Monday, August 30, 2010

साहित्य से ‘साक्षात्कार’

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: 362-363, स्वरूप: द्वैमासिक, प्रधान संपादक: देवेन्द्र दीपक, संपादकः आनंद सिन्हा, पृष्ठ: 120, मूल्य:30रू.(.वार्षिक 250रू.), ई मेल: sahitya_academy@yahoo.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 0755.2554783, सम्पर्क: साहित्य अकादमी, म.प्र. संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन, वाण गंगा, भोपाल-3, म.प्र. पत्रिका के समीक्षित अंक में रचनाओं को बहुत ही आकर्षक ढंग से प्रकाशित किया गया है। संतोष खरे जी से अनूप अशेष की बातचीत साहित्य जगत की विभिन्न गतिविधियों के साथ साथ वर्तमान साहित्यिक परिवेश पर भी विचार रखती है। डाॅ. प्रेम भारती एवं सुरेश गौतम के आलेख नवीनता लिए हुए हैं। विनोद साब की कहानी दोस्त तथा विभा रानी की कहानी मीडियम वेव दो हजार पर.... ! ने कथ्य व शिल्प के साथ कुछ नए प्रयोग किए गए हैं। नवल जायसवाल, सच्चिदानंद जोशी, सवाई सिंह शेखावत, मृगेन्द्र राय, रश्मि रमानी तथा विनय त्रिपाठी की कविताएं जन सामान्य की भावनाओं को अभिव्यक्ति देती हैं। दिवाकर शर्मा एवं देवेन्द्र आर्य के गीत/दोहे अच्छे व पठनीय हैं। नई कलम के अंतर्गत ऋचा सत्यार्थी की हिंदी ग़ज़लें इस विधा के साथ अच्छी तरह से निर्वाह कर सकीं हैं। पत्रिका की समीक्षाएं, अन्य रचनाएं, पत्र समाचार आदि भी उपयोगी व जानकारी परक हैं।

Sunday, August 29, 2010

‘शब्दशिल्पियों के आसपास’

पत्रिका: आसपास, अंक:अगस्त 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 24, मूल्य:5रू.(.वार्षिक 60रू.), ई मेल: shabdashilpi@yahoo.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: http://www.dharohar.net/ , फोन/मो. 0755.2772061, सम्पर्क: एच-3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर,भोपाल म.प्र.
रचनाकर्मियों की संवाद पत्रिका आसपास के इस अंक में उपयोगी व साहित्यपे्रमियों के संवाद हेतु जानकारी का प्रकाशन किया गया है। अंक में विभूतिनारायण जी के विवादास्पद प्रकरण को प्रकाशित किया गया है। इसके अंतर्गत ख्यात व्यंग्यकार एवं व्यंग्ययात्रा के संपादक पे्रम जनमेजय के विचार भी उपयोगी हैं। अन्य समाचारों मेें साहित्य अकादमी के नए प्रकल्प, जब्बार ढाकवाला की मृत्यु पर उठे सवाल, तस्लीमा को छोड़ना होगा भारत सहित अन्य समाचारों का प्रकाशन किया गया है। पत्रिका सभी समाचार अन्य पत्रिकाओं से साभार लेकर प्रकाशित करती है। साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ. त्रिभुवनाथ शुक्ल से बातचीत तथा गूगल की हिंदी सर्च सेवा सुधरने का समाचार हिंदी साहित्य के प्रति लोगों की उत्सुकता की जानकारी देता है। माणिक वर्मा से संबंधित समाचार व लीलाधर मण्डलोई, हेमंत शेष, माणिक वर्मा, ममता कालिया एवं चित्रांश को मिले सम्मान के समाचार जानकर प्रसन्नता हुई। आसपास ने एनएचडीसी लि. के स्थापना दिवस समारोह का समाचार विस्तार के साथ प्रकाशित किया है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, समाचार, हलचल आदि भी प्रभावित कर संवाद स्थापित करने में सफल रहे हैं।

Saturday, August 28, 2010

‘प्रगति वार्ता’ का आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पर एकाग्र अंक

पत्रिका: प्रगति वार्ता, अंक: 532010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: सच्चिदानंद, पृष्ठ: 100, मूल्य:20रू.(.वार्षिक 80रू.), ई मेल: pragativarta@yahoo.co.in , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 06436222467, सम्पर्क: प्रगति भवन, चैती दुर्गा स्थान, साहिबगंज 816109(झारखण्ड)
पत्रिका प्रगति वार्ता का समीक्षित अंक ख्यात आलोचक, संपादक व निबंधकार महावीर प्रसाद द्विवेदी जी पर एकाग्र है। अंक में उनके समग्र व्यक्तित्व व कृतित्व पर सारगर्भित सामग्री का प्रकाशन किया गया है। भारत यायावर, डाॅ. तपेश्वरनाथ, श्री रंजन सूरिदेव, डाॅ. राजनारायण, श्री ऋषिकेश राय, डाॅ. हरनिवास पाण्डेय, लता सुमन, श्री चंद्रशेखर तिवारी, कृष्ण कुमार गुप्ता, सच्चिदानंद एवं राजेन्द्र प्रसाद ठाकुर के आलेख संग्रह करने योग्य हैं। पत्रिका का अंक एक सामान्य पाठक से लेकर साहित्य के शोधार्थी के लिए समान रूप से उपयोगी है। आचार्य द्विवेदी की प्रतिनिध रचनाओं में उनकी कहानियां, कविताएं, जीवनी, निबंध/ललित निबंध एवं समीक्षा आदि पुनः पढ़कर पाठक जान सकेगा की वे आज की घटनाओं व परिस्थितियों को काफी पहले ही जान समझ गए थे। पत्रिका के अतिथि संपादक भारत यायावर का संपादकीय विशेष रूप से पढ़ने योग्य है।

