Wednesday, March 31, 2010

बच्चों की पत्रिका-‘अभिनव बालमन’

पत्रिका: अभिनव बालमन, अंक: जनवरी-मार्च10, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: निश्चल, पृष्ठ: 48, मूल्य 15रू.(वार्षिकः 50रू.), ई मेल: abhinavbalmann@rediffmail.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 9719007153, सम्पर्क: शारदायतन, 17/238, जेड 13/59, पंच नगरी, सासनी गेट, अलीगढ़ 202001 (उ.प्र.)
बच्चों की पत्रिका अभिनव बालमन के इस अंक में मनोरंजक व ज्ञानवर्धक सामग्री का प्रकाशन किया गया है। कहानियों मंे माधुरी, शिवम व उत्कर्ष मजेदार व रोचक हैं। डाॅ. गोपालदास नीरज, यादराम शर्मा एव श्याम कृष्ण सक्सेना की रचनाएं बच्चों में आत्मविश्वास जगाने में सहायक हैं। डाॅ. अजय शर्मा, डाॅ. नमिता सिंह, पारस व लक्ष्मण प्रसाद के आलेख उपयोगी हैं। बच्चों की सभी कविताएं गाने गुनगुनाने योग्य हैं। विशेष रूप से पायल, शुभि, आदित्य, दीप्ती, मानसी, माध्ुारी, पूनम, ओमवीर, नेहा व अनु प्रभावित करते हैं। पत्रिका के सभी स्थायी स्तंभ व अन्य रचनाएं भी स्तरीय व बच्चों के लिए संग्रह योग्य हैं। यह विचारणीय है कि देश में बच्चों के लिए इस तरह की पत्रिका का सर्वथा अभाव हैं। अभिनव बालमन काफी हद तक कमी को पूरा करती है। बधाई।

साहित्य की ‘ज़मीन’

पत्रिका: ज़मीन, अंक: 25, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: अमिताभ मिश्र व चन्द्रशेखर साक्कले, पृष्ठ: 54, मूल्य 25 रू.(वार्षिकः 100रू.), ई मेल: उपलब्ध नहीं, वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (00)000000, सम्पर्क: ई-1, सरस्वती नगर, सिचाई कालोनी, भोपाल 462003 म.प्र.
दिखने में साधारण लेकिन असाधारण व उपयोगी साहित्य युक्त पत्रिका ज़मीन के 25 वर्ष बाद पुनः प्रारंभ होने पर स्वागत किया जाना चाहिए। पत्रिका के इस अंक मंे कौशल मिश्र, संदी श्रोत्रिय, धमेन्द्र पारे व डाॅ. पूर्णचंद्र रथ की कविताएं एवं पवन कुमार मिश्र के दो नवगीत प्रकाशित किए गए हैं। प्रमोद त्रिवेदी का आलेख ‘वे दिनः जमीन से जुड़ी यादें’ पत्रिका के पुराने दिनों की यादें ताज़ा करता है। चिन्मय मिश्र का आलेख ‘साहित्य से भी विस्थापित समुदाय एक विचारणीय गंभीर रचना है।

क्या आप ग़ज़लें लिखना सीखना चाहते हैं?-‘ग़ज़ल के बहाने’

पत्रिका: ग़ज़ल के बहाने, अंक: फरवरी10, स्वरूप: उपलब्ध नहीं, संपादक: डाॅ. ‘दरवेश’ भारती, पृष्ठ: 32, मूल्य:निःशुल्क,ईमेल:ghazalkebhane.darvesh@gmail.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: http://ghazaldarvesh.blogspot.com/ , फोन/मो. 09268798930, सम्पर्क: 1414/14, गांधी नगर, रोहतक 124001 हरियाणा
अरूज़ की कसौटी पर खरी उतरने वाली ग़ज़लें प्रकाशित करने वाली यह पत्रिका इस विधा में अद्वितीय है। प्रकाशित अंक में ताराचंद निर्विरोध, मरयम ग़ज़ाला, खन्ना मुज्जफरपुरी, अली अब्बास ‘उम्मीद’, हसन जहीर, मिर्जा हसन नासिर, सूर्यप्रकाश आष्ठाना, आशा शैली, अनुराग मिश्र, जितेन्द्र जौहर, शिवकुमार अर्चन, प्रकाश सूना तथा दरवेश भारती की बेहद खूबसूरत व तरक्कीपसंद ग़ज़लों का प्रकाशन किया गया है। पत्रिका की खास विशेषता यह है कि यह ग़ज़ल लेखन विधा व उसके शास्त्र पर समग्र रूप से प्रकाश डालती है।

Tuesday, March 30, 2010

नरेन्द्र कोहलीनामा-‘व्यंग्य यात्रा’

पत्रिका: व्यंग्य यात्रा, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर.09, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डाॅ. प्रेमजनमेजय, पृष्ठ: 164, मूल्य:20रू.(वार्षिकः 100रू.), ई मेल: vyangya@yahoo.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (011)25264227, सम्पर्क: 73, साक्षर अपार्टमेंटस, ए-3, पश्चिम विहार नई दिल्ली 110063
व्यंग्य यात्रा की त्रैमासिकी का यह अंक ख्यात कथाकार व्यंग्यकार नरेन्द्र कोहली पर एकाग्र है। उप पर पत्रिका ने संग्रह योग्य सार्थक व सारगर्भित सामग्री का प्रकाशन किया है। नरेन्द्र कोहली जी की व्यंग्य रचनाएं एक बार फिर पत्रिका ने पढ़ने के लिए उपलब्ध करा कर पाठक को उनके लेखन से जुड़ने का एक और अवसर प्रदान किया है। उनके समग्र लेखन पर यज्ञ शर्मा, मनोहर पुरी, जवाहर चैधरी, प्रेम जनमेजय, हरीश नवल व संतोष खरे के विचार उल्लेखनीय हैं। उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर क्रमशः ज्ञान चतुर्वेदी, प्रेमजनमेजय, सूर्यबाला, गिरीश पंकज, विवेकी राय, रमेश बतरा, तेजेन्द्र शर्मा, सी. भास्कर राव व मीरा सीकरी का दृष्टिकोण अधिक उपयोगी लगा। पत्रिका की अन्य रचनाएं व स्थायी स्तंभ भी जनमेजयी हैं। एक और अच्छे व सार्थक अंक के लिए बधाई।

