Friday, December 31, 2010

मॉरिशस से प्रकाशित ‘विश्व हिंदी समाचार’ का नया अंक

पत्रिका: विश्व हिंदी समाचार, अंक: सितम्बर 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र , पृष्ठ: 12, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: उपलब्ध नहीं , ई मेल: whsmauritus@intnet.mu , sgwhs@innet.mu , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 230.6761196, सम्पर्क: World Hindi Secretariat, Swift Lane, forest side, Mauritus
विश्वप्रसिद्ध समाचार पत्रिका विश्व हिंदी समाचार के समीक्षित अंक जानकारीपरक व ज्ञानवर्धक समाचारों को स्थान दिया गया है। अंक के मुखपृष्ठ पर मॉरिशस में हिंदी दिवस के आयोजन का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। हिंदी दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में महामहिम श्री मधुसूदन गणपति ने अपने उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, ‘हिंदी भारत में तथा भारत के बाहर भारतवंशियों को एकता और स्नेह के सूत्र में बांधती है।’ मॉरिशस के कला एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि कुछ ही समय में हिंदी दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन जाएगी। इस अवसर पर मॉरिशस के शिक्षा एवं मानवसंसाधन मंत्री माननीय श्री वसंत कुमार बनवारी ने स्पष्ट किया, ‘हिंदी बहुत तेजी से वैश्विक भाषा का रूप ले रही है।’ इंदिरा गांधी भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र की निदेशक श्रीमती अनीता अरोड़ा ने अतिथियों की सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। एक अन्य समाचार के अनुसार, लंदन में हिंदी पुस्तकों का लोकापर्ण कार्याक्रम आयोजित किया गया। यह लोकापर्ण कैलाश बुधवार एवं डॉ. अरूणा अजीतसरिया द्वारा किया गया। भारत नार्वे लेखक सेमिनार का समाचार अच्छा व रूचिकर है। इससे नार्वे में हिंदी के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यो की झलक मिलती है। लंदन में आयोजित सम्मान समारोह मंे बिहार(भारत) के रंगकर्मी व नाटककार हषिकेश सुलभ को वर्ष 2010 का अंतर्राष्ट्रीय इंदु वर्मा कथा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस कार्यक्रम मंे महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति व वरिष्ठ साहित्यकार श्री विभूतिनारायण राय ने स्पष्ट किया की विश्वविद्यालय विदेशों की हिंदी से संबंधित संस्थाओं के मध्य समन्वय का कार्य करेगा। लंदन के नेहरू केन्द्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वातायन कविता सम्मान 2010 तथा ख्यात कथाकार चित्रा मुदगल को मिले दो प्रमुख पुरस्कारों को समाचार पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। अंक में राजस्थान प्रगतिशील लेखक मंच तथा जवाहर कला केन्द्र की पहल पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम का समाचार विस्तृत रूप से प्रकाशित किया गया है। पत्रिका ने इसे कार्यक्रम की रपट के रूप में बहुत ही सुंदर ढंग से प्रकाशित किया है। 31जुलाई व 1 अगस्त 10 को प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में ख्यात कवि नंद भारद्वाज, जितेन्द्र भाटिया, आदिल रजा मंसूरी, सीमा विजय, दिनेश चारण ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ लेखक व कवि श्री नंद भारद्वाज ने कहा, ‘आज पढ़ी गई कहानियों से राजस्थान की समकालीन रचनाशीलता का पता चलता है।’ नई दिल्ली स्थित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार श्री मानिक वछावत द्वारा रचित इस शहर के लोग को दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रत्नाकर पाण्डेय ने की। प्रो. शिवकुमार मिश्र ने एक कार्याक्रम के दौरान स्पष्ट किया है कि मनुष्यता के लिए साहित्य से जुड़ा रहना होगा। यह समाचार विचारणीय जानकारी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त मॉरिशस में अनुवाद पर कार्यशाला, अब अ से अनार पढ़ेंगे अमरीकी तथा पोर्टबलेयर में प्रेमचंद जयंती के समचार पत्रिका ने आकर्षक ढंग से विस्तार के साथ प्रकाशित किए हैं। पत्रिका के संपादक राजेन्द्र प्रसाद मिश्र का संपादकीय हिंदी दिवस की धूम के मध्य पाठकों से कुछ अपेक्षा करता है।उनके अनुसार, ‘हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की 7वीं आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए यह आवश्यक है कि हिंदी के प्रचार प्रसार से जुड़ी विश्वव्यापी संस्थाएं अपने अभियान को और तेज करे। जिससे संयुक्त राष्ट्र संघ के ज्यादा से ज्यादा सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त करना सहज हो सकेगा।’