Friday, August 27, 2010

‘हम सब साथ साथ’ हैं और आप?

पत्रिका: हम सब साथ साथ, अंक: 06, स्वरूप: द्विमासिक, संपादक: शशि श्रीवास्तव, पृष्ठ: 34, मूल्य:15रू.(.वार्षिक 120रू.), ई मेल: , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 01124568464, सम्पर्क: 916, बाबा फरीदपुरी, पश्चिमी पटेल नगर, नई दिल्ली 110.008
बाल पत्रिका हम सब साथ साथ का यह अंक बच्चों के विकास की रचनाओं के साथ प्रकाशित किया गया है। अंक में विनोद बब्बर, मधु शर्मा की रचनाएं व ज्योति गजभिये, प्रो. शामलाल कौशल, अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, आरती वर्मा, मदनमोहन श्रीवास्तव के विचार विचार विमर्श के तहत प्रकाशित किए गए हैं। कृष्ण कुमार यादव व राजकुमार तिवारी सुमित्र पर आलेख उपयोगी व जानकारीपरक हैं। हरकीरत हरकीर, माला वर्मा, प्रतीक्षा दुबे, सुभाष राय, सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी, पूनम अरोड़ा, सुमन सिंह, इंदिरा शबनम व किशोर श्रीवास्तव की रचनाओं में बच्चों के लिए नयापन है जो प्रभावित करता है। रश्मि वडवाल की लघुकथाएं, बी.पी. दुबे की ग़ज़ल एवं अनिल कांत की कहानियां भी पठनीय हैं व प्रभावित करती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समाचार व प्रस्तुत सामग्री भी अच्छी बन पड़ी है।

सेक्स, मारेलिटी एंड सेन्सरशिप-‘इप्टा वार्ता’

पत्रिका: इप्टा वार्ता, अंक: 39, स्वरूप: मासिक, संपादक: हिमांशु राय, पृष्ठ: , ई मेल: mailto:iptavarta@rediffmail.com.
रंग समाचार पत्रिका इप्टा वार्ता के इस अंक में रंगपेमियों के लिए उपयोगी व संग्रह योग्य समाचारों का प्रकाशन किया गया है। अंक मंे दिल्ली की रंग संस्था अस्मिता के द्वारा मंचित नाटक अम्बेडकर और गांधी का समाचार प्रमुखत से प्रकाशित किया गया है। विनीत तिवारी का आलेख ख्यालों की खुशबू को आज़ादी का इंतजार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखा गया हैै। वर्तमान के एक ज्वलंत मुद्दे अश्लीलता व नैतिकता पर आलेख सेक्स, मारेलिटी एंड सेन्सरशिप पाठकों को अपनी ओर आकर्षित कर विषय पर बहुत उपयोगी जानकारी देता है। सहरसा में नाट्योत्सव का आयोजन, विंदा करंदीकर पर आलेख व जयवर्धन के नाटक अर्जेट मीटिग पर पत्रिका में अच्छी रिपोर्टिग की गई है जो हर दृष्टि से सहेजकर रखने योग्य है।

Wednesday, August 25, 2010

रू. 5 में इतना कुछ?

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: जुलाई2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 56, मूल्य:5रू.(.वार्षिक 50रू.), ई मेल: himprasthahp@gmail.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: हि.प्र. प्रिटिंग प्रेस परिसर, घौड़ा चैकी, शिमला 05, हिमाचल प्रदेश
सार्थक साहित्य एवं कला की मासिक पत्रिका हिमप्रस्थ के समीक्षित अंक में सुरेन्द्र श्याम, सुरेश आनंद, संजीव त्रिपाठी, तुलसी रमण, शशिभूषण शलभ, दीन दयाल शर्मा, डाॅ. आर.के. शुक्ला, जितेन्द्र कुमार एंव जी. टी.एस. अशोक के विविध विषयों पर पठनीय आलेखों का प्रकाशन किया गया है। कहानियों में दादी की दिलेरी (प्रत्यूष गुलेरी), पारबती(ओम प्रकाश मिश्र), गलत पते की चिठ्ठी(बद्री सिंह भाटिया) एवं सरकारी नौकरी(कृष्णा अवस्थी) आम जीवन की रचनाएं हैं। साधुराम दर्शक एवं रमेश चद्र की लघुकथाएं भी पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं। प्रभात कुमार, ओमप्रकाश शर्मा, कमल सिंह चैहान, वृंदा गांधी एवं शंकर सुलतानपुरी की कविताएं अच्छी हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, रपट, समीक्षाएं व समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।