Monday, March 29, 2010

पत्रिका ‘शुभ तारिका’ का नया अंक

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: मार्च 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: श्रीमती उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 38, मूल्य:12रू.(वार्षिकः 120रू.), ई मेल: urmi.klm@gmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (0171)2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी 133.001 हरियाणा
पत्रिका का समीक्षित अंक आंशिक रूप से कथाकार कवि देवेन्द्र कुमार मिश्रा पर एकाग्र है। इस खण्ड में उनकी कुछ कविताएं व रचनाएं प्रमुखता से प्रकाशित की गई हैं। इसके अतिरिक्त पत्रिका में नीलम राकेश, अनूप मिश्र, नीना अग्रवाल, राधेश्याम भारतीय व अनूप घई की लघुकथाएं प्रभावित करती हैं। अजात शत्रु जी का व्यंग्य व डाॅ. महाराज कृष्ण जैन का कहानी पर आलेख संग्रह योग्य रचना है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं, समाचार व स्तंभ पत्रिका को स्तरीय बनाते हैं।

Sunday, March 28, 2010

साहित्यानुरागियों को स्व. जीवितराम सेतपाल का ‘प्रोत्साहन’

पत्रिका: प्रोत्साहन, अंक: 74, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: श्रीमती कमला जीवितराम सेतपाल, पृष्ठ: 26, मूल्य:उपलब्ध नहीं (त्रैवार्षिकः उपलब्ध नहीं), ई मेल: उपलब्ध नहीं, वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (022)26365138, सम्पर्क: ई. 3/307, इन्लैक्स नगर, यारों रोड़, वर्सोवा, अंधेरी(प.) मुम्बई 400.061 महाराष्ट्र स्व. श्री जीवितराम जी सेतपाल द्वारा स्थापित पत्रिका प्रोत्साहन का यह 74 वां अंक है। पत्रिका में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। लेखकों ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला है। अन्य रचनाओं में सुदर्शन शर्मा का व्यंग्य, कमला सेतपाल की कहानी वापसी पठनीय रचना है। उषा यादव, डाॅ. मोहन आनंद, हितेष कुमार शर्मा व नरेन्द्र कुमार परिहार की कविताएं प्रभावित करती हैं।

Saturday, March 27, 2010

आपके लिए राजस्थान से साहित्य का ‘सम्बोधन’

पत्रिका: सम्बोधन, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर09, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ: 186, मूल्य:20रू.(त्रैवार्षिकः 200रू.), ई मेल: qamar.mewari@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (02952)223221, 09829161342, सम्पर्क: संपादक सम्बोधन, पो. कांकरोली 313324,जिला राजसमंद, राजस्थान Jaipur_Hotels Jaipur_Hotels
पत्रिका का समीक्षित अंक ‘समकालीन युवा कविता अंक’ है।अंक में किसी वाद विवाद अथवा संवाद की अपेक्षा सीधे तौर पर वर्तमान में लिखी जा रही कविताओं को स्थान दिया गया है। इन कविताओं का स्वर मूलतः मानवतावादी है। जिसमे यथार्थ को रेखांकित करते हुए मानवीय मूल्यों की रक्षा भी की गई है। प्रकाशित कवियों में - अंशुल त्रिपाठी, अनीता वर्मा, अरूण शीतांश, कृष्ण कल्पित, कुमार अनुपम, कुमार वीरेन्द्र, केशव तिवारी, गिरिराज किराडू, गीत चतुर्वेदी, ज्योत्सना शर्मा, तरूण भारतीय, नरेश चंद्रकर, निर्मला गर्ग, नीलेश रघुवंशी, पंकज चतुर्वेदी, परमेन्द्र सिंह, पवन करण, प्रकाश, प्रभात, मंजरी दुबे, मनोज कुमार झा, मृत्युंजय, यतीन्द्र मिश्र, रवीन्द्र स्पप्निल प्रजापति, व्योमेश शुक्ल, शिरीष कुमार मोर्य, शिवप्रसाद जोशी, शेलेष, संजीव बख़्शी, सर्वेन्द्र विक्रम व संुदर चंद्र ठाकुर शामिल हैं। हालांकि कुछ कवि अपेक्षाकृत रूप से नए है लेकिन उनकी कविताएं गंभीर व वर्तमान समाज का प्रतिनिधित्व करती दिखाई पड़ती हैं। राजस्थान से प्रकाशित इस अच्छे व संग्रह योग्य अंक की साहित्य जगत में व्यापक चर्चा होना चाहिए।

Friday, March 26, 2010

साहित्य का ‘समावर्तन’