‘हिमप्रस्थ’ बाल साहित्य पर एकाग्र विशेषांक

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: नवम्बर2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 96, रेखा चित्र/छायांकन: जानकारी उपलब्ध नहीं, मूल्य: 5रू.(वार्षिक 50), ई मेल: himprasthahp@gmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: हि.प्र. प्रिटिंग प्रेेस परिसर, घोड़ा चौकी, शिमला .4
पत्रिका का स्वरूप व सामग्री देखकर यह कहीं से नहीं लगता है कि यह पत्रिका किसी प्रदेश के प्रकाशन विभाग की होगी। पत्रिका की सामग्री व स्तर प्रभावित करता है। समीक्षित अंक बाल साहित्य पर एकाग्र किया गया है। अंक में बालोपयोगी रचनाएं व विश्लेषणात्मक आलेख प्रकाशित किए गए हैं। समय के साथ बदलता बाल साहित्य(प्रकाश मनु), बाल साहित्य की प्रासंगिकता(जया चौहान), शिशुगीत एवं बाल कविताएं(डॉ. परशुराम शुक्ल), साहित सभी आलेख अच्छे व जानकारीपरक हैं। प्रो. आदित्य प्रचंडिया,ओमप्रकाश गुप्ता, सुशील कुमार फुल्ल, डॉ. दिनेश चमोला, डॉ. अदिति गुलेरी, डॉ. आशु फुल्ल, प्यार सिंह ठाकुर तथा योगराज शर्मा के लेख बाल साहित्य व उसकी वर्तमान उपयोगिता, उपलब्धता पर प्रकाश डालते हैं। रमेश चंद्र पंत, राजेन्द्र परदेसी, साधुराम दर्शक, प्रमिला गुप्ता, डॉ. रामसिंह यादव, डॉ. श्याम मनोहर व्यास, श्याम सिंह घुना, केशव चंद्र, रणीराम गढवाली, द्विजेन्द्र द्विज, नरेन्द्र भारती एवं बालशौरि रेड्डी की बाल कहानियों में बच्चों के लिए अच्छी व मनोरंजक शैली में लेखन कार्य किया गया है। कविताओं में शबाब ललित, रामनिवास मानव, जगदीश चंद्र, ओम प्रकाश सारस्वत, महेन्द्र सिंह शेखावत, पीयूष गुलेरी, त्रिलोक सिंह ठकुरेला, प्रतापसिंह सोठी, प्रत्यूष गुलेरी, नरेश कुमार उदास, मीना गुप्ता, अरूण कुमार शर्मा, तेजराम शर्मा, हिमेन्द्र बाली, हेमलता गुप्ता, राजकुमार कुम्भज, राजीव कुमार एवं डॉ. रीना नाथ शरण की बाल कविताएं बच्चों के साथ साथ प्रबुद्ध वर्ग को भी अच्छी लगेगी। साथ ही बानो सरताज की एकांकी, प्रेम पखरोल व श्रीनिवास श्रीकांत का चिंतन, प्रदीप कंवर का यात्रा वर्णन अच्छे व रूचिकर हैं। डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव से पत्रिका के संपादक रणजीत सिंह राणा की बातचीत बाल साहित्य व उसकी प्रासंगिकता पर गंभीरता से विचार करती है। अशोक गौतम व दादुराम शर्मा के व्यंग्य बच्चों को अवश्य ही पसंद आएंगे। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी इसकी लोकप्रियता के संबंध में काफी कुछ कहते हैं।

Tuesday, December 28, 2010

बाल पत्रिका ‘सुमन सागर’ का नया अंक

पत्रिका: सुमन सागर, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: श्याम बिहारी आलोक, संजवी बिहारी आलोक, पृष्ठ: 22, रेखा चित्र/छायांकन: उपलब्ध नहीं, मूल्य: 10रू.(वार्षिक 80), ई मेल: skalok_25dec@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0983505365, सम्पर्क: विनीता भवन, सवेरा सिनेमा चैक, काजी चक्र , बाढ़ बिहार 803.213
बाल पत्रिका सुमन सागर के समीक्षित अंक में बच्चों के लिए शिक्षाप्रद तथा ज्ञानवर्धक रचनाओं का प्रकाश किया गया है। अंक में राकेश कुमार सिन्हा, पुष्पेश कुमार पुष्प, उमेश कुमार साहू, कंचन सिंह, स्वरूप सिंह, पारस दासोत, सुषमा भण्डारी, तारासिंह, ख्याल नारायण, गाफिल, कृष्णा, ब्रजेश, जमुआर, ईश्वर, नयन कुमार राठी, सहित सभी लेखकों की रचनाएं नयापन लिए हुए हैं।

Monday, December 27, 2010

अब गणित ही नहीं साहित्य में भी ‘समावर्तन’

पत्रिका: समावर्तन, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, मुकेश वर्मा, निरंजन श्रोत्रिय, पृष्ठ: 114, रेखा चित्र/छायांकन: अक्षय आमेरिया , मूल्य: 25रू.(वार्षिक 300), ई मेल: samavartan@yahoo.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0734.2524457, सम्पर्क: ‘Madvi’ 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
साहित्य एवं कला पत्रिका के समीक्षित अंक में प्रभावशाली रचनाओं का समावेश किया गया है। यह जानकार सुखद लगा कि अंक ख्यात लेखक, संपादक व समालोचक विजय बहादुर सिंह जी पर एकाग्र है। उनके समग्र पर इतनी अच्छी व विविधतापूर्ण सामग्री बहुत दिनों बाद पढ़ने में आयी है। पत्रिका के संपादक रमेश दवे जी के उन के व्यक्तित्व पर विचार सारगर्भित है। ख्यात कवि अशोक वाजपेयी, कथाकार उदयप्रकाश, कहानीकार जयश्ंाकर व दिनेश कुशवाहा के विचार एकदम सटीक व संतुलित हैं। पहली बार किसी पत्रिका ने किसी व्यक्तित्व पर बिना किसी पूर्वाग्रह के संतुलित सामग्री का प्रकाशन किया है। उनसे बातचीत व अन्य रचनाएं भी संग्रह योग्य है। लोकप्रिय आलोचक धनंजय वर्मा का लेख, हरि मृदुल की कविताएं समाज का अच्छा विश्लेषण प्रस्तुत करती है। राजकुमार कुम्भज, आशा पाण्डेय, ओम नागर, की कविताएं तथा सिम्मी हर्षिता की कहानी पत्रिका के स्तर में वृद्धि करती है। रंगशीर्ष के अंतर्गत गुन्देचा बंधु के कृतित्व पर नए सिरे से विचार किया गया है। चांदमल गुन्देचा, रमाकांत गुन्देचा के लेख व साक्षात्कार उपयोगी हैं। पत्रिका के अन्य सभी स्थायी स्तंभ, समीक्षाएं व रचनाएं स्तरीय हैं।