समावर्तन का संग्रह योग्य अंक

पत्रिका: समावर्तन, अंक: अगस्त 2010, स्वरूप: मासिक, संस्थापक: प्रभात कुमार भट्टाचार्य, संपादक: रमेश दवे मुकेश वर्मा, पृष्ठ: 96, मूल्य:25रू.(.वार्षिक 250रू.), ई मेल: samavartan@yahoo.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी, 129 दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
समावर्तन का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण साहित्यिक सामग्री से युक्त है। अंक में ख्यात कवि व कथाकार कमल कुमार पर उपयोगी व पठनीय सामग्री प्रकाशित की गई है। उनके समग्र व्यक्तित्व पर प्रकाशित रचनाएं व लेख उल्लेखनीय हैं। ख्यात आलोचक डाॅ. धनंजय वर्मा, कुंवर जावेद, व पिलकेन्द्र अरोरा व सत्य शुचि की लघुकथाएं एवं अन्य रचनाएं पत्रिका का कलेवर व उसकी उपयोगिता से परिचय कराती है। मालवी हास्य एवं व्यंग्य कवि भावसार बा पर इतनी विस्तृत सामग्री पहली बार कहीं पढ़ने में आयी है। प्रमोद त्रिवेदी एवं भगवती लाल राजपुरोहित ने मालवी लोक भाषा एवं संस्कृति पर विचार करते हुए अपने अपने आलेख लिखे हैं। जितेन्द्र चैहान की कविताएं उस दौर की कविताएं हैं जहां मानव अपनी अस्मिता के लिए समय के साथ संघर्षरत रहता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, आलेख व समाचार भी उपयोग व पठनीय हैं।

Monday, August 23, 2010

हिंदी का गौरव-‘मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका’

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: जुलाई 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: डाॅ. बी. रामसंजीवैया, गौरव संपादकः डाॅ. मनोहर भारती, पृष्ठ: 52, मूल्य:5रू.(.वार्षिक 50रू.), ई मेल: brsmhpp@yahoo.co.in , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 080.23404892, सम्पर्क: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद, 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजी नगर, बेंगलूर कर्नाटक
मैसूर हिंदी प्रचार परिषद का यह अंक भी अच्छी रचनाओं के साथ प्रकाशित किया गया है। अंक में एस.पी. केवल, डाॅ.मित्रश कुमार गुप्त, वीरेन्द्र कुमार यादव, राधागोंिवंद पालर, जसवंत भाईजी पण्डया, मृत्युजंय उपाध्याय, कृष्ण कुमार ग्रोवर, डाॅ. सुरेश उजाला, प्रो.ए. लक्ष्मीनारायण, गणेश गुप्त, विनोद चंद्र पाण्डये विनोद, राजेन्द्र परदेसी, प्रो. बी.वै. ललिताम्बा, डाॅ. टी.वी. प्रभाशंकर पे्रमी एवं रंजना अरगड़े के आलेख वर्तमान में हिंदी भाषा व उसके साहित्य पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हैं। डाॅ. रामशंकर चंचल, दिलीप भाटिया की लघुकथाएं अच्छी है व पाठक को आकर्षित करती हैं। श्रीमती हेमवती शर्मा, डाॅ. रामगोपाल वर्मा, देवेन्द्र भारद्वाज एवं विनोद चंद्र पाण्डेय की कविताएं आज के संदर्भाे को अच्छी तरह से व्यक्त कर सकी हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी उपयोगी हैं।

