Monday, December 20, 2010

देश के लिए भी सार्थक है ‘अंचल भारती’

पत्रिका: अंचल भारती, अंक: दिसम्बर 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक:डाॅ. जयनाथ मणि त्रिपाठी, पृष्ठ: 64, मूल्य: 15रू.(वार्षिक 60), ई मेल: , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 09415320854, सम्पर्क: अंचल भारती प्रिंटिंग पे्रस, राजकीय औद्योगिक संस्थान, गोरखपुर मार्ग, देवरिया उ.प्र.
स्तरीय व ख्यात साहित्यिक पत्रिका अंचल भारती का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से युक्त है। अंक में प्रख्यात साहित्यकार विश्वरंजन से राजेन्द्र परदेसी की बातचीत साहित्य व साहित्येत्तर वातावरण को समेटते हुए भविष्य में साहित्य की बुनियाद टटोलती है। डाॅ. आरती द्वारा प्रस्तुत स्व. मंजु अरूण की कविताएं अतीत व भविष्य के मध्य कड़ी के समान दिखाई देती है। जयचक्रवर्ती, हरपाल अरूण, बृजेन्द्र मिश्र, नूर मोहम्मद नूर, ऋषिवंश, श्रीकांत प्रसाद सिंह, गिरिमोहन गुरू, अखिलेश निगम ‘अखिल’, मधुर नज्मी, अक्षयगोजा, खुर्शीद नवाब, सर्वेश कुमार पाण्डेय की कविताएं अच्छी बुनावट व कलेवर के साथ मनन योग्य हैं। सोनाली सिंह , डाॅ. दिग्विजय कुमार वर्मा, बद्रीनारायण तिवारी, के लेख अच्छे बन पड़े हैं। मदन मोहन वर्मा तथा अखिलेश शुक्ल की लघुकथाएं पत्रिका का अतिरिक्त आकर्षण है। डाॅ. रामनारायण सिंह मधुर का व्यंग्य व हरदयाल मिश्र, सुरेश धीगड़ा के विविधतायुक्त लेख प्रभावशाली हैं। पत्रिका की समीक्षाएं, अन्य रचनाएं भी उपयोगी व समयानुकूल हैं।

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