Sunday, December 26, 2010

साहित्य सागर का दिसम्बर 2010 अंक

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 52, रेखा चित्र: उपलब्ध नहीं, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 240), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.4260116, सम्पर्क: 161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र.
साहित्य सेवा में विगत 9 वर्ष से सेवारत पत्रिका के समीक्षित अंक को श्री दिवाकर वर्मा जी पर एकाग्र किया गया है। अंक में उनपर उपयोगी सामग्री संजोयी गई है। रामप्रकाश शर्मा, सुरेश गौतम, नचिकेता, मयंक श्रीवास्तव, मधुकर गौड, डाॅ. देवेन्द्र आर्य, मधुकर आष्ठाना, रामकृष्ण शर्मा, राधाकृष्ण दीक्षित व विमलेश शर्मा के आलेख प्रभावित करते हैं। इस परिशिष्ट के अतिरिक्त पत्रिका में डाॅ. रामस्नेहीलाल शर्मा व आर.एम.पी. सिंह के आलेख उपयोगी हैं। रामप्रकाश अनुरागी, सतीश श्रोत्रिय, वर्षा रश्मि, यतीन्द्रनाथ राठी तथा डाॅ. चंद्रप्रकाश शर्मा की कविताएं हैं।

Saturday, December 25, 2010

पाखी का दिसम्बर 2010 अंक

पत्रिका: पाखी, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ: 120, रेखा चित्र: राजेन्द्र परदेसी, बंशीलाल परमार, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 240), ई मेल: pakhi@pakhi.in , वेबसाईट: http://www.pakhi.in/ , फोन/मो. 0120.4070300, सम्पर्क: बी-107, सेक्टर 63, नोएड़ा 201303 उ.प्र.
साहित्य जगत की अग्रणी पत्रिका पाखी के इस अंक में सामाजिक व्यवस्था व उसकी बनावट को उजागर करती कहानियों का प्रकाशन किया गया है। प्रकाशित कहानियों में क्या मनु लौटेगा?(विजय), मेमोरी फुल(राजेन्द्र दानी), एक अंजाने खौफ की रिहर्सल(मुर्शरफ आलम जौकी), ये भी समय है(दुष्यंत), वह टेªन निरंजना को जाती है(संजीव चंदन) एवं राख होती जिंदगी(शिवअवतार पाल) सम्मलित है। वाद, विवाद, संवाद कालम के अंतर्गत अजय वर्मा, दिनेश कर्नाटक, संदीप अवस्थी तथा रूपलाल बेदिया के विचार प्रकाशित किए गए हैं। राजकुमार कुम्भज, प्रमोद कुमार व रामजी तिवारी की कविताएं भी सामाजिक परिवेश की रक्षा करते हुए उसे जटिल होने से बचाती दिखाई देती है। हमेशा की तरह राजीव रंजन गिरि, विनोद अनुपम व प्रतिभा कुशवाहा के कालम अच्छे व सकारात्मक सोच लिए हुए हैं। मेरी बात के अंतर्गत अपूर्व जोशी के विचार व कमल चोपड़ा की लघुकथाएं प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं एव पत्र भी जानकारीपरक हैं।