Sunday, August 22, 2010

पाखी अगस्त 2010 अंक

पत्रिका: पाखी, अंक: अगस्त 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: अपूर्व जोशी, पृष्ठ: 96, मूल्य:20रू.(.वार्षिक 240रू.), ई मेल: pakhi@pakhi.in , वेबसाईट/ब्लाॅग: http://www.pakhi.in/august_10/ , फोन/मो. 0120.4070300, सम्पर्क: इंडिपेडेंट मीदिया इनिशिएटिव सोसायटी, बी-107, सेक्टर-61, नोएडा 201303
पाखी का समीक्षित अंक वर्तमान समय को पिछली पीढी से जोड़ने के प्रयास में सफल रहा है। इसे अंक में प्रकाशित कहानियों से अच्छी तरह से जाना समझा जा कसता है। कहानियां शोक वंचिता(अशोक गुप्ता), अभिशाप(उर्मिला शिरीष), आठ आने का जहर(रणीराम गढ़वाली) एवं उसकी आजादी(पदमा शर्मा) इसे अपनी पूर्णता के साथ अभिव्यक्ति देती है। कहानी जो दिल को छू गई के अंतर्गत प्रकाशित कहानी कामरेड का कोट(संृजय) आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 90 के दशक में दी। कहानी का कथानक, पात्र तथा परिवेश प्रगतिवादी विचारधारा के प्रति समाज की दिन प्रतिदिन बदल रही सोच को व्यपक रूप से व्यक्त कर सका है। शतदल, आलोक श्रीवास्तव, अच्युतानंद मिश्र, कैलाश दहिया एवं सत्येद्र कुमार झा की कविताएं एवं कुमार विश्वास, ज्ञान प्रकाश विवेक तथा दीपक कुमार की ग़ज़लें प्रभावित करती हैं। विशेष रूप से ज्ञान प्रकाश विवेक अपने समय के साथ ग़ज़लों में जो अभिव्यक्ति देते दिखाई पड़ते हैं वह प्रशंसनीय हैै। विजय शर्मा, राजीव रंजन गिरि, पुण्य प्रसून वाजपेयी तथा विनोद अनुपम के कालम अब जड़वत से लगने लगे हैं। पत्रिका के प्रायः हर अंक में इन स्तंभों की एक सी भाषा व शैली (भले ही विषय अलग अलग हो) निष्प्रभावी लगती है। पत्रिका के संपादक प्रेम भारद्वाज का लेख कंपनी बन चुकी है कश्मीर बिलकुल नए ढंग से कश्मीर पर विश्लेषण है। इस विषय पर गंभीर चर्चा की जाने की आवश्यकता है। इस अंक में प्रतिभा कुशवाहा के स्तंभ की कमी लगी।यह स्तंभ वेब पत्रकारिता पर चल रही गतिविधियों को पिछले अंकों में अच्छे विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करता रहा है। पत्रिका के संपादक अपूर्व जोशी जी संपादकीय बहुत अधिक आक्रमक हो गया है। मेरा सुझाव है कि उन्हें साहित्यिक पत्रकारिता के रणक्षेत्र में तलवार तथा ढाल का बुद्धिमत्ता पूर्ण प्रयोग करना चाहिए। केवल तलवारबाजी कभी कभी सामने वाले के सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर कर देती है। पाखी के इस एक और अच्छे अंक के लिए बधाई।

Saturday, August 21, 2010

साहित्य सागर का स्वाधीनता अंक

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: अगस्त10, स्वरूप: मासिक, संपादकः कमलकांत सक्सेना’, पृष्ठ: 52, मूल्य:20रू.(.वार्षिक 250रू.), ई kksaxenasahityasagar@rediffmail.com मेलः , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं , फोनः 0755.4260116, सम्पर्क: 161 बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल 462.043 म.प्र.
प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका साहित्य सागर का यह अंक स्वाधीनता विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया गया है। अंक मंे प्रो. एस.एन. सक्सेना, महेश श्रीवास्तव, लता अग्रवाल तथा लक्ष्मण सहाय के आलेख स्वतंत्रता दिवस पर नए ढंग से विचार करते दिखाई पड़ते हैं। प्रभा पाण्डे, रामवल्लभ आचार्य, भगवत दुबे, दामोदर शर्मा, श्याम बिहारी सक्सेना, रामसहाय बरैया तथा जगदीश श्रीवास्तव की कविताएं प्रभावित करती हैं। डाॅ. हरीन्द्र श्रीवास्तव पर एकाग्र खण्ड उनके समग्र पर अच्छे ढंग से प्रकाश डाल सका है। वीरेन्द्र कुमार अग्रवाल, कमल किशोर गोयनका, डाॅ. देवेन्द्र दीपक तथा भवेश दिलशाद के आलेख बहुत विस्तार से डाॅ. श्रीवास्तव की लेखन व पठन पाठन की विशेषताओं को सामने लाते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व सभी स्थायी पूर्ववर्ती अकों की तरह प्रभावित करते हैं।

Friday, August 20, 2010

कथाप्रधान पत्रिका-‘कथाबिंब’

पत्रिका: कथाबिंब, अंक: 110, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादकः डाॅ.माधव सक्सेना ‘अरविंद’, पृष्ठ: 52, मूल्य:15रू.(.वार्षिक 50रू.), ई मेलः kathabimb@yahoo.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: http://www.kathabimb.com/ , फोनः 25515541, सम्पर्क: ए-10 बसेरा आॅफ दिन क्वारी रोड़, देवनार मुंबई 400088
कथा प्रधान पत्रिका कथाबिंब का समीक्षित अंक आम आदमी का यथार्थ सामने लाता हुआ एक उपयोगी अंक है। अंक में वह चुप है(डाॅ. रूपसिंह चंदेल), एक और एकलव्य(पुन्नी सिंह), इज्जत के रखवाले(डाॅ. पदमा शर्मा) एवं मंथन(विवेक द्विवेदी) की कहानियों में किसी न किसी रूप में आम आदमी जुड़ा हुआ है। आनंद बिल्थरे, राजकमल सक्सेना, कुंवर प्रेमिल, आशफाक कादरी एवं सीमा शाह जी की लघुकथाएं मात्र चुटकुले न होकर सहज सरल रूप से अपनी बात सामने लाती है। गाफिल स्वामी, सच्चिदानंद इसान, पंकज शर्मा एवं जयदीप पाल दीप की कविताएं भी अच्छी व पठनीय है। इस अंक की समीक्षाओं का स्वर कुछ कमजोर लगा पत्रिका को समीक्षा व उसके लेखन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। अन्य स्थायी स्तंभ व रचनाएं भी अपेक्षित स्तर की हैं।

Tuesday, August 17, 2010

क्या आप पढ़ना चाहेंगे विश्व हिंदी समाचार?

