Sunday, February 27, 2011

लेखक से बड़ा दलित कोई नहीं-‘पाखी’

पत्रिका: पाखी, अंक: फरवरी 2011, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ: 96, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी नहीं, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 240), ई मेल: pakhi@pakhi.in , वेबसाईट: www.pakhi.in , फोन/मो. 0120.4070300, सम्पर्क: इडिपेंडेंट मीडिया इनीशिएटिव सोसायटी, बी-107, सेक्टर 63, नोएडा 201303 उ.प्र.
साहित्य जगत की अग्रणी पत्रिका पाखी के समीक्षित अंक में ख्यात कथाकार कवि उदयप्रकाश जी से साक्षात्कार इस अंक की विशेष रचना है। प्रकाशित कहानियों में फोटो वाला दफ्तर(महेश राठी), रेसक्यू(नीलम कुलश्रेष्ठ), उस दिन आसमान में कितने .....(अचला शर्मा) तथा सट्टे वाली सड़क(नगेन्द्र नागदेव) समयसापेक्ष कहानियां हैं। वाद-विवाद-संवाद के अंतर्गत महावीर राजी तथा मदन मोहन पाण्डेय के विचार उपयुक्त लगते हैं। दिनेश कुशवाह, सुरेन्द्र स्निग्ध तथा प्रीति सिंह परिहार की कविताएं दैनिक जीवन में किसी तरह से घिसटते मनुष्य को राहत देती दिखाई पड़ती है। शभु गुप्त का लेख उदयप्रकाश जी की कहानियों पर अति संक्ष्ज्ञिप्तता के साथ प्रकाश डालता है। इस लेख को कम से कम तीन या चार भागों में विस्तृत रूप से लिखकर प्रकाशित किया जाना चाहिए था। क्योंकि उदय प्रकाश जी पर इतने कम शब्दों में कुछ नहीं कहा जा सकता है। सुरेश पंडित, रमेश प्रजापति तथा विज्ञान भूषण के मीमांसा स्तंभ के अंतर्गत लेखों में कोई नई बात नहीं पढने समझने में आती है। पुण्य प्रसून वाजपेयी तथा विनोद अनुपम के कालम भी ठीक ठाक लगे। अशोक कुमार मिश्र का स्तंभालेख जानकारीपरक है। पत्रिका की अन्य रचनाएं तथा समीक्षाएं भी प्रभावित करती है।

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