Thursday, December 23, 2010

साहित्यिक पत्रिका ‘शुभ तारिका’ का हरियाणा अंक

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: नवम्बर2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 102, मूल्य: 25रू.यह अंक(वार्षिक 120), ई मेल: urmi.klm@gmail.com , वेबसाईट: not avilale , फोन/मो. 0171.2631068, सम्पर्क: कृष्णदीप ए-47, शास्त्री कालोनी अम्बाला छावनी हरियाणा
अग्रिम पंक्ति की ख्यात पत्रिका शुभतारिका का समीक्षित अंक हरियाणा साहित्य अंक है। अंक में हरियाणा की कला, साहित्य व संस्कृति पर एकाग्र रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित लेखों में डाॅ. परशुराम शुक्ल, जितेन्द्र सूद, पवन चैधरी मनमौजी, रश्मि, राजेश चुघ, अंजु शर्मा, लालचंद गुप्त मंगल, कमलेश भारतीय, क्षिप्रा बनर्जी, प्रमिला गुप्ता, सुरेन्द्र कुमार, ओमप्रकाश कादयान, सोमवीर शर्मा, आनंद प्रकाश आर्टिस्ट, सुनीता आनंद, सत्यपाल शर्मा, संजीव कुमारी, ओ.पी. वनमाली, अनीता शर्मा, पंकज शर्मा, विजय कुमार, मनजीत कौर, प्रवीण शर्मा स्नेही, शिवकुमार शर्मा, विक्की नरूला एवं तेजिन्द्र के लेख उल्लेखनीय हैं। देवचंद की लोक कथा दो उरली दो परली तथा मुक्ता एवं कमल कपूर की कहानियां प्रभावित करती हैं। प्रमिला गुप्ता का व्यंग्य महिमा जूते की अच्छा है। सुखचैन सिंह भण्डारी, घमंडीलाल अग्रवाल, राधेश्याम भारतीय, कुलदीप अरोड़ा एवं बलजीत गढ़वाल भारती की लघुकथाएं अच्छी व पठनीय हैं। उदयभानु हंस, रामनिवास मानव, लक्ष्मी रूपल, ईश्वर सिंह खिच्ची, निर्मला जौहरी, महेन्द्र जैन, नज़र जालंधरी, यश खन्ना नीर, मदनलाल वर्मा, विनोदिनी पात्र, कुमार शर्मा अनिल, ओमीशा पारूथी, सुनील सिंह मार, राजन शर्मा एवं अंजु सूरी की कविताएं पत्रिका के कलेवर के अनुरूप हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ व रचनाएं भी प्रभावित करती हैं।

Wednesday, December 22, 2010

मुम्बई से हिंदी के लिए ‘प्रोत्साहन’

पत्रिका: प्रोत्साहन, अंक: 76 वर्ष2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक:कमला जीवितराम सेतपाल, पृष्ठ: 32, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60), ई मेल: arts@hotmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 022.26365138, सम्पर्क: ई-3/307, इन्लैक्स नगर, यारी रोड़, वर्सोवा अंधेरी पश्चिम मुम्बई 400061
स्व. श्री जीवितराम सेतपाल जी द्वारा स्थापित व वर्षो से संपादित पत्रिका प्रोत्साहन का समीक्षित अंक अब पुनः उसी रूप व साज सज्जा के साथ प्रकाशित हो रहा हैै जैसा वह पूर्व मंे था। अंक में सुदर्शन शर्मा का व्यंग्य, लक्ष्मी यादव की कहानी एवं रामदलाल, नरेन्द्र धड़कन, जसप्रीत कौर जस्सी, हीरालाल जायसवाल एवं रामचरण यादव की कविताएं उल्लेखनीय हैं। डॉ. पूरन सिंह, अशोक मनवानी, सुधा भार्गव की लघुकथाएं प्रभावित करती हैं। शिवशंकर चतुर्वेदी, मिर्जा हसन नासिर एवं बेताब अलीपुरी के गीत अच्छे बन पड़े हैं। स्व.श्री जीवितराम सेतपाल की रचना नेता पुराण आज के संदर्भ पर सटीक बैठती है।

Tuesday, December 21, 2010

प्रकाशन जगत से ‘वाणी प्रकाशन समाचार’

पत्रिका: वाणी प्रकाशन समाचार, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: अरूण माहेश्वरी, पृष्ठ: 30, मूल्य: 5रू.(वार्षिक 60), ई मेल: vaniprakashan@gmail.com , वेबसाईट: http://www.vaniprakashan.in/ , फोन/मो. 011.23273167, सम्पर्क: 21ए, दरियागंज, नयी दिल्ली 110002
वाणी प्रकाशन की नवीनतम जानकारी प्रदान करने वाला यह समाचार बुलेटिन साहित्य जगत को नए प्रकाशनों के संबंध में उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। समीक्षित अंक में चांद आसमान डाट काम(विमल कुमार), तीसरी ताली(प्रदीप सौरभ), ज़ख्म हमारे(मोहनदास नैमिशराय) उसी शहर में उसका घर(धु्रव शुक्ल), पहर दोपहर(असगर वजाहत), वह जो घाटी ने कहा(पुन्नी सिंह)एवं मुमताज महल(सुरेश कुमार वर्मा) जैसे उत्कृष्ट प्रकाशनों की जानकारी बहुुत ही संुदर ढंग से प्रकाशित की गई है। अज्ञेय साहित्य की विस्त्त जानकारी एवं आलोचना पुस्तक ‘उत्तर छायावाद काल, दिनकर और उर्वशी’(सं. गोपेश्वर सिंह) इन पुस्तकों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। भील इतिहास के रोमांचकारी एवं मार्मिक उपन्यास ‘मगरी मानगढ़’(राजेन्द्र मोहन भटनागर) की समीक्षा इस उपन्यास को शीघ्र प्राप्त कर पढ़ने की इच्छा जाग्रत करती है। राजस्थान के मेवाड़ इलाके में मोहन गिरि आदिवासियों के मसीहा रहे हैं। उनके साथ (लेखक के अनुसार) लगभग 1500 निहत्थे भील आदिवासियों पर अंग्रेजों ने गोलियां बरसाई थीं। उनमें से 379 आदिवासी मारे गए थे। कर्नल शटन के इस गोलीकांड़ की लोमहर्षक कहानी पाठक की आंखें नम कर देगीं। राघेय राघव के उपन्यास प्रतिदान व कल्पना की जानकारी अच्छी व प्रभावशाली है। अन्य पुस्तकों की जानकारी पाठकों का ज्ञानार्जन करती है।

