Sunday, December 5, 2010

हिंदी का वैश्विक विस्तार-‘साक्षात्कार’

पत्रिका: साक्षात्कार, अंक: जून-जुलाई 2010, स्वरूप: मासिक, सम्पादक: प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल, पृष्ठ: 120, मूल्य: 30 रू.(वार्षिक 250 रू.), ई मेल: sahitya_academy@yahoo.com , वेबसाईट: N.A. , फोन/मो. 0755.2554782, सम्पर्क: मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन, वाणगंगा, भोपाल म.प्र.
साहित्य जगत की शीर्ष पत्रिका साक्षात्कार का समीक्षित अंक साहित्यिक सामग्री से भरपूर है। अंक में सुधीर सक्सेना, सुरेश उजाला, वीरेन्द्र गोयल तथा वसंत सकरगाए की कविताएं आज के भ्रष्टतम होते समाज के बीच लोगों में आशा का संचार करती हैं। अंक में प्रकाशित कहानियों में ‘बिग बाजार’(रमेश दवे), पापी चाण्डाल(शिवकुमार पाण्डेय) तथा शर्त का सच(दिव्या शुक्ला) भी वर्तमान परिवेश के लिए कुछ नया करने की बात कहती है। पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित सभी लेख मानव जीवन व उससे जुड़ी समस्याओं पर विचार करते दिखाई देते हैं। रामेेश्वर मिश्र पंकज, कन्हैया सिंह, श्याम स्रुंदर दुबे, श्रीराम परिहार तथा शंकर शरण के लेख आश्वस्त करते हैं कि समाज का वातावरण भले ही बिगड़ गया हो पर उसमें सुधार किया जा सकता है। वरिष्ठ साहित्यकार राममूर्ति त्रिपाठी से अमित कुमार विश्वास की बातचीत भूमंडलीकरण के दौर में काव्य तथा कला पर एकाग है। काव्य को उनकी चिंता आम पाठक की चिंता भी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं समीक्षाएं भी पठनीय व जानकारीपरक हैं। पत्रिका का संपादकीय विश्व में हिंदी के बढ़ते प्रभाव पर एक गंभीर चिंतन है।

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