Monday, April 4, 2011

साहित्य का "पुष्पक"

पत्रिका : पुष्पक, अंक : जनवरीमार्च 2011, स्वरूप : त्रैमासिक, संपादक : डॉ. अहिल्या मिश्र, पृष्ठ : 116, मूल्य : 75रू(वार्षिक 300रू.), ई मेल : mishraahilya@yahoo.in , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 040.23713249, सम्पर्क : 93/सी, राजसदन, वेंगलराव नगर, हैदराबाद आंध्र प्रदेश
कादम्बिनी क्लब हैदराबाद की 14 वर्ष पुरानी इस पत्रिका में कुछ अच्छी व पठनीय रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में प्रकाशित कहानियों में छल(पवित्रा अग्रवाल), प्लीज मम्मी...अब और नहीं(नरेश शर्मा), कुरू कुरू स्वाहा(शांति अग्रवाल) में वर्तमान समाज के यथार्थवादी दृष्टिकोण का चित्रण किया गया है। इसी विचार को सरिता सुराणा, आकांक्षा यादव, एवं मीनाक्षी की लघुकथाओं में व्यक्त किया गया है। डॉ. अहिल्या मिश्र, जया उपाध्याय, विनीता शर्मा तथा ज्योति नारायण की कविताएं समाज की विसंगतियों पर प्रहार करती है। अंक में प्रकाशित लेखों में कबीर की याद दिलाते हैं बाबा नागार्जुन’(मनोहर लाल गोयल), अंडमान निकोबार में समृद्ध होती हिंदी’(कृष्ण कुमार यादव) में प्रस्तुत विवेचन विचार एवं राष्ट्रीयता के मध्य सेतु का कार्य करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं भी प्रभावी हैं। (मेरे द्वारा लिखी गई यह समीक्षा जन संदेश कानपुर में प्रकाशित हो चुकी है।)

2 comments:

  1. आपकी समीक्षा भी पढने को मिलेगी... बधाई:)

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  2. पुष्पक निसंदेह एक खूबसूरत पत्रिका है .

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