पत्रिका: विश्व हिंदी समाचार, अंक: जून10, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादकः डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, पृष्ठ: 12, मूल्य:उपलब्ध नहीं (वार्षिक उपलब्ध नहीं), ई मेल: whsmauritus@intnet.mu, वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 230.6761196, सम्पर्क: World Hindi Secretariat, Swift Lane, Forest Side, Mauritius
माॅरिशस से प्रकाशित विश्व हिंदी समाचार पत्रिका विश्व भर के साहित्य समाचारों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। इस अंक में मुख पृष्ठ पर विश्व हिंदी सचिवालय के नए सदस्यों से संबंधित जानकारी प्रकाशित की गई है। नए मंत्रिमंडल में शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय का कार्यभार माननीय श्री बसंत कुमार बनवारी, विदेश स्थानीय सहकारिता एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्रालय का कार्यभार डाॅ. अरविन बुलेल तथा कला एवं संस्कृति मंत्रालय का कार्यभार श्री मुकेश्वर चुनी को दिया गया है। कथाचक्र परिवार की ओर से नवनियुक्त सदस्यों को बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं। दूसरे समाचार में पदमश्री जयरामन की अध्यक्षता में हुए सेमिनार में संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्यता प्राप्त सूचि में शामिल करने की आवाज अमेरिका से उठी है। अब आशा की जा सकती है कि हिंदी अवश्य ही उस सूचि में शामिल हो सकेगी। हंगरी जैसे छोटे से देश में हिंदी के संबंध में लगाव की जानकारी डाॅ. मारिया न्यजैशी के लेख से मिलती है। एक अन्य समाचार में डाॅ. रामनिवास मानव के निजी पुस्तकालय में अद्वितीय पुस्तकों के संग्रह का समाचार उनकी अध्ययनशीलता की जानकारी देता है। अन्य प्रमुख समाचारों में डाॅ. दिव्या माथुर को डाॅ. हरिवंश राय बच्चन लेखन समाचार, परदेश में देश का रंग (फजल इमाम मलिक), खाली लिफाफा का लोकापर्ण(डाॅ. वरूण कुमार तिवारी), प्रयास के वेब संस्करण को लोकापर्ण, साहित्य संवाद नारी और मीडिया, एक मंच पर लाने का प्रयास(अनिल माहेश्वरी), अंडमान निकोबार में रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जन्मशती के समाचार विश्व में हिंदी के विकास की जानकारी विस्तार से देते हैं। महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समाचार(विभूति नारायण राय) का समाचार भारत ही नहीं विश्व में बढ़ती जा रही स्वीकार्यता पर प्रकाश डालता है। अमरीका में 25वें हिंदी कवि सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट ग्लोबलाइज्ड अर्थ व्यवस्था में हिंदी का समाचार संक्षेप में काफी कुछ कह देता है। राष्ट्रीय अनुवाद मिशन से संबंधित समाचार अनुवाद के विकास व उसके स्वरूप में हो रहे विश्वव्यापी परिवर्तन की विस्तार से जानकारी देता है। इस विषय पर प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी, श्री वी.एन. शुक्ल, श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, सुश्री सुरेन्द्र सैनी व डाॅ. जयनारायण कौशिक के विचार शीघ्र ही कार्यरूप में परिणित होगें ऐसी आशा है। पत्रिका के संपादक डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र का संपादकीय हिंदी के प्रति जागरूकता पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

Monday, August 16, 2010

चांद, सितारों के मध्य ‘शुभ तारिका’

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: जुलाई10, स्वरूप: मासिक, संपादकः श्रीमती उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 34, मूल्य:12रू.(.वार्षिक 120रू.), ई मेल:, वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप, ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी 133001 हरियाणा
विगत 38 वर्ष से लगातार प्रकाशित हो रही इस पत्रिका ने अपना स्तर बनाए रखा है। समीक्षित अंक में डाॅ. पूरन ंिसंह, पंकज शर्मा, सुनील कुमार सजल, सत्यपाल, गीता जैन, चेतन आर्य एवं रामदुलारी श्रीवास्तव की लघुकथाएं प्रभावित करती हैं। कुंवर अरविंद सिंह, श्रीकांत प्रसाद सिंह, प्रमीला मजेजी एवं रामेश्वर काम्बोज की कविताएं नयापन लिए हुए हैं। मधुर कुलश्रेष्ठ की कहानी बीच बीच में कुछ बिखरी बिखरी सी लगी, लगता है इसे प्रकाशन की जल्दी के साथ प्रकाशित करने के लिए भेज दिया गया है। सरोज कृष्ण पर एकाग्र लेखक परिशिष्ट सुंदर व पठनीय है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, स्थायी स्तंभ व अन्य सामग्री भी प्रभावित करती हैं।

Saturday, August 14, 2010

हैदराबाद का ‘पुष्पक’