अब आपके पास भी है ‘शब्दशिल्पियों के आसपास’

पत्रिका: आसपास, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक:राजुरकर राज, पृष्ठ: 32, मूल्य: 5रू.(वार्षिक 50), ई मेल: , वेबसाईट: , फोन/मो. 9425007710, सम्पर्क: एच 3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर , भोपाल 462003 म.प्र.
लेखकों की संवाद प्रधान पत्रिका का हर अंक जानकारीप्रद होता है। समीक्षित अंक में बेले कोरियोग्राफर पद्मश्री गुलवर्धन से संबंधित समाचार पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। विनय उपाध्याय का लेख चिराग़-ए-गुल की रौशनी कम न होगी(दैनिक भास्कर से साभार) अच्छा व जानकारीपरक लेख है। बाल साहित्यकार चित्रांश बाघमारे को मिले राष्ट्रपति सम्मान, अब बनेगा साहित्यिक गजेटियर, अरूंधति के आशियाने पर भी शामत तथा सतत सक्रियता का नाम ज्ञानरंजन लेख शब्दकर्मियों को एक दूसरे से जुड़े रहने में उपयोगी हैं। श्री मंडलोई को सौपी पाण्डुलिपि संग्रहालय की कमान तथा हिंदी भवन में हिंदी सेवी अलंकरण समारोह की विस्तृत रपट एवं प्रदेश के उर्दू अकादमी सम्मानों की घोषणा के समाचार साहित्यिक हलचल व गतिविधियों की जानकारी विस्तार से देते हैं। पत्रिका के अन्य समाचार, स्थायी स्तंभ व सामग्री भी सूचनापरक व उपयोगी है।

Monday, December 20, 2010

देश के लिए भी सार्थक है ‘अंचल भारती’

पत्रिका: अंचल भारती, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक:डाॅ. जयनाथ मणि त्रिपाठी, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09415320854, सम्पर्क: अंचल भारती प्रिंटिंग पे्रस, राजकीय औद्योगिक संस्थान, गोरखपुर मार्ग, देवरिया उ.प्र.
स्तरीय व ख्यात साहित्यिक पत्रिका अंचल भारती का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से युक्त है। अंक में प्रख्यात साहित्यकार विश्वरंजन से राजेन्द्र परदेसी की बातचीत साहित्य व साहित्येत्तर वातावरण को समेटते हुए भविष्य में साहित्य की बुनियाद टटोलती है। डाॅ. आरती द्वारा प्रस्तुत स्व. मंजु अरूण की कविताएं अतीत व भविष्य के मध्य कड़ी के समान दिखाई देती है। जयचक्रवर्ती, हरपाल अरूण, बृजेन्द्र मिश्र, नूर मोहम्मद नूर, ऋषिवंश, श्रीकांत प्रसाद सिंह, गिरिमोहन गुरू, अखिलेश निगम ‘अखिल’, मधुर नज्मी, अक्षयगोजा, खुर्शीद नवाब, सर्वेश कुमार पाण्डेय की कविताएं अच्छी बुनावट व कलेवर के साथ मनन योग्य हैं। सोनाली सिंह , डाॅ. दिग्विजय कुमार वर्मा, बद्रीनारायण तिवारी, के लेख अच्छे बन पड़े हैं। मदन मोहन वर्मा तथा अखिलेश शुक्ल की लघुकथाएं पत्रिका का अतिरिक्त आकर्षण है। डाॅ. रामनारायण सिंह मधुर का व्यंग्य व हरदयाल मिश्र, सुरेश धीगड़ा के विविधतायुक्त लेख प्रभावशाली हैं। पत्रिका की समीक्षाएं, अन्य रचनाएं भी उपयोगी व समयानुकूल हैं।

बेंगलोर से प्रकाशित ‘हिंदी प्रचार वाणी’

पत्रिका: हिंदी प्रचार वाणी, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक:सुश्री बी.एस. शांताबाई, पृष्ठ: 32, मूल्य: 5रू.(वार्षिक 60), ई मेल: उपलब्ध नहीं, वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 26617777, सम्पर्क: कर्नाटक महिला हिंदी सेवा समिति, 178, चैथा मेन रोड़, चामराजपेठ, बेंगलोर 560.018 कर्नाटक
कर्नाटक से प्रकाशित महिला विषयक समीक्षित पत्रिका में अन्य विषयों को भी पर्याप्त महत्व दिया जाता है। अंक में साहित्यिक ऋषिः एक भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्चेदी(डाॅ. रामसिंह यादव), समुद्र पार तुलसी निष्ठ विदेशी मनीषी(बद्री नारायण तिवारी), पंख न तोड़ने वाला राग(बी.वेकटराव) तथा तेलुगु कहानी को नवीन संस्कार प्रदाता(विजय नारायण रेड्डी) सराहनीय आलेख हैं। इन लेखों में संबंधित विषय पर अच्छा व सार्थक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। प्रो. सुनीता विवेक, अशोक कुमार शोरी, कविराज डाॅ. आचार्य राधागोविंद थौड्गाम, पुष्पा तिवारी, डाॅ. एम. शेषन तथा सत्यकाम महायिा के लेख भी स्तरीय व पढ़ने योग्य हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं आदि भी प्रभावित करती हैं।

