमार तथा भारत भारद्वाज के स्तंभ पत्रिका के अन्य अंकों की तरह विचार योग्य सामग्री से युक्त हैं। (समीक्षा जनसंदेष टाइम्स में पूर्व में प्रकाषित हो चुकी है।)

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