पत्रिका: समावर्तन, अंक: मार्च 10, स्वरूप: मासिक, संस्थापक: प्रभात कुमार भट्टाचार्य, संपादक: निरंजन श्रोत्रिय, पृष्ठ: 96, मूल्य:20रू.(वार्षिकः 250रू.), ई मेल: samavartan@yahoo.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (0734)2524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
पत्रिका का समीक्षित अंक ख्यात लेखक प्रणव कुमार बंद्योपाघ्याय पर एकाग्र है। उन्होंने कविताएं, कहानियां, आलेख आदि समान रूप से लिखे हैं। राकेश भारतीय जी से साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया है कि हां परंपराएं भी आज बाजार का अंग बन रही है। पत्रिका में तत्कालीन समाज व आधुनिक दृष्टिकोण को प्राचीन विचारधारा से जोड़ती हुई कविताएं प्रकाशित की गई हैं। इनमें विश्वरंजन, उपेन्द्र, प्रमोद कुमार, अखिलेश शुक्ल व जहीर कुरेशी की ग़ज़लें शामिल की जा सकती हैं। शैलेय की कहानी भंवर, मैं भी एक औरत हूं(शरद पगारे) व आलेख अवकाश भी अपनी विषयगत नवीनता के कारण अच्छे बन पड़े हैं। पत्रिका में बहुत दिनों बाद नाटक पढ़ने को मिला। राजीव शुक्ल का नाटक तपिश लम्बा होते हुए भी पठनीय है व पाठक को बांधे रखता है। ख्यात रंगकर्मी गिरीश रस्तोगी पर एकाग्र सामग्री, आत्मकथ्य व विलास गुप्ते जी का आलेख रंगकर्मी के संघर्ष से साक्षात्कार करते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व समाचार भी उल्लेखनीय हैं व पाठक में और अधिक जानने समझने की जिज्ञासा जगाते हैं।

Thursday, March 25, 2010

वक्त और हालात का दस्तवेज-कथा सागर

पत्रिका: कथा सागर अंक: जनवरी-मार्च 10, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: असलम तस्नीम, पृष्ठ: 24, मूल्य:20रू.(वार्षिकः 100रू.), ई मेल: उपलब्ध नहीं , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 9576661480, सम्पर्क: लेखनी प्रकाशन, प्लाट 6 , सेक्टर 2, हारून नगर कालोनी, फुलवारी सरीफ पटना 801505 (बिहार)
पत्रिका के इस अंक में कृष्णदत्त पालीवाल का आलेख मधुर विद्रोही:निर्मल वर्मा, खामोश तुम्हें देखती रहूंगी(इमरोज़) व उन्होंने जो महसूस किया लिखा (सुलोचना राघेय राघव) पठनीय रचनाएं हैं। मीरा सिंह मीर, नीर शबनम, दिवाकर वर्मा, प्रताप सिंह सोढ़ी, शैली बलजीत व सुरेश शर्मा की लघुकथाएं ध्यान आकर्षित करती हैं। तारीक असलम तस्नीम की कहानी शरीफन बुआ भी अपने कथ्य व शिल्प की दृष्टि से उल्लेखनीय है।केदार नाथ सिंह, अवधेश अवस्थी, राजेन्द्र परदेसी, डाॅ. शोभनाथ यादव व सिद्धेश्वर की कविताएं नवीनता लिए हुए हैं। पत्रिका का दृष्टिकोण रचनात्मक व स्वागत योग्य है।

Wednesday, March 24, 2010

हिमाचल से आप तक-हिमप्रस्थ’

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: फरवरी10, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 56, मूल्य:5रू.(वार्षिकः 50रू.), ई मेल: himprasthahp@gmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (00)उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: हिमाचल प्रदेश प्रिटिंग प्रेस परिसर, घोड़ा चैकी, शिमला(भारत)
सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा कला पत्रिका हिमप्रस्थ के समीक्षित अंक में प्रकाशित आलेखों में - लोकमंगल के अखण्ड सौन्दर्य का नाम शिव(प्रेम पखरोलवी), पुष्पधन्धा कामदेव के पंचवाण(बनवारी लाल उमर वैश्य), कबिरा खड़ा बाजार में(रमाकांत श्रीवास्तव), संत रविदास के काव्य की दार्शनिकता(ममता चैहान) तथा किन्नौर के कामरू...(मुकेश चंद्र नेगी) उल्लेखनीय हैं। एल.आर. शर्मा की कहानी दशहरे से पहले तथा मामा दिलाराम(श्यामसिंह घुना) पढ़कर प्राचीन भारतीय कथा साहित्य मन में स्थान बनाने लगता है। देवांशु पाल, सुरेश ‘आनंद’ व नरेश कुमार उदास की लघुकथाएं प्रभावित करती हैं। रवि सांख्यान, डाॅ. पीयुष गुलेरी, केशव चंद्र व प्रियंका भारद्वाज की कविताओं मेें नयापन है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी स्तरीय व पढ़ने योग्य हैं।

Tuesday, March 23, 2010

आप हम साहित्य और ‘वागर्थ’

पत्रिका: वागर्थ, अंक: मार्च 10, स्वरूप: मासिक, संपादक: विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ: 122, मूल्य:20 रू.(वार्षिकः 200रू.), ई मेल: bbparishad@yahoo.co.in , वेबसाईट: http://www.bhartiyabhashaparishad.com/ , फोन/मो. (033)32930659, सम्पर्क: भारतीय भाषा परिषद्, 36ए, शेक्सपियर शरणि, कोलकाता 700.017
पत्रिका के समीक्षित अंक में दस्तावेज स्तंभ के अंतर्गत भगतसिंह, राममनोहर लोहिया व सच्चितानंद हीरानंद वात्सायन ‘अज्ञेय’ उपयोगी व विचार करने योग्य सामग्री प्रकाशित की गई है। वरिष्ठ कथाकार उदयप्रकाश जी का आत्मकथ्य तथा शशिप्रकाश चैधरी से साक्षात्कार पाठक को नई विचार दृष्टि प्रदान करता है। वीरेन्द्र सारंग, प्रतिभा कटियार, कंचन शर्मा तथा अशोक सिंह की कविता में समाज के प्रति दर्द व तड़प दिखाई देती है। विश्वनाथ प्रसाद त्रिपाठी जी का यात्रा वृतांत तथा दयाशंकर मिश्र का सामाजिक निबंध आप अवश्य पसंद करेंगे। गौरव सोलंकी, परिधि शर्मा तथा जीवन सिंह ठाकुर की कहानियां का केन्द्र आम आदमी है जिसपर अभी तक काफी अधिक सोच विचार करने के पश्चात लिखा गया है। इंदु श्रीवास्तव की ग़ज़ल व आलोक श्रीवास्तव का संस्मरण भी सहेजकर रखने योग्य रचनाएं हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी सार्थक है व सामाजिक चेतना जाग्रत करने के लिए अग्रसर दिखाई देती हैं। हमेशा की तरह संपादकीय एक विचारणीय रचना है।