Friday, December 17, 2010

चन्दौसी की मेला गणेश चौथ पत्रिका-‘विनायक’

पत्रिका: विनायक, अंक: मेला गणेश चौथ 2010, स्वरूप: वार्षिकी, संपादक:प्रजीत कुमार वार्ष्णेय, अमित के. एस. वार्ष्णेय, पृष्ठ: 200, मूल्य: उपलब्ध नहीं, ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09412391255, 09219564570, सम्पर्क: गोपाल भवन, 25 देवी स्ट्रीट, चन्दौसी 202412 मुरादाबाद उ.प्र.
चन्दौसी का गणेश स्थापना पर्व देश भर में प्रसिद्ध है। लोग देश विदेश से गणेश चौथ मेला देखने के लिए यहां प्रतिवर्ष आते हैं। वर्ष इस स्थान के लिए स्वर्ण जयंती वर्ष होने के कारण और भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर प्रकाशित पत्रिका विनायक में धार्मिक के साथ साथ समाजोपयोगी व साहित्यिक रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। प्रकाशित पत्रिका में देश के रचनाकारों को स्थान दिया गया है। पत्रिका में कविताएं, लघुकथाएं, यात्रा वृतांत, संस्मरण, जीवनी, कहानी आदि सभी कुछ है। प्रत्येक रचना अपने आप में प्रभावशाली व संग्र्रह योग्य है। संपादक एवं प्रधान संपादक ने इन रचनाओं को बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया हैै।

Monday, December 13, 2010

दक्षिण में हिंदी का वाहक-‘मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका’

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: नवम्बर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक:डॉ. बी. रामसंजीवैया, डॉ. मनोहर भारती , पृष्ठ: 52, मूल्य: 5 रू.(वार्षिक: 50रू.) ई मेल: brsmhpp@yahoo.co.in , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 080.23404892, सम्पर्क: 58, वेस्ट ऑफ कार्ड रोड़, राजाजीनगर, बेंगलुरू कर्नाटक
कर्नाटक से प्रकाशित हिंदी साहित्य के इस उत्कृष्ट प्रयास की रचनाएं प्रभावित करती है। समीक्षित अंक में जनसामान्य से जुड़ी रचनाओं का प्रकाशन कर पत्रिका ने आम लोगों को हिंदी साहित्य एवं भाषा से जोड़ने का प्रयास किया है। प्रकाशित लेखों में विकास का संकट(एस.पी. केवल), राष्ट्रभाषा की महत्ता एवं हिंदी(महेश चंद्र शर्मा), हिंदी के अस्तित्व का संकट(मित्रेश कुमार गुप्त), राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में आर्य समाज का योगदान(कृष्ण कुमार ग्रोवर), हरिवंश राय बच्चन और उनका साहित्य जगत(स्नेहलता), समकालीन हिंदी नाटक और रंगमंच(भरत स वाबलिया) एवं राम की शक्तिपूजा एक परिचय(निरूपमा कपूर) उल्लेखनीय है। पत्रिका का सबसे उपयुक्त व सार्थक आलेख लघुकथा को समर्पित राजेन्द्र परदेसी(दुर्गाशंकर त्रिवेदी) है। इस लेख में राजेन्द्र परदेसी जी के मार्फत लघुकथाओं के विकास व आम जन में स्वीकार्यता पर विचार किया गया है। राजेन्द्र परदेसी जी की लघुकथाएं समाज में परिवर्तन का संदेश देती हैं। इसे आलेख में त्रिवेदी जी ने अच्छी तरह से व्यक्त किया है। अंक की अन्य रचनाओं में लालता प्रसाद मिश्र, नरेन्द्र सिंह सिसोदिया, अनिल सवेरा, राज सक्सेना तथा मोहन तिवारी की कविताएं अच्छी व समयानुकूल हैं। डॉ. रामनिवास मानव एवं हितेश कुमार शर्मा की लघुकथाएं प्रभावित करती है। मनीष कुमार सिंह की कहानी कंपनी का कथानक नए संदर्भ लिए हुए है। प्रो. बी. बै. ललिताम्बा का लेख बोळुवार एक विशिष्ट साहित्यकार व्यक्तित्व कन्नड़ साहित्य जगत से हिंदी के पाठक का परिचय कराता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं पत्र आदि भी पठनीय हैं।