पत्रिका: पुष्पक, अंक: 04, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादकः डाॅ. अहिल्या मिश्र, पृष्ठ: 112, मूल्य:75रू.(.वार्षिक 250रू.), ई मेल: mishraahilya@yahoo.in , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 040.23703708, सम्पर्क: 93सी, राजसदन, वेंगलराव नगर, हैदराबाद 500038
हैदराबाद से प्रकाशित साहित्य का पुष्पक कई नई रचनाओं से युक्त है। पत्रिका के समीक्षित अंक में प्रकाशित प्रमुख कहानियों में मेरे अपने(शांति अग्रवाल), दुविधा के बादल(पवित्रा अग्रवाल), चिंगारी बनो(लक्ष्मी नारायण अग्रवाल), एक में सब(प्रो. एस. शेषारत्नम्), कब तक(डाॅ. करण सिंह उटवाल) का स्वर आज के समाज को नई दिशा देने के प्रति प्रतिबद्ध दिखाई देता है। पत्रिका की कविताएं सामाजिक उथल पुथल व बदलाव के प्रति कुछ नया कहने के लिए तत्पर हैं। इन कविताओं में रमा दिवेद्वी, यासमिन सुल्ताना नकवी, विनीता शर्मा, ज्योति नारायण, अशोक कुमार शेरी, उदित नारायण समदर्शी, प्रकाश सूना, मीना मुथा, उमाश्री, किरण सिंह, डाॅ. परमलाल गुप्त, अंजना अनिल जनार्दन यादव व अनुपमा दीप्ति की कविताओं में समाज के प्रति जबावदेही दिखाई देती है। अमृता प्रीतम पर एकाग्र आलेख व डाॅ. पवन अग्रवाल, एस. रविचंद्र राव, गणेश दत्त सारस्वत, अर्पणा दीप्ति के लेख प्रभावित करते हैं। इस अंक की लघुकथाएं कुछ अधिक नहीं कह सकीं है। पत्रिका की अन्य रचनाएं व पत्र समाचार आदि भी आकर्षक व पठनीय हैं।

Friday, August 13, 2010

हिंदी-उर्दू का साहित्यिक मंच-सुख़नवर’

पत्रिका: सुख़नवर, अंक: मई-जून10, स्वरूप: द्विमासिक, संपादकः अनवारे इस्लाम, पृष्ठ: 48, मूल्य:25रू.(.वार्षिक 170रू.), ई मेलः mehra.kailash@gmail.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोनः 0755.2555789, सम्पर्क: सी-16, सम्राट कालोनी, अशोका गार्डन, भोपाल 462023 म.प्र.
धरोहर हिंदी उर्दू ज़बान में प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका इस मायने में अद्वितीय है कि पत्रिका में प्रकाशित रचनाएं दोनों भाषाओं व उसके साहित्य का अनुमोदन व समर्थन करती है। पत्रिका में प्रकाशित कहानियां आज की अपसंस्कृति तथा भोगवादी मानसिकता से लोगों को बचाती हुई दिखाई देती है। प्रमुख कहानियों में बर्फ़ में आग(शमोएल अहमद), कहीं कुछ खो गया है(प्रो. अजहर राही), कथाएं खत्म नहीं होतीं(प्रेेम कुमार गौतम) तथा गौरा मां(रेणुश्री आस्थाना) को शामिल किया जा सकता है। नुसरत मेंहदी, अक़ील नोमानी, इक़बाल मसूद, शाहिर सागरी, श्यामनंद सरस्वती, ख़ुर्शीद नवाब, दीपक दानीश, मनोज अबोध, सीमा गुप्ता, कमर रईस बहराइची, शाहजहां खान शाद, अर्श सहबाई, कुंदन सिंह सहगल, सुनीति बैस, सलीम अंसारी, कु. रूचि जैबा एवं विजय लक्ष्मी विभा की ग़ज़लें प्रभावित तो करती ही हैं साथ ही समाज को जोड़कर रखने के लिए संदेश भी देती दिखाई देती हैं। नज़्मों में अशफ़ाक़ अहमद सिद्दकी, हसीब सोज़ कुछ नया कर सके हैं। तेलुगु कविता स्त्री पुरूष का अनुवाद कुछ अधूरा सा लगता है। पत्रिका की लघुकथाएं भी उस स्तर की नहीं लगीं जिस स्तर की कहानियां व ग़ज़लें हैं। पत्रिका की समीक्षाएं व अन्य रचनाएं भी पढ़ने योग्य हैं। एक अच्छी पत्रिका का इसलिए भी स्वागत किया जाना चाहिए कि इसका स्वर देश को जोड़ने का है जो अधिक महत्वपूर्ण है।