Sunday, March 21, 2010

व्यंग्य विधा पर एकाग्र-‘प्रगति वार्ता’

पत्रिका: प्रगति वार्ता, अंक: दिसम्बर.09, स्वरूप: मासिक,प्रधान संपादक: डाॅ. रामजन्म मिश्र, संपादक: सच्चिदानन्द, पृष्ठ: 80, मूल्य:20 रू.(वार्षिकः 240रू.), ई मेल: pragativarta@yahoo.com.in , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (06436)222467, 09131311857, सम्पर्क: प्रगति भवन चैती दुर्गा स्थान, साहिबगंज 816.109 (झाडखण्ड) पत्रिका का समीक्षित अंक व्यंग्य विशेषांक है। इस अंक में व्यंग्य जैसी महत्वपूर्ण विधा पर आलेख सहित अन्य रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। इनमें प्रमुख हैं- हिंदी व्यंग्य यात्रा(डाॅ. अशोक प्रियदर्शनी), हिंदी व्यंग्यःदिशा और दृष्टि(डाॅ. सुरेन्द्र परिमल) तथा व्यंग्य की सार्थकता(डाॅ. राम जन्म मिश्र) अन्य कालजयी रचनाओं में एक मध्यमवर्गीय कुत्ता(हरिशंकर परसाई), महंगाई(शरद जोशी) तथा एक बहुत बूढे़ आदमी से मुलाकात(रवीन्द्र नाथ त्यागी) हर बार पढ़ने पर नवीन आनंद देते हैं। अन्य समकालीन व्यंग्य में - क्रिकेट प्रभु की जय(पे्रम जनमेजय), राजा शूर है(शंकर पुणताम्बेकर), मैं लेखक हूं(पूरन शरमा), बजट से डर मत(विनोद शंकर शुक्ल), हर बारिश में(कैलाश मण्डलेकर), जूते की राजनीति(अजय अनुरागी) तथा जंगल की ओर(विनोद साब)। पत्रिका में प्रकाशित अन्य व्यंग्य रचनाएं भी प्रभावित करती हैं। पत्र, समीक्षा तथा आलेख भी उपयोगी हैं।

Saturday, March 20, 2010

हास्य व्यंग्य विधा पर एकाग्र-‘साहित्य सागर’

पत्रिका: साहित्य सागर, अंक: मार्च 2010, स्वरूप: मासिक,
संपादक: कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ: 50, मूल्य:20 रू.(वार्षिकः 250रू.),
ई मेल: kksaxenasahityasagar@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (0755)4260116, सम्पर्क: 161 बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल 462043 म.प्र.
पत्रिका का समीक्षित अंक वरिष्ठ रचनाकार श्री ज्ञानचंद्र बाफना जी पर एकाग्र है। अन्य रचनाएं हास्यं व्यंग्य विधा पर केन्द्रित की गई हैं। चंद्रभान भारद्वाज, लीलाधर यादव, हरिवल्लभ श्रीवास्तव, अक्षया गोजा एवं परशुराम शुक्ल ‘विरही’ की कविताएं अच्छी व पठनीय हैं। प्रकाशित रचनाओं में - कृष्ण चराटे, रमेश चंद्र पण्डित, प्रभात दुबे, देवेन्द्र कुमार मिश्रा एवं सतीश चतुर्वेदी की हास्य रचनाएं प्रभावित करती हैं। बाफना जी पर एकाग्र रचनाओं में रमेश बैस तथा आचार्य भगवत दुबे ने सारगर्भित आलेख लिखे हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ व रचनाएं तथा समीक्षाएं भी आकर्षित करती है।

Thursday, March 18, 2010

साहित्य का-‘संबोधन’

पत्रिका: सम्बोधन, अंक: जनवरी-मार्च 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ: 98, मूल्य:20 रू.(त्रैवार्षिकः 200रू.), ई मेल: qamar.mewari@rediffmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (02952)223221, सम्पर्क: पोस्ट कांकरोली 313324, जिला महासमन्द, राजस्थान
पत्रिका के समीक्षित अंक मंे ख्यात कवि भगवत रावत की तीन सार्थक व पठनीय कविताओं को स्थान दिया गया है। प्रख्यात साहित्यकार काशीनाथ सिंह से अरूण आदित्य की बातचीत काफी कुछ सिखाती है। जयश्री राय की कविताएं आज के समय का दस्तावेज प्रस्तुत करती हैं। रामकुमार कृषक की डायरी एक बार फिर इस विधा की सार्थकता सिद्ध करती है। हरपाल सिंह अरूण की कविता, श्याम जांगिड़ के उपन्यास अंश व पल्लव का कथा प्रतिमान अच्छी व पठनीय रचनाएं बन पड़ी हैं। विद्यासागर नौटियाल की कहानी ‘सोना’ व नवज्योत भनोत का आलेख अंधेरे के खिलाफ जद्दोजहद’ में पाठक को बहुत कुछ नया मिलता है। पत्रिका की अन्य ग़ज़लें, समीक्षाएं कविताएं व अन्य सामग्री भी प्रभावशाली व सार्थक प्रस्तुुति है। इस लघु पत्रिका के संपादन के लिए क़मर मेवाड़ी जी बधाई के पात्र हैं।