Sunday, December 12, 2010

क्रांतिकारी और सोशलिस्ट एक ज़मीन पर काम करें-संबोधन

पत्रिका : सम्बोधन, अंक : अक्टूबरदिसम्बर 2010, स्वरूप : त्रैमासिक, संपादक : क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ : 172, मूल्य : 20 रू.(वार्षिक : 80रू.) ई मेल : qamar.mewari@rediffmail.com , वेबसाईट : उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09829161342, सम्पर्क : पो. कांकरोली, जिला राजसमंद, राजस्थान 313324
लगातार 44 वर्ष से प्रकाशित हो रही त्रैमासिक पत्रिका संबोधन का प्रत्येक अंक नवीनता लिए हुए होता है। पत्रिका में प्रकाशित रचनाओं में विविधता के साथ प्रस्तुतिकरण की नवीनता आकर्षित करती है। समीक्षित अंक में प्रकाशित कहानियों में ऋतुचक्र(स्वाति तिवारी), वर्जित सुख(जयश्री राय), पहाड़(इंदिरा दांगी), चकबंदी(हुस्न तबस्सुम निहां) उल्लेखनीय है। प्रायः सभी कहानियों में बाजारवाद की अपेक्षा मानव मूल्यों व आदर्शो को तहरीज दी गई है। कालम विशिष्ट कवि के अंतर्गत दिनेश कुमार शुक्ल की तीन कविताओं में से अजब संसार व लिखना कविता में भाव के साथ एक विचार केन्द्र में निहित है जो इन दोनों कविता की विशेषता है। भगवतीलाल व्यास, मधूसूदन पाण्डेया, टीकम चंद्र बोहरा, एम.डी. कनेरिया ॔स्नेहिल’व अखिलेश शुक्ल की कविताएं सम्मिलित हैं। इन कविताओं का स्वर भी तत्कालीन समाज के प्रति सहानुभूति लिए हुए है। शमोएल अहमद का ऐ दिलए-आवारा, नासिरा शर्मा द्वारा लिखित मिस्त्र की ममी तथा पी.सी. पाण्डे का आलेख प्रिंट मीडिया की सामाजिक जवाबदेही पठनीय होने के साथ साथ सरसता लिए हुए है। कवि कथाकार विष्णुचंद्र शर्मा से सुधीर विद्यार्थी की बातचीत क्रांतिकारी और सोशलिस्ट एक जमीन पर काम करें विचारयोग्य व गंभीर साक्षात्कार है। सुरेश पंडित का लेख पहचान का संकट और हिंसा आज के संदर्भ में सामाजिक बहस की मांग करता है। राम मेश्राम, शेख अब्दुल हमीद की ग़ज़लें तथा सीमा श़फक के ख़त, स्वामी वाजिद कासमी की रचना ॔पर्वत पर जब रहा अपना डेरा, के संदर्भ व तफसीलें पाठक के जेहन में स्थान बना लेंगी। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी पॄने व विचारने योग्य हैं।

Sunday, December 5, 2010

‘हिंदी चेतना’ का महामना मालवीय विशेषांक-पाठकों के लिए साहित्यिक उपहार

पत्रिका: हिंदी चेतना, अंक: अक्टूबर 2010, स्वरूप: मासिक, प्रमुख सम्पादक: श्याम त्रिपाठी, संपादक: डाॅ. सुधा ओम ढीगरा, पृष्ठ: 82, ई मेल: hindichetna@yahoo.ca , वेबसाईट: http://www.hindi-chetna.blogspot.com/ , http://www.vibhom.com/ फोन/मो. (905)7165, सम्पर्क: 6 Larksmere Court, Markham, Ontario L3R3R1
विश्व प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका हिंदी चेतना का समीक्षित अंक 48 महामना मदनमोहन मालवीय जी पर एकाग्र है। अंक में मालवीय जी पर संग्रह योग्य पठनीय सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अब तक भारत सहित किसी भी देश में मालवीय जी पर इतनी अधिक विविधतापूर्ण व उपयोगी सामग्री किसी पत्रिका में पढ़ने में नहीं आई है। संस्मरण खण्ड के अंतर्गत मालवीय जी पर एकाग्र संस्मरण व आलेखों का प्रकाशन किया गया है। इनमें उनके व्यक्तित्व व कृतित्व के साथ साथ रचनाकारों ने अपने विचार भी व्यक्त किए हैं। सभी लेख मालवीय जी के विविध स्वरूपों पर भलीभांति प्रकाश डाल सके हैं। महामना का हिंदी प्रेम(चंद्रमौलि मणि), महामना का विलक्षण(गिरधर मालवीय), महामना मदनमोहन(ओमलता अखौरी), राष्ट्रशिक्षक पंडित(डाॅ. चंद्र सूद), मनुष्य में पशुत्व....(वीरभद्र मिश्र), मानस सुत अथक...(वेदप्रकाश वटुक), अत्यंत पवित्र था...(डाॅ. शंकरदयाल शर्मा), वे बातें वे छवियां(राजकुमारी सिन्हा), वह युवक(गोपालदास नागर), मालवीय जी और हिंदी(डाॅ. दिग्विजय सिंह), प्यार की सौगात(डाॅ. अफरोज ताज), सबसे बड़ा भिक्षुक(शीला मालवीय), मेरे परिवार जैसे(डाॅ. आनंद संुदरम्), उन्होंने पत्थरों में जान डाल दी(अखिलेश शुक्ल) अमन की आशा(डाॅ. गुलाम मुतर्जा शरीफ) एवं हिंदी के पितामाह(प्रो. हरिशंकर आदेश) आलेखों संग्रह योग्य व हिंदी के सामान्य पाठक से लेकर शोधार्थियों के लिए समान रूप से उपयोगी हैं। महामना जी पर एकाग्र कविताएं उनके जीवन संघर्ष व आम जन की भलाई के लिए किए गए कार्यो पर अपने अपने दृष्टिकोण से प्रकाश डालती हैं। श्रीनाथ प्रसाद द्विवेदी, राजकुमारी सिन्हा, अमित कुमार सिंह, मैथिलीशरण गुप्त तथा संजीव सलिल की कविताएं मालवीय जी के प्रति श्रृद्धांजलि के साथ साथ उनके द्वारा किए गए कार्यो का पुर्नस्मरण भी है। पत्रिका की अन्य रचनाओं में सीताराम चतुर्वेदी व श्रीकांत कुलश्रेष्ठ की रचनाएं भी उल्लेखनीय है। श्री श्याम त्रिपाठी जी का संपादकीय अंक के संयोजन व प्रस्तुतिकरण में अथक परिश्रम, रचना संग्रह व महामना अंक प्रकाशन की दृढ़ इच्छा शक्ति व्यक्त करता है। अंतिम पृष्ठ पर पत्रिका की संपादक डाॅ. सुधा ओम ढीगरा ने स्पष्ठ किया है कि इस अंक की योजना बहुत पहले बन गई थी। बुद्धिजीवियों व रचनाकारों को मालवीय जी पर अंक न निकालने की सलाह दी थी। यह प्रसन्नता की बात है कि डाॅ. सुधा जी के जुनून तथा कर्मठता ने एक जन-उपयोगी व सार्थक अंक पाठकों के सामने लाने का भागीरथी प्रयास सफलतापूर्वक किया है। इससे पाठकों को मालवीय जी के जीवन संघर्ष से प्रेरित होने व लाभ उठाने का अमूल्य अवसर मिलेगा।