Wednesday, August 11, 2010

‘प्रेरणा’ में कविता का संसार

पत्रिका: प्रेरणा, अंक: जनवरी-जून10(संयुक्तांक), स्वरूप: त्रैमासिक, संपादकः अरूण तिवारी, पृष्ठ: 248, मूल्य:20रू.(.वार्षिक 100रू.), ई मेल:, वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.2422109, सम्पर्क: ए-74, पैलेस आर्चड़, फेज़-3, सर्वधर्म के पीछे, कोलार रोड़, भोपाल म.प्र. 462042
ख्यात पत्रिका पे्रेरणा का समीक्षित अंक कविता अंक है। अंक में कविताओं के साथ साथ विभिन्न उपयोगी व पठनीय आलेखों का प्रकाशन भी किया गया है। विमर्श के अंतर्गत साहित्य में माफियावाद(मदन मोहन उपेन्द्र) एवं लेखक संगठनों को मजबूत करने की जरूरत(मुशर्रफ आलम जौकी) तथा छंदबद्ध एवं छंद मुक्त की बहस गैर जरूरी(केवल गोस्वामी) काफी विश्लेषण युक्त आलेख हैं। कविता एवं अन्य विषयों पर प्रकाशित आलेखों में भगवत रावत, कमल किशोर गोयनका, सरेन्द्र वर्मा, श्रीप्रकाश मिश्र, अमिताभ मिश्र, वीरेन्द्र सिंह, उदयभानु हंस एवं अनिरूद्ध सिन्हा ने कविता विधा पर विस्तार पूर्वक विचार व्यक्त किए हैं। आज के वातावरण व संस्कृति में हो रहे पश्चिमीकरण पर चिंतन के अंतर्गत काफी कुछ कहा गया हैै। जयंत देशमुख, रंजना श्रीवास्तव, प्रद्युम्न भल्ला, दया दीक्षित, मुकुट सक्सेना, सुमन केशरी, ललन राजपूत के लेखों में वर्तमान समय की विसंगतियों व विरोधाभाषों का स्वर मुखर हुआ है। अनेक कविताएं अंक को एक सार्थक कविता का संसार युक्त अंक का स्वरूप प्रदान करती है। परमानंद श्रीवास्तव, डाॅ. रामदरश मिश्र, हरदयाल, अजामिल, केवल गोस्वामी, प्रमोद त्रिवेदी, कमर मेवाड़ी, रामकुमार आत्रेय, भरत प्रसाद, पूर्णचंद्र रथ, अरूण शीतांश, शोभनाथ यादव, सुभाष रस्तोगी, संतकुमार टण्डन, शशिभूषण त्रिवेदी, हितेश व्यास, राजेन्द्र परदेसी, हरिशंकर अग्रवाल, प्रेमशंकर रघुवंशी, बलराम गुमास्ता, संतोष चैबे, शिवसिंह पतंग, तसवीर त्यागी, राधेलाल विजघावने, राजेन्द्र वर्मा, मनोज कुमार झा, श्री रंग, केशवशरण, वरूण कुमार तिवारी, रामनाथ शिवेन्द्र, नीरज कुमार, राजेन्द्र जोशी, मुकुट सक्सेना, प्रांजल धर, संजीव ठाकुर, राजेन्द्र जोशी, मंजरी श्रीवास्तव, केशव तिवारी, विजय सिंह, अनवर सुहैल, महेश चंद्र पुनेठा, रमेश प्रजापति, सुरेन्द्र अग्निहोत्री, ओम नागर, राहुल झा, संतोष श्रेयांस, नंद किशोर, राग तेलंग, माधव नागदा, रंजना श्रीवास्तव, नरेन्द्र गौड़, उषा प्रारंब्ध, किरण श्रीवास्तव, सरिता शर्मा, शशि भूषण बड़ोनी, प्रज्ञा रावत, सुशांत सुप्रिय, नूर मोहम्मद नूर, राजेन्द्र ग्रोवर, अनुज शर्मा, नरेश कुमार उदास, जयश्रीराय, मोतीलाल, तारिक असलम तस्लीम, रेणुका शिरहट्टी, पदमा शर्मा, सिद्धेश्वर, विवेक सत्यांशु, ओमप्रकाश मिश्र, तेजराम शर्मा, नील मणि शर्मा, वंदना मिश्र, प्रभा मजूमदार, बसंत सकरगाएं, पूर्णिमा ढिल्लन, दिनेश पाराशर, रजनीकांत पाण्डेय, श्रीमती सुगत कुमारी, कुलविंदर सिंह, शाश्विता, शेख मुहम्मद कल्याण, जोलनी मकीचा, इंद्रअमर्थनयगम, डेरिक वाल्काॅट, जेवहिर स्पेहियू एवं जैकी के की कविताएं प्रत्येक क्षेत्र व वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। गीतों में अनिरूद्ध नीरव, कुमार रवीन्द्र, सुरेन्द्र दीप, निेश अनिकेत, नचिकेता, परशुराम शुक्ल विरही, ओम उपाध्याय, श्रीमती मधु प्रसाद, संजय मालगुजार, चंद्रसेन विराट, सरोनी प्रीतम के गीत प्रमुखता से पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं। अशोक अंजुम, नवल जायसवाल, अश्रवघोष, सीमा फरीदी, अंजुदुआ जैमिनी, भगवानदास जैन, नरेश हमिलपुरकर की ग़ज़लें उम्दा बन पड़ी हैं। विनय उपाध्याय का रंगमंच पर एकाग्र आलेख एवं अभिनव तैलंग का मधुबाला पर लेख पत्रिका की विविधतापूर्ण सामग्री है। पत्रिका में प्रकाशित पुस्तक चर्चा व अन्य रचनाएं भी पाठक के रसास्वादन में वृद्धि करती हैं। पत्रिका के अच्छे अंक व विशेषांक के लिए बधाई।