Wednesday, March 17, 2010

क्या आपने पढ़ा है?--‘विश्व हिंदी समाचार’

पत्रिका: विश्व हिंदी समाचार, अंक: दिसम्बर.09, स्वरूप: त्रैमासिक, प्रधान संपादक: डाॅ. (श्रीमती) विनोद बाला अरूण, संपादक: डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, पृष्ठ: 12, मूल्य:उपलब्ध नहीं (वार्षिकः उपलब्ध नहीं), ई मेल: whsmauritius@intnet.mu , sgwhs@intnet.mu/dsgwhs@intnet.mu वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (230)6761196, सम्पर्क: World Hindi Secretartat, Swift Lane, Forest side, Mauritius
समाचार प्रधान पत्रिका विश्व हिंदी समाचार के दूसरे वर्ष के इस अंक 8 में अति महत्वपूर्ण समाचारों का प्रकाशन किया गया है। इस पत्रिका के समाचारों से विश्व भर में हिंदी भाषा व साहित्य जगत में हो रहे अद्यतन कार्यो की जानकारी मिलती है। पत्रिका के मुखपृष्ठ पर ‘माॅरीशस के राष्ट्रपति सर अनिरूद्ध जगन्नाथ डी. लिट की मानद उपाधि से विभूषित’ का प्रकाशन बहुत ही संुदर ढंग से किया गया है। महात्मा गाॅधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में 9 दिसम्बर 2009 को आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें डी. लिट की उपाधि प्रदान की गई। उनके द्वारा भोजपुरी में दिए गए अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया गया कि माॅरिशस में रह रहे भारतवंशियों के खून में हिंदी रचती बसती है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की वेबसाइट हिंदीसमयडाट काम का लोकार्पण भी उनके द्वारा किया गया। दूसरे पृष्ठ पर माॅरिशस में आयोजित हिंदी निबंध प्रतियोगिता के आयोजन को स्थान दिया गया है। इस अवसर पर श्री प्रशांत पीसे, उपउच्चायुक्त ने श्री पी. चिदंबरम, ग्रहमंत्री भारत सरकार का तथा सुश्री सुजा के. मेनन, द्वितीय सचिव ने विदेश सचिव, श्रीमती निरूपमा राव का संदेश उपस्थित श्रोताओं के समझ पढ़कर सुनाया। इसी पृष्ठ पर भूटान के शहर फुंछोलिंग में पहली बार आयोजित हिंदी दिवस व हिंदी पखवाड़ा के आयोजन का समाचार प्रकाशित किया गया हैै। मुखलाल लोकमन द्वारा लिखित भारतीय आप्रवासी दिवस पर पुस्तकों का लोकार्पण का समाचार आकर्षित करता है। प्रधान संपादक श्रीमती विनोद बाला अरूण ने हिंदी के प्रचार प्रसार में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला है। संपादक श्री राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने विश्व हिंदी दिवस तथा महात्मा गाॅधी अंतर्राष्ट्रीय विश्व विद्यालय की गतिविधियों पर पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है। प्रो. योशिफुमि मिजुनो (जापान) ने ‘टोक्यो के आसपास हिंदी शिक्षण’ आलेख में स्पष्ट किया है कि छात्र/छात्राएं अनिवार्य रूप से नहीं अपनी इच्छा से हिंदी चुनकर पढ़ते हैं। यह उक्ति हम भारतवासियों को आस्वस्त करती है कि हिंदी अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। अमेरिका में सक्रिय हिंदी पाठशालएं आलेख वहां हिंदी शिक्षण केन्द्रों की जानकारी देता है। अन्य समाचारों में डाॅ. अभिमन्यु अनंत और प्रो.पुष्मिता अवस्थी को शमशेर सम्मान, दिमाग को चुस्त बनाती है हिंदी, यू.के. में भाषिक कम्प्यूटिंग और मल्टी मीडिया कार्यशालाएं, जमैका के हिंदी छात्र पिकनिक पर आदि का बहुत ही संुदर ढंग से प्रकाशन किया गया है। पत्रिका ने ख्यात पत्रकार व लेखक स्व. प्रभाष जोशी व स्व. मुनीश्वरलाल चिंतामणि को श्रद्धांजलि अर्पित की है। पत्रिका के शानदार कलेवर व प्रस्तुतिकरण अनुकरणीय व प्रभावशाली है। बधाई

शब्दशिल्पियों के ‘आसपास’

पत्रिका: आसपास, अंक: मार्च2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 24, मूल्य:05रू.(वार्षिकः 50), ई मेल: shabdashilpi@yahoo.com , वेबसाईट: http://www.sanghralay.blogspot.com/ , फोन/मो. (0755)2775129, सम्पर्क: एच 3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर भोपाल म.प्र.
पत्रिका आसपास का समीक्षित अंक साहित्यकारों-लेखकों के मध्य संवाद स्थापित करने के लिए प्रकाशित की जाती है। पत्रिका के इस अंक में दुष्यंत कुमार पाण्डुलिपि संग्रहालय के अलंकरण का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। इस बार यह अलंकरण सोम ठाकुर, प्रो. भगवत रावत, श्रीमती मालती जोशी, श्री हरिहर वैष्णव को दिया गया है। भवभूति अंकरण में विष्णु खरे की खरी खरी कैलाश गुरू गोस्वामी की उर्दू की दुर्लभ विधा पर किताब का समाचार पठनीय व जानकारीप्रद है। संग्रहालय समाचार के अंतर्गत कलम भले ही मेरी है पर कमाल तेरा है, बिना टिकिट अतीत का सफर, हिंदी का दीवान अफगानी परिवार पढने में अच्छे लगे। पत्रिका की अन्य जानकारी, प्रकाशन लोकार्पण आदि भी संवाद स्थापित करने में सफल हैं।