हिंदी का वैश्विक विस्तार-‘साक्षात्कार’

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: जून-जुलाई 2010, स्वरूप: मासिक, सम्पादक: प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल, पृष्ठ: 120, मूल्य: 30 रू.(वार्षिक 250 रू.), ई मेल: sahitya_academy@yahoo.com , वेबसाईट: N.A. , फोन/मो. 0755.2554782, सम्पर्क: मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन, वाणगंगा, भोपाल म.प्र.
साहित्य जगत की शीर्ष पत्रिका साक्षात्कार का समीक्षित अंक साहित्यिक सामग्री से भरपूर है। अंक में सुधीर सक्सेना, सुरेश उजाला, वीरेन्द्र गोयल तथा वसंत सकरगाए की कविताएं आज के भ्रष्टतम होते समाज के बीच लोगों में आशा का संचार करती हैं। अंक में प्रकाशित कहानियों में ‘बिग बाजार’(रमेश दवे), पापी चाण्डाल(शिवकुमार पाण्डेय) तथा शर्त का सच(दिव्या शुक्ला) भी वर्तमान परिवेश के लिए कुछ नया करने की बात कहती है। पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित सभी लेख मानव जीवन व उससे जुड़ी समस्याओं पर विचार करते दिखाई देते हैं। रामेेश्वर मिश्र पंकज, कन्हैया सिंह, श्याम स्रुंदर दुबे, श्रीराम परिहार तथा शंकर शरण के लेख आश्वस्त करते हैं कि समाज का वातावरण भले ही बिगड़ गया हो पर उसमें सुधार किया जा सकता है। वरिष्ठ साहित्यकार राममूर्ति त्रिपाठी से अमित कुमार विश्वास की बातचीत भूमंडलीकरण के दौर में काव्य तथा कला पर एकाग है। काव्य को उनकी चिंता आम पाठक की चिंता भी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं समीक्षाएं भी पठनीय व जानकारीपरक हैं। पत्रिका का संपादकीय विश्व में हिंदी के बढ़ते प्रभाव पर एक गंभीर चिंतन है।

Saturday, December 4, 2010

‘नेपथ्य में रहकर भी मंच पर रहे तनवीर’-‘इप्टा वार्ता’

पत्रिका: इप्टा वार्ता, अंक: जुलाई 2010, स्वरूप: मासिक, सम्पादक: हिमांशु राय, पृष्ठ: 12, मूल्य उपलब्ध नहीं(वार्षिक उप. नहीं), ई मेल: iptavarta@rediffmail.com , वेबसाईट: http://www.iptavarthahindi.blogspot.com/ , फोन/मो. 0761.2417711, सम्पर्क: पी.डी. 4, परफेक्ट एन्क्लेव, स्नेह नगर, जबलपुर 02 म.प्र.
नाट्य प्रधान पत्रिका इप्टा वार्ता के समीक्षित अंक में जनउपयोगी समाचारों का प्रकाशन किया गया है। यह समाचार नाट्य से जुड़े लोगों के साथ साथ आम आदमी को भी नाटकों के प्रति रूचि जाग्रत करने में पूरी तरह से सहायक हैं। पत्रिका के मुख पृष्ठ पर समाचार ‘नेपथ्य में रहकर भी मंच पर ही रहे तनवीर’ एक ऐसा समाचार है जो आम जन की नाट््य व उसके स्वरूप पर जिज्ञासा शांत करता है। वसंत काशीकर का लेख ‘कहानी का रंगमंच’ नाट्य रूपांतर को लेकर लिखा गया एक सार्थक व पाठकों को नाटकों की बारीकियों से अवगत कराने वाला लेख है। समाचार रंगालाप नाट्य समारोह तथा आवाज का शेष भाग प्रभावित करता है। समाचार ‘रायपुर में हबीब की याद’, इफतेखार नाट्य समारोह तथा रवि वासवानी की यादें संदर्भ हेतु काफी विस्तृत जानकारी प्रदान करती हैै। पत्रिका का संपादकीय पढ़ने व मनन योग्य है।