Monday, August 9, 2010

साहित्य से एक और ‘साक्षात्कार’

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: दिसम्बर09-जनवरी10, स्वरूप: मासिक, प्रधान संपादकः देवेन्द्र दीपक, पृष्ठ: 120, मूल्य:30रू.(.वार्षिक 250रू.), ई मेल: sahitya_academy@yahoo.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0755.2554782, सम्पर्क: साहित्य अकादमी, म.प्र. संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन, बाण गंगा, भोपाल.03
यह जानकर प्रसन्नता होती है कि ख्यात पत्रिका साक्षात्कार अब धीरे धीरे नियमित प्रकाशन की ओर बढ़ रही है। समीक्षित अंक में प्रायः सभी रचनाएं उच्च कोटि की व पठनीय हैं। मृद ुला सिन्हा एवं भवानी ंिसंह की कहानी आज के वातावरण में आम आदमी के जीवन संघर्ष व्यक्त करने में सक्षम रही हैं। वरिष्ठ साहित्यकार देवेन्द्र शर्मा से संजय शुक्ल की बातचीत साहित्य सृजन व उनकी यात्रा से आम पाठक को परिचित कराती है। राजकुमार कुम्भज, पीताम्बर दास सराफ, रामनिवास झा, अरूण कुमार यादव एवं डाॅ. सुधा उपाध्याय की कविताएं मानव मन को बाह्य जगत से जोड़ती हुई प्रतीत होती है। आलेख साम्यवादी सिद्धांत और रामचंद्र शुक्ल(सदानंद प्रसाद गुप्त) एवं आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध(डाॅ. जगत सिंह विष्ट) विस्तारित होते हुए भी शोधरत छात्रों के लिए उपयोगी सामग्री है। अनुवादित रचना बर्फानी तूफान(अनुवाद-इंदुप्रकाश कानूनगो) में कहीं कहीं जटिलता आ गई है जिसे साहित्य का विद्यार्थी तो समझ सकता है लेकिन आम पाठक को पढ़ने में कठिनाई महसूस होती है। अश्वघोष, इशाक अश्क, अनूप अशेष के गीत व आचार्य अरूण दिवाकर नाथ वाजपेयी के दोहे प्रभावित करते हैं। सुदर्शन वशिष्ठ के व्यंग्य ‘बनना बड़ा आदमी’ में व्यंग्य अपनी उपस्थिति दर्ज कराते कराते रह गया। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार आदि भी उपयोगी है। साक्षात्कार को अपने साथ नए लेखकों व नए विचारों से युक्त लोगों को जोड़ने के प्रयास करना चाहिए जिससे यह पत्रिका पुनः अपना खोया हुआ स्थान प्राप्त कर सके। संपादकीय हिंदी रेलवे टाइम टेबल के माध्यम से हिंदी के साथ हो रहे दोयम दर्जे के व्यवहार की ओर संकेत करता है। बधाई

Thursday, August 5, 2010

हिंदुस्तानी जबान का नया अंक

पत्रिका: हिंदुस्तानी जबान, अंक: जुलाई-सितम्बर10, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादकः डाॅ सुशीला गुप्ता, पृष्ठ: 46, मूल्य:10रू.(.वार्षिक 40रू.), ई मेल: , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 22812871, सम्पर्क: महात्मा गांधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर, म.गां. बिल्डिंग, 7 नेताजी सुभाष रोड़, मुम्बई 400002
गांधीवादी विचारधारा को प्रोत्साहित कर आम लोगों के लिए साहित्य की सेवा कर रही पत्रिका में उपयोगी रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। अंक में क्यो सिकुड़ रहा है हिंदी का साहित्य संसार(महिप सिंह), दलित चिंतन का उदभव और आदिकालीन साहित्य(डाॅ. चंद्रभान सिंह यादव), भारतीय साहित्यः अवधारणा और आधार(डाॅ. मनोज पाण्डेय), हिंदी पत्रकारिताः नई चुनौतियां एवं जन अपेक्षाएं(सुरेश उजाला), नई कविताःइतिहास चिंतन(डाॅ. घनश्याम सिंह), आधुनिक नारी की वैचारिक स्वतंत्रताएवं परिवेश की चुनौतियां कथा साहित्य के संदर्भ में(डाॅ. अर्जुन के तड़वी), वैश्वीकरण के युग में बाज़ारीकरण का प्रभाव(जे.डी. डामोर), राजभाषा हिंदी का स्वरूप विवेचन(डाॅ. बैजनाथ प्रसाद) एवं शशि मिश्रा की पुस्तक समीक्षा सहित अन्य आलेख व रचनाएं प्रभावित करती हंै। कर्म पर एकाग्र संपादकीय प्रभावित करता है।