Tuesday, March 16, 2010

‘‘महानायक या रीढविहीन भांड़’’(संपादकीय)--‘पाखी’

पत्रिका: पाखी, अंक: मार्च2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: अर्पूव जोशी, पृष्ठ: 96, मूल्य:20रू.(वार्षिकः 240), ई मेल: pakhi@pakhi.in , वेबसाईट: http://www.pakhi.in/ , फोन/मो. (0120)4070300, सम्पर्क: इंडिपेंडेंट मीडिया इनिशिएटिव सोसायटी, बी.107, सेक्टर 63, नोएडा 201303 उ.प्र.
अग्रिम पक्ति की पत्रिका पाखी का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण साहित्यिक सामग्री से युक्त है। अंक में प्रकाशित कहानियों में - होम लेस(तेजेन्द्र शर्मा), अकेली(गजेन्द्र रावत) एवं अब बेवफा सा लगता है(मंजुलिका पाण्डेय) प्रमुख हंै। ख्यात कथाकार तेजेन्द्र शर्मा की कहानी नए संदर्भो से युक्त होते हुए भी कलात्मक रचना है। नीलाभ, ओम भारती, रोहित प्रकाश एव विनीत उप्पल की कविताएं आम आदमी की समस्याओं के इर्द गिर्द बुनी गई हैं। जहां इनमें कहीं ‘अनुमान’ है तो कहीं ‘असफलता’ भी। वहीं दूसरी ओर ‘दोस्त के लिए’ है तो ‘आत्म कथ्य’ भी। रमेश मनोहरा व अनिल कार्की के गीत आस्वस्त करते हैं कि गीत विधा में भी काफी कुछ कहा जा सकता है। आलेख ‘आलोचना बनाब फतवेबाजी’(अश्विनी कुमार), रिपोर्ट ‘उस रहगुजर की तलाश है’(राजेन्द्र राव) व बीच बहस में ‘बातचीत में अनपढ़ता की बू(अनुज) अच्छी व पठनीय रचनाएं हैं। पुण्य प्रसून वाजपेयी का आलेख ‘खान माने आतंकी नहीं’, दावं पर लगी प्रतिष्ठा(विनोद अनुपम) व ‘वरिष्ठ लेखक की नाराजगी’(रवीन्द्र त्रिपाठी) पाठक के मतिष्क को उर्जा प्रदान करते हैं। ‘घिरे हैं हम सवालों से’(प्रेम भारद्वाज), ‘टिपटिपाइये मगर ध्यान से’(प्रतिभा कुशवाहा) व अन्य रचनाएं, लघुकथाएं साहित्येत्तर विषया होने के बावजूद भी समसामयिक व विचार करने योग्य हंै। पत्रिका का प्रमुख आकर्षण संपादकीय ‘महानायक’ या रीढ़विहीन ‘भांड़’ है। जिसमें आक्रमकता के साथ साथ सोचने समझने के लिए भी पर्याप्त सामग्री है। अन्य रचनाएं, स्तंभ व समीक्षाएं भी पत्रिका को स्तरीय बनाती है।

Sunday, March 14, 2010

कहानी पर एकाग्र-‘साहित्य अमृत’

पत्रिका: साहित्य अमृत, अंक: फरवरी10, स्वरूप: मासिक, संपादक: त्रिलोकीनाथ चतुर्वेदी, पृष्ठ: 162, मूल्य:50रू.(वार्षिकः 200), ई मेल: prabhat1@vsnl.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (011)23289777, सम्पर्क: 4/19, आसफ अली रोड़, नई दिल्ली 110.002
ख्यात पत्रिका साहित्य अमृत का समीक्षित अंक कहानी विशेषांक है। अंक में ख्यात कथाकारों के साथ साथ वर्तमान में कथा साहित्य पर गंभीर चिंतन कर रहे साहित्यकारों के विचारों को भी स्थान दिया गया है। प्रकाशित कहानियों में - देवी(सूर्यकांत त्रिपाठी निराला), भरम(विजयदान देथा), दिन(महीप सिंह), सहस्त्र पूतों वाली(मृदुला सिन्हा), मोहलत(गोविंद मिश्र), शुभ विवाह(ऋचा शुक्ल), घाटे का भविष्य(से.रा. यात्री) की कहानियों को स्थान दिया गया है। इन कहानियों में तत्कालीन समाज की बदलती मान्यताओं परंपराओं को कथाकारों ने प्रमुखता से स्थान दिया है। अन्य कहानियों में गवाह(कुसुम अंसल), बेड़ियां(सीतेश आलोक), हीरा जन्म अनमोल था(सूर्यबाला), अपनी अपनी रणनीति(प्रदीप पंत), स्नेक प्लांट(सुर्दशन वशिष्ठ) कथा की प्रवाहता के कारण पठनीय व मनन योग्य हैं। मन मोहने का मूल्य(सुषमा मुनीन्द्र), मदद(अमर गोस्वामी), निर्णय उस रात का(देवव्रत जोशी), सरगम(उर्मिला शिरीष) हादसा(रूपसिंह चंदेल) एवं जनकपुर का अवसान(शुभदा मिश्र) अपनी शैली व विषय वस्तु की विशिष्टता के कारण याद रखने योग्य हैं। अन्य रचनाओं में छाया दर्शन(सुनील गंगोपाध्याय) तथा संस्मरण अवसान एक कलमजीवी लेखनी का(मृदुला सिन्हा) में पाठकों के विचार करने हेतु काफी कुछ सामग्री का समावेश किया गया है। अन्य स्थायी स्तंभ, रचनाएं, समाचार आदि भी पत्रिका के इस अंक को संग्रह योग्य बनाते हैं।

Wednesday, March 10, 2010

आधुनिक भारतीय रंगमंच के महास्रष्टा ‘इब्राहिम अल्काज़ी’--पूर्वग्रह

पत्रिका: पूर्वग्रह, अंक: जनवरी-मार्च 10, स्वरूप: त्रैमासिक, प्रधान संपादक: प्रभाकर श्रोत्रिय, पृष्ठ: 128, मूल्य:30रू.(वार्षिकः 100) ईमेल: bharatbhavantrust@gmail.com , bharatbhavantrust@yahoo.co.in वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो.(0755)2660239, सम्पर्क: भारत भवन न्यास, ज. स्वामीनाथन मार्ग, श्यामला हिल्स भोपाल, (म.प्र.)
पत्रिका का समीक्षित अंक आधुनिक रंगमंच के महास्रष्टा इब्राहिम अल्काज़ी पर एकाग्र है। पत्रिका में जितनी विविधापूर्ण व उपयोगी सामग्री प्रकाशित की गई है वह अब तक इब्राहिम जी पर कहीं प्रकाशित नहीं की गई। किरण भटनागर व चमन आहूजा ने उनसे साक्षात्कार में कला व उसकी विविधता व उपयोगिता पर विचार किया है। अल्काज़ी ने समकालीन भारतीय रंगमंच को दुनिया में प्रतिष्ठित किया है। इस पुुनीत कार्य के लिए भारतीय रंगमंच हमेश उनका ऋणी रहेगा। जयदेव तनेजा, भारत रत्न भार्गव व गिरीश रस्तोगी अपने अपने आलेखों में अल्काज़ी की नाट्य दृष्टि, रंगसंयोजन, प्रासंगिकता व नाटकों में पात्रों की भूमिका तथा उनके चयन पर विचार करते हैं। इन आलेखों में अल्काज़ी के संबंध में पाठक विस्तृत रूप से जान पाता है कि वास्तव में नाटक क्यों आज भी सर्वाधिक पसंद की जाने वाली विधा है। प्रमुख संस्मरणों में वह समय(सुधा शिवपुरी), मेरे श्रद्धास्पद गुरू(उत्तरा बावकर), मेरे गुरू इब्राहिम अल्काज़ी(रोहिणी हट्टगणी), अल्काज़ी साहब(नादिरा जहीर बब्बर), गुरूवर्य अल्काज़ी(प्रतिभा मतकरी), थिएटर के आदमी तुम फिल्म देखते हो?(सुरेन्द्र कौशिक), एन.एस.डी. के भाग्य विधाता(सविता बजाज), आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा(जयंति भाटिया), वे अनमोल यादें(सुब्बा राव) व एक पुरानी याद(विजय कश्यप) प्रमुख हैं। पत्रिका के इस अंक की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। संग्रह योग्य यह अंक प्रत्येक साहित्य व कला मर्मज्ञ के सेल्फ पर होना चाहिए।

Saturday, March 6, 2010

दक्षिण भारत से पत्रिका--‘मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका’

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: फरवरी 10, स्वरूप: मासिक, प्रधान संपादक: डाॅ. डाॅ.बी. रामसंजीवैया, संपादक: डाॅ. मनोहर भारती, पृष्ठ: 46, मूल्य:5रू.(वार्षिकः 50), ई मेल: brsmhpp@yahoo.co.in , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो.(080)23404892, सम्पर्क: 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड, राजाजी नगर, बेंगलूर 560.010 कर्नाटक
हिंदी साहित्य के लिए विगत 40 वर्ष से कार्य कर रही संस्था मैसूर हिंदी साहित्य परिषद की समीक्षित पत्रिका का यह इस वर्ष का दूसरा अंक है। पत्रिका में अशोक शैरी, डाॅ. एम. शेषन, कृष्ण कुमार ग्रोवर, अमित पटेल, डाॅ. मिरगणे अनुराधा, डाॅ. सूर्यप्रकाश शुक्ल एवं प्रो. बी.वै. ललिताम्बा के महत्वपूर्ण व उपयोगी आलेखों का प्रकाशन किया गया है। बी.जी. पटेल तथा जसविंदर शर्मा की लघुकथाएं प्रभावित करती हैं। रामशंकर चंचल, महेश चंद्र शर्मा तथा राधेलाल नवचक्र की कविताएं भी पत्रिका की भावना को प्रगट करती है। यह साफ सुथरी पत्रिका प्रभावित करती है।

Friday, March 5, 2010

हिंदी साहित्य की कथा का बिंब--‘कथा बिंब’

पत्रिका: कथाबिंब, अंक: अक्टूबर-दिसम्बर.09, स्वरूप: त्रैमासिक, प्रधान संपादक: डाॅ. माधव सक्सेना ‘अरविंद’, संपादक: मंजुश्री, पृष्ठ: 56, मूल्य:15रू.(वार्षिकः 50), ई मेल: kathabimb@yahoo.com , वेबसाईट: http://www.kathabimb.com/ , फोन/मो.(022)25515541, सम्पर्क: ए.10, बसेरा आॅफ दिनक्वारी रोड़, देवनार मुम्बई 400.088 कथा प्रधान पत्रिका का समीक्षित अंक सार्थक व पाठकोपयोगी रचनाओं से परिपूर्ण है। अंक में लौटना (सुशांत सुप्रिय), कभी कभी मेरे दिल मे...(संजीव निगम), भेड़िए(नज़्म सुभाष), मुक्ति(महेश कटारे) एवं अपराधबोध(नरेन्द्र कौर छाबड़ा) की अच्छी पठनीय कहानियों का प्रकाशन किया गया है। लघुकथाओं में आनंद बिलथरे, अनंत भटनागर, राधेश्याम पाठक, राजेन्द्र वर्मा उल्लेखनीय हैं। रमेश चंद्र शर्मा, सुशांत सुप्रिय, गाफिल स्वामी, पद्यमा सेन, श्यामनारायण श्रीवास्तव, रजनी मोरवाल, मधु प्रसाद व राही शंकर के गीत गजल व कविताएं प्रभावित करती हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, समीक्षाएं व रचनाएं भी आकर्षक हैं।

Monday, March 1, 2010

गंगा से टेम्स तक--हिंदी चेतना

पत्रिका: हिंदी चेतना, अंक: जनवरी.10, स्वरूप: त्रैमासिक, प्रधान संपादक: श्याम त्रिपाठी, संपादक: सुधा ओम ढीगरा, पृष्ठ: 56, मूल्य: उपलब्ध नहीं रू.(वार्षिकः अनउपलब्ध), ई मेल: hindichetna@yahoo.ca , वेबसाईट: http://www.vibhom.com/ , फोन/मो.(905)4757165, सम्पर्क: 6 Larksmere Court, Markham, Ontario L3R 3R1
पत्रिका का जनवरी 10 अंक अपने परिवर्तित रूप में आकर्षित करता है। अंक की साज सज्जा, कलेवर, विषय वस्तु आदि प्रभावशाली है। प्रथम आलेख ‘भारतीय संस्कार एवं संस्कृति के पुरोधा प्रवासी भारतीय’(लक्ष्मीनारायण गुप्त) विदेशों में रह रहे हिंदी प्रेमियों के योगदान पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालता है। मृदुला कीर्ति ने विचारों की उपादेयता पर गहन गंभीर आलेख लिखा है। वहीं दूसरी ओर इन्द्रा (धीर) वडेरा का आलेख अनुशासन व उसके महत्व पर दृष्टिपात करता है। डाॅ. अंजना संधीर का संस्मरण ‘एक दरवाजा बंद हुआ तो दूसरा खुला’ अहमदाबाद के साहित्यिक वातावरण की यादें ताज़ा करता है। प्रख्यात लेखक आत्माराम शर्मा ने हिंदी ब्लाग जगत में लिखी जा रही ‘पोस्ट’ का सटीक विश्लेषण किया है। सुदर्शन प्रियदर्शिनी की कहानी ‘अब के बिछड़े’ वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर विचार करती दिखाई देती है। एक अन्य कहानी ‘मुन्ना’ बच्चों की जिज्ञासा व उनकी मनःस्थिति से पाठक को जोड़कर आनंद देती है। डाॅ. अफरोज ताज की कहानी ‘अमरीका वाला’ प्रसिद्ध कहानीकार रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी काबुलीवाला की यादें ताजा करती है। कहानी ‘जहां से चले थे’(मनमोहन गुप्त) मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार की चिंताओं से अवगत करती है। हिंदी चेतना की संपादक व ख्यात कथाकार डाॅ. सुधा ओम ढीगरा की कहानी ‘लड़की थी वह’ बहुत ही मार्मिक रचना है। यह मानवीय संवेदनाओं व ममतत्व के आधार पर बुनी गई है। प्राध्यापिका अनुपमा द्वारा अबोध बच्ची पर अपना ममतत्व लुटाना मन में गहरी छाप छोड़ गया। कहानी सामाजिक सहिष्णुता का संदेश भी देती है। शर्दुला, योगेन्द्र मोदगिल, अशोक गुप्ता, बृजेन्द्र श्रीवास्तव, देवमणि पाण्डेय, किरण सिंह, साफिर समदर्शी, पूर्णिमा वर्मन, शशि पाधा, भारतेन्द्र श्रीवास्तव, भगवत शरण श्रीवास्तव, अमित कुमार सिंह, किरण सिन्हा, अभिनव शुक्ल, व सुरेन्द्र पाठक की कविताएं प्राचीन व नवीन पीढ़ी के मध्य सेतु बनाती दिखाई देती है। इनमें तत्कालीन बाजारवाद की अनुगूंज तो है लेकिन गरीब, पिछड़े, असहाय व साधन विहीन वर्ग को भुलाया नहीं गया है। समस्त कविताएं भूमंडलीकरण के दौर में आम आदमी को सुखद जीवन जीने की पे्ररणा देती है। समीर लाल का आलेख ‘बिजली रानी बड़ी सयानी’ एक अच्छी व्यंग्य रचना है। अखिलेश शुक्ल की लघुकथाएं, देवी नागरानी की समीक्षा(किताब जिंदगी की), दीवाली उत्सव समाचार एवं श्रीमती साध्वी वाजपेयी को श्रद्धांजलि(लेखिका सरोज सोनी) रचनाएं पत्रिका को परिपूर्णता प्रदान करती है। कनाड़ा से प्रकाशित हिंदी चेतना के इस सुंदर सहेजने योग्य अंक के प्रकाशन पर पूरी टीम व सहयोगी बधाई के पात्र हैं। प्रधान संपादक श्याम त्रिपाठी जी का कथन ‘साहित्यकार सत्यम, शिवम, संुदरम की भावना लेकर साहित्य सृजन करें’ स्वागत योग्य व प्रेरणादायी कथन है। पुनः बधाई